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संसार में घड़ी भर का सत्संग भी कोटि-कोटि जन्मों के पापों को मिटा देता है।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम
भगवती के भवन में भक्तों के ‘भावों’ का भिक्षापात्र भरता रहा!
#नवरात्रि
बाबा कहते हैं....“करोड़ों प्रकार से योग की साधना करके मुनिगण जिस परम गतिको भगवान् हरिसे माँगते हुए सकुचाते हैं वही परम गति त्रिपुरारि शिवजी की पुरी काशी में कीट-पतंग भी पा जाते हैं!”
दानी कहुँ संकर सम- नाहीं!
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मेरे रोम रोम में आज भी
वो रोमांच विद्यमान है
जो हमारे प्रथम आलिंगन
से भरे क्षण में था
आज भी मेरे होंठों पर है
तुम्हारे माथे का प्रथम चुम्बन
आज भी स्मरण है मुझे
तुम्हारी गोद में सिमटता हुआ
मेरा संसार सारा
आज भी मुझमें जीवित है
तुम्हारी निकटता का वो एहसास
जब हम दोनो की साँसें
एकाकार हो रही थी...!!
दुनिया में कोई चीज आसानी से मिल सकती है लेकिन वो आदमी जिसकी नजर अपनी हद जानती है वो मिलना मुश्किल है!
#NN
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मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि ।
एवं ज्ञात्वा महादेवि यथायोग्यं तथा कुरु।।🙏🏻🌸
जीवन में पवित्र और सात्विक न हो पाने का मलाल रहेगा! मेरा तामसी शरीर है, स्वभाव से ही मुझे पाप प्रिय हैं, जैसे उल्लू को अन्धकार पर सहज स्नेह होता है!
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शिवरात्रि, जन्माष्टमी पर हमें पूजा करने, दर्शन पाने मंदिर जाना पड़ता है, पर मैया हमारी करुणामयी है।
अष्टमी-नवमी पर वो विविध रूपों से झुंड के झुंड बना स्वयं हमारे घरों में आती, अपनी पूजा कराती और सबको कृतार्थ कर जाती! बाहर निकलो तो अनुभव होगा चारों ओर केवल मैया ही व्याप्त हैं🙂↕️
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सत्यव्रताएँ नाम पुकारे शैव प्रिया हर्षाने को
शिवालिकों की गुप्त गुहाएँ शुभ्र तेज बरसाने को
देखो जप तप करते करते गिरिजा स्वयं से शंकर होंगी
त्रिशिख डमरू मुद्रा वर की, दुविधा नग से कंकर होंगी।































