मैं कब से हूं कितना तन्हा ,तुझे पता भी नहीं
कभी गिला था हमें उनसे अब तो गिला भी नहीं
कभी ये लगता है अब खत्म हो गया सब कुछ
कभी ये लगता है अब तक तो कुछ मिला भी नहीं
मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूं
मगर सफ़र तो सफ़र है इंतजार मत करना
हमारी राह में कलियां नहीं है कांटे है
हमारी राह कभी इख्तियार मत करना .....
अब ये दुनिया वो दुनिया न रही
अब तेरा ध्यान भी उतना न रहा
जिंदगी कटी जिस के तम्मन्ना में
वो मेरे हाल से बेगाना रहा.....






