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रौद्र नामक इस विक्रम संवत् 2083 का राजा गुरु और मंत्री मंगल है. वर्षलग्न के अनुसार जन जीवन में वैचारिक संकीर्णता और आक्रोश बढ़ेगा. आर्थिक मामलों में चुनौतियां रहेंगी. शासन सत्ता के कुछ निर्णय बड़े मुद्दे बनेंगे. इस वर्ष किसी नए मजबूत और कठोर नेतृत्व के उभरने की प्रवल संभावना है.
राम रामेति रमेति, रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने।।
-- आप सब को विजयदशमी की शुभकामनाएं!
विजयदशमी (दशहरा) पर्व पर इन तीनों के दर्शन को शुभ माना जाता है. (भले आभासी ही सही)
जय श्री राम! जय श्री राम! जय श्री राम!
विजयदशमी अबूझ मुहूर्त होता है.
अबूझ मुहूर्त जिसे स्वयंसिद्ध मुहूर्त भी कहा जाता है एक ऐसा विशेष और पावन समय होता है, जिसमें किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य को शुरू करने के लिए पंचांग देखकर अलग से समय निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती है.
19 से 29 अक्टूबर
नीचावस्था में सूर्य की वक्री अस्त शुक्र से निकटतम युति होगी, इस पर नीचावस्था के मंगल की पूर्ण दृष्टि रहेगी. बृहस्पति मुहाने पर है.
नवाचार की बजाय जो है उसे कंसोलिडेट करने पर फोकस कीजिए. कोई पुराना रिश्ता फिर से सक्रिय हो सकता है. अभिमान और पूर्वाग्रह अवॉइड करें.
ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में इस समय शरद ऋतु में नवरात्र की पूजा नहीं की जाती थी, क्योंकि ये माता के शयन का समय माना जाता था. ब्रह्मा जी के कहने पर भगवान राम ने रावण वध के लिए शरद ऋतु में आदिशक्ति दुर्गा की पूजा की थी. तब से शरद ऋतु में नवरात्र पूजा का प्रचलन है. इसके समापन पर राम की रावण पर विजय का पर्व विजयदशमी मनाया जाता है.
पंद्रहवीं सदी में बंगाल में सुप्रसिद्ध भक्त कवि कृत्तिबास ओझा नें 'श्री राम पांचाली' का सृजन किया था. इसे 'कृतिबासी रामायण' भी कहते हैं. उन्होंने वर्णन किया कि श्री राम ने रावण को पराजित करने के लिए शक्ति की उपासना की थी.
महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध लंबी कविता 'राम की शक्ति पूजा' में अत्यंत मार्मिक वर्णन है. श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने हेतु शक्ति पूजा सन्धि काल में ही की थी और मां का आशीर्वाद प्राप्त किया था. सन्धि काल में ही माता चामुण्डा ने चण्ड और मुण्ड असुरों का वध किया था.
आज अष्टमी तिथि की समाप्ति और नवमी तिथि के आरंभ होने पर सन्धि पूजा मुहूर्त सुबह 10:28 बजे से 11:16 बजे तक है.
नवरात्र के दिनों में "नारी शक्ति वंदन" की त्रासद खबर! यह नेहा सिंह की नहीं हर स्त्री की गरिमा का मुद्दा है. 24 घण्टे हो गए परंतु महिला आयोग, कोर्ट या सूचना मंत्रालय आदि किसी ने संज्ञान क्यों नहीं लिया? दुख है, रोष है और चिंता का विषय है.
In solidarity with you @nehafolksinger
✊
Replying to @ABPNews
@ABPNews ने फ़र्ज़ी ख़बर चलाकर मुझे प्रॉस्टिट्यूsट कहा, और अब मुझसे मेरा रेट पूछा जा रहा है. क्या एबीपी न्यूज़ का माफ़ीनामा लोगों के दिमाग़ में मेरे ख़िलाफ़ बैठ चुकी अफ़वाहों को ख़त्म कर देगा? क्या माफ़ीनामा लिखने से अपराध ख़त्म हो जाता है? एबीपी न्यूज़ की खबर में मेरा नाम गलती से नहीं आया था. पूरी की पूरी खबर ही मुझे डिफ़ेम करने के लिए गढ़ी गई थी. ये सुपारी जर्नलिज़्म है जिसका उद्देश्य ही व्यक्ति का का मान-मर्दन करना और आईटी सेल को सपोर्टिंग कंटेंट-स्क्रीनशॉट देना होता है. इनकी फ़र्ज़ी ख़बर के स्क्रीनशॉट हमेशा ऑनलाइन मौजूद रहेंगे और इन्हें हमेशा मेरे ख़िलाफ़ यूज़ किया जाएगा. क्या मेरे इस नुक़सान की भरपाई इनके माफ़ीनामे से हो जाएगी? मुझे माफ़ी नहीं न्याय चाहिए.
@NCWIndia
*सूर्यास्त हो चुका है. अब कल संधि पूजा की तैयारी*
शक्ति की करो मौलिक कल्पना...
रवि हुआ अस्त;
रह गया राम-रावण का अपराजेय समर आज का,
इस निर्णायक समय में राम की शक्ति पूजा
नवरात्र में सन्धि पूजा काल
और ये क्या! एक सौ आठवां कमल पुष्प नहीं,
राम हो गए व्यथित
क्या पूजा पूर्ण नही हो पाएगी?
राम के मन के अंतर्द्वंद, संघर्ष, संशय
अंततः शक्ति चाहिए
शक्ति के बिना तो शिव भी शव के समान हैं
अभीष्ट है शक्ति...
चाहिए कि, की जाए शक्ति की मौलिक कल्पना
चाहे अवतारी राम हों या जन आम
अथवा मिथक का सम-सामयिक प्रत्यक्ष,
सर्वहारा कुकुरमुत्ता
सक्षम हो कर वो भी कह सके
अबे, सुन बे गुलाब,
भूल मत जो पाई खुशबू, रंगोआब
खून चूसा खाद का तूने अशिष्ट
डाल पर इतरा रहा कैपिटलिस्ट
-- अहंकार, असत्य और तामसी शक्तिओं के वर्चस्व को चुनौती देने हेतु आप सक्षम बने, विवेकशील बनें.
स्वयं देवी कहें 'होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन!'
(महाप्राण निराला को स्मरण करते हुए, क्षमा पूर्वक)
शंकराचार्य रचित सौंदर्य लहरी का पहला श्लोक है:
शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं।
न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि॥
अर्थ: परमशिव केवल तब ही ब्रह्मांड की सृष्टि या कोई क्रिया करने में समर्थ होते हैं, जब वे शक्ति (माँ) से युक्त होते हैं. यदि वे शक्ति से रहित हों, तो वे एक स्पंदन भी नहीं कर सकते.
काशी में आदि शंकराचार्य और भगवती आद्याशक्ति के बीच का एक प्रसंग अद्वैत दर्शन और शक्ति-तत्व के मिलन की अलौकिक कथा है.
एक बार शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ काशी पहुँचे. वहाँ वे अद्वैत सिद्धांत का प्रचार कर रहे थे. एक दिन उन्हें भीषण ज्वर हुआ था. निरंतर कठिन साधना के कारण उनका शरीर इतना दुर्बल हो गया था कि वे गंगा तट की सीढ़ियों पर बैठ गए और उनसे एक कदम भी चला नहीं जा रहा था. उनके शिष्य उस समय जल और औषधि लेने गए हुए थे. तभी वहाँ से एक वृद्ध महिला गुजरी. उनके हाथ में जल का पात्र था. शंकराचार्य ने अत्यंत क्षीण स्वर में उनसे कहा, "हे माते! क्या आप मुझे थोड़ा जल दे सकती हैं? मुझसे उठकर जल के पास जाने की सामर्थ्य नहीं है."
वृद्ध महिला रुक गईं और मुस्कुराते हुए बोलीं, "हे संन्यासी! तुम तो स्वयं महान ज्ञानी हो. यदि तुम्हें जल चाहिए, तो स्वयं उठकर ले लो."
शंकराचार्य ने कातर भाव से कहा, "माता, आप देख रही हैं कि मुझमें उठने की 'शक्ति' नहीं है. बिना शक्ति के मैं हिल भी नहीं सकता."
वृद्ध स्त्री ने कहा, "हे ज्ञानी संन्यासी! जरा विचार करो. तुम कहते हो कि ब्रह्म ही सब कुछ है और माया या शक्ति कुछ नहीं. तो फिर आज तुम बिना 'शक्ति' के एक अंगुली भी क्यों नहीं हिला पा रहे हो? यदि ब्रह्म ही सर्वस्व है, तो बिना शक्ति के तुम्हारा ज्ञान और शरीर निष्प्राण क्यों पड़ा है?"
स्त्री के ये शब्द साधारण बोली नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय सत्य की गूंज थी. शंकराचार्य की आँखें खुल गईं. वे समझ गए कि यह कोई साधारण स्त्री नहीं हैं. उसी क्षण वह वृद्धा अपने वास्तविक अलौकिक रूप में प्रकट हुईं. उनके एक हाथ में खप्पर, दूसरे में वरमुद्रा और चेहरे पर असीम करुणा थी. वे साक्षात महाकाली थीं.
माँ काली ने शंकराचार्य को ज्ञान दिया:
शिव और शक्ति एक ही हैं. जिस प्रकार अग्नि से उसकी उष्णता को अलग नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार निर्गुण ब्रह्म (शिव) से उसकी अभिव्यक्ति यानी क्रियात्मक ऊर्जा (शक्ति) को अलग नहीं किया जा सकता.
चेतना जब तक शांत है, वह शिव है. जब वह चेतना गतिमान होती है और संसार की रचना, पालन व संहार करती है, तो वही 'शक्ति' कहलाती है. बिना शक्ति के शिव भी 'शव' (निश्चेष्ट) के समान हैं.
माँ काली के इस साक्षात्कार ने शंकराचार्य का यह भ्रम समाप्त कर दिया कि शक्ति केवल एक मिथ्या माया है. उन्होंने माँ काली के चरणों में शीश नवाया और उनसे क्षमा मांगी. माँ के स्पर्श मात्र से उनका शरीर पुनः ऊर्जावान हो गया.
इस दिव्य घटना के बाद ही आदि शंकराचार्य ने केवल ज्ञानमार्ग ही नहीं, बल्कि भक्ति और शक्ति-साधना को भी अद्वैत का ही अंग माना. उन्होंने प्रसिद्ध 'सौंदर्य लहरी' और 'कनकधारा स्तोत्र' जैसे महान शक्ति-ग्रंथों की रचना की.
Rajesh Shukla/ राजेश शुक्ला retweeted
Replying to @ashutoshjourno
हर सिटिजन जर्नलिस्ट बन जाएगा तो प्रॉब्लम होगी ! बिल्कुल होगी। जब हर हाथ में स्मार्टफोन, हर जेब में कैमरा और हर अन्याय का लाइव ब्रॉडकास्ट होगा, तो पावरफुल लोगों का नैरेटिव कौन कंट्रोल करेगा? न्यूज़रूम का मोनोपॉली बिजनेस कैसे चलेगा? सत्ता के पीआर और कॉरपोरेट मीडिया का इकोसिस्टम कैसे बचेगा?
फेक न्यूज़ की समस्या वास्तविक है, लेकिन उसका सॉल्यूशन सिटिजन जर्नलिज़्म को शक की नजर से देखना नहीं है। बड़े मीडिया हाउस पिछले 15 साल से प्रोपेगैंडा ही तो चलाते हैं !
सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट को जनता के पत्रकार बनने से होने वाली प्रॉब्लम की चिंता है या उस प्रॉब्लम की, जो जनता के सवाल पूछने से सत्ता को होती है ?
डेमोक्रेसी में जनता सिर्फ वोटर नहीं, सत्ता की वॉचडॉग भी है। उसे हर पाँच साल में वोट डालने वाला सिटिजन और बाकी समय चुप रहने वाला ऑडियंस मत समझिए !
कैमरा जनता के हाथ में आया है, तो सत्ता की स्क्रिप्ट बिगड़ेगी ही। यही डेमोक्रेसी का असली टेस्ट है !
#सुप्रीम_कोर्ट
बिना किसी ठोस सबूत के इतनी बड़ी खबर चला दी, फिर बाद मे खेद व्यक्त कर दिया... बस.
एक महिला की गरिमा के साथ खिलवाड़!
और बात कर रहे हैं लोग कि यूट्यूबर और फ्रीलांसर गैर जिम्मेदार होते हैं. बड़े अखबारों/ चैनलों में काम करने वालों की क्रेडिबिलिटी होती है.
शर्मनाक! शर्मनाक! शर्मनाक!
आजकल चर्चा है कि पत्रकार वही है जिसके पास PIB कार्ड हो और किसी संस्थान में नौकरी करता हो. पुराने जमाने के बहुत से नामचीन पत्रकारों को आज की पत्रकारिता में स्थान ही नहीं मिलता! हालांकि इन दिनों सोशल मीडिया पर स्वतंत्र रूप से बहुत से ऐसे लोग भी सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं जिन्हें अपने काम और तकनीकी कौशल का तजुर्बा है. उनके पास PIB एक्रिडिटेशन कार्ड नहीं है और न वे किसी मीडिया हाउस के मुलाजिम हैं.
किशोर कुमार ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा नहीं ली थी. वह स्वरों का व्याकरण या नोट्स की बारीकियां भी नहीं जानते थे. लेकिन राग खमाज में "कुछ तो लोग कहेंगे", राग शिवरंजनी में "मेरे नैना सावन भादौं" आदि बहुत सारे अनूठे गाने गाए हैं. कहते हैं कि भीमसेन जोशी ने किशोर दा से कहा था, अच्छा हुआ तुमने शास्त्रीय संगीत नहीं सीखा अन्यथा मेरे लिए कठिन प्रतिस्पर्धा हो जाती.
कला कोई भी हो नैसर्गिक प्रतिभा, जुनून,संवेदना और सम्प्रेषण मायने रखता है.
कबीर ने "मसि कागद छुओ नहीं, कलम गहो नहिं हाथ" जबकि तमाम लोगों ने उनके सृजन पर पीएचडी की है, उनके बारे में ग्रन्थ लिखे हैं.
Rajesh Shukla/ राजेश शुक्ला retweeted
सत्ता बदलती रही, पर शब्दावली और तेज़ बदलती गई। जब विरोध सत्ता के पास नहीं था, तो वह “जन-चेतना” था। अब वही “देशद्रोह” बन गया है। जनता सरकार नहीं है, इसलिए उसका असहमत होना अपराध नहीं,बलोकतंत्र की साँस है।
नेता आते-जाते रहते हैं, झंडे बदलते रहते हैं, पर नागरिक का सवाल पूछने का अधिकार स्थायी होना चाहिए। “रिजीम चेंज” का शोर फालतू है। असल मुद्दा “मन की बदलाव” है। जहाँ विरोध राष्ट्रभक्ति नहीं, राजभक्ति की परीक्षा बन गया है।
जो सरकार आलोचना को देशद्रोह समझे, वह लोकतंत्र को नहीं, अपनी असुरक्षा समझती है। देश उनका नहीं है जो तालियाँ बजवाते हैं। देश उनका है जो सवाल पूछने से नहीं डरते।
पहले से ही भसड़ फैली है और अब ग्रह गोचर भी प्रतिकूल है. आज से सूर्य नीच राशि तुला में, वक्री और अस्त होते शुक्र के साथ. इनपर नीच मंगल की पूर्णदृष्टि रहेगी. -फिलहाल बंदरहाव जारी रहेगा. अटकलों में ही खबरें हैं. हर पक्ष को वार्ता के विकल्प के तहत स्ट्रेटेजिक समझौते करने ही पड़ेंगे.
Earthly wisdom: time turns the tables.
Rajesh Shukla/ राजेश शुक्ला retweeted
After nearly eight decades, the Indian National Flag has deepened its meaning, heightened its resonance and enriched its symbolism. Thanks are due to those in power for providing the context for citizens young and old to experience directly what the fight for freedom and civil rights means.
Rajesh Shukla/ राजेश शुक्ला retweeted
अब सनातन भी अपग्रेड हो गया है. सूर्पणखा इन गानों पर नांच रही हैं.
मंदीप पूनिया की इस बात से ऐसा प्रतीत होता है कि यह संयोग नहीं, प्रयोग है. क्रोनोलॉजी काबिलेगौर है.
2 अक्टूबर के आसपास कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि फोन और माइक लेकर घूमने वाला कोई भी व्यक्ति पत्रकार कैसे हो सकता है।
कुछ ही दिनों बाद दिल्ली पुलिस ने भी यही बात कही।
उसके बाद कुछ एंकर्स ने टीवी पर इसे बार-बार दोहराया।
और अब यही बात मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी कही है।
ये सब एक लाइन कैसे बोल रहे!
जब एक लाइन इतनी जल्दी इतने लोगों के मुँह से निकलने लगे, तो समझ लीजिए कि इसके पीछे कोई न कोई क्रोनोलॉजी समझाने वाला आदमी होगा.
हमनें सत्य और अहिंसा के गांधीवादी ढंग से विदेशी अंग्रेजों तक की सत्ता जड़ से उखाड़ी थी. अन्य देशों जैसे रिजीम चेंज के मंसूबे वालों के लिए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के शब्द, "वे इतिहास से अनजान हैं, वर्तमान की समझ नहीं है उन्हें, भविष्य के प्रति वे आंखें बंद किये हुए हैं."
शारदीय नवरात्र: 19 अक्टूबर, अष्टमी-नवमी के संयोजन में सुबह संधि पूजा. इस साल तिथियों में समय की स्थिति के कारण कुछ मतभेद हैं. 19 अक्टूबर को दिन में नवमी तिथि है, परंतु जो लोग पूरे नवरात्र करते हैं, उदयातिथि के अनुसार 20 अक्टूबर को प्रातः नवमी का हवनादि करें, पारण दोपहर में होगा.
Rajesh Shukla/ राजेश शुक्ला retweeted
Reporters from TV stations have right to ask questions not disrupt the occasion. We are the messenger not hecklers or agenda setters. This was not journalism at Press Club.













