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क्या राजस्थान की भाजपा सरकार पूरी तरह से अक्षम हो चुकी है?
जयपुर पुलिस को रितु बराला की केवल एक 'जीरो FIR' दर्ज करके मामला आगे दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर करना है। आगे की पूरी जांच और कार्रवाई दिल्ली पुलिस को ही करनी है। इसके बावजूद राजस्थान की एक बेटी को न्याय के लिए थानों में क्यों जलील किया जा रहा है?
क्या भाजपा शासित राज्यों में अब किसी बेटी को केवल इसलिए न्याय नहीं मिलेगा कि वह कांग्रेस पार्टी या उसके छात्र संगठन (NSUI) से जुड़ी है? क्या अब इस देश में दो कानून चलेंगे: एक सत्ता पक्ष के लिए और दूसरा विपक्ष के लिए?
राजस्थान पुलिस और सरकार कान खोलकर नए कानून (BNSS) की यह व्यवस्था सुन लें, जिसका वे सरेआम उल्लंघन कर रहे हैं:
BNSS की धारा 173(1): अपराध देश के किसी भी कोने में हुआ हो, पुलिस को 'जीरो FIR' हर हाल में दर्ज करनी होगी।
मुख्यमंत्री जी, पुलिस को राजनीतिक मोहरा बनाना बंद करें। रितु बराला के मामले में तुरंत जीरो FIR दर्ज कर राजधर्म और कानूनी धर्म निभाया जाए।
@BhajanlalBjp @PoliceRajasthan
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राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष स्व. श्री नाथूराम मिर्धा की जयंती पर सादर नमन।
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अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य की जीत के पर्व विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह पर्व हमें संदेश देता है कि नकारात्मकता, अहंकार चाहे कितने ही बड़े हो जाएं, सत्य, विनम्रता एवं नैतिकता के हाथों उनकी पराजय निश्चित है। जय सियाराम।
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जयपुर कमिश्नरेट में NSUI की साथी रितु बराला के साथ दिल्ली में हुई बर्बरता के मामले में FIR दर्ज न किए जाने के विरोध में चल रहे धरने में शामिल हुआ।
न्याय मिलने तक हम चुप नहीं बैठेंगे। भाजपा सरकार बताए कि FIR दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है?
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NSUI छात्र नेता रितु बराला की जीरो एफआईआर दर्ज न करने पर प्रतिक्रिया :
सवाल : सर डोटासरा जी धरने पर बैठे हैं,एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है जयपुर कमिश्नरेट में :
जवाब : वो बैठे हैं, सोच समझ के बैठे हैं। अगर पुलिस को उन्होंने कहा जीरो-आधारित एफआईआर आप दर्ज करो, केरल में तो हो गई है यहाँ भी आप कर देते । मेरे वक्त में मैंने एक बहुत बड़ा फैसला किया था कंपल्सरी FIR, का , इतना बड़ा फायदा होगा जो गरीब है, दलित है, पिछड़े हैं, उनको थाने में जा के FIR दर्ज करवाने की कोई तकलीफ नहीं आई थी। और थानेदार नहीं करेगा तो एसपी करता , एसपी ऑफिस करता। इतना बड़ा हमने निर्णय किया, इनको पूछो कि तुमने वो हटाया क्यों? हटाने से अब क्या हुआ है? हटाने के बाद में ऐसी स्थिति बन गई है, धक्के खा रहे हैं वहां पर! जिसका रेप हुआ है, उसको कह रहे हैं तुम समझौता कर लो, जिससे रेप किया उससे। तो यह जो स्थिति बनी है, उसी कारण से तमाम तरह से यह गड़बड़ हो रही है।
अगर कंपल्सरी FIR की होती, यह नौबत ही नहीं आती, ना धरना देते, FIR दर्ज हो जाती। तफ्तीश तो पुलिस को करनी होती है ना, FIR दर्ज करने में क्या तकलीफ है? कोई किसी को प्रॉब्लम है, अब कर लीजिए, अगर आपको लगे भई इस FIR में कोई दम नहीं, तफ्तीश आप कर रहे हो, FR लगानी है या चार्जशीट बन सकती है, चार्जशीट पेश करनी है ये बाद की बातें हैं। तो क्यों आपने प्रेस्टीज पॉइंट बनाया और यह स्थिति बनी कि हमें धरना देना पड़ा कांग्रेस वालों को? वो भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं, उनको खुद को धरने बैठना पड़ा, इससे बड़ा दुर्भाग्य की बात क्या होगी? सरकार के दिलों-दिमाग के अंदर विपक्ष के प्रति कोई सम्मान नहीं है! केंद्र में यही हो रहा है, मोदी जी के राज में। अगर सम्मान होता तो राहुल गांधी को, खड़गे साहब को सम्मान मिलता पार्लियामेंट के अंदर भी और बाहर भी। आप देख रहे हो क्या स्थिति है।
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सवाल : अब फिर बिल ला रहे हैं सुना है ?
जवाब : इन्होंने असम में परिसीमन किया और वहां कांग्रेस को साफ कर दिया। भाजपा का परिसीमन का मतलब है कि जो एरिया वे जीत सकते हैं, उसे मिला दो। हमारे कांग्रेस के असम में एमएलए 21 हैं , उसमें से 20 मुसलमान हैं मुसलमान की सीटें कम कर दीं और कांग्रेस से लड़ी बाक़ी कम्युनिटी को, 36 कौम को घर बैठा दिया।। देश में यह खतरनाक खेल चल रहा है। राहुल जी और खड़गे साहब इसका विरोध कर रहे हैं। अगर इन्हें परिसीमन का अधिकार मिल गया, तो रूस और चीन की तरह 50-100 साल तक इन्हीं का राज रहेगा। ये ख़तरनाक खेल चल रहा है, उसको बचाने के लिए हम सब की जिम्मेदारी है।
पत्रकार: अकाल की आहट तो अगस्त में शुरू हो गई थी, अभी तक न तो गिरदावरी हुई है न पशु शिविर शुरू हुए हैं, न काम की व्यवस्था है
जवाब : इनके मंत्रियों के बयान आ रहे हैं काम शुरू कर दिए हैं। उनको ज्ञान ही नहीं है कि अकाल-सूखे में क्या स्थिति बनती है। नोटिफिकेशन जारी होता है इनके डिपार्टमेंट से, अकाल राहत विभाग से बाक़ायदा ऑर्डर निकलते हैं तब कलेक्टर जो हैं हरकत में आते हैं। जैसे ही कल मेरा प्रोग्राम बना, कलेक्टर के फ़ोन आ गए कि आप अप्लाई करो चारा डिपो के लिए । कल फ़ोन आने लग गए, दौरे का इतना असर पड़ता है।
सवाल : ये डिजिटल राजद्रोह जैसा चल रहा है, वर्तमान समय में बात करें तो आप एक जननायक के तौर पर माने जाते हो...
जवाब : कार्यकर्ता हूँ, जननायक तो...
पत्रकार: जैसलमेर में डिजिटल राजद्रोह चल रहा है, पंचायतों में जो योजनाएँ आ रही हैं उसके जो है, जैसे एनएमएमएस है, महात्मा गांधी नरेगा योजना का नाम वी बी जी राम जी कर दिया, वो उसका एक अलग क्लोन ऐप बनाकर योजनाओं के पैसे जो हैं निचले स्तर के अधिकारी से लेकर बड़े स्तर के अधिकारी अपनी जेबों में डाल रहे हैं, वो धरातल पर नहीं आ रहे, फ़र्ज़ी है जैसे डिजिटल राजद्रोह हो गया, ऐसा क्यों चल रहा है सर?
जवाब : इनके ये ऐप-वैप सब फर्जी हैं। ये सिर्फ दिखावा कर रहे हैं कि हम हाई-टेक हो गए हैं। देश में कंप्यूटर और इंटरनेट लाकर इसे हाई-टेक बनाने का सपना राजीव गांधी जी का था। वाजपेयी जी तो मैंने सुना उस वक़्त में बैलगाड़ी लेकर आए थे पार्लियामेंट के अंदर कि कंप्यूटर आ गए तो नौकरी चली जाएगी। ये किस मुँह से बातें करते हैं ऐसी? इनकी कोई बातों में दम नहीं है ऐप कैसे बना लो, असली बात है कैसे लोगों को राहत पहुँचे। और वह पहुंचाने सुनिचित करने के लिए हम इनको जवाब दे रहे है !
पत्रकार: ईडब्ल्यूएस (EWS) सरलीकरण का मुद्दा चल रहा है...
जवाब : देश में राजस्थान एकमात्र राज्य था, जहां हमारी सरकार ने EWS का सरलीकरण किया था, तभी लोगों को इसका असली फायदा मिलने लगा। आज जो लोग पूरे राजस्थान में मांग कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि यह सरलीकरण केंद्र सरकार की नौकरियों में भी लागू हो।
पत्रकार: पूर्व विधायक की हत्या हो गई...
जवाब : यह बहुत निर्मम और बड़ी घटना है। मैं उनके घर होकर आया हूं। यह मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के गृह जिले की घटना है, फिर भी सरकार को फौरी कार्रवाई करने में तीन दिन लग गए। क्या मुख्यमंत्री को अपने पद पर रहने का नैतिक अधिकार है? उन्होंने आईजी और एसपी को बुलाकर हकीकत तक नहीं जानी।
पत्रकार: पश्चिमी राजस्थान में ओरण भूमि को लेकर लगातार संघर्ष हो रहा है...
अशोक गहलोत: ओरण बहुत वाजिब मुद्दा है। हमारी सरकार के समय भी सोलर और विंड कंपनियां आई थीं। सरकार को चाहिए कि कंपनियों को अन्य जमीनें दे, लेकिन ओरण को संरक्षित घोषित करे। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए है। इसके लिए गांव वाले जयपुर तक पदयात्रा कर रहे हैं; क्या सरकार में इतनी समझ नहीं होनी चाहिए?
पत्रकार: भाजपा आरोप लगा रही है कि विपक्षी आंदोलन विदेशी फंड से हो रहे हैं?
अशोक गहलोत: जब वाजपेयी जी और आडवाणी जी सड़कों पर उतरते थे, तब क्या हमने कभी कहा था कि वे विदेशी ताकतों या धनबल के इशारे पर आंदोलन कर रहे हैं? ये सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं।
पत्रकार: पंचायत चुनावों की क्या तैयारी है? इन्होंने परिसीमन का फायदा तो यहां भी उठाया होगा?
जवाब : प्रदेश कांग्रेस कमेटी पूरी तरह चाक-चौबंद है। हर स्तर पर पर्यवेक्षक लगा दिए गए हैं। आज सच्चा कांग्रेसी केवल पार्टी के लिए नहीं, बल्कि देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहा है। जहां तक परिसीमन का सवाल है जनता चुनाव लड़ेगी, और हम पूरी तरह जनता के साथ खड़े हैं।
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आज शेरगढ़ क्षेत्र के चामूं में पंचायतीराज चुनावों को लेकर जनसभा को संबोधित किया। कई घंटे के इंतजार के बावजूद जनता का जोश और उत्साह देखकर पंचायतीराज चुनाव में भाजपा की हार तय हो गई है।
कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी ताकत से जुटें और भाजपा सरकार की नाकामियां जनता तक पहुंचाएं। कांग्रेस उम्मीदवारों को अधिक से अधिक संख्या में विजयी बनाएं।
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🔴Watch Live : चामूं, शेरगढ़ में पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन एवं किसान संवाद xitter.cf/i/broadcasts/1RJZzBEOo…
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पत्रकार: इतने बड़े आंदोलन और युवाओं (जेन-ज़ी) के भारी समर्थन के बावजूद सरकार पर इसका कोई असर क्यों नहीं हो रहा है?
जवाब: सरकार असर मानने के बजाय उल्टे हम पर अराजकता फैलाने का आरोप लगा रही है! आप ही बताइए, क्या इस आंदोलन में कहीं कोई हिंसा हुई?
श्री राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक (INDIA Bloc) के नेतृत्व में जो ऐतिहासिक प्रदर्शन हुआ, उसमें मैं भी शामिल था। वहाँ मौजूद लोगों में गज़ब का उत्साह था। उस प्रदर्शन में सिर्फ कांग्रेस के लोग नहीं थे, बल्कि इंडिया ब्लॉक की लगभग सभी पार्टियां, एक्टिविस्ट, सोशल वर्कर, वकील और डॉक्टर भी शामिल थे। इतने उत्साहपूर्ण और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद भी सरकार कह रही है कि हम अराजकता फैला रहे हैं और बिना चुनाव के नई सरकार लाना चाहते हैं।
यह बात न तो राहुल गांधी जी ने कभी कही और न ही किसी और ने। इसके विपरीत, राहुल जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस संघर्ष में चाहे दो दिन लगें, दो सप्ताह लगें, दो महीने लगें या दो साल लगें, हम इसे जारी रखेंगे।
मैंने खुद राहुल जी को यह कहते हुए सुना है कि यह संघर्ष लंबा चल सकता है और हम इसे लंबा चलाएंगे। अगर इस सरकार में थोड़ी भी ईमानदारी होती, तो वे राहुल जी के इस बयान को समझते। लोकतंत्र को समाप्त करने की इस सरकार की जो खराब नीयत है, उसे हम किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने देंगे।
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प्रदेश में पंचायत चुनाव चल रहे हैं। मैं जनता से अपील करूंगा कि वे हमारा साथ दें, क्योंकि भाजपा ने नगरपालिकाओं और पंचायतों के परिसीमन में जो गुंडागर्दी की है, उसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
इन्होंने ऐसा बड़ा षड्यंत्र रचा है कि कोई वार्ड 250 वोटरों का है, तो कोई 10 हज़ार, 15 हज़ार या 20 हज़ार वोटरों का। हमारे और सत्ता पक्ष के वोटों में महज़ 0.94% का फ़र्क है। जोधपुर और जयपुर में हम 14,000-15,000 वोटों से आगे हैं; अगर सीधे (डायरेक्ट) चुनाव होते तो हम पक्का जीतते। लेकिन इन्होंने बेईमानी करते हुए कांग्रेस की जीत वाले चार वार्डों को मिलाकर एक कर दिया और अपने फायदे वाले एक वार्ड के तीन वार्ड बना दिए।
मुख्यमंत्री भले ही ज़ोर-ज़ोर से बोलकर जनता को समझाएं, लेकिन लोगों के ज़हन में यह बात बैठ गई है कि ये लोग बंगाल की तरह चाहते हैं कि 'सत्ता पक्ष भी हमारा हो और विपक्ष भी हमारा'। चुनाव हारने के बाद भी बंगाल में इन्होंने 80 में से 60 विधायक तोड़कर अपना ही नेता प्रतिपक्ष बना लिया। ये चाहते हैं कि चीन, रूस और नॉर्थ कोरिया की तरह देश में जम्हूरियत (लोकतंत्र) खत्म हो जाए।
यह बहुत बड़ा षड्यंत्र है। पिछली बार संसद में विपक्ष और 'इंडिया ब्लॉक' ने एकजुट होकर जिस बिल को फेल कर दिया था, अब ये उसी षड्यंत्र पर फिर से आगे बढ़ रहे हैं। खड़गे साहब और राहुल गांधी जी इसके खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हम पूछते हैं कि इतने बड़े फैसलों के लिए ये ऑल-पार्टी मीटिंग (सर्वदलीय बैठक) क्यों नहीं बुलाते? लोकतंत्र में सबको विश्वास में लेना पड़ता है, लेकिन ये इसकी परवाह ही नहीं कर रहे और पार्टियों को अलग-अलग बुलाकर बात कर रहे हैं।
आज हजारों-लाखों गायें भूख-प्यास से धोरे बैठ रही हैं (मरणासन्न स्थिति में हैं)। ये लोग गायों के नाम पर सिर्फ राजनीति करते हैं, जबकि असली गौ-सेवा हमने की है। इसके दो बड़े उदाहरण हैं— पूरे देश में गौशालाओं को 9 महीने तक का अनुदान देने की शुरुआत हमारी सरकार ने की। दूसरा, जब प्रदेश में लम्पी रोग आया, तो हमने प्रति गाय ₹40,000 (दो गायों पर ₹80,000) का मुआवज़ा दिया। लम्पी रोग से गायों की मौत पर पशुपालकों को मुआवज़ा देने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य था।
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🔴Watch Live : देचू, लोहावट में पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन एवं किसान संवाद xitter.cf/i/broadcasts/1RJZzBEgq…
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आज जैसलमेर में आयोजित प्रेसवार्ता :
अकाल की स्थिति है, सरकार पानी की व्यवस्था करे ,चारे का प्रबंधन करे, गायों के कैम्प खोले और लोगों को मज़दूरी दे :
आप लोग खुद यहीं के रहने वाले हैं इसलिए आप लोगों को मालूम है कि स्थिति कितनी गंभीर है। यह गंभीरता जयपुर तक पहुँचनी चाहिए लेकिन वो पहुँच नहीं पा रही है, यह बहुत बड़ी शिकायत है। गाँव के अंदर स्थिति इतनी ख़राब है कि कोई सोच नहीं सकता है।
25 साल पहले मैं सीएम था उस दौरान चार अकाल लगातार पड़े । तीसरे अकाल में ऐसी स्थिति बन गई कि 16 अगस्त से काम खोलने पड़ गए तो आप स्थिति की कल्पना कर सकते हैं , मतलब बरसात ख़त्म हुई नहीं और अगले साल के लिए काम खुल गया 11 महीने। अब 11 महीने नहीं है मान लो, तो कम से कम नौ महीने तो ये काम करे। वैसे तो फ़ैमिन ( अकाल ) के अंदर तीन-चार महीने काम चलते हैं, केंद्र सरकार के नॉर्म्स वही होते हैं। यह वो फ़ैमिन नहीं है, यह फ़ैमिन वो है जिसमें सरकार अभी से ही लोगों को रोज़गार दे। चारे का प्रबंधन करे, बहुत महँगा हो गया, कई जगह 25 रुपये किलो तक हो गया है। गाय के कैम्प लगाने पड़ेंगे क्योंकि जो बेसहारा पशु हैं उन्हें बचाना है। अभी गायें मरने लग गई हैं, रास्ते में दिख रही हैं। इन हालातों में प्रदेश में जो अकाल पड़ा है, वह बहुत ही भयावह स्थिति है।
अभी मुख्यमंत्री आए थे बाड़मेर के अंदर, 1 करोड़ रुपये मंज़ूर किए,और जो घोषणा कीं, वो कोई लागू ही नहीं हुई। स्थिति को देखते हुए चारे का डिपो अभी खुल जाना चाहिए। पीने के पानी के लिए अभी से टैंकर लग जाना चाहिए। लोग अपने खुद के खर्चे से हज़ार-₹1500 देकर टैंकर मँगा रहे हैं। तो पानी की व्यवस्था सरकार करे, चारे का प्रबंधन करे, गायों के कैम्प खोले और लोगों को मज़दूरी दे।
नरेगा बंद हो गया है, नरेगा था तो कम से कम यह शांति थी। सोनिया जी और मनमोहन सिंह ने सोच-समझ के तथा क़ानून बना के मनरेगा को लागू किया था । वो भी दूरदृष्टि थी और उसका सबसे अधिक फ़ायदा राजस्थान को मिला।
अब स्थिति ये है कि कई राज्यों में जैसे महाराष्ट्र है जहाँ बीजेपी सरकार है, प्रति परिवार 5,000 देने की घोषणा कर दी है। शरद पवार जी हैं या कांग्रेस के हमारे नेता हैं, पीसीसी प्रेसिडेंट हैं और बीजेपी के चीफ़ मिनिस्टर, वहां उन सबके भयंकर दौरे शुरू हो गए हैं। जैसे जैसे वहां रिपोर्ट आ रही हैं, तहसीलों पर तहसील डिक्लेअर होती जा रही हैं। यहाँ कोई हलचल ही नहीं है। गिरदावरी भी अभी कहीं होती है, कहीं नहीं होती है, ये कागजों के अंदर हो रही है। रात और दिन का फ़र्क है, ये मैं राजनीति से हटकर बात कर रहा हूँ। ये अकाल-सूखे के काम खोलना, पानी की व्यवस्था करना, मज़दूरी देना, कुछ काम ऐसे होते हैं जो राजनीति से ताल्लुक नहीं रखते। हर काम में राजनीति है, पर यह काम ऐसे हैं जिनमे मानवीय दर्ष्टिकोण होता है , राजनीति के ऊपर मानवीय दृष्टिकोण।
मैं इतना जल्दी क्यों आया हूँ? वरना तो आप आओ दिसंबर, जनवरी, फ़रवरी में आओ, मार्च में, अप्रैल में काम शुरू होते हैं तब आओ। इसीलिए आया हूँ कि पूरे राजस्थान में जहाँ- जहाँ अकाल पड़ गया है, तमाम लोगों को यह कॉन्फ़िडेंस रहे कि अगर अकाल-सूखा पड़ गया तो उसके लिए अभी से आवाज़ उठाई जा रही है तो सरकार ज़रूर कुछ करे। डेमोक्रेसी में यही होता है, आप सरकार पर दबाव दो तो सरकार को कुछ करने के लिए मजबूरी हो जाती है। तो में मजबूरी पैदा हो सरकार की, दबाव में ही, वो स्थिति पैदा करने के लिए मैं हाज़िर हुआ हूँ।
एक मैंने नोट बनाया है रूपाराम जी को, सालेह मोहम्मद जी को कह कर के, ये आपको बाद में बाँट देंगे। मैं एक कॉपी ले जा भी रहा हूँ, ये मैं यूज़ करूँगा, मुख्यमंत्री को लेटर लिखूँगा। इन्हीं पॉइंट के आधार पर, यह पॉइंट आपके लिए ज़हन में है। फिर भी रूपाराम जी, सालेह मोहम्मद जी आपको बाँट देंगे जिससे कि आपको एक आधार बन जाएगा। आज की जो यह प्रेस कॉन्फ्रेंस है-जहाँ चारा नहीं, पानी नहीं, रोज़गार नहीं- इन्होंने इसमें आपकी बहुत बड़ी भागीदारी हो जाएगी जब जैसलमेर से न्यूज़ आएगी। मैंने हमेशा नोट किया है कि जैसलमेर की न्यूज़ का अलग महत्व होता है, क्योंकि जैसलमेर बॉर्डर पाकिस्तान के बॉर्डर पर है और यहाँ से कहीं ख़बर जाती है गाँव में क्या स्थिति है, इलाक़े दूर-दूर हैं, हर व्यक्ति वहां पहुँच नहीं पाता, फिर भी आप लोग कोशिश करके फ़ीडबैक देते हो। वो जब न्यूज़ छपती है जयपुर में, जोधपुर में, उसका असर ज़्यादा पड़ता है।
अभी मैंने चुना जैसलमेर को ,यहाँ से मैं शुरुआत कर रहा हूँ ,वैसे मैं बीकानेर गया मीटिंग वहां भी हुई थी पर आप यह समझ लो जैसलमेर से लॉन्चिंग है अकाल राहत ज़िलों में मेरे दौरे की। मैं भी जहाँ संभव होगा जाऊँगा, वहाँ अन्य नेता राजस्थान के वह भी जाएँगे।
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आज फलोदी में पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन एवं किसान संवाद में शामिल हुआ।
हमारी कांग्रेस सरकार ने फलोदी को जिला बनाया है। मैं सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान करता हूं कि पूरी ताकत से जुटें और फलोदी का पहला जिला प्रमुख कांग्रेस का बनाएं।
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🔴Watch Live : फलोदी में पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन एवं किसान संवाद
xitter.cf/i/broadcasts/1dKrPrjZg…
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जालौर में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मदन राठौड़ के बयान का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे नगर परिषद सभापति श्री बंशीलाल सोलंकी समेत कांग्रेस पदाधिकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेना निंदनीय है।
श्री राठौड़ अपने बयान के लिए माफी मांगने की बजाय पुलिस का दुरुपयोग कर रहे हैं। लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता का अधिकार है। जनता की नाराजगी को पुलिस के बल पर दबाया नहीं जा सकता।
श्री मदन राठौड़ को बिना किसी शर्त के देश और प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
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महानवमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। मां सिद्धिदात्री से समस्त प्रदेशवासियों की खुशहाली एवं सुख- समृद्धि की कामना करता हूँ।
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नवरात्र की अष्टमी के पावन अवसर पर जैसलमेर में तनोट माता के दर्शन किए और प्रदेश की खुशहाली व सभी के सुख-समृद्धि की कामना की।
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आज जैसलमेर में पंचायतीराज चुनाव को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन और किसान संवाद में शामिल हुआ।
जैसलमेर सूखे की मार झेल रहा है। चारे की कमी से हजारों पशु दम तोड़ रहे हैं, आम आदमी के पास रोजगार नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। किसान और पशुपालक अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं।
जिस तरह नगरीय निकाय चुनावों में बेईमानी की गई, उसी तरह पंचायतीराज के परिसीमन में भी मनमानी की गई है। लेकिन जनता में भाजपा के खिलाफ इतना आक्रोश है कि पंचायतीराज चुनावों में वह भाजपा को करारा जवाब देगी। कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी ताकत से जनता के साथ खड़े हैं।



















