क्या आपका ऑफिस भी कभी-कभी किसी कॉर्पोरेट जंगल जैसा लगता है?
बॉस का दबाव, अप्रेजल की चिंता, ऑफिस पॉलिटिक्स और हर किसी से आगे निकलने की होड़—आख़िर इस कॉर्पोरेट जंगल में खुद को कैसे बचाया जाए?
पढ़िए यशवंत व्यास की किताब ‘कॉर्पोरेट जंगल का हिट उपदेश’|
क्या सच्चा प्यार कभी खत्म होता है
स्कूल के दिनों का एक छोटा-सा क्रश… जो 20 साल बाद भी दिल के किसी कोने में ज़िंदा रहता है। नीरज पांडेय की ‘कहीं और पर कहाँ’ क्षितिज और माया की इसी अधूरी मोहब्बत की कहानी है.
क्या हो अगर बचपन में चूरन के साथ मिला कोई नकली नोट अचानक सच में जादुई बन जाए?
अविरल अदीब की किताब ‘मैजिकल Note’ की कहानी आरव के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी ज़िंदगी एक रहस्यमयी नोट की वजह से पूरी तरह बदल जाती है। लेकिन इस जादू के साथ आते हैं लालच, फैसले और उनके खतरनाक परिणाम।
असम की किसी शांत नदी के किनारे अगर आपको एक ऐसा ख़त मिले, जो शायद आपके लिए लिखा ही न गया हो… तो क्या आप उसे पढ़ेंगे?
‘डोंट स्किप दिस बुक’ सीरीज़ में आज बात शिव शंकर झा के उपन्यास ‘ब्रह्म-पत्र’ की।
'बारिश के पिंजड़े में' चंदनसिंह की, समकालीन कविता के दरवाज़े पर दी जानेवाली यह पहली दस्तक दूर तक सुनी जायेगी-क्योंकि यहाँ एक भरोसा है और उस भरोसे में हमारे समय की छिपी हुई 'आयरनी' भी- क्षमा करें
-केदारनाथ सिंह
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बिरसा मुंडा और टंट्या भील जैसे नायकों की कहानियाँ तो हम जानते हैं, लेकिन संविधान सभा के भीतर आदिवासी प्रतिनिधियों ने अपने अधिकारों के लिए कैसे आवाज़ उठाई, यह इतिहास का एक कम चर्चित अध्याय है।
@JitendraMeenaDU
क्या प्रेम सच में कभी खत्म होता है… या कुछ प्रेम चिट्ठियों और इंतज़ार के बीच हमेशा ज़िंदा रहते हैं?
शिव शंकर झा की ‘ब्रह्मपत्र’ एक ऐसी ही कहानी है, जहाँ प्रेम के साथ जुड़ते हैं रहस्य, इंतज़ार और समय के कुछ अनकहे सवाल।
क्या एक दुबला-पतला, साधारण सा लड़का देश की सबसे कठिन सैन्य ट्रेनिंग को पार कर सकता है?
“अंधे घोड़े फौज में दौड़े” सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि नेवल जासूसी, खतरनाक ऑपरेशंस और असाधारण जज्बे की दिल दहला देने वाली दास्तान है।



