Replying to @CP_Jodhpur
@CP_Jodhpur kindly register a FIR against the person for abusing one of the lady, as she ordered & 2300/-paid for Rajasthani poshak. Now he started threatening &, abusing her.
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सुना है राममंदिर के विरोध में खड़े 30वकीलों में से 20वकीलों की बहुत ही दर्दनाक मौत हुई है ।
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कॉकरोचों को हुड़दंग मचाने की जगह सरकार के सामने लोकतांत्रिक तरीक़े से लड़ना चाहिए
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Replying to @nehafolksinger @gupta_rekha
कॉलगर्ल और तुममें कोई ज्यादा फर्क तो नहीं है बस इतना सा फर्क है कि वे एक निश्चित इलाके "रेडलाइट"एरिया में रह कर धंधा करतीं हैं और तुम सफेदपोश देश विरोधी तत्वों के घरों पर जाकर करती हो..!
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वामपंथी लोग सबसे कुंठित और और सबसे कुपोषित होते हैं।
जो दूसरे के जीवन को खराब करने के लिए लगे रहते हैं।
JNU के अंदर एक्टिविज्म केवल कुपोषित लोग ही करते हैं।
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तुम जाति पाती में तोड़ोगे हम राम राम से जोड़ेंगे
पूरी तैयारी से आयेंगे हम | आज की बैठक सम्पन्न
Rt | if u Support
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गुरूद्वारे के अंदर धोखे से कोई खैनी लेकर भूलवश चला जाए तो यह उसे अपमानित करते हैं मारपीट करते हैं।
और स्वयं ड्रग्स दारू पीकर हिंसा हल्ला करते हैं।
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यही वक्त है, सही वक्त है!
हथौड़ा मारो, तोड़ दो ताला , यह मौका फिर लौटकर नहीं आने वाला! 🔥
वामपंथी अराजकतावाद, सड़क पर शक्ति प्रदर्शन और राहुल गांधी जैसे नेताओं की दिशाहीन राजनीति को आज ही जनता के सामने निर्णायक सवालों का सामना करना होगा। सत्ता बदलने की लड़ाई के नाम पर व्यवस्था को बंधक बनाने, संस्थाओं पर अविश्वास फैलाने और हर असहमति को आंदोलन का तमगा देने की राजनीति आखिर कब तक चलेगी?
आज नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। उनकी सरकार की सहनशीलता को कमजोरी समझने वालों को यह भी समझना चाहिए कि लोकतंत्र में धैर्य की सीमा होती है। कानून का शासन किसी भी सरकार की मजबूरी नहीं, उसकी जिम्मेदारी है। सहनशीलता का अर्थ अराजकता को खुली छूट देना नहीं होता।
आज कुछ लोग तालियाँ बजा रहे हैं, कुछ हर आरोप को सच मान रहे हैं। लेकिन जनता हमेशा एक जैसी नहीं रहती। समय बदलेगा, सवाल बदलेंगे और आज जिन चेहरों को आंदोलन का नायक बताया जा रहा है, कल उन्हीं के आचरण पर जवाबदेही की माँग उठ सकती है। राहुल गांधी हों, अभिजीत डिपके, सौरव दास, नेहा बोरा या कोई और, किसी को भी आलोचना और कानून से ऊपर होने का विशेषाधिकार नहीं मिल सकता।
वामपंथी विचारधारा हो या स्थापित सत्ता-संरचना, जनता को नियंत्रित करने की हर कोशिश का जवाब जागरूक नागरिक देंगे। पुरानी व्यवस्था का अंत हिंसा से नहीं, विचारों, जनमत और संवैधानिक बदलाव से होना चाहिए। जो शक्तियाँ अपना औचित्य खो चुकी हैं, उन्हें इतिहास के पन्नों में जगह मिलनी चाहिए, लोकतंत्र की दिशा तय करने का स्थायी अधिकार नहीं।
याद रखिए, इतिहास में बड़े बदलाव तब आते हैं जब जनता डरना छोड़ देती है और सवाल पूछना शुरू करती है। आज सवाल पूछने का वक्त है, जवाबदेही तय करने का वक्त है और लोकतंत्र को किसी की निजी जागीर बनने से रोकने का वक्त है! 🚩
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बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते। कहते हैं कि जब जागो तभी सवेरा बशर्ते इस पर दृढ़ रहें।
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ये विपक्षी दल के नेता कान खोलकर सुन लो मेरे देशवाशी तुम्हारी देशविरोधी मानसिकता को अच्छी तरह समझ रही है इसलिये तुम सता से बाहर हो ! हम सभी मजबूती के साथ मोदी जी के साथ खड़े थे,है और रहेंगे ! जय हिन्द 👇👇🇮🇳🇮🇳
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लोकतंत्र खतरे में है ऐसा सालों से पप्पू पुरवार करने में लगा है लेकिन सफलता नहीं मिली


































