Poet | Blogger | Editor | Gardening | Cooking प्रकाशन: हमिंगबर्ड | ...है न ! (कवितासंग्रह) | लाल फ्रॉक वाली लड़की(लप्रेक)| संपादन: 8 साझासंग्रह | संस्थापक: गूंज

New Delhi, India
Joined January 2011
तुम हो खास बुक मार्क की तरह। मैंने जिंदगी की अपनी सारी किताबों में रखा हुआ है सिर्फ तुम्हे। (विश्व पुस्तक दिवस की शुभकामनाएं 😊) – at New Delhi, India
17
56
203
Mukesh Kumar Sinha retweeted
बहुत दिनों बाद.....😊🌸❣️ ___ यह ज़रूरी तो नहीं वो सज संवर के आए वो आ भी जाए तो जिंदगी सँवर सकती है - देशपाल देशहित
2
13
425
Mukesh Kumar Sinha retweeted
अभी कोहरा उतरा भी नहीं, फिर भी रास्ते धुँधले धुँधले हैं ये अक्टूबर की गुलाबी शाम तुम्हारे लौटने जितनी गर्म है, और तुम्हारे न लौटने जितनी ठंडी मैं अभागा दोनों मौसमों के बीच बैठा हूँ। _____________ उदित गर्ग
1
14
457
Mukesh Kumar Sinha retweeted
अब तो इतने रावण न पालिए जमीर अपने अपने एहसास में काम क्रोध अहम जले जड़ से राममय बोध हो सबके सांस में । - सुरेश वैष्णव
3
19
856
Mukesh Kumar Sinha retweeted
बार - बार आ रही है कानों में ज़िन्दगी ! ये तेरी सदा है क्या ? मुझको कब से है जुस्तजू अपनी मैं कहां हूं तुम्हें पता है क्या ? - किरण यादव @kiranYa24674497
5
20
782
Mukesh Kumar Sinha retweeted
कितने अजब ये शहर के हालात हो गए मक़तूल से क़ातिल के ताल्लुक़ात हो गए - लीना दरियाल
7
31
1,274
Mukesh Kumar Sinha retweeted
क्या जाने अभी कितना लहू और बहेगा क़ातिल ने उतारे नहीं दस्ताने अभी तक - राजेश रेड्डी
11
36
1,257
Mukesh Kumar Sinha retweeted
अक्टूबर बीत रहा है और अब भी मैं तुम्हारे खिलने की प्रतीक्षा में हूं "हरसिंगार"..!!! ~ मुकेश कुमार सिन्हा@Tweetmukesh
1
4
1
18
303
Mukesh Kumar Sinha retweeted
आज हमारे पसंदीदा कवि श्री मुकेश सिन्हा जी की प्रेम से लबरेज कविताएं पढ़ने को मिली।प्रेम का विज्ञान के साथ सामंजस्य अद्भुत है। लिखते रहिए मित्र मुकेश जी🤗💐 हां है न सच कि 'लव यू' से ज्यादा बहता है प्रेम 'स्टिल आई लव हर' में🌹 #बूकेल्फि @Tweetmukesh @goonjabhivyakti #poojaauthor
6
26
45
Mukesh Kumar Sinha retweeted
विंड चाइम की घंटियों सी किचन से आती खनकती आवाज का जादू साथ ही, तुम्हारा बनाया ज्यादा दूध और कम चाय पत्ती वाली चाय का बेवजह का शुरुर सर चढ़ कर जब बोलता है तो बंद आँखों में तैरने लगते हैं कविताओं के खिलखिलाते शव्द बेशक लिख न पाऊं कविता कल इतवार की छुट्टी कल काफी बनाना!
5
16
1
41
Mukesh Kumar Sinha retweeted
बहुत सोचता हूं जिंदगी के बारे में ये जिंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए - अभिषेक शुक्ला
6
23
1,046
Mukesh Kumar Sinha retweeted
बेशक पुतले ही जले, निभी दशहरा रीत.. चलो कहीं तो झूठ पर हुई सत्य की जीत..!! - लक्ष्मी शंकर वाजपेयी
4
24
1,134
Mukesh Kumar Sinha retweeted
(काव्यांश) ताक लो आईने में अपने रुख़सार पे देख लो वो काला तिल पड़ चुका है मेरा मत और जो है चेहरे पे निशान अब जीत जाओगी न मेरी जान। (प्रेम के लिए करें मतदान) ~मुकेश सिन्हा @Tweetmukesh #Rukhsar #Shair
6
10
210
बेशक कहते हैं, सबसे खतरनाक संवेदना प्रेम है, पर आसक्ति का दर्द कहीं अधिक परेशान करता है। क्योंकि फिर अपना मन, भीतर की खुशी, सब कुछ किसी एक के हेड-टेल पर टिक जाता है।
6
13
250
Mukesh Kumar Sinha retweeted
ढीला-ढाला सा-दिन मेरे कुर्ते सा यहाँ वहाँ से उधड़ा हुआ उतर रहा है काँधो से खुद को खुद ही मे समेटे बेखुद, बेसुध... एक तितली उड़ गयी है चूम के काँधे का तिल सकपका के ठिठक गया है सूरज लजा के सुर्ख हो गयी है शाम... और सबसे बेखबर गुज़रता जा रहा है दिन... अलसाया-सा! - निवेदिता भावसार
5
16
843
Mukesh Kumar Sinha retweeted
तेरी ख़ुशबू कि पोरों से जाती नहीं, तेरी यादों के सावन के मारे हुए बंद आँखों में थामे तसव्वुर तेरा हम भटकते हैं तुझको पुकारे हुए.. - सिफ़र शर्मा
4
17
955
Mukesh Kumar Sinha retweeted
ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है - ख़ुमार बाराबंकवी
4
11
772
Mukesh Kumar Sinha retweeted
हर दौर में इंसाँ को इंसाँ से गिला है, हर आँख में ठहरा हुआ इक ख़्वाब-ए-वफ़ा है, हम अहल-ए-मोहब्बत हैं, ये दुनिया को बता दें, नफ़रत का चलन है तो मोहब्बत भी सदा है!! - रुपाली त्रेहन श्रीवास्तव @RoopaliTrehan
1
4
12
689
Mukesh Kumar Sinha retweeted
सबसे सुंदर और उदास कविता किसी किताब में नहीं होगी, वह बीत रही होगी अभी किसी चहरे पर। - अनुपमा कृति
7
32
1,340
कंजूसों के लिए तृप्ति का साधन होती है, चाय में कूद पड़े मक्खी को हटाकर पी जाना 😊 मित्रता के संदर्भ में भी, बहुत बार ये लागू होता देखा है मैंने😊 .....है न!!!😊 ~मुकेश~
5
7
221
Mukesh Kumar Sinha retweeted
कौन किसका यहां पे रहबर है अजनबी सा हर एक पैकर है ढूंढती है जिसे मेरी आँखें कोई खोया हुआ वो मंजर है मुस्कुराती हैं उसकी नम आँखें जिनमें गहरा छुपा समंदर है ढूंढता क्यूं है उसको साहिल पर वो तो गहराईयों का गौहर है - सुषमा 'सदा ' @SushmaKamalVij1
6
20
750