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जननीति भारत पार्टी के गमछे का रंग?
Colour revealed of Janneeti Bharat’s scarf!
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मोदी जी के पिता पर बात आई, तो योगी आदित्यनाथ का यह वीडियो वायरल!
योगी जी ने Mallikarjun Kharge को आईना दिखाते हुए कहा 👇
🗣️ योगी जी:
“खड़गे जी, मेरे ऊपर गुस्सा मत करिए। मैं तो आपकी उम्र का सम्मान करता हूं। आपको गुस्सा करना है तो हैदराबाद वाले निजाम पर करिए!
जिस निजाम के रजाकारों ने आपके गांव को जलाया था, हिंदुओं की निर्मम हत्या की थी और आपकी पूज्य माता जी, बहन व परिवार के सदस्यों को निर्मम तरीके से जलाया था।
इस सच्चाई को देश और दुनिया के सामने रखिए कि
‘जब भी बँटेंगे, तो इसी प्रकार कटेंगे।’
आप वोट बैंक के लिए इस सच्चाई को देश के सामने रखने में कोताही कर रहे हैं। यह देश के साथ धोखा है!
🙏 मैं तो योगी हूं, एक ही बात सीखी है—हर काम देश के नाम! 🇮🇳🚩
@myogiadityanath
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दिव्या मित्तल हनुमान जी के शरण मे!
राजनीति में आने के बाद दिव्या मित्तल गांव-गांव जनसंपर्क कर रही है।मंदिरों में हाजिरी लगा रही है।
राजनीति में धर्म भी सफलता की पहली प्रथमिकता हो गयी है दिव्या मित्तल उसी रास्ते पर चल रही है।
क्या लगता दिव्या मित्तल सफल होगी या नही?
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राजनीति नहीं, जननीति
#JanneetiBharat
हमारे देश की काबिलियत ये कि चंद्रयान ने चाँद पर पानी खोज निकाला, और हमारे देश के लोगों की किस्मत ये कि घर में पानी नसीब नहीं।
तो कमी क्या है? काबिलियत की तो कमी नहीं है। कमी है इरादे की, लोगों के प्रति सोच की, और भविष्य की फ़िक्र की।
नीति वही जहाँ न्याय हो, न्याय वहीं जहाँ सबकी सुनवाई हो।
जननीति भारत पार्टी — अब होगी सुनवाई।
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तो इंदिरा साहनी वाले निर्णय में यह स्पष्ट किया गया था कि पायलट से ले कर कोई भी ऐसा क्षेत्र जहाँ प्रतिभा से समझौता मृत्यु को आमंत्रण है, या देश की बर्बादी का बिगुल, वहाँ आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। शोध, मेडिकल-इंजीनियरिंग या अन्य तकनीकी विषयों के सुपर स्पेशियालिटी, प्रोफ़ेसर्स के पद के लिए, रक्षा सामग्री बनाने के लिए दिए पदों में आरक्षण ना दिया जाए।
यानी, जजों ने स्वयं माना है कि आरक्षण पाने वाले गुणवत्ता को घटाते हैं।
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🤔
कोई लाग- लपेट नहीं..
सीधी बात- कड़वी बात..
@BJP4India के लिए..
.आचार्य श्री की बातें सुनिए...
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सरकार को तुरंत आईआईटी,आईआईएम इत्यादि संस्थाओ का बटवारा करके दलितों के लिए अलग से आईआईटी दे कर मनुवादियो को सबक सिखाना चाहिए ।
भारत जल्दी से विकसित हो जाएगा अगर दलित आईआईटी में गोल्डन दास क्वांटम फिजिक्स और रावण जी ह्यूमैनिटी पढ़ायें ।
अजीत भारती ने यूट्यूब लाइव के माध्यम से आईआईटी ,आईआईएम में होने वाले जातिवाद को करारा सुझाव दिया है 🤣🤣🤣
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साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो।
साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर।
एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली।
क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए?
आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है।
प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
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🚨 IIT बॉम्बे के निदेशक ने इस्तीफा दिया, लेकिन यह बातचीत पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर गई।
छात्रा: "सर, आपको अंदाज़ा भी नहीं है कि छात्रों पर कितना दबाव होता है।"
प्रो. शिरीष केदारे: "ठीक है, तो क्या हम तुम्हारे लिए नकल को कानूनी बना दें ताकि दबाव न रहे? हमें ऐसे छात्रों के लिए प्रश्नपत्र बनाने को कहा जाता है जिनमें पढ़ाई करने की क्षमता है। कुछ छात्र 80 परसेंटाइल के आधार पर आए हैं। सिर्फ इसलिए कि कुछ छात्र 30 परसेंटाइल के साथ आए हैं, हम बाकी छात्रों के लिए पेपर आसान नहीं बना सकते।"
छात्रा: "फिर भी सर, आप बेशर्मी दिखा रहे हैं। यह सब आपकी गलती थी।"
प्रो. शिरीष केदारे: "मैं इस्तीफा दे रहा हूँ क्योंकि इसमें कहीं न कहीं मेरी भी कुछ गलती रही होगी। लेकिन जिन छात्रों ने कभी नकल की है, उन्हें भी IIT छोड़ देनी चाहिए। मैं चौकीदार से भी इस्तीफा माँगूँगा क्योंकि वह किसी की पैंट में मोबाइल फोन होने की जाँच नहीं कर पाया। अगर माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित नहीं कर पाते, तो क्या उन्हें भी अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे देना चाहिए? उस छात्र को हमसे नहीं, बल्कि अपने कर्मों से डरना चाहिए था। जिन छात्रों में IIT की परीक्षा पास करने की क्षमता तक नहीं है, उन्हें IIT भेजने पर उनके माता-पिता को शर्म आनी चाहिए।
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उदय अस्त निश्चित है, मनुष्य को अंहकार हो जाता है कि सब ओर मेरी सत्ता चलती है, मेरे हिसाब से दुनिया चलेगी ऐसी गलतफहमी उसके मन में रहती है, लेकिन ऐसा नहीं होता : RSS Supremo Dr Mohan Bhagwat
ये आईना किसको दिखाया गया है? कौन है जिसे सत्ता का अहंकार हो गया है? अहंकार तो रावण को था
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"जिनको हम चुनकर अपना अगुवा बनाकर भेजते हैं, वो जब हमारी बात ही नहीं उठाएगा तो हम वोट क्यों करें? हम वोट ही नहीं करेंगे! हम वोटिंग का बहिष्कार करेंगे"
-कहना है सवर्ण बुजुर्ग का
सवर्ण समाज का ये असंतोष अब जमीन तक भी पहुँच चुका है कि हमारा संसद में कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं!
नेताओं को अब सोचना होगा, कि अपने लालच में किसी को इतना मत दबाओ कि प्रतिकार के सिवा कोई रास्ता ना बचे!
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अब सरकार दलितों के लिए एक्सक्लूसिव कॉलेज खोल रही है, हमारे पैसों से!
उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेज- अम्बेडकर नगर, जालौन, कन्नौज और सहारनपुर- में 2026-27 की सीट मैट्रिक्स फिर वही पुरानी व्यवस्था पर जारी हुई है।
प्रत्येक कॉलेज की 85 राज्य कोटा सीटों में: एससी: 62 सीटें (लगभग 73%), एसटी: 5 सीटें (लगभग 6%), ओबीसी: 11 सीटें (लगभग 13%), अनारक्षित/जनरल: सिर्फ 7 सीटें (लगभग 8%) हैं, यानी कुल आरक्षण लगभग 92% हो गया है।
सरकार की धूर्तता देखिए कि इन्होंने ये चार कॉलेज एससी स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के तहत बनवाए थे। यानी अब खुल्लमखुल्ला जाति के आधार पर केवल दलितों के लिए कॉलेज तो बन रहे हैं, पर हर नए कॉलेज में 60% सीटें आरक्षित रहेंगी! @myogiadityanath या @narendramodi जब चार कॉलेज दलितों के लिए बनवाते हैं, तो चार केवल अनारक्षित के लिए बनवा लेते!
सरकार का तर्क यही है कि चूँकि फंड एससी कल्याण के लिए था, इसलिए यहाँ सामान्य 21%+2%+27% फॉर्मूला लागू नहीं होता। अगस्त 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 2010-2015 के उन शासनादेशों को रद्द कर दिया था जो 50% की सीमा पार करते थे।
कोर्ट ने साफ कहा था कि इंदिरा साहनी फैसले और यूपी आरक्षण अधिनियम 2006 के मुताबिक सामान्य फॉर्मूला लागू हो। सरकार ने विशेष अपील दाखिल की और 2026 की काउंसलिंग में पुरानी 62-5-11-7 व्यवस्था ही जारी रखी। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है।
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जो आइटी सेल या नस फाड़ कर चिल्लाने वाले यूट्यूबर यह कह रहे हैं कि ‘आरक्षण की बात योगी को हराने के लिए की जा रही है’, वो निर्लज्ज कल को नाचेंगे और हम सबका मजाक उड़ाएँगे यदि हमने इस आंदोलन को धीमा किया या रोका, और उसका लाभ भाजपा को मिला।
इन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी को हराना नहीं है। हम भी चाहते हैं कि योगी जीतें। आरक्षण या यूजीसी का योगी जी से कोई लेना-देना नहीं है। और भाजपा ही सत्ता में है, तो नीतियाँ वही बदलेगी।
पर हाँ, भाजपा और मोदी जी ने आरक्षण में जो-जो प्रावधान किए हैं, वह देशी की बर्बादी की पटकथा है। हम बस पक चुके हैं और हम अपनी बात कहना चाहते हैं। इसका विरोध हम करेंगे और पूरे बल से करेंगे।
मैंने तो फरवरी से सुधारों की पूरी सूची सार्वजनिक रूप से रखी है। केन्द्र द्वारा अनौपचारिक रूप से भेजे गए प्रतिनिधि से भी मैंने बात कर अपनी माँगें रखी। पाँच दिन बीत चुके हैं। हमारी कोई भी माँग ऐसी नहीं है कि किसी भी को समस्या हो सके।
व्हाइट पेपर हो, EWS की बात हो, रैशनलाइजेशन हेतु महादलित जातियों के आरक्षण की बात हो… ऐसा क्या है जो मानने योग्य नहीं है? आप यह कहिए कि आपको चार जातिवादी नेताओं से भय है, जबकि अंबेडकर का नाम ले कर दंगे की धमकी देने वालों के अनुयायी भी आपको वोट नहीं देते।
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अनुराधा तिवारी ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस किया वो किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, सिर्फ मेरिट और न्याय के पक्ष में हैं।
✅ एक परिवार — एक आरक्षण — एक बार
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