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Janneeti Bharat - जननीति भारत ex-IAS, IPS, Wall Street Trader | Ex DM of Deoria, Mirzapur, Sant Kabir Nagar | Author-The Crafted Genius

Uttar Pradesh
Joined July 2014
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Today my heart is full and I am overwhelmed with emotions. Water is flowing in Lahuriya deh (लहुरियादह) and through my eyes and the eyes of people there. Even after 75 years of Independence, people of Lahuria Deh village, Mirzapur did not have access to water! Situated on a hilltop on the border of UP-MP, the topography made any attempts to get water there 'impossible'. When I went there for the first time, I did not have the heart to drink water from my water bottle in front of the villagers. Aadhar cards were used to issue water through tankers. People did not marry their daughters to this village. But yesterday, that changed. After dedicated work of 9 months, our team beat the challenges of geography, finances and other logistics achieving what people said was impossible. Today through the 'Har Ghar Jal' scheme piped connections to supply clean, safe water directly to every home in the village was started. As the tap was turned on for the first time today, tears of joy streamed down almost every face we saw. The village is celebrating and rejoicing. We are celebrating and rejoicing. Our hard work paid off. Our efforts made a difference. We brought life and health to hundreds of families today. Days like today make all the struggle worth it. Seeing lives changed so dramatically with such a basic necessity makes me believe that we can accomplish great things when we work together. Together, we can make a difference and Together, we will! Jai Hind! Jai Bharat!
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माननीय जी के भाषण के लिए स्कूल बंद!
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दादा जी ने गाड़ी रोककर 'सीट' के बारे में क्या कहा?
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जननीति भारत पार्टी के गमछे का रंग? Colour revealed of Janneeti Bharat’s scarf!
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मातृशक्ति जननीति भारत के साथ
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बेटियों की सुरक्षा पर बात तब होती है, जब ख़बर बन जाती है। जननीति में सुरक्षा पर बात बेटियाँ करेंगी जन से नीति, नीति से भारत — जननीति भारत।
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भागते हुए आया युवक। उनका और मेरा वार्तालाप
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बेटियों की सुरक्षा पर बात तब होती है, जब ख़बर बन जाती है। जननीति में सुरक्षा पर बात बेटियाँ करेंगी जन से नीति, नीति से भारत — जननीति भारत।
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राजनीति नहीं, जननीति अब होगी सुनवाई
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हमारे देश की काबिलियत ये कि चंद्रयान ने चाँद पर पानी खोज निकाला, और हमारे देश के लोगों की किस्मत ये कि घर में पानी नसीब नहीं। तो कमी क्या है? काबिलियत की तो कमी नहीं है। कमी है इरादे की, लोगों के प्रति सोच की, और भविष्य की फ़िक्र की। नीति वही जहाँ न्याय हो, न्याय वहीं जहाँ सबकी सुनवाई हो। जननीति भारत पार्टी — अब होगी सुनवाई।
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प्रभु श्रीराम ने गंगा जी को पार करने के लिए केवट से नाव माँगी थी। आज उसी गंगा जी पर नावें बाँध दी जाती हैं — कभी त्योहार पर, कभी मेले पर, कभी वीआईपी आगमन पर, कभी सुरक्षा के नाम पर। जिस दिन घाट पर सबसे ज़्यादा भीड़ होती है, उसी दिन चप्पू रुक जाता है। नाव रुकती है तो चूल्हा रुकता है। सुरक्षा ज़रूरी है, पर रोज़गार भी उतना ही ज़रूरी है। नाव चलेगी तो घर चलेगा। नीति वही, जहाँ न्याय हो। न्याय वहीं, जहाँ यात्री और रोज़गार दोनों सुरक्षित रहें। जन से नीति, नीति से भारत। जननीति भारत — अब होगी सुनवाई।
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मेरा राजनीतिक सफर का अगला कदम। मेरे साथ जुड़ें 🙏🙏
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अपने राजनीतिक सफ़र का अगला क़दम मैं आपके सामने रखूँगी। 15 अक्टूबर, 1 बजे।
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कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए।
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आगे क्या करना है? मैंने पढ़ा: "बच्चे छोटे हैं। अब घर।" "अच्छा पैकेज मिलेगा। वापस विदेश।" "IAS पर किताब लिखी है। कोचिंग।" "टिकट पक्का हो गया होगा। राजनीति।" 29 सितंबर, सुबह 8:30 बजे। बताऊँगी। 🙏
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माँ वैष्णो देवी के अलौकिक दर्शन का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। 🙏 माँ, बिन माँगे तूने सब दिया, मैं तेरे चरणों में चढ़ाऊँ क्या? बस अपना आभार चढ़ाती हूँ, भर आई आँखों की अश्रुधार चढ़ाती हूँ। पर आगे राह कठिन है, सद्बुद्धि देना, कि समझ सकूँ सही-गलत का अंतर, साहस देना, कि सही पथ पर चल सकूँ निरंतर, मन में इतना प्रेम देना, कि कोई दुख पराया न रह पाए, और वो नज़र देना, कि जिसे दुनिया ने अनदेखा किया, उसमे मुझे तेरा ही रूप नज़र आए। जय माता दी 🙏🙏
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आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला। बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे। आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है। आपकी अपनी, दिव्या मित्तल
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Happy independence day 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
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Watched Nolan’s Odyssey yesterday. Saw possibly the world's first commitment device: Odysseus gets himself tied to the mast because he knew the Sirens’ song would be too beautiful to resist. The strongest man on the ship didn’t trust his willpower. He trusted his systems. We think disciplined people resist temptation better. They don’t. They just design their lives so the temptation never gets a vote. 1. Phone in another room while studying 2. Money auto-invested before you see it. 3. Don't keep unhealthy food in fridge if you want to avoid it 4. Link small activities with daily chores - like 5 sit-ups before bathing Don’t fight the Sirens. Tie yourself to the mast.
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