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अजीत भारती ने आवाज उठाई समान्य वर्ग के लिए #UGC के प्रावधानों के खिलाफ,
उस समय के बाद पुरे देश में इसका जोरदार विरोध हुआ, और जायज भी था I
पता नहीं सरकार किस मानसिकता के साथ ये क़ानून लाई,
अब एससी एसटी एक्ट को हीं देख लीजिये यह आज एक धंधा बन चुका है,
सरकार जहाँ भी गलत होगी वहाँ विरोध होता रहेगा और इस मामले में अजीत भारती को फुल समर्थन रहेगा,
आजकल जिसको देखो @ajeetbharti के नाम पर रीच खाने को बेचैन है,
लेकिन अगर योगी जी को टारगेट करेंगे भारती जी तो बैक फायर हो जायेगा खुद भारती जी को 😊
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🚩 एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है!
गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गणतंत्र हमें जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है, जबकि एकता हमें राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की ताकत देती है।
आज स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय एकता दिवस तीनों राष्ट्रीय पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को शत्-शत् नमन! 🙏🇮🇳
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क्या भोगी, क्या लोभी और क्या योगी... अंत में सबकी मंजिल तो एक ही है! BARC में काम करने वाला इंजीनियर संन्यासी बना, अब उसकी मुस्कान में हम जैसे लोग जिंदगी का फलसफा तलाश रहे हैं।
कभी कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक, फिर एमटेक और देश के प्रतिष्ठित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में ट्रेनिंग और नौकरी। साल 2002 में इंजीनियरिंग करने वाले इस शख्स के पास एक शानदार करियर बनाने का अवसर था। लेकिन उसने एक दिन नौकरी और सांसारिक जीवन छोड़कर संन्यासियों वाला रास्ता चुन लिया।
आज गंगोत्री की पहाड़ियों में भगवा वस्त्र पहने, उलझे बालों और सफेद दाढ़ी के साथ खिलखिलाकर हंसते इस आदमी को देखकर शायद ही कोई उनके अतीत का अंदाजा लगा पाए।
वह बताता है कि जब उसके पुराने बॉस को उनके संन्यास लेने का पता चला तो बॉस ने फोन करके पूछा- "क्या तुम पागल हो गए हो?" जो इतनी लेविश नौकरी को लात मा रते हो ?? उसका जवाब था- "हां! मैं पागल हो गया हूँ। "
आजतक दुनिया उससे यही सवाल करती आ रही है। कि ऐसा क्यों किया ? असल जवाब उसकी फिलोसॉफी में है। जिंदगी को लेकर उनकी सोच में है। उसका कहना है कि जन्म और मृत्यु के बीच जो थोड़ा-सा समय मिला है, वही असली जिंदगी है। यह समय बहुत कीमती है। आपको लगेगा कि अभी तो बहुत साल पड़े हैं। बहुत वक़्त है। पर ऐसा नहीं है। ये वक़्त पंख लगा कर उड़ता है।"
सबसे महत्वपूर्ण ये है कि ये शख्स खुश है। अपने इस साधुत्व को खुल कर जी रहा है। बेशक़ दुनिया इसे पागल कहे। क्या हम लोग पागल नहीं हैं? जिस जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए हम पूरी जिंदगी लगा देते हैं, कहीं उसी जिंदगी को जीना तो नहीं भूल रहे?
यह अनाम साधु हो सकता है कइयों के हिसाब से पागल हो, कि उसने एक बड़ी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है?
मगर मुझे लगता है कि ये हम सबसे कहीं अधिक समझदार है। हम सब अपने अपने चक्रव्यूह में फंसे हैं। जिससे शायद हम जीवन भर ना निकल पाएं। जीवन निकल जाता है।
ज़िंदगी के आखिरी लम्हों में इंसान चाहता है कि थोड़ा वक्त और मिल जाए ... ज़िंदगी जी लूं। एक मलाल रह जाता है। उसके द्वारा जीवन में किये त्याग, नौकरी, EMI, परिवार संबंधी जिसके लिए वो खटता रहा। वो सब तामझाम। ये सारे मिल कर भी उसकी ज़िंदगी का "एक दिन" नहीं बढ़ा पाते।💀
उसके मरने के पहले क्षण के बाद से ही वो एक ज़रूरी व्यक्ति से "बॉडी" बन जाता है। उसके अपने उसकी चिता जला कर लौट आते हैं, वो वहीं रह जाता है राख बना। जिसमें कुछ राख उसके शरीर की है। कुछ अधूरी अभिलाषाओं की भस्म है। 🔥❣️
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Dear केंद्र और राज्य Sarkar 🙏🏻
तनी रहम करी महाराज🥺। छठ पूजा में हर पूर्वांचली के सपना रहेला की वो आपन गाँव जाए लेकिन ना तो ट्रेन में टिकट खाली बा और फ्लाइट के रेट भी आग 🔥 लाग गइल बा। अब तो केंद्र और राज्य दोनों जगह राउर ही राज बा फिर भी बहाना देम तो कैसे भरोसा जागी?
जल्दी एकर समाधान निकाली ये देवता। छठी माई बहुत दुआ दिहन 🙌
निवेदक(निहोरा)
राउर जनता
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शर्त लगा लो शायद अपने पहले न तो इन्हें देखा होगा या नाम भी सुना होगा......
.......प्रधानमंत्री मोदी की सरदार पटेल जी परिवार से मुलाकात के समय का फोटो
नेहरू से लेके प्रियंका वाड्रा के बच्चों तक की जीवनी मीडिया द्वारा लिखी गई सरकारों द्वारा लिखवाई गई
पर पटेल के परिवार को...?? भुला दिया गया..?
नहीं,....पटेल के परिवार ने उनके नाम का न तो इस्तेमाल किया न उनके नाम की अनुशंसा की ताकि कोई वंशवाद का आरोप लगा दे...
यही अंतर है फर्जी गांधी परिवाद की लिगेसी ओर पटेल परिवार के संस्कार
सरदार पटेल की 151 वी जयंती पर उनको नमन🙏
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इतने सालों से शादी के बिना उमर अब्दुल्ला के घर पर साथ रहती थी
अब जाकर शादी हो गई है
खैर
मुबारक हो तुम्हे कबूल कर लिया गया निधि राजदान
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वैभव सूर्यवंशी ने IPL में अपने प्रदर्शन से कई अवॉर्ड जीते और BCCI पर उसे टीम में शामिल करने का दबाव बना। लेकिन अब उसे फास्ट ट्रैक करने के बजाय उम्र, फेम और अनुभव का हवाला देकर रोका जा रहा है। क्या उसकी प्रतिभा से ज्यादा उसकी पहचान और बिहार से होना कुछ लोगों को खटक रहा है? पोस्टर और प्रोमो में आगे रखेंगे, लेकिन खेलने का मौका नहीं देंगे!
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पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित संस्कृति मॉडल स्कूल में तीसरी कक्षा के छात्र द्वारा KG में पढ़ने वाली विशेष आवश्यकता वाली बच्ची पर पत्थरों और भारी गमले से हमला करना बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है।
मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल होकर PGI चंडीगढ़ में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
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गलवान से लेह की दूरी 150 किमी तो होगी... लेफ्टिनेंट रेखा सिंह की पहली पोस्टिंग वही त्रिशूल डीविजन में हुई थी ,जहां से 150 किमी दूर नायक दीपक सिंह ,वीर चक्र शहीद हुए थे...
मेडिकल असिस्टेंट दीपक ने उस दिन गलवान में अपने 30 साथियों की जीवन रक्षा की थी तत्कालीन चिकित्सा देकर...उन्होने तो कुछ पीएलए सैनिकों की भी प्राथमिक चिकित्सा की थी...पर उस भयंकर झड़प में हो रही पत्थरों से हमले में खुद को बचा नही पाए थे...
दीपक और रेखा की शादी को मात्र 7 महीने हुए थे,जिसमें से मुश्किल से वो कुछ वक्त ही साथ बिता पाएं थे...
पर वीर नारी रेखा सिंह ने नायक दीपक के वीरचक्र को जब हाथ में लिया तब अपने शोक को फौज में जाने के अपने जज्बे में बदल दिया और ओटीए चेन्नई से पास होकर लेफ्टिनेंट रेखा सिंह बन गई...पीपिंग सेरेमनी ने जब उनके कंधों पर उनकी सास ने सितारे सजाएं तो उनको लगा कि रेखा और दीपक एक हो गए इस वर्दी में...
पहली पोस्टिंग में लेह पहुंचने पर रेखा सिंह इमोशनल जरूर हुई होंगी,पर उनका जज्बा भी उनके पति दीपक सिंह जितना ही अडिग था...भारत की स्त्रियों में सच में बहुत तेज है,ये कहानी उसी की मिसाल है कि एक 23, साल की लड़की जिसने कभी सोचा ना होगा कि एक फौजी से विवाह करने के बाद उसकी जिंदगी कैसा मोड़ लेगी...उसने फौजी से विवाह किया होगा ,पर खुद कभी फौजी बनने का सोचा नही होगा,पर पति के बलिदान ने उसे भी वही पथ चुनना श्रेयस्कर लगा जो अब उसके लिए पुण्य पथ है...
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भारत में पेट्रोल की कीमतों को लेकर गलत नैरेटिव फैलाने वालों के लिए ये आंकड़े काफी हैं!
The Economic Times के अनुसार, पेट्रोल की कीमतें:
भारत – ₹108.97/L
UAE – ₹110.49/L
अमेरिका – ₹115.25/L
चीन – ₹132.02/L
कनाडा – ₹134.97/L
जबकि वैश्विक औसत ₹150 प्रति लीटर है, भारत में पेट्रोल करीब ₹41 सस्ता है।
डीजल भी वैश्विक औसत से ₹61 प्रति लीटर सस्ता बताया गया है।
लेकिन कुछ लोगों को फिर भी यही कहना है कि भारत में दुनिया का सबसे महंगा पेट्रोल मिलता है!
आंकड़ों से बहस कीजिए, सिर्फ नैरेटिव से नहीं!
economictimes.indiatimes.com…
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दरभंगा सवर्ण बाहुल्य क्षेत्र है, BJP ने यहाँ से सवर्ण उम्मीदवार भी उतारा था, ये BJP के प्रदेश अध्यक्ष का क्षेत्र है, उसके बावजूद यहाँ RJD प्रत्याशी जीते! उसके 2 बड़े कारण:-
- भरत तिवारी एनकाउंटर
- UGC को लेकर अभी तक लोगों के मन में आक्रोश।
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भय का विनाश, प्रारब्ध, संचित, पाप जो विनाश कर दे वह शक्ति कामाख्या माँ के शरण में है!❤️
"जय माँ कामाख्या"🌙🔱🙏🏽
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शुभम शुक्ला ने अगर कोई बात कह दिया, मतलब कह दिया, सोर्स 2 हज़ार किलोमीटर वाले नहीं 100% सही होते हैं….. HM शाह, CM योगी का ये दृश्य देखिए। नीचे के प्वाइंट्स पढ़िए:-
- HM अमित शाह लखनऊ पहुंचे, CM रिसीव करने गए
- दीप प्रज्वलन में HM के साथ CM रहे
- HM का हावभाव CM के साथ पूर्णतः सकारात्मक और ताजगी भरा रहा।
- आज बैठक में भी साथ दिखेंगे, HM और CM की मीटिंग भी होगी.
- HM आपको CM की तारीफ़ करते भी दिखेंगे
- इनके बीच मतभेद की खबर पूर्णतः झूठी, राजनीतिक और नैरेटिव सेट करने का आधार हैं।
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संजू सैमसन जी 4 रन बनाकर आउट हो गए हैं। सीरीज के 4 में से एक मैच में चले हैं भाई साब लेकिन कोई कुछ नहीं बोल सकता उनको काहे कि टीम मैनेजमेंट के हिसाब से पूरे भारत पर एहसान है उनका कि उन्होंने वर्ल्ड कप जिताने में भूमिका निभायी थी।
इस कर्जे के बोझ तले दबे रहिए और वैभव को बाहर बैठा देखते रहिए।
गजबे है।
वैसी एमएलसी चुनाव के बहुत पहले राजद के 'युवराज' तेजस्वी यादव ने M Y समीकरण से हट कर ए टू जेड ( A टू Z) की थ्योरी ला कर एक नई राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार की। पर इस एमएलसी के चुनाव में राजद सुप्रीमो लालू यादव ने एनडीए के खास समीकरण भूमिहार और ब्राह्मण में दल की संभावना तलाश की। उनका मानना था कि राष्ट्रीय जनता दल के प्रति M Y का विश्वास आज भी बना हुआ है।
इस वोट बैंक का पूरा आधार अगर सवर्ण से खास कर भूमिहार और ब्राह्मण के साथ जोड़ लिया जाए तो एक चमत्कार हो सकता है। और राजद सुप्रीमो का यह समीकरण एक कारगर राजनीतिक हथियार साबित हुआ। इसने भारतीय जनता पार्टी से दो एमएलसी पद (एक ब्राह्मण और एक भूमिहार) छीन कर राजद की झोली में डाल दिए।
बिहार की राजनीति में ऐसा मुश्किल तो नहीं लेकिन थोड़ा टफ है।
RJD मुखिया लालू प्रसाद यादव जी की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक सुझाव दिया है जो सच में तेजस्वी यादव को पसंद आना चाहिए।
रोहिणी आचार्य कहती हैं कि
अगर बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर साथ आ जाएं तो BJP-NDA बिहार से गायब हो जाएगी पता तक नहीं लगेगा इनका।
इसका उदाहरण आपको MLC के चुनाव में देखने को मिल जाएगा।
ऐसा करना भी चाहिए क्योंकि लालू प्रसाद यादव जी ने भी कई बार ऐसा किया था और RJD सत्ता में बराबर रही थी।
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किसी ने रामायण के मंगल गीत की जगह मिथिला में गाए गए मंगल गीत को यहाँ पर लगा दिया
सुनिया, उससे कितने करोड़ गुना सुंदर है ये …….इसमें भाव है, आस्था है। सच में मंगल गीत लग रहा है, क़व्वाली नहीं
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कॉन्ग्रेस के शून्य को प्राथमिकता देने से बिहार और UP में भाजपा का परिणाम छुप नहीं जाता। कॉन्ग्रेस से स्वयं कॉन्ग्रेस को भी आशा नहीं थी, पर आप उसको ट्रोल करके पा क्या लोगे?
बिहार में सवर्णों ने राजद तक को वोट दे दिया (क्योंकि भूमिहार प्रत्याशी था), सजातीय निर्दलीय को जिताया, जन सुराज को जिताया। ये आपको यदि नहीं दिख रहा है, जैसे बाँकीपुर नहीं रजिस्टर हो रहा था, तो रहिए मूर्खों के स्वर्ग में।
'वाराणसी में तो पहले से ही सपा थी!' अरे, क्या हुआ डबल इंजन का? मतलब आप स्वीकार रहे हो कि शिक्षकों और छात्रों में मोदी-योगी-भाजपा का कोई क्रेज नहीं है? 27,000 की बढ़त और मार्जिन में आपको दिख नहीं रहा समीकरण कहाँ जा रहा?
कॉन्ग्रेस से क्या आशा थी? अपना ढेढर ना देखे, दूसरे की फूली निहारे!
मैं इन चुनावों में अधिक नहीं पढ़ता था, पर जब से ये चटुआ गिरोह के मूर्ख गुजरात के निकाय चुनावों में जीत को UGC पर रेफरेंडम बता रहे थे और झारखंड में हुई हार पर चुप होते थे, तब से इनको याद दिलाना आवश्यक है कि प्रबुद्ध युवा और शिक्षक अब अपने विकल्प देख रहा है। ये वो लोग हैं जो कक्षा में बच्चों को पढ़ाते हैं, कहीं ना कहीं नैरेटिव शेप करते हैं। यह भी रेफरेंडम नहीं है, पर संकेत अवश्य है एक क्षेत्र का।
100-200 वोट अधिकारी मैनेज कर भी देते हैं, यदि कोई नेता उन्हें माँ-बहन की गाली देता फिरे, पर 4000 या 27000 की बढ़त मैनेज नहीं होती, सरकार कोई भी हो। यूपी के जितने जानकार हैं, वो बताएँ कि इस बार प्रदेश भाजपा (मूलतः योगी) चुनावों से पूर्व कितना बल लगा रही थी?
विधान परिषद् चुनावों में यदि आपको CM की रैली और भाषणों की आवश्यकता पड़े, और आपका स्कोर 6-5 रहे, तब बैठ कर आत्ममंथन कीजिए। मोदी की बकलोली वाली पोस्ट और genZ इमोजी का उतना ही अंतर पड़ रहा है जितना डैश उखाड़ने से मुर्दे के भार पर पड़ता है।
सत्य को स्वीकारो और जगो। कोई नहीं चाहता अखिलेश आए, राहुल आए, पर तुम्हारा नीला प्रेम सब को अपने विकल्प और जाति को देखने को विवश कर रहा है। हर चुनाव, हर निर्णय ऐसा आता जा रहा है जैसे सवर्ण इस देश का हिस्सा केवल मोटा टैक्स भरने के लिए और मोदी की घटिया, दो कौड़ी की, जातिवादी, समाज विभाजनकारी नीतियों को फण्ड करने के लिए है।
सुधर जाओ, थोड़ा समय है अभी भी।
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MLC elections in 28 seats across 4 big states - Uttar Pradesh, Maharashtra, Bihar and Karnataka.
Elections held using ballot papers.
Guess how many seats Congress won? 🧐






















