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उत्तर प्रदेश सरकार का रामराज्य! उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में छेड़छाड़ से तंग आकर बेटी ने जान दे दी। पिता थाने के चक्कर लगाता रहा गुंडे रोजाना परेशान करते थे, पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया !
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समान नागरिक संहिता: फिर वही चुनावी दांव (संपादकीय) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में घोषणा की है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद यदि उत्तर प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार बनी, तो राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले देश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील राज्य में यह घोषणा केवल नीति की बात नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा चुनावी संदेश है। पहले से ही ध्रुवीकृत माहौल में ऐसा बयान समाज की दरारों को और गहरा कर सकता है। यह कोई अचानक दिया गया बयान नहीं है। सितंबर में ही शाह ने भरोसा जताया था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए-शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर दी जाएगी। दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से मौजूदा व्यवस्था को "सांप्रदायिक नागरिक संहिता" बताकर "धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता" की वकालत की थी। उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश इस दिशा में कानून बना चुके हैं। स्पष्ट है कि राष्ट्रीय कानून लाने के बजाय भाजपा राज्य-दर-राज्य प्रयोग का रास्ता अपना रही है, ताकि राष्ट्रव्यापी कानून की संवैधानिक और राजनीतिक जटिलताओं का सीधा सामना न करना पड़े। विडंबना यह है कि केंद्र की एनडीए सरकार जदयू और तेलुगु देशम पार्टी जैसे सहयोगियों के समर्थन पर टिकी है, और ये दल इस मुद्दे पर पहले ही अपनी आपत्तियाँ जता चुके हैं। जदयू नेता तो यहाँ तक कह चुके हैं कि बिहार में यह लागू नहीं होगी। इतने दूरगामी विषय पर सहयोगियों से भी आम सहमति बनाने का गंभीर प्रयास नहीं दिखता, तो विपक्ष और अल्पसंख्यक समुदायों से संवाद की अपेक्षा कैसे की जाए? यह भी सच है कि समान नागरिक संहिता के पक्ष में ठोस तर्क मौजूद हैं। संविधान निर्माताओं ने स्वयं अनुच्छेद 44 में इसका लक्ष्य रखा था, और सर्वोच्च न्यायालय भी समय-समय पर इसकी आवश्यकता की ओर ध्यान दिला चुका है। विवाह, तलाक, गुज़ारा भत्ता, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण कई समुदायों की महिलाओं को बराबर अधिकार नहीं मिल पाते। समर्थकों का कहना है कि एक लोकतांत्रिक गणराज्य में नागरिक अधिकार धर्म के आधार पर भिन्न नहीं होने चाहिए, और गोवा दशकों से एक साझा नागरिक कानून के साथ चल रहा है। इन तर्कों को केवल राजनीति कहकर ख़ारिज नहीं किया जा सकता। किंतु भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता है। विभिन्न धर्मों, परंपराओं और रीति-रिवाजों के सह-अस्तित्व ने ही इस देश को दुनिया के सामने एक मिसाल बनाया है। अनुच्छेद 44 नीति-निदेशक तत्व है, कोई चुनावी हथियार नहीं। वहीं अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। इन दोनों के बीच संतुलन केवल व्यापक विमर्श, विधि आयोग की गहन समीक्षा और सभी समुदायों के विश्वास से ही बन सकता है। यदि उद्देश्य वास्तव में महिलाओं के अधिकार और सामाजिक सुधार है, तो उसका रास्ता संवाद और सहमति से होकर जाता है, चुनावी मंचों की घोषणाओं से नहीं। सुधार थोपे नहीं जाते, अपनाए जाते हैं। सत्ता पक्ष को समझना होगा कि जिस कानून को बड़ा वर्ग अपने विरुद्ध मानने लगे, वह एकता नहीं, अविश्वास पैदा करता है।
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हरियाणा के पंचकूला से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां स्कूल परिसर में तीसरी कक्षा के एक छात्र पर KG में पढ़ने वाली मासूम बच्ची के साथ बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगा है। आरोप है कि छात्र बच्ची को पिता के बुलाने का बहाना बनाकर स्कूल की पहली मंजिल पर ले गया, जहां उस पर पत्थरों और गमले से हमला किया गया। परिजनों के मुताबिक, बच्ची को बेहोश होने के बाद भी पत्थरों से मारा गया और काफी देर तक घसीटा गया। गंभीर रूप से घायल बच्ची को पहले पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी हालत को देखते हुए PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। फिलहाल बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बच्ची के चाचा फाजिल का आरोप है कि स्कूल में CCTV कैमरे लगे होने और उनकी मॉनिटरिंग प्रिंसिपल के कार्यालय से होने के बावजूद इतनी बड़ी घटना किसी की नजर में क्यों नहीं आई? परिजनों का यह भी कहना है कि जब वे बच्ची को तलाशते हुए स्कूल पहुंचे, तो कथित तौर पर हमला करने वाला छात्र ही उन्हें घायल बच्ची के पास लेकर गया। मामले की सूचना मिलते ही सेक्टर-20 थाना पुलिस स्कूल पहुंची और स्कूल प्रबंधन से पूछताछ शुरू की। पुलिस आरोपी छात्र के माता-पिता से भी जानकारी जुटा रही है। फिलहाल हमले की वजह और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जा रही है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, CCTV निगरानी और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। #Haryana #Panchkula #SchoolIncident #SchoolSafety #ChildSafety #indianbroadcastingcorporation
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इसलिए तो लोग अधिकारी बनते है, इन अधिकारीयों ने देश को लूटने का संकल्प लिया हुआ है? अब कुछ लोग कहेंगे कि तुम लोगों की तरक्की से जलते हो।
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रिपोर्टर पर ज़मानत दिलाने के नाम पर 26 लाख रुपये ऐंठने का आरोप !
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बेलापुर में 25 से ज़्यादा बड़े पेड़ों को ज़हर देकर मारने की आशंका; केंद्र ने दिए जांच के आदेश
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Lawrence Bishnoi (terrorist) is talking to Pakistani terrorist Shahzad Bhatti on video call while sitting in jail. Despite this, Andhbhakt label this terrorist a patriot. लॉरेंस बिश्नोई (आतंकवादी) जेल में बैठे-बैठे वीडियो कॉल पर पाकिस्तानी आतंकवादी शहजाद भट्टी से बात कर रहा है। इसके बावजूद, अंधभक्त इस आतंकवादी को देशभक्त मानते हैं।
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हमलावरों को उन्हीं की भाषा में देंगे जवाब: एकनाथ शिंदे ने News 24 से कहा ◆ टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले के मामले में बोले डिप्टी सीएम #TigerShroff | Tiger Shroff | Attack | Lawrence Bishnoi #indianbroadcastingcorporation
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टाइगर श्रॉफ पर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खुलेआम फायरिंग! देश भी सुरक्षित हाथों में है और महाराष्ट्र भी सुरक्षित हाथों में है फिर भी नागरिक सुरक्षित नहीं हैं? इस आतंकी लॉरेंस बिश्नोई को किसका संरक्षण प्राप्त है जो ये भारत की कानून व्यवस्था व कानून को खुला चैलेंज कर रहा है? यह आतंकी खुलेआम हत्याएं करवा रहा है और न्याय पालिका तमाशबीन बनी बैठी हैं? नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी किसकी है। क्या अब नागरिकों को अपनी सुरक्षा व कानून व्यवस्था के सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ से शिकायत करनी होगी क्योंकि न्यायपालिका व पुलिस से भारत की कानून व्यवस्था संभल नहीं रही है?
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आदरणीय राजकीय रेलवे पुलिस के पुलिस महानिदेशक महोदय अवगत कराना हैं कि इस वीडियो में जनता के टेक्स से तनख्वाह लेने वाले जो जीआरपी के पुलिस कर्मी (भक्षक) अपने पैर से यात्री का हाथ पैर दब रहे हैं क्या यात्री को दर्द नहीं होता है? महोदय तत्काल कार्यवाही करें और भक्षक के विरुद्ध की गयी कानूनी कार्यवाही साझा करें ताकि जनता का कानून पर विश्वास बना रहे, अन्यथा कहीं जनता स्वं न्याय करने पर उतारू न हो जाये? @prakashdips @upgrphq @spgrpagra @spgrpjhansi @RailwaySeva @RPF_INDIA @HMOIndia @PMOIndia @RahulGandhi @India_NHRC @rashtrapatibhvn @SupriyaShrinate
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सबूत सौंपे, फिर भी सन्नाटा! नशा माफिया पर क्यों मेहरबान है पुलिस-प्रशासन? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के दावों की धज्जियाँ उड़ाते अधिकारी वीडियो साक्ष्य के साथ शिकायत पीएमओ से थाने तक पहुंची, व्हाट्सएप पर अफसरों को भेजा गया लिंक; फिर भी स्मैक-गांजा कारोबारियों पर कार्रवाई शून्य • शिकायतकर्ता का आरोप: छोटे से बड़े अफसर तक मिलीभगत गाजियाबाद। नशे और अपराध पर 'जीरो टॉलरेंस' का दावा करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार के राज में शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र का कथित नशा रैकेट अब पुलिस-प्रशासन की नीयत पर सीधा सवाल बन गया है। 10/10/2026 को इलाके में स्मैक और गांजे के अवैध कारोबार को वीडियो साक्ष्यों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सार्वजनिक किया। उन्होंने केंद्र से लेकर जिले तक के जिम्मेदार अधिकारियों को टैग किया और पोस्ट का लिंक व्हाट्सएप पर जिले व प्रदेश के संबंधित अफसरों तक पहुंचाया। इसके बावजूद नशा कारोबारियों के खिलाफ अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। न एफआईआर, न छापेमारी, न गिरफ्तारी। सबूत खुद अफसरों के मोबाइल तक पहुंच चुके हैं, इसलिए "जानकारी नहीं थी" का बहाना अब नहीं चल सकता। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है: यह महज लापरवाही है या सोची-समझी चुप्पी? क्या है मामला डीएलएफ आईजीएल सीएनजी पंप के पास मदरसा निसारिया के बराबर वाली गली की झुग्गियों में टोनी और गुलशन नामक व्यक्ति अपने गुर्गों के साथ वर्षों से स्मैक और गांजे का अवैध धंधा चला रहे हैं। इस धंधे को स्थानीय पुलिस और बीट अधिकारियों का संरक्षण हासिल है और इसके एवज में हर महीने लाखों रुपये की रिश्वत पहुंचाई जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोनी खुलेआम शालीमार गार्डन थाना प्रभारी से अपने संबंधों की धौंस देता है। शालीमार गार्डन और दिल्ली के सीमापुरी थाना क्षेत्र के कुछ पुलिसकर्मियों पर भी रैकेट को संरक्षण देने के आरोप हैं। इलाका दिल्ली-यूपी सीमा पर है, और आरोप है कि दोनों राज्यों की पुलिस जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल देती है। पीएमओ से थाने तक टैग, फिर भी कार्रवाई शून्य यह शिकायत किसी थाने की फाइल में दबा गुमनाम पत्र नहीं है। एक्स पर की गई पोस्ट में इन सबको टैग किया गया था: प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग और डीजीपी गाजियाबाद पुलिस, जिलाधिकारी गाजियाबाद और संबंधित डीसीपी दिल्ली पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और सीबीआई इसके बाद पोस्ट का लिंक व्हाट्सएप पर जिले और प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को अलग से भेजा गया। यानी सबूत सार्वजनिक मंच पर भी हैं और हर जिम्मेदार अफसर तक पहुंचाए भी जा चुके हैं। फिर भी आरोपियों पर अब तक हाथ नहीं डाला गया। चुप्पी या साझेदारी? मिलीभगत के आरोप गहराए शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि वीडियो सबूत अधिकारियों के फोन तक पहुंचने के बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए इसे लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित संरक्षण ही माना जाएगा। उनका आरोप है कि बीट सिपाही से लेकर ऊंचे पदों पर बैठे अफसरों तक, छोटे-बड़े सभी अधिकारी नशे के इस कारोबार में संलिप्त हैं। उनके मुताबिक हर महीने पहुंचने वाली कथित रिश्वत ही इस खामोशी की असली वजह है। अब तक इन आरोपों को "सूत्रों का दावा" कहकर टाला जा सकता था, लेकिन अफसरों की यह चुप्पी उन्हें और वजनदार बना रही है। सवाल सीधा है: सबूत मिलने के बाद भी तंत्र हरकत में नहीं आता, तो वह आखिर किसके साथ खड़ा है, जनता के या नशे के सौदागरों के? कानून साफ, अमल नदारद एनडीपीएस अधिनियम की धारा 42 और 43 के तहत अधिकृत पुलिस अधिकारी सूचना मिलने पर बिना वारंट तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी कर सकते हैं। यही कानून कर्तव्य से मुंह मोड़ने वाले अफसरों को भी नहीं बख्शता: धारा 59 के तहत बिना वैध कारण या वरिष्ठ की लिखित अनुमति के अपनी ड्यूटी से इनकार करने या उससे हटने वाले अधिकारी को एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। कानून के उल्लंघन में जानबूझकर मदद या मिलीभगत करने वाले अधिकारी के लिए कम से कम 10 और अधिकतम 20 साल का कठोर कारावास है, साथ में एक से दो लाख रुपये तक का जुर्माना। बॉम्बे हाईकोर्ट भी एक मामले में साफ कर चुका है कि धारा 59 के दायरे में आने वाली कोताही सामने आए तो उससे सख्ती से निपटना होगा। वहां हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के उस कदम को सराहा था, जिसमें चार्जशीट में देरी करने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में सवाल है कि सबूत मिलने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे अफसरों की जवाबदेही कौन तय करेगा? सवाल, जो जवाब मांगते हैं वीडियो साक्ष्य सार्वजनिक होने के बाद अब तक जांच क्यों शुरू नहीं हुई? एक्स और व्हाट्सएप पर पहुंची शिकायत पर किस अधिकारी ने क्या कदम उठाया, और नहीं उठाया तो क्यों? थाना प्रभारी के नाम की धौंस देने के दावों की जांच अब तक क्यों नहीं हुई? हर महीने लाखों की कथित रिश्वत आखिर किस-किस तक पहुंचती है? दिल्ली-यूपी सीमा पर इस कारोबार को रोकने की जवाबदेही किसकी है? ये हैं मांगें स्थानीय पुलिस पर ही आरोप हैं, इसलिए जांच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो या किसी स्वतंत्र एसआईटी को सौंपी जाए। कथित नशा कारोबारियों पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत तत्काल एफआईआर, छापेमारी और गिरफ्तारी हो। आरोपों के घेरे में आए पुलिसकर्मियों को जांच पूरी होने तक क्षेत्र से हटाया जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो। शिकायत की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर धारा 59 एनडीपीएस और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई हो। धारा 59 के मामलों में अदालत सरकार की पूर्व स्वीकृति वाली लिखित शिकायत पर ही संज्ञान ले सकती है, इसलिए संबंधित सरकार अभियोजन स्वीकृति तुरंत दे। शिकायतकर्ता, गवाहों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। एफआईआर, छापेमारी, बरामदगी और गिरफ्तारी का ब्योरा आधिकारिक माध्यमों से सार्वजनिक किया जाए। अब देखना यह है कि सबूतों के बाद भी पुलिस-प्रशासन चुप्पी ओढ़े रहता है या नशे के सौदागरों और उनके कथित संरक्षकों पर कानून का शिकंजा कसता है। फिलहाल तो अफसरों की यह खामोशी खुद कई सवालों का जवाब देती नज़र आ रही है। आज भी उपरोक्त स्मैक विक्रेताओं द्वारा खुलेआम स्मैक बेची जा रही है, जिसका ताज़ा वीडियो संलग्न है | @rashtrapatibhvn @PMOIndia @HMOIndia @UPGovt @112UttarPradesh @CMOfficeUP @HomeDepttUP @dgpup @Uppolice @ghaziabadpolice @DelhiPolice @CPDelhi @InfoDeptUP @narendramodi @narcoticsbureau @DmGhaziabad @DCPCityGZB @myogiadityanath @DCPTHindonGZB @DCP_SHAHDARA @gupta_rekha @CMODelhi @myogioffice @AmitShah @rajnathsingh @INCIndia @AmitShahOffice @RahulGandhi @SanjayAzadSln @ArvindKejriwal @INCDelhi @BJP4Delhi @DCPCR @CBIHeadquarters @CrimeBranchDP @BJP4UP @LtGovDelhi @kpmaurya1 @yadavakhilesh @India_NHRC @Mayawati @priyankagandhi @kpmaurya1 @UNinIndia #corruption #PoliceCommissionerateGhaziabad
योगी राज में नशा माफिया बेखौफ? खाकी पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत के गंभीर आरोप शालीमार गार्डन की झुग्गियों से स्मैक-गांजे का कथित कारोबार, हर महीने लाखों की रिश्वत का दावा; दिल्ली-यूपी सीमा पर जिम्मेदारी टालने का खेल गाजियाबाद (भारतीय प्रसारण निगम ब्यूरो )। अपराध और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के सरकारी दावों के बीच शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र में नशे के एक कथित संगठित कारोबार ने पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि क्षेत्र की झुग्गियों से वर्षों से स्मैक और गांजे की बिक्री हो रही है और इसे स्थानीय पुलिस के कुछ कर्मियों का खुला संरक्षण हासिल है। सूत्रों के मुताबिक, डीएलएफ आईजीएल सीएनजी पंप के पास मदरसा निसारिया के बराबर वाली गली में बनी झुग्गियां इस कथित कारोबार का अड्डा हैं। आरोप है कि टोनी और गुलशन नामक व्यक्ति अपने गुर्गों के साथ यहां बड़े पैमाने पर स्मैक और गांजा बेच रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि नशे का यह नेटवर्क कई वर्षों से बेरोकटोक सक्रिय है। रिश्वत, संरक्षण और संलिप्तता के आरोप इस प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू पुलिस की भूमिका है। सूत्रों का दावा है कि धंधे को स्थानीय पुलिस और बीट अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है और इसे चालू रखने के एवज में हर महीने लाखों रुपये की रिश्वत दी जाती है। शालीमार गार्डन और दिल्ली के सीमापुरी थाना क्षेत्र के कुछ पुलिसकर्मियों पर रैकेट को सक्रिय संरक्षण देने और उसमें संलिप्त होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप यहीं नहीं रुकते। सूत्रों के अनुसार कुछ पत्रकारों और एनजीओ का भी इस कथित कारोबार को सहयोग मिल रहा है। यदि ये आरोप सही हैं तो मामला केवल नशे की बिक्री का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के एक पूरे गठजोड़ का है, जिसकी परतें निष्पक्ष जांच से ही खुल सकती हैं। थाना प्रभारी के नाम की धौंस स्थानीय लोगों का कहना है कि टोनी खुलेआम शालीमार गार्डन थाना प्रभारी से अपने संबंधों का हवाला देता है। उसका कथित दावा है कि कोई पत्रकार, समाजसेवी या आम नागरिक उसका कारोबार बंद नहीं करा सकता। लोगों के अनुसार बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतों पर यह चुप्पी मिलीभगत के संदेह को और गहरा करती है। दो राज्यों की सीमा, जवाबदेही किसी की नहीं यह इलाका दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा से सटा हुआ है। आरोप है कि दोनों राज्यों की पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल देती है और इसी खामी का पूरा लाभ कथित तस्कर उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक सीमा का स्पष्ट निर्धारण और जवाबदेही तय नहीं होती, यह खेल थमने वाला नहीं है। युवा नशे की गिरफ्त में, इलाके में दहशत लोगों के मुताबिक इस कारोबार की सबसे बड़ी कीमत क्षेत्र के युवा चुका रहे हैं। उन्हें नशे की लत लगाकर उनका शोषण किया जा रहा है, परिवार बिखर रहे हैं और सामाजिक माहौल लगातार बिगड़ रहा है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि महिलाएं और बच्चे डर के साए में जीने को मजबूर हैं। ये हैं प्रमुख मांगें #पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच #आरोपियों पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई #रिश्वत के आरोपों में घिरे पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई और एफआईआर #कथित नशा रैकेट पर तत्काल रोक #एफआईआर, छापेमारी, बरामदगी और गिरफ्तारी का ब्योरा आधिकारिक माध्यमों से सार्वजनिक करना यह मांग उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस, दोनों ओर के पुलिस आयुक्तों, संबंधित प्रशासन और केंद्रीय गृह मंत्रालय से की गई है। सवाल, जो जवाब मांगते हैं - कथित धंधा वर्षों से चल रहा है तो बीट पुलिस को भनक क्यों नहीं लगी? - बार-बार की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? - थाना प्रभारी के नाम के खुलेआम इस्तेमाल के दावों की जांच क्यों नहीं हुई? - हर महीने लाखों की कथित रिश्वत किस-किस तक पहुंचती है? - सीमा क्षेत्र में कार्रवाई की जवाबदेही आखिर किस पुलिस की है? चेतावनी दी गई है कि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो समस्या पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है। अब निगाहें पुलिस-प्रशासन पर हैं कि वह इन आरोपों पर जांच बैठाता है या चुप्पी साधे रहता है। @rashtrapatibhvn @PMOIndia @HMOIndia @UPGovt @112UttarPradesh @CMOfficeUP @HomeDepttUP @dgpup @Uppolice @ghaziabadpolice @DelhiPolice @CPDelhi @InfoDeptUP @narendramodi @narcoticsbureau @DmGhaziabad @DCPCityGZB @UPGovt @myogiadityanath @DCPTHindonGZB @DCP_SHAHDAR @gupta_rekha @CMODelhi @myogioffice @AmitShah @rajnathsingh @INCIndia @AmitShahOffice @RahulGandhi @SanjayAzadSln @ArvindKejriwal @INCDelhi @BJP4Delhi @DCPCR @CBIHeadquarters @CrimeBranchDP @BJP4UP @LtGovDelhi @myogiadityanath @Uppolice @kpmaurya1 @yadavakhilesh @India_NHRC
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क्या यह सत्य है?
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उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा जिला आजमगढ़ के SP डॉ अनिल कुमार के PRO को पुलिस कस्टडी में लेने का आदेश हुआ है। SP के PRO ने सरकारी वकील को फोन पर अनपढ़ कहा था उत्तर प्रदेश के DGP से लेकर जिले के SP/SSP/ पुलिस कमिश्नर आदि को खूब फटकार लग रही है लेकिन फिर भी इनमें सुधार नहीं आ रहा है। @dgpup @CMOfficeUP
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🚨अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश के रामपुर से हत्या का लाइव वीडियो वायरल! उत्तर प्रदेश में हत्यारे बेखौफ, दिनदहाड़े कारोबारी की हत्या LIVE CCTV में हुआ क़ैद UP : जिला रामपुर में दिनदहाड़े कारोबारी नवजोत सिंह की ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई। रामपुर पुलिस को बदमाशों ने दी खुली चुनौती। हत्या का LIVE CCTV सामने आया है। वीडियो में कार सवार हमलावर आते हैं और‌ चंद सेकेंड में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर फरार? इस घटना ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं? #upnews #murder @rampurpolice @Uppolice @CMOfficeUP @India_NHRC @yadavakhilesh @RahulGandhi @UNinIndia @iac_registered @dgpup @HMOIndia @PMOIndia @rashtrapatibhvn @SupriyaShrinate @SanjayAzadSln @priyankagandhi @kpmaurya1
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