अहमदाबाद के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में दी कालूपुर कमर्शियल को-ऑपरेटिव बैंक एवं 'सदविचार परिवार' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'आनंद अर्पण नो' जॉय ऑफ गिविंग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की।
सामान्यतः बैंक केवल वित्तीय लेनदेन तक सीमित रहते हैं, लेकिन कालूपुर बैंक ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्व से आगे बढ़कर कर्मचारियों एवं ग्राहकों के सहयोग से अनुपयोगी वस्तुओं, कपड़ों, अनाज, खिलौनों और शैक्षणिक सामग्री के 27,000 से अधिक बॉक्स एकत्र कर वंचित वर्ग तक पहुंचाने का जो पुनीत कार्य किया है, वह पूरे समाज के लिए अनुकरणीय प्रेरणास्रोत है।
वास्तविक धर्म और मानवता यही है कि मनुष्य केवल अपनी ही प्रगति न सोचे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में भी खुशियां लाने का प्रयास करे। जो भाव हम स्वयं के लिए रखते हैं, वही भाव दूसरों के लिए रखना ही श्रेष्ठ संस्कार है।
जरूरतमंद परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाने का यह प्रयास 'सेवा परमो धर्म:' की हमारी भारतीय संस्कृति के मूल विचारों को जीवंत करता है।
रासायनिक खेती ने हमारी उपजाऊ भूमि को बंजर किया है। अब प्राकृतिक खेती से ही मिट्टी और मानव दोनों का स्वास्थ्य सुधरेगा।
गुजरात में देशी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि के विस्तार, प्रगति एवं आगामी रबी सीजन की तैयारियों की व्यापक समीक्षा हेतु लोकभवन में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कृषि मंत्री श्री जीतुभाई वाघाणी जी एवं कृषि राज्यमंत्री श्री रमेशभाई कटारा जी भी उपस्थित रहे।
प्राकृतिक कृषि उत्पादों को सीधा बाजार से जोड़ने, नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा बिक्री केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
ग्राहकों में प्राकृतिक उत्पादों के प्रति पूर्ण विश्वास कायम करने के लिए प्रमाणन अत्यंत आवश्यक है। बैठक में प्रथम चरण के अंतर्गत 2,400 से अधिक किसानों के प्रमाण-पत्रों का अनावरण किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा तैयार की गई विशेष प्रासंगिक पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
राज्य के सभी कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं वैज्ञानिकों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों पर गहन शोध करने, भूमि के स्वास्थ्य, फसल उत्पादकता और लागत में कमी का वैज्ञानिक डेटा तैयार कर किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
प्राकृतिक खेती का उद्देश्य भूमि की उर्वरता बढ़ाना, लोगों को स्वस्थ आहार प्रदान करना, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना और किसान की आय में वृद्धि करके उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी के दूरदर्शी विचार 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को साकार करते 'युवा संगम चरण-7' कार्यक्रम के अंतर्गत गुजरात प्रवास पर आए चंडीगढ़ के 40 विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने गांधीनगर स्थित लोकभवन में शुभेच्छा भेंट की। इस अवसर पर इन युवाओं के साथ सहज संवाद किया।
देश के होनहार युवा देश की प्रगति और विकास की असली शक्ति हैं। युवाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करते हुए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।
युवा संगम जैसी पहल युवाओं को भारत की समृद्ध और वैविध्यपूर्ण सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और औद्योगिक प्रगति से सीधे परिचित होने का अनूठा अवसर प्रदान करती है।
संवाद के दौरान अमृतसर की होनहार बेटी जस्मिन कौर ने अपने गांव के किसानों को रासायनिक उर्वरकों से मुक्त कर प्राकृतिक कृषि की ओर मोड़ने हेतु मार्गदर्शन प्राप्त किया। युवा पीढ़ी का जहरमुक्त खेती और भूमि-संरक्षण के प्रति यह उत्साह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है।
विद्यार्थियों को शिक्षा, उच्च नैतिक संस्कारों, स्वच्छता, वृक्षारोपण, व्यसनमुक्ति, सामाजिक समरसता तथा पर्यावरण रक्षा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
आणंद जिले के बोचासण स्थित BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर परिसर में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में प्राकृतिक उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा उपस्थित किसानों से सीधा संवाद किया।
घातक रसायनों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से हमारी उपजाऊ भूमि बंजर और विषैली हो रही है। यही विषैले तत्व अन्न और फलों के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंचकर आज छोटे-छोटे बच्चों को कैंसर, डायबिटीज और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार बना रहे हैं।
किसानों को आश्वस्त किया कि प्राकृतिक कृषि से उत्पादन कम नहीं होता। कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल की पूरी भूमि पर बिना एक बूंद यूरिया या डीएपी के सफल प्राकृतिक खेती की जा रही है। इससे खेती की लागत नगण्य हो जाती है, जमीन का उपजाऊपन बढ़ता है और जल-संचयन क्षमता सुधरती है।
देशी गाय आधारित खेती ही भूजल स्तर को ऊपर उठाने, संपूर्ण जीव-सृष्टि का संरक्षण करने और नयी पीढ़ी को निरोगी जीवन देने का अचूक मार्ग है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु प्रत्येक किसान भाईयों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आणंद जिले के झारोला गांव में स्थित 'सांज' संस्था का दौरा किया। इस दौरान संस्था में उपस्थित सम्मानित वरिष्ठ नागरिकों के साथ बैठकर उनका कुशलक्षेम जाना और स्नेहपूर्ण संवाद किया।
हमारे बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर और मार्गदर्शक हैं। उनके जीवन के दीर्घ अनुभवों से हमें प्रेरणा मिलती है। उनके स्वास्थ्य, दिनचर्या और डे केयर संस्था में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
आणंद जिले की बोरसद तहसील के चुवा गांव में अनुसूचित जाति परिवार के श्री अंबालालभाई रोहित जी के निवास स्थान पर आत्मीय और सादगीपूर्ण वातावरण में प्रातःकालीन अल्पाहार का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
अंबालालभाई एवं उनके परिवार के सदस्यों के साथ अत्यंत सहजता से चर्चा की, उनका हाल-चाल जाना तथा उनके दैनिक जीवन, आजीविका और पारिवारिक खुशहाली के विषय में आत्मीय संवाद किया।
आणंद जिले की बोरसद तहसील स्थित झारोला गांव में प्रगतिशील किसान श्री राजेन्द्रभाई पटेल जी के प्राकृतिक कृषि मॉडल फार्म का दौरा किया। फार्म पर कृषि, गौ-सेवा और ग्राम संस्कृति के अद्भुत संगम का अनुभव प्राप्त हुआ।
मॉडल फार्म में स्वयं हल चलाकर तथा गौ-माता का दुग्ध दोहन कर हमारी कृषि और ग्रामीण संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। फार्म परिसर में पौधारोपण कर धरा को हरी-भरी बनाने का संदेश दिया।
उपस्थित किसानों को देशी गायों के संवर्धन, उचित रखरखाव और उत्तम नस्ल के विषय में मार्गदर्शन प्रदान किया। किसानों को प्राकृतिक कृषि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
किसानों को देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से बनने वाले जीवामृत तथा घनजीवामृत को तैयार करने की वैज्ञानिक एवं सरल विधि समझाई। यह विधि मिट्टी के सूक्ष्म जीवाणुओं और केंचुओं को सक्रिय कर भूमि की उर्वरता को बढ़ाती है तथा खेती की लागत को शून्य करती है।
प्राकृतिक कृषि केवल खेती की पद्धति ही नहीं, बल्कि पर्यावरण, भूमि और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का पावन मार्ग है।
आणंद जिले के झारोला गांव की एच.जे. परीख हाईस्कूल के साधारण कक्ष में रात्रि-विश्राम के पश्चात प्रातःकाल विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं ग्रामवासियों के साथ योगाभ्यास किया।
स्वास्थ्य जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। विद्यार्थी प्रतिदिन योग और प्राणायाम को अपनाकर अपनी मानसिक और शारीरिक क्षमता को सुदृढ़ करें। सादगीपूर्ण जीवन और अनुशासन ही हमारे जीवन को सार्थक बनाते हैं।
आणंद जिले के झारोला गांव में आयोजित रात्रि सभा में सम्मिलित होकर बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामवासियों, किसानों, युवाओं एवं विद्यार्थियों से ग्रामोत्थान और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर गहन संवाद किया।
प्राकृतिक खेती अपनाकर धरती माता को बचाएं, एक पेड़ मां के नाम अभियान से पर्यावरण को संवारें, स्वच्छता को अपनी आदत बनाएं तथा युवा पीढ़ी को व्यसनमुक्त और संस्कारवान बनाकर राष्ट्र-सेवा में समर्पित करें। सामाजिक समरसता अपनाकर और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर हर परिवार का उत्थान ही हमारी सच्ची सफलता है।
आइए, हम सब मिलकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए अपने गांवों को स्वावलंबी, स्वच्छ और संस्कारित बनाएं !
आणंद जिले की बोरसद तहसील स्थित झारोला गांव में, अनुसूचित जाति परिवार के श्री अशोकभाई गोविंदभाई के निवास स्थान पर उनके परिजनों के साथ अत्यंत आत्मीयता और सादगीपूर्ण वातावरण में सहभोज का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
परिवार के सदस्यों से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी का हाल-चाल जाना तथा उनके दैनिक जीवन, आजीविका और पारिवारिक खुशहाली के विषय में आत्मीय चर्चा की।
समाज में ऊंच-नीच और जातिगत भेदभाव के बंधनों को त्यागकर वसुधैव कुटुंबकम और समतामूलक समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना ही हमारा परम कर्तव्य है।
आणंद जिले की बोरसद तहसील के झारोला गांव में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी के एक पेड़ मां के नाम 3.0 अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया तथा स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत झाड़ू लगाकर श्रमदान किया।
सामाजिक वनीकरण विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पौधा रोपकर पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी का यह राष्ट्रव्यापी अभियान हमारी भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य और प्रकृति रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
झारोला गांव में स्वयं झाड़ू लगाकर सफाई अभियान में सहभागिता की। समाज को स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद बनाने में रात-दिन योगदान देने वाले गांव के सफाई कर्मचारियों का अभिनंदन एवं सम्मान किया।
वल्लभ विद्यानगर स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय की होस्टलों का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कैंपस में स्वच्छता को लेकर कड़े निर्देश दिए तथा विद्यार्थियों के साथ आत्मीय संवाद किया।
युवा पीढ़ी हर प्रकार के व्यसन से दूर रहे, स्वच्छ वातावरण में पले-बढ़े और राष्ट्रप्रथम की भावना के साथ देश के विकास में अपना योगदान दे यही हमारा मुख्य संकल्प है!
वल्लभ विद्यानगर स्थित इप्कोवाला ऑडिटोरियम में सरदार पटेल विश्वविद्यालय एवं सैमुअल हैनिमेन एकेडमी फॉर होमियोपैथी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गरिमामयी समारोह की अध्यक्षता की।
इस अवसर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्री प्रफुलभाई पानशेरिया जी भी उपस्थित रहे।
होमियोपैथी और आयुर्वेद ऐसी सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियां हैं जो प्रकृति की भांति बिना किसी साइड-इफेक्ट के शरीर को पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करती हैं। "तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु" के वैदिक आदर्श के अनुसार क्रोध, ईर्ष्या और असंतोष जैसे मानसिक विकार शरीर को रोगग्रस्त बनाते हैं। होमियोपैथी मन के मूल कारण को समझकर स्थायी उपचार करती है।
राज्य की 6 प्रमुख यूनिवर्सिटीज के साथ हुए शैक्षणिक MoU के माध्यम से 20 से 25 हजार होमियोपैथी छात्रों को फ्री एजुकेशन एवं स्कॉलरशिप का लाभ मिलेगा।
समारोह में डॉ. कृतिक शाह द्वारा लिखित 'The Hahnemann's Digital Organon of Medicine' ई-बुक का विमोचन किया गया। साथ ही महिला सशक्तिकरण और युवा डॉक्टरों के प्रोत्साहन हेतु 4 विशेष छात्रवृत्ति योजनाओं की शुरुआत हुई।
डॉक्टरों से मिश्रित चिकित्सा त्यागकर अपनी पद्धति पर विश्वास रखते हुए शुद्ध होमियोपैथी अपनाने का आह्वान किया। साथ ही युवा पीढ़ी से व्यसनों से दूर रहकर नशामुक्त भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की।
वल्लभ विद्यानगर स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय के नेहरू बॉयज हॉस्टल तथा एम.बी.ए. एन.आर.आई. हॉस्टल का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परिसर में पाई गई अव्यवस्था और गंदगी को तत्काल प्रभाव से दूर करने के कड़े निर्देश दिए।
हॉस्टल के रेक्टर एवं सुपरिटेंडेंट को निर्देश दिए कि वह हॉस्टल परिसर, कमरों और साझा स्थानों की नियमित रूप से साफ-सफाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों को स्वच्छ, सुंदर और आरोग्यप्रद वातावरण प्रदान करना प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
अध्ययनरत युवाओं के साथ संवाद कर उनके सर्वांगीण विकास, चरित्र निर्माण और अनुशासित जीवनशैली पर बल दिया।
युवाओं को मोबाइल की लत, जंकफूड और हर प्रकार के व्यसन से दूर रहकर एक स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देने को प्रेरित किया।
विद्यार्थियों को लगनपूर्वक अध्ययन करने के साथ-साथ राष्ट्रप्रथम की भावना लेकर समाज और देश की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभाने का मार्गदर्शन दिया।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु शैक्षणिक परिसरों में अनुशासन, स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
जीवामृत और बीजामृत मिट्टी के मित्र सूक्ष्मजीवों को जागृत करते हैं, जिससे भूमि बिना किसी रासायनिक खाद के उपजाऊ बनती है।
राजकोट जिले के बेडी स्थित ए. पी.एम.सी. में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद की अध्यक्षता की। इस अवसर पर प्राकृतिक कृषि उत्पादों के विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया तथा कृषि सखियों और किसान मित्रों से संवाद किया।
जैविक खेती में शुरुआत में उत्पादन घटने की संभावना रहती है, जबकि देशी गाय के गोबर-गोमूत्र, सूक्ष्म जीवाणुओं और केंचुओं पर आधारित प्राकृतिक खेती में उत्पादन घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है और लागत शून्य हो जाती है।
105 माताओं के दूध के नमूनों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण में यूरिया और कीटनाशकों के अंश पाए गए, जो अत्यंत चिंताजनक हैं। रसायनों के कारण ही कैंसर, हार्टअटैक, डायबिटीज और किडनी फेल जैसे गंभीर रोग बढ़ रहे हैं।
बीजामृत, घनजीवामृत और जीवामृत, आच्छादन, वाप्सा और बहु-फसल पद्धति को अपनाकर ही धरती माता को उपजाऊ और आने वाली पीढ़ियों के लिए हवा और जल को शुद्ध रखा जा सकता है।
केंचुए और सूक्ष्म जीवाणु भूमि में पड़े पोषक तत्वों को पौधे के भोजन में परिवर्तित करते हैं। प्राकृतिक खेती से केंचुओं का संवर्धन होता है, जिससे वर्षा जल भूमि के भीतर उतरता है और जल-संचयन सहज हो जाता है।
अब तक गुजरात में 9 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक कृषि से जुड़ चुके हैं। राजकोट जिले में ही 20,000 से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं, जो अत्यंत आनंददायी और सराहनीय है।
किसानों से आह्वान किया कि वह अपनी आने वाली पीढ़ियों को जहरमुक्त अन्न, शुद्ध जल और सुरक्षित पर्यावरण देने के लिए संकल्पबद्ध होकर प्राकृतिक कृषि को जन-आंदोलन बनाएं।


























































