لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِيَ دِينِ RT= Not endorsement

New Delhi, Delhi
Joined July 2014
The #USA lied about Iraq The #USA lied about Syria The #USA lied about Libya The #USA lied about Kuwait The #USA lied about Ukraine The #USA lied about Afghanistan But you think they’re telling you the truth about who bombed a hospital in Gaza? Wake up. #FreePalestine
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Ashique iqbal retweeted
📢Trend Alert📢Tomorrow🤝 20 Oct. Tuesday 4PM #SaveRaceCourseMasjid अस्सलामु अलैकुम नाजरीन आप सभी से गुज़ारिश है कि प्रशासन दिल्ली PM हाउस के पास रेस कोर्स मस्जिद को तोड़ने के मंसूबे बना रहा है। मस्जिद 150 साल पुरानी बताई जा रही है, मस्जिद कमेटी के पास 1933 के सरकार कागज़ात है, 1977 के दिल्ली गैजेट नोटिफिकेशन में भी दर्ज है। कल शाम 4 बजे हम सब मिलकर #SaveRaceCourseMasjid के साथ मस्जिद के हक मे ट्रेंड ट्वीट करेंगे। उम्मीद है आप सभी साथ देंगे और इस मुहिम को कामयाब बनाएंगे। Hashtage:- #SaveRaceCourseMasjid Join this campaign🤝 Join All Muslim 💯 Keep Tweeting ✍️
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बिल्कुल सही कह रहे हैं ओवैसी साहब मैं सहमत हूं। अब हिस्सेदारी और बराबरी तभी मिलेगी जब तक हम लोग नेता नहीं बनेंगे।
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This video genuinely overwhelmed me. It reminds us of the immense sacrifices Muslims of UP made to build and strengthen the leadership of Dalits and Backward Classes. For many, that contribution came at a devastating personal cost. Muslims helped build this leadership, only to be discarded once their purpose was served. This man’s story is heartbreaking. He put aside the pain of watching his own child die and even missed the child’s janazah because he did not want his leader to lose an election. Think about that for a moment. No political cause can erase the weight of such a sacrifice. It is a level of personal loss that words can barely capture.
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Meri aulad secularism naam qurban? Avg congressi/SP/BSP gulam aur inke zehniyat rakhne wale lifafon aur chande pe jeene wale log
This video genuinely overwhelmed me. It reminds us of the immense sacrifices Muslims of UP made to build and strengthen the leadership of Dalits and Backward Classes. For many, that contribution came at a devastating personal cost. Muslims helped build this leadership, only to be discarded once their purpose was served. This man’s story is heartbreaking. He put aside the pain of watching his own child die and even missed the child’s janazah because he did not want his leader to lose an election. Think about that for a moment. No political cause can erase the weight of such a sacrifice. It is a level of personal loss that words can barely capture.
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आप लोगो ये लोग क्यों बीजेपी की बी टीम नहीं लगती??? क्यूँकि आप बी नहीं चाहते मुस्लिम आगे बड़े उनकी हिस्सेदारी बड़े, मुस्लिम हमेशा ये नक़ली सेक्युलर के सामने झुका हुवा रहे। हिम्मत करके इनपे बी बोलके दिखाए
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मुसलमान से इतनी नफ़रत है टोटी और CongRSS में कि उर्दू नाम वालों का इस्तेमाल कर कैसे हरा दिए बलरामपुर भी तुम्हारी अम्मा इकरा हसन, बाप अफ़ज़ाल अंसारी और भड़वा टुट्टा शायर हरवा दिया मुसलमान आदिल हसन को 300 votes से उसमे भी टोटी का मुसलमान से नफ़रत वाला एजेंडा चला
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ठाकुरगंज में सऊद असरार की सीट भाजपा गठबंधन को दी बलरामपुर में महबूब आलम की सीट भाजपा गठबंधन को दी कस्बा में आफाक आलम की सीट भाजपा गठबंधन को दी प्राणपुर में इशरत परवीन की सीट भाजपा को दी केवटी में फराज फातमी की सीट भाजपा गठबंधन को दी
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“गान में गू नहीं हगने चले हो bhnchd के छोड़े”
कोई दिक्कत नहीं अगर ओवैसी की मदद से भी भाजपा की सरकार बनती है तो भी इत्तेहाद उल मुस्लिमीन 00 ही पाएगी
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झूठ फैला रहे हो चादरमोड सीमांचल पर मत भिड़ना भोस D K, टोटी ने ही मुसलमानों को हरवाया है वहाँ पूछ तेरे नाजायज़ बाप इमरान शायर से कि अफ़ाक आलम 5 बार का जीता हुआ MLA का टिकट इरफ़ान कितने बेचा पप्पू यादव के साथ ?? और 5 बार का जीता हुआ MLA का टिकट किस आधार पर काटा ??
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ठाकुरगंज में सऊद असरार की सीट भाजपा गठबंधन को दी बलरामपुर में महबूब आलम की सीट भाजपा गठबंधन को दी कस्बा में आफाक आलम की सीट भाजपा गठबंधन को दी प्राणपुर में इशरत परवीन की सीट भाजपा को दी केवटी में फराज फातमी की सीट भाजपा गठबंधन को दी
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सियासत अगर तेरे समझ कि चीज़ होती तो हुतुये ये बात तू सबसे पहले अपने नाजायज़ बाप राहुल गांधी से पूछता कि तेलंगाना में अलायन्स कियूँ किया हुआ है AIMIM से ? और ज़रूरत कियूँ पड़ी? और केरल में मुसलमानों कि पार्टी IUML से गठबंधन कियूँ किया हुआ है अकेले कियूँ नहीं लड़ता इलेक्शन वहाँ ?
pehli or akhri baat telangana jiski sarkar wo owaisi ka baap po ehle brs baap tha owaisi ka ab revanth reddy baap he kal or koi sarkar bana le wo baap vanjayega pehle telangana ka tu jaat waha 7 seat ladta he bsdk ka
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पहले ये सेक्युलर थे फिर संघी हो गए, और लगता है बहुत जल्द फिर से सेक्युलर हो जाएंगे। सेक्युलर पार्टियों के लिए सेक्युलर शब्द कपड़ों की तरह हो गया है जब चाहे पहन लो और जब चाहे उतार दो..!!
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IRCTC वाला किया घोटाला था दोस्त?? जिसका summon RJD एंड कांग्रेस के अलायन्स वाले दिन आया था किया हुआ था उस दिन यादव जी ?? बारह कैंडिडेट अलायंस के बाद भी एक दूसरे के आमने सामने मैदान काहे था रजाऊ ?? दुइ कंटाप में ज़मीन नचा दिया जाएगा सर
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Are daribaaz is se pahle bihar me 24 muslim mla the murkh
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Ashique iqbal retweeted
मुलायम सिंह को श्रद्धांजलि देने पहुंचे जुम्मन मियां????
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The Captive Mind और भारत की मुस्लिम राजनीति का इलीट वर्ग Czesław Miłosz की किताब The Captive Mind हमें बताती है कि किस तरह बुद्धिजीवी और राजनीतिक इलीट अपनी स्वतंत्र सोच से समझौता करके किसी व्यवस्था के अनुकूल हो जाते हैं। वे धीरे धीरे व्यवस्था की सीमाओं को ही वास्तविकता मानने लगते हैं और फिर उसी व्यवस्था को सही साबित करने में अपनी बौद्धिक ऊर्जा खर्च करने लगते हैं। भारत में मुस्लिम राजनीति के इलीट वर्ग को भी इसी नजरिए से देखने की जरूरत है। एक तरफ आम मुस्लिम अवाम है जो अपनी सुरक्षा सम्मान शिक्षा रोजगार और राजनीतिक हिस्सेदारी के सवालों से जूझ रही है। दूसरी तरफ मुस्लिम राजनीति का एक ऐसा इलीट वर्ग है जिसकी राजनीतिक स्वीकार्यता अक्सर स्थापित सत्ता संरचनाओं के साथ उसके संबंधों पर निर्भर दिखाई देती है। आम मुसलमान अपने नेतृत्व से पूछता है कि उसकी राजनीतिक ताकत का वास्तविक परिणाम क्या निकला। उसके प्रतिनिधित्व का विस्तार क्यों नहीं हुआ। उसकी समस्याएं चुनावी भाषणों से आगे नीतिगत फैसलों तक क्यों नहीं पहुंचीं। और मुस्लिम नेतृत्व को अपने स्वतंत्र राजनीतिक विकल्पों के लिए बार बार सफाई क्यों देनी पड़ती है। लेकिन इलीट राजनीति का एक हिस्सा इन सवालों का जवाब देने के बजाय स्थापित राजनीतिक व्यवस्था की सीमाओं को ही अंतिम सत्य मान लेता है। वह अवाम को समझाता है कि राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग करना अव्यावहारिक है। स्वतंत्र नेतृत्व की कोशिश करना जोखिम भरा है। और मौजूदा व्यवस्था के भीतर जो जगह मिल रही है उसी को उपलब्धि समझ लेना चाहिए। यहीं The Captive Mind का विचार प्रासंगिक हो जाता है। जब कोई राजनीतिक इलीट व्यवस्था को बदलने के बजाय अवाम को उसी व्यवस्था के अनुकूल ढलने की शिक्षा देने लगे तो सवाल उठना चाहिए कि वह अवाम का प्रतिनिधित्व कर रहा है या व्यवस्था की स्वीकार्य सीमाओं का। यह जरूरी नहीं कि हर समझौता अवसरवाद हो। गठबंधन और चुनावी रणनीति राजनीति का हिस्सा हैं। लेकिन रणनीतिक समझौते और स्थायी राजनीतिक आत्मसमर्पण के बीच फर्क होना चाहिए। मुद्दा किसी एक दल या नेता का नहीं है। सवाल उस पूरी राजनीतिक मानसिकता का है जिसमें मुस्लिम अवाम से हर बार समझौता करने की उम्मीद की जाती है लेकिन मुस्लिम राजनीतिक इलीट से अपनी स्वतंत्रता और जवाबदेही साबित करने की मांग नहीं की जाती। लोकतंत्र में किसी समुदाय की भूमिका केवल वोट देने और चुनावी चंदा जुटाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उसे निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी वास्तविक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। आम मुसलमान को केवल राजनीतिक समर्थन देने वाला वर्ग नहीं बल्कि अपने राजनीतिक भविष्य का निर्णय लेने वाला वर्ग बनना होगा। क्योंकि किसी समुदाय की राजनीतिक परिपक्वता इस बात से तय नहीं होती कि उसका इलीट सत्ता के कितने करीब है। असली कसौटी यह है कि वह इलीट अवाम को कितना जवाबदेह है और उसकी राजनीतिक ताकत को कितने वास्तविक अधिकारों में बदल पाता है। The Captive Mind हमें दूसरों की मानसिक गुलामी पहचानने से पहले एक जरूरी सवाल पूछने के लिए प्रेरित करती है। कहीं हमारी राजनीतिक समझ भी उन्हीं सीमाओं की कैदी तो नहीं बन गई है जिन्हें हमने कभी चुनौती देने का सपना देखा था? ✍️ aw azmi #TCT ☕️
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How to Destroy Your Own civilization 👇
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टोटी जहाँ जहाँ जाएगा, वहाँ कि सरकार ऐसे ही बनवाएगा 😂 दिल्ली, बिहार, बंगाल और अब UP टोटी ही पनौती है 😂😂
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बकलोल, बंगाल में भी उछल रहे थे,, वहां बना लिए सरकार
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93% मुसलमानों ने टोटी को वोट दिया है, बेवफ़ा तो साले तुमलोग हो, थे, और रहोगे मुल्ले टाइट करने गए थे ना ?
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Tum log apni vote gad me ghusod lo tum logo ke chakkar me spa aj stta me nhi hai
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गांव का गुद्दा लाल हो जाएगा बेटा, तुम्ही लोग टोटी के साथ बेवफ़ाई किए हो भोस D K और टोटी का मुस्लिम विरोधी एजेंडा, उसके बाद भी मियाँ भाई साथ में ही था अब नहीं रहेगा मुल्ले टाइट करने चले थे ना भाजपा के साथ, तुमलोग तो वो हो के जिसने तुमलोगों आरक्षण दिया तुम उसके सगे नहीं हूए
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Tum log apni vote gad me ghusod lo tum logo ke chakkar me spa aj stta me nhi hai
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अखिलेश बहुत बड़ा फ्रॉडी गिरगिट है जो चुनाव देखते ही तरह तरह के रंग बदलता रहता है पहले सगा बनाता है फिर ऐसा कोई सगा नहीं जिसको इसने कभी ना कभी ठगा ना हो। P= परिवार D=धन्नासेठ A= अपराध
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correction, AIMIM 5 विधाएक जीती और वहाँ भी टोटी ने मुसलमान विधायक हरवा के BJP और JDU को जीतवाया, बाजी इक़रा हसन, और अफ़ज़ाल अंसारी का इस्तेमाल कर के वो भी बिन बुलाए बारात कि तरह वरना टोटल 10 MLA मुसलमान सिक्योर था बिहार का नाम ना लेना सपाई कर्मियों बहुत लप्पड़ पड़ेगा
ओवैसी: अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा हक़ीकत: 2015 में बिहार में 24 मुस्लिम विधायक थे ओवैसी के बिहार जाने के बाद अब केवल 11 मुस्लिम विधायक बचे है ओवैसी हमेशा जीते हुए मुस्लिम विधायक के सामने अपने उम्मीदवार उतारते हैं ताकि वह हार जाए इन्हें केवल चुनाव में अब्दुल की याद आती है उसके बाद यह मस्त हैदराबाद के महल में बैठकर बिरयानी खाते हैं और भूल जाते हैं कि बिहार और यूपी के मुसलमान को क्या दिक्कत हो रही है।
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