विश्व रैंकिंग 2025 में मेरा नाम
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मैं JNU में नंबर 1, भारत में 11वें और एशिया में 134वें स्थान पर हूँ यह रैंकिंग मुझे समाज विज्ञानियों /वैज्ञानिकों की AD वर्ल्ड रैंकिंग 2025 द्वारा प्रदान की गयी है है. इसे साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।समाज का बहुत बहुत साभार.
मनोहर पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित होने वाली मेरी पुस्तक के दूसरे, संशोधित और विस्तारित संस्करण का कवर जारी हो गया है। आपके सहयोग और शुभकामनाओं का आकांछी।
SC/ST में पीढ़ी दर पीढ़ी IAS -IPS हो रहे है -यह कपोल कल्पित कथा है ? इसके आँकड़े कहाँ है। UP के पांच IAS/IPS जैसे एस. डी बगला, माता प्रसाद, पी एल पुनिया, हरीश चंद्रा (सभी IAS ), जंगी सिंह, श्री राम अरुण (सभी IPS )
youtube.com/shorts/8wNed-SKu…
समाजवादियों का पुराना इतिहास-
2004 में अनिल अंबानी ने उत्तर प्रदेश से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और राज्यसभा में प्रवेश किया, लेकिन उन्हें समाजवादी पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त था। हालांकि, लाभ के पद विवाद के बीच उन्हें 2006 में राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ा था।
लखनऊ का कौन सा सोशलिस्ट (समाजवादी) लीडर कैपिटलिस्ट (पूँजीवादी) का हो गया ?
परन्तु तथाकथित प्रगतिशील मीडिया विशेषकर अपने आप को समाजवादी कहने वाले यूट्यूब के एंकर और उस पर समजवादी विचारधारा के पैरोकार (डिस्कशन करने वाले) सब चुप है।
इसी लिए मान्यवर मिडिया को ....कहते थे।
आरक्षण क्यों
दलितों/जनजाति/पिछड़ों के प्रतिनिधित्व पर किस समाज में कितनी घृणा,अनादर,निकृष्ट भाषा प्रयोग,ईर्ष्या भरी हुई है यह मेरी 48 शब्द की पोस्ट पर दी गयी प्रतिक्रियाओं से प्रमणित हो गया।कल्पना कीजिये अगर संवैधानिक प्रतिनिधित्व न होता तो क्या दलित इस समाज में स्वतंत्र रह पाते?
जब तक अनुसूचित जाति/जनजाति के शिक्षकों का IIT में प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ेगा,तब तक इन पहचानों के छात्रों के साथ भेदभाव जारी रहेगा।
इसलिए,दलित छात्रों के खिलाफ भेदभाव को रोकने के लिए IIT में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के शिक्षकों की संख्या में जल्द से जल्द वृद्धि की जानी चाहिए।
JNU में "बाबासाहेब अम्बेडकर: आर्थिक और विकासीय दृष्टिकोण," पर राष्ट्रीय सेमीनार, यह सेमिनार जेएनयू स्थित समाजशास्त्र की अम्बेडकर पीठ (समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) द्वारा आयोजित किया गया। इस सेमीनार में JNU,DU, पंजाब केंद्रीय ,जामिया,जिंदल विवि के प्राध्यपको ने भाग लिया।
सवर्णों में क्रीमी लेयर बिना निकाले ही अलग से 10 प्रतिशत EWS कोटे से आरक्षण दे दिया। इसके विपरीत OBC में क्रीमी लेयर लगाकर अनेक समाजों को आरक्षण से वंचित कर दिया।अब अनुसूचित जाति के साथ यही शाजिश की जा रही है। यह लड़ाई प्रतिनिधित्व की है। क्या SC समाज का प्रतिनिधित्व पूरा हुआ ?
Understanding the difference between Methodology and Method. Underlining the Ontology and Epistemology of qualitative research.
A lecture organized by Centre for Social Medicine and Community Health /SSS/JNU).
youtube.com/watch?v=nkektT-T…
In this era of of debate on Reservations please listen this profound lecture on reservation by Prof Vivek Kumar .... youtube.com/watch?v=zG8nz4Ws…
दलितों/आदिवासियों/पिछड़ों के आरक्षण के विरोध में ज़बरदस्ती बहस चलाने वालों के बारे में मान्यवर कांशीराम की बहुजनो को दी गयी सलाह याद दिलाना चाहता हूँ। ऐसी बहस के बारे में मान्यवर कहा करते थे की "सोते हुए को जगाया जा सकता है, जो सोने का नाटक कर रहा हो उसे कैसे जगाया जा सकता है"?
मैं दो दशक से लिख/व्यख्यान दे रहा हूँ की "आरक्षण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है";यह प्रतिनिधित्व है जो हज़ारों सालों की सामाजिक, सांस्कृतिक,राजनैतिक,धार्मिक,शिक्षा,संसाधन आदि की वंचना की छतिपूर्ति है जिसे जाति व्यवस्था के आधार पर थोपा गया था।अत:आरक्षण आर्थिक आधार पर नहीं हो सकता








