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ज्योतिर्लिंग की अगली कड़ी, #Threads ८) त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर (महाराष्ट्र- नासिक) माना जाता हैं कि, प्राचीनकाल में त्र्यंबक गौतम ऋषि की तपोभूमि थी। अपने ऊपर लगे गोहत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए गौतम ऋषि ने कठोर तप कर शिव से गंगा को यहाँ अवतरित करने का वरदान
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Your cheap copy has Masterpiece @prakashraaj 😂
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Uncle Dropped Genrational Banger 😭😭😭
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🚨 रिपोस्ट रूकना नहीं चाहिए 🖐️ @BiharCMQRT संज्ञान ले धर्मेद्र (गांव-डुमरा,औरगाबाद, बिहार) द्वारा सोशल मीडिया पर हिंदू देवी देवताओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी कि जा रही है। @bihar_police @police_aurangab जल्द से जल्द कठोरतम कार्रवाई करे। @samrat4bjp @trivikram4bjp ध्यान दें।
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Sahi hain guru
Excellent reel posted by BJP Haryana page BJP social media handles are taking it to another level now 🤣🤣
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Sahi hain guru
Excellent reel posted by BJP Haryana page BJP social media handles are taking it to another level now 🤣🤣
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📣 Ashutosh Ranka detained by Assam Police: Today, Ashutosh Ranka and his team held a meet-up in Assam in a prohibited area without permission. Later, police requested them to change the location, but Ashutosh Ranka started arguing with the police.
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Later, when the situation escalated, police detained Ashutosh Ranka and his team. Ranka got the belt treatment in Rajasthan, and now even in Assam 🔥😹
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26/11 का मुंबई रेलवे स्टेशन पाकिस्तान से आया कसाब और उसका साथी...प्लेटफॉर्म पर घूमते हुए पर घूमते लोगों को मार रहे थे ....गोलियों की आवाज़ और 50 से ज्यादा लोगों की मौत.... ये घटना सभी याद रखते हैं लेकिन उस शख्स को बहुत कम लोग याद करते हैं, जिसकी आवाज़ ने सैकड़ों अनजान लोगों को गोलियों की दिशा में जाने से रोक दिया....., #विष्णु_दत्ताराम_झेंडे। 26 नवंबर 2008 की रात वह छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST) के अनाउंसमेंट केबिन में ड्यूटी पर थे। यह प्लेटफॉर्म के ऊपर बना एक कांच का कमरा था, जहाँ से पूरे स्टेशन का काफी हिस्सा दिखाई देता था। ड्यूटी खत्म होने में ज्यादा वक्त नहीं बचा था कि अचानक उन्हें तेज धमाके और गोलियों की आवाज़ सुनाई दी। उन्होंने देखा कि लोग जान बचाकर भाग रहे हैं। दो आतंकवादी देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक में घुस चुके थे और सामने आने वाले लोगों पर गोलियां चला रहे थे। उस स्टेशन पर ही 50 से ज्यादा लोगों की जान जाने वाली थी। लेकिन विष्णु झेंडे ने ऊपर से एक ऐसी चीज देख ली, जिसे शायद बाकी लोग नहीं देख पा रहे थे। लोकल ट्रेनें लगातार स्टेशन पर आ रही थीं। हर ट्रेन से सैकड़ों यात्री उतरने वाले थे—सीधे उन्हीं प्लेटफॉर्मों पर, जहाँ आतंकवादी गोलियां चला रहे थे। उनके पास सिर्फ एक माइक्रोफोन था, जिसकी आवाज़ पूरे स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती थी। उन्होंने फैसला किया कि वे इसका इस्तेमाल करेंगे। भले ही इसका मतलब था कि उन्हें छिपने के बजाय उसी जगह पर रहना होगा, जहाँ से आतंकवादी उन्हें देख सकते थे। उन्होंने बार-बार हिंदी और मराठी में अनाउंसमेंट करना शुरू किया। लोगों से कहा कि वे मुख्य कॉनकोर्स की तरफ न जाएं। पीछे के रास्तों से स्टेशन से बाहर निकलें और गोलियों की दिशा से दूर रहें। उनकी आवाज़ सुनकर सैकड़ों लोगों ने अपना रास्ता बदल लिया। वे स्टेशन से बाहर निकल गए—उस जगह जाने के बजाय जहाँ गोलियां चल रही थीं। आतंकवादियों को समझ आ गया कि ये अनाउंसमेंट कहाँ से हो रही हैं। वे उनके केबिन के ठीक नीचे तक पहुंच गए। एक आतंकवादी ने ऊपर की तरफ गोली चलाई। विष्णु झेंडे नीचे झुक गए, इंतजार किया और जैसे ही मौका मिला, फिर माइक्रोफोन उठाकर लोगों को चेतावनी देने लगे। उनके पास न कोई हथियार था, न कोई सुरक्षा कवच। उनके पास था तो बस एक माइक्रोफोन और यह समझ कि खतरा कहाँ है। वह कोई कमांडो नहीं थे। वह कोई पुलिस अधिकारी नहीं थे। वह रेलवे के एक सामान्य अनाउंसर थे, जो उस रात अपनी ड्यूटी कर रहे थे। लेकिन जब आतंकवादी लोगों की जान लेने आए, तो उन्होंने अपने पास मौजूद एकमात्र हथियार—अपनी आवाज़—का इस्तेमाल किया। 26/11 में बंदूकें चलाने वाले आतंकवादियों के नाम इतिहास में दर्ज हैं। लेकिन उसी स्टेशन पर सैकड़ों लोगों को गोलियों के रास्ते से दूर करने वाली वह आवाज़ भी याद रखी जानी चाहिए। वह आवाज़ थी—विष्णु दत्ताराम झेंडे की।
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I stand with Dr. Doolla of IIT Bombay. ✊ RT if you support him #IITBombay #DrDoolla
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"40,000 is not a small number." "I am always deeply grateful to Bajrang Dal from the bottom of my heart." 🫡
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