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शेतकऱ्यांच्या डोळ्यांतील अश्रू पुसता आले, हीच माझ्यासाठी खरी दिवाळी!
हेमाडपंथी शिवमंदिराचा ऐतिहासिक वारसा आणि कार नदीमुळे लाभलेले निसर्गसौंदर्य अशा वैशिष्ट्यांनी समृद्ध असलेल्या नागपूर जिल्ह्यातील लोहारी सावंगा या गावी आज शेतकरी बांधवांसमवेत दिवाळी साजरी करण्याचे सौभाग्य प्राप्त झाले. दुष्काळाचा सामना करणाऱ्या बळीराजाचे दुःख, त्याच्या व्यथा आणि कुटुंबाच्या भविष्याची चिंता जाणून घेताना मन भरून आले. आज मी येथील शेतकरी अरुणाबाई बालपांडे आणि रामभाऊ बालपांडे यांच्या घरी मुक्कामी आहे. बालपांडे कुटुंबाने अत्यंत आपुलकीने केलेल्या स्वागताने मन अक्षरशः भारावून गेले आहे. त्यांच्या प्रेमात, जिव्हाळ्यात आणि आपलेपणात एक विलक्षण भावनिक ओलावा आहे.
देशभरात दिवाळीचा उत्साह असताना राज्यातील शेतकरी मात्र चिंतेत आहे. निसर्गाच्या अवकृपेमुळे करपलेली पिके, निर्माण झालेली आर्थिक विवंचना, मुलांच्या शिक्षणाची चिंता त्यांच्या मनात आहे. लोहारी सावंगा येथील शेतकऱ्यांशी या विषयांवर संवाद साधला, त्यांच्या अडचणी जाणून घेतल्या, तेव्हा त्यांच्या चेहऱ्यावरचा ताण हळूहळू निवळताना अनुभवला. "साहेब, तुम्ही थेट आमच्या गावात आलात, आमच्या सुख-दुःखात सहभागी झालात, यातच आमचे अर्धे दुःख हलके झाले," हे त्यांचे शब्द मनाला स्पर्शून गेले.
माझ्यासाठी महाराष्ट्रातील प्रत्येक शेतकऱ्याचे पीक म्हणजे केवळ उत्पादन नाही, तर ते त्याच्या संपूर्ण कुटुंबाने वर्षभर केलेल्या कष्टांचे, त्यागाचे आणि स्वप्नांचे प्रतीक आहे. प्रत्येक पिकामागे कुटुंबाच्या भविष्याची आशा असते आणि प्रत्येक हंगामामागे समृद्धीचे स्वप्न असते. निसर्गाच्या अनिश्चिततेमुळे जेव्हा पीक उद्ध्वस्त होते तेव्हा शेतकऱ्यांच्या भविष्यावरही संकट येते. आज हे दुःख जवळून अनुभवले. म्हणूनच, केवळ मंत्रालयातील बैठका, निर्णय, योजना किंवा आर्थिक सहाय्यापुरते मर्यादित न राहता, बळीराजाच्या शेजारी बसून त्याच्या अडचणी जाणून घेणे, त्याचे अश्रू पुसणे आणि त्याला पुन्हा उभारी देण्यासाठी आधाराचा हात देणे, हा माझा प्रामाणिक प्रयत्न आहे.
रब्बी पिकांचे नुकसान टाळण्यासाठी कोणत्या उपाययोजना करता येतील, याबाबत शेतकऱ्यांशी चर्चा केली. दुष्काळी परिस्थितीच्या पार्श्वभूमीवर शक्य असेल त्या ठिकाणी विंधन विहिरी घेण्यास परवानगी देण्यात येईल. काटोल आणि नरखेड परिसरात संत्र्यासह मोसंबीचे मोठ्या प्रमाणावर उत्पादन घेतले जाते. मात्र, निर्यातीसमोरील नव्या आंतरराष्ट्रीय आव्हानांमुळे शेतकऱ्यांना नुकसान सहन करावे लागत आहे. या पार्श्वभूमीवर नागपूरमधील मिहान प्रकल्पाच्या माध्यमातून संत्री आणि मोसंबीवर प्रक्रिया करण्यासाठी मोठा प्रकल्प उभारण्याचे नियोजन आहे. शेतकरी अडचणीत येऊ नये यासाठी आवश्यक ती खबरदारी घेतली जाईल.
यावेळी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, आमदार डॉ. आशिष देशमुख व इतर मान्यवर उपस्थित होते.
@cbawankule @AshishRDeshmukh
#Maharashtra #DiwaliWithFarmers #Nagpur
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तन-मन-धन से सदा सुखी हो, भारत देश हमारा ।
सभी धर्म अरु पंथ पक्ष को, दिल से रहे पियारा ।।
विजयी हो, विजयी हो, विजयी हो, भारत देश हमारा ।।
@cbawankule @AshishRDeshmukh
#Maharashtra #RashtraSantTukdojiMaharaj #DiwaliWithFarmers
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मंगल नाम तुम्हार प्रभू! जो गावे मंगल होत सदा ।
अमंगलहारी कृपा तुम्हारी, जो चाहत दिलको घोत सदा ।।
तु आद-अनाद सुमंगल हो, अरु रुप तुम्हार निरामय है।
तुकड्या कहे जो भजता तुमको, नित पावत मंगल निर्भय है ।।
@cbawankule @AshishRDeshmukh
#Maharashtra #RashtraSantTukdojiMaharaj #DiwaliWithFarmers
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भारत संतो कि धरती थी है और रहेगी 👇🏻
103 वर्ष की पूज्य जैन साध्वी जी ने लगातार 3 घंटे खड़े रह कर प्रभु कि भक्ति कि 🙏🏻🚩
यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है 💯
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Safe food is every citizen's right, not festive favour
Diwali is a festival of joy, and joy begins with trust. Every citizen deserves safe, standard and quality food.
We will build a culture of food safety with compliant Food Business Operators, Strict regulators and vigilant citizens.
On public health, there can be no compromise.
#Diwali #FoodSafety #FDA #TukaramMundhe
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Bombay High Court cancels bail granted to ex-cop Sachin Waze in Antilia bomb scare case
report by @Neha_Jozie
barandbench.com/news/bombay-…
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खबर यह नहीं है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने RTI आवेदक को रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति दे दी। खबर यह है कि समानतः 30 दिन में मिलने वाली जानकारी के लिए एक नागरिक को अपने सूचना के अधिकार के लिए 15 साल इंतजार करना पड़ा और इनमें से 14 साल तक तो यह मामला अदालतों में घसीटा गया!
जरा इस मामले की टाइमलाइन देखिए।
12 दिसंबर 2011 को RTI आवेदन।
23 फरवरी 2012 को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का आदेश पहले रिकॉर्ड का निरीक्षण कीजिए, फिर जिन दस्तावेजों की प्रतियां चाहिए, उन्हें चिन्हित कीजिए।
20 अक्टूबर 2015 को हाईकोर्ट में सरकारी पक्ष की रिट याचिका। 17 अगस्त 2026 को एकल पीठ का आदेश। और नवंबर 2026 में खंडपीठ से निरीक्षण का रास्ता बहाल!
और इस पूरी कहानी का सबसे शर्मनाक पहलू क्या है?
जिस व्यवस्था का काम नागरिक को सूचना उपलब्ध कराना है, उसी व्यवस्था ने सूचना देने के रास्ते में कानूनी दीवारें खड़ी करने में अपनी ताकत लगा दी।
सबसे बड़ा सवाल !!!!!
किस अधिकारी ने यह तय किया कि 2012 के आदेश के खिलाफ मुकदमा लड़ना जरूरी है? किसने सरकारी खजाने से इस मुकदमे की पैरवी की मंजूरी दी? कितने सरकारी वकील, कितनी सुनवाइयां, कितने घंटे और जनता के टैक्स के कितने रुपये इस कवायद में खर्च हुए?
सरकारी पैसा खर्च करना इतना आसान क्यों है? आखिर सरकार के पैसे का कोई मालिक नहीं है क्या?
मेरी मांग है कि इस पूरे मुकदमे की फाइल सार्वजनिक हो। यह बताया जाए कि किस स्तर पर इसे चुनौती देने का फैसला हुआ, किसने कानूनी सलाह दी और किसने इसे जारी रखने की मंजूरी दी।
जिन अधिकारियों ने इस मुकदमेबाजी को मंजूरी दी, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि जांच में दुर्भावना, मनमानी या गंभीर लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो और सरकारी धन की वसूली भी हो।
किसी अधिकारी को यह अधिकार नहीं मिल सकता कि वह अपनी कुर्सी और अहंकार बचाने के लिए जनता के पैसे से जनता के अधिकार के खिलाफ मुकदमे लड़ता रहे।
मैं राज्य सूचना आयुक्त रह चुका हूं। जानता हूं कि सूचना आयोगों में किस तरह ऐसे मामलों की सुनवाई होती है। निरीक्षण कोई असाधारण या असंभव प्रक्रिया नहीं है। RTI कानून में रिकॉर्ड के निरीक्षण का स्पष्ट प्रावधान है। फिर एक नागरिक को इसके लिए इतने वर्षों तक क्यों लड़ना पड़ा?
और न्यायपालिका से भी एक सवाल है।
माननीय न्यायाधीशों को भी अपनी व्यवस्था के गिरेबान में झांकना होगा। 2012 से चले आ रहे एक सूचना विवाद को अंतिम दिशा देने में 2026 क्यों लग गया? क्या यह इतना जटिल संवैधानिक विवाद था कि इसे सुलझाने में एक पीढ़ी का महत्वपूर्ण समय निकल जाए?
न्याय में देरी का सबसे बड़ा फायदा किसे मिलता है? उस नागरिक को, जो सूचना मांग रहा है, या उस व्यवस्था को, जो सूचना नहीं देना चाहती?
यह सिर्फ एक RTI आवेदक की लड़ाई नहीं है। यह उस पूरे सरकारी माई-बाप कल्चर का नमूना है, जहां अधिकारी खुद को जनता का जवाबदेह सेवक नहीं, बल्कि जनता का भाग्यविधाता समझने लगते हैं।
याद रखिए, सूचना का अधिकार सरकार की कृपा नहीं है। यह नागरिक का मौलिक लोकतांत्रिक औजार है। और इस औजार को कुंद करने की कोशिश करने वालों को जवाबदेह बनाना ही होगा।
इस खबर का असली सवाल यह नहीं कि हाईकोर्ट ने क्या अनुमति दी। असली सवाल है कि एक नागरिक को उसका अधिकार देने में व्यवस्था ने 14-15 साल क्यों बर्बाद किए?
और इस बर्बादी की कीमत कौन चुकाएगा?
नागरिक ने अपना समय गंवाया। जनता ने अपना पैसा। अब जवाबदेही किसकी?
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🚨 सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अवैध कब्जा चाहे कितना भी पुराना हो, मालिकाना हक कभी नहीं मिलेगा! ⚖️📜
अगर किसी की जमीन या मकान पर किसी ने सालों से अवैध कब्जा कर रखा है, तो यह फैसला आपके लिए बेहद जरूरी और राहत देने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि:
👉 सिर्फ लंबे समय तक काबिज रहने से कोई मालिक नहीं बन जाता!
अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसी के पास वैध कानूनी दस्तावेज
(Valid Legal Documents) और पक्की रजिस्ट्री नहीं है, तब तक केवल कब्जा रखने के आधार पर मालिकाना हक का दावा नहीं किया जा सकता। 🚫🏠
📌 फैसले की मुख्य बातें:
1️⃣ कागज़ात ही असली ताकत हैं: संपत्ति का असली हकदार वही होगा जिसके पास वैध दस्तावेज होंगे। 📄✍️
2️⃣ अवैध कब्जाधारियों को झटका: 'लंबे कब्जे' की आड़ लेकर जमीन हड़पने वालों के रास्ते पूरी तरह बंद। 🛑❌
3️⃣ मालिकों को बड़ी राहत: अपनी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे असली मालिकों को कोर्ट के इस रुख से जबरदस्त मजबूती मिलेगी। 🛡️🤝
💡 सलाह: अपनी पुश्तैनी या खरीदी गई किसी भी संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records), खतौनी, रजिस्ट्री और म्यूटेशन के कागजात हमेशा दुरुस्त रखें।
क्या आपको लगता है कि इस फैसले से भू-माफियाओं और अवैध कब्जों पर लगाम लगेगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं! 👇💬
(यह जरूरी कानूनी जानकारी अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें!) 📲🔄
#SupremeCourt #PropertyLaw #LegalUpdate #RealEstate #IndianLaw #Nyay #Kanoon
#Kanpur
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BMC launches demolition drive hours after Supreme Court freezes commissioner's salary
Read here: barandbench.com/news/bmc-lau…
@mybmc
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#BREAKING Development in the BMC Commissioner contempt case before #SupremeCourt.
A day after the Court threatened stoppage of the Commissioner's salary over non-compliance, senior counsel informs CJI Surya Kant's Bench that the directions have now been implemented and all offending structures demolished.
Counsel personally apologises for earlier defending the authorities, saying they have now realised their mistake.
An affidavit of compliance will be filed by tomorrow.
@mybmc
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WR clears 28 illegal huts near Ram Mandir station for new Jogeshwari terminus
hindustantimes.com/s/1keXfgu Railways continue allowing illegal structures on its lands till it needs for its use. Who benefits from this? @suchetadalal @szaveri71
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Supreme Court Stops Salary Of Mumbai Corporation Commissioner Over Failure To Remove Encroachments; Imposes Rs 5 Lakh Cost |@AmishaShriv
livelaw.in/top-stories/supre…
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रेल्वेगाड्यांची प्रतीक्षायादी कमी करण्याच्या सूचना रेल्वे मंत्रालयाने पश्चिम रेल्वेला दिल्या आहेत.
@WesternRly
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VIDEO | Mumbai, Maharashtra: FDA Commissioner Tukaram Mundhe says the licence of the food caterer has been suspended after several people fell ill due to food poisoning at a wedding in Mumbai. He urges event organisers to inform the FDA in advance so that food samples can be collected.
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#BREAKING Supreme Court holds that the Municipal Commissioner of Greater Mumbai has committed contempt of two earlier orders concerning removal of encroachments from land earmarked for a BEST bus stand in Mumbai.
CJI Surya Kant-led bench issues show cause notice to the Commissioner, asking why contempt action should not be taken against him.
The Court dismisses the Commissioner's application seeking extension of time with costs of ₹5 lakh and directs that no salary be disbursed to the Commissioner or his staff until the show cause notice is decided.
The bench takes serious exception to the explanation that municipal officers required Marathi documents to be translated into English before complying with its directions.
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The Supreme Court on Tuesday ordered an immediate freeze on the November salary of Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) Commissioner Ashwini Bhide and other civic officials while initiating contempt of court proceedings against her for failing to clear encroachments from government land.
The three-judge bench also rejected the civic body's request for an additional 30 days to comply with its earlier directions to clear the land earmarked for a Brihanmumbai Electric Supply and Transport (BEST) bus station in Mumbai's Borivali and imposed costs of Rs 5 lakh.
#SupremeCourt #BMC #BMCCommissioner #AshwiniBhide | @journovidya
Read More: intdy.in/qu2p48
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🤣🤣🤣🤣🤣🤣 Punjab Police ASI first plant drugs into victim’s home and then raid the premises
On too of it gets caught on CCTV 🤣🤣🤣 #shameless
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It was lovely to attend Raasleela – Edition 6, organised by Jain Social Organisation, a Garba night that brought people together to celebrate tradition, strengthen bonds, and dance as one community
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Ghatkopar #LoveJihad accuse
Jaid Qureshi ran away to DUBAI
घाटकोपर लवजिहाद का आरोपी जैद कुरेशी दुबई भाग गया
@MumbaiPolice
























