
Broadcast/Online Journalist | Editor-in-Chief #BharatSamachar TV News Station @bstvlive & https://xitter.cf/t.co/Qx6WEhTfT0| Founder of https://xitter.cf/t.co/nFGASTl6ny
Lucknow, India
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43 साल, अनगिनत युद्ध और सच की बेखौफ आवाज़। CNN को अलविदा कहेंगी दुनिया की दिग्गज पत्रकार क्रिस्टियान अमनपोर! उन्होंने पत्रकारिता के अपने सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत को एक बार फिर दोहराया “Always be truthful, not neutral.” यानी, “हमेशा सच के साथ खड़े रहिए, तटस्थता के नाम पर सच से समझौता मत कीजिए।” यह सिर्फ एक मशहूर एंकर की विदाई नहीं, बल्कि अमेरिका में उस पत्रकारिता के एक गौरवशाली अध्याय का समापन है, जिसने दुनिया को युद्ध, सत्ता, संघर्ष और मानवीय त्रासदियों की सच्चाई दिखाई। 1983 में CNN के न्यूज़ डेस्क पर एक साधारण असिस्टेंट के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाली अमनपोर दुनिया की सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों में शामिल हुईं। खाड़ी युद्ध से लेकर बोस्निया, रवांडा, अफगानिस्तान, इराक, यूक्रेन और ईरान तक, उन्होंने उन मोर्चों से रिपोर्टिंग की, जहां कैमरा लेकर पहुंचना भी जान जोखिम में डालने जैसा था। अमनपोर की पहचान सिर्फ बड़े नेताओं के इंटरव्यू लेने से नहीं बनी, बल्कि सत्ता के सामने निर्भीक सवाल उठाने और युद्ध के शोर में आम इंसान की आवाज़ सुनाने से बनी। अपनी विदाई की घोषणा में उन्होंने कहा कि कई महीनों के विचार-विमर्श और बेचैन रातों के बाद उन्होंने CNN से अलग होने का निर्णय लिया है।
#ChristianeAmanpour #CNN #Journalism @CNN
शंघाई के वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन ने एक बात हमेशा के लिए साबित कर दी "21वीं सदी में हुनर ही सबसे बड़ी पूंजी है।" भारत के 70 युवा इस पूंजी के चमकते प्रतीक बनकर लौटेंगे। उनकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। और यह कहानी हर उस भारतीय को पढ़नी चाहिए, जो आज भी डिग्री के पीछे भागते-भागते अपना असली हुनर भूल बैठा है। क्योंकि शंघाई ने एक और बात भी सिद्ध कर दी है कि "जिसके पास हुनर है, उसके पास दुनिया है। और जिस देश के पास हुनर है, उस देश का भविष्य कोई नहीं रोक सकता।"
शंघाई में भारतीय स्किल का शानदार प्रदर्शन! 🇮🇳 भारत के युवाओं ने अपनी मेहनत, हुनर और नवाचार से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। टेक्नोलॉजी हो, स्टार्टअप, डिज़ाइन या ग्लोबल इंडस्ट्री। हर क्षेत्र में युवा भारत की छाप छोड़ रहे हैं।
शंघाई में WorldSkills का मंच याद दिलाता है कौशल केवल नौकरी पाने का साधन नहीं, बेहतर जीवन और समृद्ध समाज की नींव है। यहां भारत अपने युवाओं की प्रतिभा दुनिया को दिखा सकता है और दुनिया की श्रेष्ठ पद्धतियों से सीख भी सकता है। यही सीख नए रोज़गार, उद्यम और व्यापार के अवसर खोल सकती है।
शंघाई में आज भारत के महावाणिज्य दूत श्री प्रतीक माथुर से मुलाक़ात यादगार रही। पूर्वी चीन में भारत का प्रतिनिधित्व केवल औपचारिक कूटनीति नहीं है; व्यापार, तकनीक, संस्कृति और आपसी सहयोग के बीच भरोसे के नए रास्ते बनाना भी है। माथुर जी की समझ, ऊर्जा और भारत के प्रति प्रतिबद्धता प्रभावित करती है। विश्वास है कि उनके नेतृत्व में यह संवाद और सार्थक परिणाम देगा। उन्हें और उनकी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएँ।
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शंघाई में सजेगा हुनर का महाकुंभ, जहां दुनिया भर के युवा दिखाएंगे दम। भविष्य की स्किल, तकनीक और ट्रेनिंग पर होगा खास फोकस। ग्लोबल मंच पर भारत समाचार की मौजूदगी।
देखिए शंघाई से एडिटर इन चीफ ब्रजेश मिश्रा के साथ खास कवरेज।
#WorldSkills2026 #SkillIndia @brajeshlive @IndiaInShanghai @jayantrld @WorldSkillsInd @MSDESkillIndia @MEAIndia @EOIBeijing @PratikMathur1 @WorldSkills
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"पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा इंटरव्यू देने नहीं आए थे। फाइनल राउंड में जो 16 आवेदक थे उनमें मिश्रा तो शामिल भी नहीं थे। मेरा सलेक्शन लगभग तय था, फिर क्यों फैसला बदला मुझे नहीं पता, राम मंदिर ट्रस्ट वालों से पूछिए"
राजेश पांडे, पूर्व IPS, पॉडकास्ट में।
#Ayodhya #RamMandir #RajeshPandey @RajeshPandeyIPS
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एक खबर… और बदल गई रागिनी की राह ❤️
बलिया की दिव्यांग बेटी रागिनी के लिए स्कूल जाना हर दिन एक संघर्ष था। कोई साधन नहीं था, इसलिए वह किसी तरह घिसटते हुए स्कूल तक पहुंचती थी। कल भारत समाचार ने रागिनी की इस तकलीफ और हौसले की कहानी देश-दुनिया के सामने रखी। आज भारत समाचार सिर्फ खबर दिखाकर आगे नहीं बढ़ा। चैनल की ओर से रागिनी के लिए ट्राई-साइकिल और उपहार लेकर बलिया के हमारे संवाददाता सर्वेंद्र विक्रम सिंह जनपद के पत्रकार साथियों के साथ उसके गांव पहुंचे। रागिनी को ट्राई-साइकिल सौंपी गई, ताकि अब उसकी पढ़ाई की राह कुछ आसान हो सके। पत्रकारिता हमारे लिए सिर्फ सवाल पूछना और खबर दिखाना नहीं है। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। एक ट्राई-साइकिल शायद दुनिया न बदल पाए, लेकिन रागिनी की दुनिया जरूर बदल सकती है। भारत समाचार। खबर के साथ, समाज के साथ।
@brajeshlive
बलिया
➡️कक्षा 1 की छात्रा रागिनी ने DM से लगाई गुहार
➡️DM अंकल, मुझे साइकिल दिलवा दीजिए- छात्रा
➡️मैं रोज स्कूल पढ़ने आऊंगी- रागिनी
➡️हादसे में छात्रा का एक पैर हुआ क्षतिग्रस्त
➡️दिव्यांग होने के बावजूद पढ़ाई का जुनून
➡️एक पैर से कूद-कूदकर स्कूल जाती है रागिनी
➡️मनियर के प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में पढ़ती है
➡️रागिनी की मार्मिक अपील सोशल मीडिया पर वायरल
#Ballia #Education #UttarPradesh @dmballia @dayashankar4bjp
आज तिरंगा सिर्फ़ हवा में नहीं, हमारी धड़कनों में फहर रहा है। आज़ादी कोई तारीख़ नहीं, उन अनगिनत मांओं की चुप्पी है जिन्होंने बेटों की तस्वीरें सीने से लगाकर देश को मुस्कान दी। यह उन अधूरी चिट्ठियों की स्याही है जो जेलों, फांसीघरों और सरहदों से घर नहीं लौटीं। हम जिस सुबह को उत्सव कहते हैं, वह किसी की आख़िरी रात की कीमत पर आई है। इसलिए आज वादा कीजिए, भारत को सिर्फ़ प्यार नहीं करेंगे, उसे बेहतर भी बनाएंगे। क्योंकि शहीदों ने हमें आज़ाद देश दिया था; अब हमें उसे न्यायपूर्ण, निर्भय और सुंदर बनाना है।
काकोरी कोई ‘डकैती’ नहीं थी। वह गुलाम भारत द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य को भेजा गया साहस का तार था। 9 अगस्त 1925 को रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, चंद्रशेखर आज़ाद और उनके साथियों ने काकोरी के पास ट्रेन में जा रहे सरकारी खजाने को अपने कब्जे में लिया। उद्देश्य निजी धन नहीं, उसी अंग्रेजी सत्ता के संसाधनों को क्रांति के लिए इस्तेमाल करना था, जो भारत की संपदा पर शासन चला रही थी। काकोरी की सबसे बड़ी विरासत खजाना नहीं, खौफ का हस्तांतरण था। जिस सत्ता से भारतीय डरते थे, पहली बार वही सत्ता इन नौजवानों के दुस्साहस से डरने लगी। बिस्मिल हिंदू थे, अशफाक मुसलमान; लेकिन दोनों की आराधना एक थी; भारत माता की आज़ादी। फांसी ने उनके शरीर समाप्त किए, विचार नहीं। काकोरी ने बता दिया था, साम्राज्य कितना भी विशाल हो, जब युवाओं के भीतर स्वतंत्रता बारूद बन जाए तो उसकी एक चिंगारी इतिहास की दिशा बदल सकती है।
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जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के बाद सर्वाधिक चर्चा इस विषय पर है कि नई और मौजूदा पीढ़ी के बीच "जेनरेशनल गैप" हर प्रकार का है। वैचारिक, समाजिक, जीवन शैली, रहन सहन, शैक्षिक, सामाजिक, संवाद में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द, जिन्हें नई पीढ़ी स्लैंग कहती है। ये बात सही है कि जंतर मंतर के आंदोलन से निकली बातें देश के लिए कल्चरल शॉक थी। क्योंकि क्योंकि आक्रोश के स्तर का अंदाजा शायद किसी को नहीं था। सिवाय नई पीढ़ी के। उसको व्यक्त करने के तरीके ने देश भर में वैचारिक विमर्श शुरू कर दिया है। ये देश उपलब्धियों से भरा हुआ। ऐसा नहीं है कि सब कुछ नकारात्मक है। इस देश ने अपनी एकता और अखंडता से बहुत कुछ हासिल किया है। समुद्र के भीतर से लेकर चंद्रमा तक। लेकिन हर नई पीढ़ी अपने से पहले वाली पीढ़ी से अलग होती है। एक प्रगतिशील समाज और देश, हमेशा आगे की सोचता है। जंतर मंतर पर बच्चों के साथ जो हुआ वो गलत था और अब जब प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं कि उन्होंने माफ किया तो इस मसले को समाप्त करके देश को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए। इस देश में नौजवानों की ऊर्जा का इस्तेमाल राष्ट्र की तरक्की के लिए होना चाहिए वो भी निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ। ये देश टकराव नहीं टेक्नोलॉजी चाहता है। आपसी मतभेद को अब खत्म करने का वक़्त है। सरकार को चाहिए वो नौजवानों को गले लगाए और उनके मुद्दों को समझे साथ ही समाधान करे। नौजवानों को भी उतने सयंम और सब्र की जरूरत है। अविश्वास की ये दरार पाटी जानी चाहिए। समाज, सरकार और सियासत को सकारात्मक पहल करनी चाहिए। नई पीढ़ी को अपनाने और उन्हें समझने साथ ही संवाद की आवश्यकता पर बल दिया जाना चाहिए।
भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के उत्तर भारत क्षेत्रीय वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना मेरे लिए गौरवपूर्ण अनुभव रहा। देश के प्रतिष्ठित कंपनी सचिवों, कॉरपोरेट लीडर्स और गवर्नेंस विशेषज्ञों का यह अत्यंत विशिष्ट और एलीट मंच लखनऊ में था। बोर्डरूम की जवाबदेही, कॉरपोरेट गवर्नेंस, तकनीक, AI और पेशेवर नैतिकता पर संवाद हुआ। भाषण को मिले अपार स्नेह ने इस अवसर को अविस्मरणीय बना दिया। सम्मान, आत्मीयता और शानदार आयोजन के लिए पूरी CS कम्युनिटी का हृदय से आभार।
#ICSI #CompanySecretaries #CorporateGovernance #Leadership #ProfessionalExcellence
इंसान की जान की कोई कीमत नहीं। लोग मर रहे हैं, मरने दो। कौन जिम्मेदार ? नीचे वालों को नाप दो। जांच बिठा दो। रिपोर्ट आएगी। रात गई, बात गई। सरकार और मीडिया दोनों के पास हजार काम हैं। ये घटना भी भुला दी जाएगी। दरअसल हमने किसी के दर्द को महसूस करना ही बंद कर दिया है। किसी की पीड़ा से हम दुखी नहीं होते। करुणा का भाव नहीं रहा। तकलीफ में बस वो हैं जिनका बेटा भाई बहन इस कांड में घुट घुटकर मरे। तो क्या कुछ बदलेगा ? नहीं। बस कुछ करवाई, SIT की जांच, निचले स्तर के कर्मियों का निलंबन। अरेस्टिंग। लेकिन ऐसी घटनाएं आगे न हो इस पर कोई सबक लिया ? नहीं। तो तैयार रहिए दूसरी वारदातों को कवर करने के लिए और सरकार अपने काम में लग जाएगी। ये न तब बदला था, न अब बदला है, और न आगे। मातम मनाइए उनके लिए जिनके घर के चिराग़ बुझ गए। हम आप ये तो कर ही सकते हैं।
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तमिलनाडु के राज्यपाल वही कर रहे हैं जिसके लिए राजभवन कुख्यात रहे हैं।
तमिल समाज ने विजय को चुना। विधायकों ने भी विजय को अपना नेता चुना। 108 जीत कर आए। बहुमत से 10 कम। कांग्रेस के 5 बाकी अन्य दलों के विधायक हैं जो लोकतांत्रिक सरकार के पक्ष में है। कोई और दल सरकार बनाने के लिए सामने भी नहीं आया। उसके बाद भी विजय को सरकार बनाने से रोकने की राज्यपाल की कोशिश तमिल भावनाओं को आहत करती है। तमिलियन अपनी सरकार चाहते हैं। जिसे सिद्ध करने का इन्हें पूरा अधिकार है। लेकिन लुका छिपी का ये खेल राजभवन की गरिमा के विपरीत है। जनादेश में तमिलियन ने परिवर्तन तय किया है। तो राजभवन को किस बात पर आपत्ति है। राजभवन के अभी के आचरण से हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा मिल रहा है। रिसॉर्ट पॉलिटिक्स से लेकर विधायक के लापता होने के मामले आ रहे हैं। ये संगठित अराजकता को बढ़ावा देना है। अब भी वक्त है राज्यपाल को चाहिए कि विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करे और वो सदन में तत्काल अपना बहुमत साबित करे। तमिलियन समाज की। भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
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नेपाल ने नयापन अपनाया। बालेंद्र शाह को प्रधानमंत्री चुना। देश की कमान सौंपी। वो 35 बरस के हैं। शाह का सफर उपलब्धियों से भरा है। वो बदलाव का प्रतीक हैं। नई पीढ़ी, Gen Z के प्रतिनिधि हैं। शाह नए नेपाल को नेतृत्व देते है। हम ये कामना और उम्मीद करते हैं कि नेपाल उनके नेतृत्व में शांति, स्थिरता, विकास और भारत के साथ अटूट संबंधों को नई ऊंचाई तक ले जाएंगे। एक कलाकार का काठमांडू के मेयर से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर प्रेरणादायक है। #BalendraShah #NepalPM #RSP
ईरान वॉर की सबसे सही। सबसे सटीक। सबसे वेरीफाइड न्यूज़ चाहिए ? तो Brevity उसका सटीक जवाब है। भारत का पहला AI Powered Hyper Local GenZ News app जो हिंदी, इंग्लिश, तमिल और तेलुगू में उपलब्ध।
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भारत के उत्तर पूर्व क्षेत्र के लोग हमसे आपसे ज्यादा भारतीय हैं। उनको चाइनीज कहना देश का अपमान है। उन्हें मसाज वाली कहना भारत की सभी महिलाओं का तिरस्कार है। उन्हें चिंकी पिंकी बोलना नीच कृत्य है। उनके प्रति दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार करने वाले सही मायनों में देश के दुश्मन हैं जो इस देश की एकता, संस्कृति, अखंडता और भाईचारे के विरोधी हैं। भारत का प्रत्येक सच्चा नागरिक, विपरीत हालत में रहने वाले और भारत के प्रति संपूर्ण समर्पण का भाव रखने वाले समस्त उत्तर पूर्व के अपने नागरिकों के प्रति सच्ची निष्ठा और आभार प्रकट करता है। #WeLoveNorthEast
“hum massage wale nahi hain” - northeast discrimination ka sach.
racial stereotypes, racism in india aur identity crisis par khulkar baat. kya yeh isolated incident hai ya systemic bias?
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रोहित जी, मीडिया में इस नए प्रयोग और अभिनव पहल की बधाई। आपकी कठोर मेहनत। प्रयोग करने की क्षमता, असाधारण है। Zingabad।
ढेर सारी ताज़ा मुस्कुराहटें, aesthetics, vibes, colors, love, freshness. थोड़ी anxiety, थोड़े थोड़े goof-ups, bloopers, existential crisis, burnouts. और उस पर dreams और hope जैसी कुछ ज़िंदा feelings की garnishing -That’s 'Zingabad' on your table! क्योंकि at the end of the day, मेरे लिए views से ज़्यादा वजूद मायने रखता है. Virality से पहले Vitality आती है.
खैर! बाकी बातें तो होती रहेंगी, फिलहाल डिश की खुशबू लो, स्वाद 14 से आना शुरू होगा.
अब तुम्हारे हवाले ज़िंगाबाद साथियों...
Davos 2026 का मूल मंत्र था।
संवाद + तकनीक + स्थिरता + साझेदारी = भविष्य का विकास।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस के अनुभवों को आज उत्तर प्रदेश की इंडस्ट्री, कॉर्पोरेट्स और मीडिया क्षेत्र के साथियों के साथ साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन को इस अभिनव पहल के लिए शुक्रिया। उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी जी और सिद्धार्थ कलहंस जी का विशेष धन्यवाद उत्तर प्रदेश केंद्रित इस सार्थक चर्चा को आयोजित करने के लिए। उद्यान मंत्री दिनेश सिंह जी और IACC के यूपी चैप्टर के प्रमुख मुकेश सिंह जी का विशेष आभार। #WEF26
































