आज शक्ति भवन में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रमुख सचिव (ऊर्जा) एवं समस्त ऊर्जा निगमों के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री रणवीर प्रसाद जी से शिष्टाचार भेंट की गई।
इस अवसर पर अभियंता संघ की ओर से उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए ऊर्जा निगमों की कार्यप्रणाली, अभियंताओं से संबंधित विषयों तथा निगम एवं उपभोक्ता हितों के संबंध में सौहार्दपूर्ण संवाद किया गया।
अभियंता संघ प्रमुख सचिव (ऊर्जा) एवं अध्यक्ष जी के मार्गदर्शन में प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़, दक्ष, पारदर्शी एवं उपभोक्ता हितैषी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की ओर से प्रदेश के समस्त अभियंताओं को अभियंता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
अभियंता केवल तकनीक और मशीनों का विशेषज्ञ नहीं, बल्कि विकास, प्रगति और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार है। विद्युत अभियंता अपनी तकनीकी दक्षता, कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हमारा संकल्प है कि प्रत्येक अभियंता—
“गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति, उपभोक्ता संतुष्टि, निगम की आर्थिक सुदृढ़ता, विद्युत सुरक्षा और पारदर्शी कार्यप्रणाली” को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए।
आज नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा और आधुनिक विद्युत प्रणालियाँ हमारे सामने नई संभावनाएँ और चुनौतियाँ लेकर आ रही हैं। ऐसे समय में हमें ज्ञान, नवाचार, ईमानदारी और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।
हमारा विश्वास है कि प्रदेश का प्रत्येक विद्युत अभियंता केवल अपने दायित्व का निर्वहन करने वाला अधिकारी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा भविष्य का निर्माता है।
आइए, अभियंता दिवस पर हम संकल्प लें कि—कर्तव्य में उत्कृष्टता, कार्य में पारदर्शिता, निर्णयों में निष्पक्षता, उपभोक्ता के प्रति संवेदनशीलता, सहकर्मियों के प्रति सम्मान, और निगम के प्रति पूर्ण निष्ठा हमारी कार्यसंस्कृति की पहचान बने।
आइए, हम सब मिलकर ऐसी विद्युत व्यवस्था के निर्माण में योगदान दें जो विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और भविष्य के लिए तैयार हो।
समस्त अभियंताओं को एक बार पुनः अभियंता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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उपभोक्ता हित को केंद्र बिंदु मानकर ऊर्जा निगमों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए बनाए गए संघ के 15 बिंदुओं का चार्टर।
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आज शक्तिभवन में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के प्रतिनिधिमण्डल ने अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) व ऊर्जा निगमों के चेयरमैन डा. आशीष गोयल साहब से मुलाकात कर अभियंताओं की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया गया।
अभियंता संघ ने चेयरमैन साहब को निगम हित एवं उपभोक्ता हित को केंद्र बिंदु मानकर बनाये गये संघ के 15 बिंदुओं के चार्टर की प्रति भेंट की।
अभियंता संघ उपभोक्ता हित, विद्युत सुरक्षा, ऊर्जा निगमों का वित्तीय सशक्तिकरण, बेहतर मानव संसाधान, प्रोफेशनल कार्य संस्कृति, विद्युत सामग्री की गुणवत्ता में जीरों कंप्रोमाइज, विद्युत चोरी को रोकना, ट्रांसफार्मर डैमेज को न्यूनतम करना एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
अतः प्रदेश के समस्त अभियंताओं से अपील है कि संघ द्वारा जारी चार्टर पर सकारात्मक रूप से कार्य किया जाए। जिससे उपभोक्ताओं का ऊर्जा निगमों के प्रति विश्वास बढ़ेगा, परिणाम स्वरूप ऊर्जा निगम वित्तीय रूप से सशक्त होंगे।
हमें पूर्ण विश्वास है कि चार्टर के बिंदुओं का पालन होने से ऊर्जा निगमों में निगम हित एवं उपभोक्ता हित के साथ-साथ सकारात्मक प्रोफेशनल कार्य संस्कृति विकसित होगी।
चार्टर के प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं-
• उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्वाध विद्युत आपूर्ति तथा शिकायतों का त्वरित समाधान।
• वास्तविक खपत के आधार पर सही बिजली बिल, मीटर रीडिंग की शुद्धता एवं पारदर्शी बिलिंग।
• ऊर्जा निगमों में बेहतर मानव संसाधन विकास सुनिश्चित कराना।
• ऊर्जा निगमों में प्रोफेशनल कार्य संस्कृति विकसित करना।
• निवेश मित्र एवं झटपट पोर्टल पर आवेदनों का समयबद्ध एवं पारदर्शी निस्तारण।
• ब्रेकडाउन (Fault) का आधुनिक तकनीक एवं प्रभावी माॅनिटरिंग के माध्यम से त्वरित समाधान।
• ऊर्जा निगमों को लाभकारी, टिकाऊ एवं Commercially Viable बनाने हेतु वित्तीय सशक्तिकरण।
• तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों (AT&C Losses) में कमी, विद्युत चोरी पर प्रभावी अंकुश एवं राजस्व वसूली में वृद्धि।
• पारदर्शिता, ई-गवर्नेस, डिजिटल निगरानी एवं भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति को बढ़ावा।
• ट्रांसफार्मर डैमेज रेट को न्यूनतम करना।
• ऊर्जा निगमों में विद्युत सामग्री की गुणवत्ता के संबंध में “जीरों कप्रोमाइज” की नीति पर कार्य किया जाना।
• कर्मचारियों एवं उपभोक्ताओं की विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘जीरो इलेक्ट्रिकल एक्सीडेंट’ की दिशा में प्रभावी कार्य।
• संयंत्रों की Plant Availability बढ़ाना, समयबद्ध अनुरक्षण एवं उत्पादन लागत में कमी।
• सुदृढ़ एवं सुरक्षित पारेषण प्रणाली के साथ उच्च क्षमता की लाइनों, आधुनिक ग्रिड उपकेंद्रों एवं नवीन तकनीकों का उपयोग।
• ट्रांसफार्मरों के नियमित रखरखाव, संतुलित लोड प्रबंधन एवं गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग।
• अभियंताओं को नवीन तकनीकों, प्रशिक्षण एवं बेहतर संसाधनों से सशक्त बनाकर ऊर्जा व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाना।
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दिनांक 20 जुलाई 2026 को शक्ति भवन में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की समस्त ऊर्जा निगमों के चेयरमैन एवं अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्रीमान डॉ. आशीष कुमार गोयल साहब की अध्यक्षता में व श्री मयूर माहेश्वरी जी प्रबंध निदेशक उत्पादन/ट्रांसमिशन निगम, श्री नीतीश कुमार जी प्रबंध निदेशक पावर कॉरपोरेशन की उपस्थिति में द्विपक्षीय वार्ता संघ के विभिन्न मांगों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
वार्ता के दौरान संगठन द्वारा उठाई गई मांगों पर ऊर्जा प्रबंधन का रुख सकारात्मक रहा, उम्मीद है जल्द ही कई मांगों पर सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे।
वार्ता में संघ की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंजीनियर प्रभात सिंह, महासचिव इंजीनियर जितेंद्र सिंह गुर्जर, उपाध्यक्ष इंजीनियर रणवीर सिंह, संयुक्त सचिव इंजीनियर आलोक कुमार श्रीवास्तव, संगठन सचिव इंजीनियर जगदीश पटेल, सहायक सचिव इंजीनियर निखिल कुमार, सहायक सचिव इंजीनियर सुबोध झा, क्षेत्रीय सचिव शक्ति भवन इंजीनियर उपदेश कुमार, क्षेत्रीय सचिव लेसा, इंजीनियर देवेंद्र सिसोदिया आदि उपस्थित रहे।
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आज दिनांक 18 जुलाई 2026 को जनपद मेरठ में किसान संगठनों द्वारा विद्युत आपूर्ति बाधित होने के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। इसी दौरान इं० सौरभ कुमार, विद्युत सहायक अभियंता (तृतीय), 11 केवी, मेरठ किसानों की समस्याएँ सुनने एवं उनसे वार्ता करने के उद्देश्य से ही धरना स्थल पर एसडीएम से मिलने के लिए कलेक्ट्रेट के दूसरे गेट की ओर से जा रहे थे ,तभी कुछ किसानों द्वारा पुलिसकर्मियों से कहा गया कि एसडीओ भाग रहा है। इसके तुरंत बाद वहाँ मौजूद एक पुलिस उपनिरीक्षक (दरोगा) दौड़कर इं० सौरभ कुमार के पास पहुंचे और उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनका हाथ पकड़ के ले जाने लगा जबकि इंजीनियर सौरभ एस डी एम से ही मिलेने धरना स्थल पर किसानों को संतुष्ट करने पहुचे थे। इंजीनियर सौरभ एक उपखण्ड अधिकारी स्तर के अधिकारी है और इस तरह का व्यवहार उनके साथ दरोगा स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाना नियम संगत नही है।
साथ ही कुछ अराजक तत्वों द्वारा इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रसारित किया गया, जिससे इंजीनियर सौरभ मानसिक रूप से आहत है और अपमानजनक महसूस कर रहे है। इस घटना से पूरे प्रदेश के बिजली अभियंताओं में गहरा रोष व्याप्त हो रहा है।
इस भीषण गर्मी में पूरे प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली अभियंताओं के साथ इस प्रकार की अभद्रता स्वीकार करने योग्य नहीं है। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया उपरोक्त प्रकरण में न्याय संगत कार्यवाही कराने की कृपा करें, जिससे सभी विद्युत अभियंता बिना किसी भय के सम्मान के साथ अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर सके।
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विद्युत दुर्घटनाएं रोकने और उपभोक्ताओं को और बेहतर विद्युत सेवाएं सुनिश्चित कराने का लिया संकल्प।
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आज उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के प्रतिनिधि मंडल द्वारा मध्यांचल के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक श्रीमान संदीप भागिया IAS जी से शिष्टाचार भेंट कर मध्यांचल मुख्यालय में स्वागत किया।
संघ के प्रतिनिधि मंडल में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं अभियंता सदस्य उपस्थित रहे।
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आज उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के प्रतिनिधि मंडल ने माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी। तथा उनसे निवेदन किया कि 19 मार्च 2023 में हुए समझौते का पालन करते हुए आंदोलन के दौरान बिजली कार्मिकों पर की गई समस्त उत्पीड़न की कार्रवाई को वापस लिया जाए, निकाले गए सभी संविदा कर्मचारियों को कार्य पर बहाल किया जाए, जिससे ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित हो सके। और ऊर्जा निगम उपभोक्ता की संतुष्टि के साथ तेजी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ सकें।
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अलीगंज अग्निकांड के बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया जाये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
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अलीगंज अग्निकांड मामले में नया खुलासा: विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लगातार बचाते हुए नजर आ रहे हैं, उनके बयान देखें तो वह कभी कहते हैं कि उपभोक्ता की एनओसी से संबंधित संबंधित हमारे पास कोई अभिलेख नहीं है, कभी कहते हैं कि एनओसी ही फर्जी है, जबकि संबंधित उपभोक्ता द्वारा अपने 20 किलोवाट कमर्शियल संयोजन की विद्युत सुरक्षा से निरीक्षण कराने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय विभाग के मद में भारतीय स्टेट बैंक के चालान के रूप में ट्रेजरी में रुपए 1150 की धनराशि 23 जून 2016 को जमा कराई गई थी, उपरोक्त चालान की राशि जमा होने के उपरांत विद्युत सुरक्षा निदेशालय का दायित्व होता है कि वह परिसर का निरीक्षण कर एनओसी जारी करें अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा अगले दिन 24 जून 2016 को निरीक्षण कर एनओसी जारी की गई है तो फिर NOC फर्जी कहां से हुई और अगर NOC फर्जी है तो फिर चालान जमा होने के बाद परिसर का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उस निरीक्षण के बाद NOC निर्गत क्यों नहीं की गई, जबकि शासन का नियम है कि यदि चालान फीस जमा होने के 7 दिन के अंदर एनओसी प्राप्त नहीं होती है तो ऊर्जा निगम के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत कर सकते हैं।
यदि किसी परिसर में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी निर्धारित कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रहा है, पहले जून 2016 फिर उसके बाद हर 3 साल अर्थात सन 2019, 2022, 2026 में परिसर का विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी द्वारा विद्युत निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन किसी ने निरीक्षण नहीं किया उनकी इस लापरवाही के कारण 15 निर्दोष बच्चों की जान चली गई, जो की अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है इस दुखद घटना के बाद लगातार विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपने 04 लापरवाह अधिकारियों को बचाने में लगा है और अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जबकि दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को आनन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशाषी अभियंता के निलंबन आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह आरोप बिल्कुल निराधार एवं तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता के संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन माह अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित होती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित करना सरासर गलत एवं अवैधानिक है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया जाये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
~इं• जितेंद्र सिंह गुर्जर
महासचिव उ• प्र• राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ
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राजधानी लखनऊ के अलीगंज में घटित हुई भयानक अग्निकांड की घटना अत्यंत ही दुखद एवं पीड़ादायक है, दुर्घटना के तत्काल बाद बिना किसी प्रारंभिक जांच के मीडिया के माध्यम से यह प्रसारित किया गया कि लापरवाही के कारण अधिशासी अभियंता (कलेक्शन) जानकीपुरम जोन को निलंबित किया गया है, आनन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशाषी अभियंता (कलेक्शन) के निलंबन आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह आरोप भी तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता के संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन माह अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित होती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित करना सरासर गलत एवं अवैधानिक है। यहां यह स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है कि कंप्यूटर सिस्टम पर भार वृद्धि से अग्निकांड का कोई लेना नहीं है।
समाचारों में अब यह तथ्य प्रमुखता से सामने आया है कि संबंधित भवन में विद्युत सुरक्षा के समुचित इंतजाम नहीं थे तथा भवन का आवश्यक इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट भी नहीं कराया गया था। एसआईटी जांच के दौरान विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारी यह अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके कि भवन का विद्युत सुरक्षा ऑडिट कब किया गया था अथवा घटना से पूर्व भवन की विद्युत सुरक्षा की जांच कब की गई थी। यह स्थिति स्पष्ट रूप से विद्युत सुरक्षा निदेशालय एवं अन्य संबंधित एजेंसियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है यदि किसी भवन में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, अग्नि सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं अपर्याप्त थीं तथा संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर कमियों की जिम्मेदारी निर्धारित किए बिना केवल विद्युत वितरण निगम के एक अभियंता को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता।
विद्युत वितरण निगम की जिम्मेदारी उपभोक्ता को विधिवत कनेक्शन उपलब्ध कराना एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना है। भवन के अंदर की वायरिंग, विद्युत उपकरणों की गुणवत्ता, विद्युत सुरक्षा प्रमाणन, अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन तथा समय-समय पर सुरक्षा परीक्षण की जिम्मेदारी भवन स्वामी एवं संबंधित नियामक एवं सुरक्षा एजेंसियों की होती है। इन दायित्वों की उपेक्षा कर एक अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई करना वास्तविक तथ्यों से ध्यान हटाने का प्रयास प्रतीत होता है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से विनम्र अनुरोध है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय एवं संबंधित विभागों की चूक को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त करते हुए इस घटना की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष, तकनीकी एवं विशेषज्ञ जांच कराई जाए तथा वास्तव में दोषी लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए। लेकिन जल्दबाजी में बिना किसी जांच के किसी भी निर्दोष अभियंता को बलि का बकरा बनाते हुए दोषी ठहराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए।
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उत्तर प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
पावर कॉरपोरेशन के हालत बयां करता ये AI वीडियो।
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मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएं।
लेकिन आश्चर्य एवं अफसोस की बात है कि ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उनका पूर्ण पालन नहीं हुआ है। इससे सरकार एवं प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।
माननीय ऊर्जा मंत्री जी एवं ऊर्जा प्रबंधन के बीच आपसी लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश की जनता एवं बिजली कर्मचारियों का हो रहा है, इस समय पूरे ऊर्जा विभाग में बिजली कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है, बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न चरम पर है, ऊर्जा निगमों में तानाशाही का माहौल है, जिससे बिजली कर्मियों के अंदर ही अंदर गहरा रोष व्याप्त हो रहा है, और वह कभी भी फूट सकता है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि व्यापक हस्तक्षेप करते हुए हुए तत्काल अग्रिम कार्रवाई करने की कृपा करें, जिससे अनवरत प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराई जा सके तथा बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न भी रोका जा सके।
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ऊर्जा मंत्री के निर्देश के अनुसार मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग : संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन: ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का तीन वर्ष बाद भी पालन न होना चिंताजनक : उत्पीड़न समाप्त कर ऊर्जा निगमों में स्वस्थ कार्य वातावरण बनाया जाए
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को ज्ञापन सौंपकर मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में सकारात्मक एवं सहयोगात्मक कार्य वातावरण स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी लंबित दंडात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए।
संघर्ष समिति ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित मामलों को समाप्त करने के बजाय उत्पादन निगम के कर्मचारी श्री दिनेश सिंह को वृहद दंड दिया गया है, जिससे प्रदेश भर के बिजली कर्मियों में भारी असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है।
केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को अवगत कराया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएं।
संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन के साथ माननीय ऊर्जा मंत्री एवं संघर्ष समिति की संयुक्त प्रेस वार्ता की प्रतिलिपि तथा उत्तर प्रदेश सूचना विभाग द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य की प्रति भी अध्यक्ष को उपलब्ध कराई। संघर्ष समिति ने कहा कि उक्त वक्तव्य में ऊर्जा मंत्री ने आंदोलन समाप्त करने के लिए संघर्ष समिति का आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन से संबंधित सभी दंडात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाएं।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य एवं अफसोस व्यक्त किया कि ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उनका पूर्ण पालन नहीं हुआ है। इससे सरकार एवं प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को कार्य से पृथक किए जाने के कारण विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा उपभोक्ताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संविदा कर्मियों की बहाली की जानी चाहिए, ताकि बिजली कर्मी पूर्ण मनोयोग एवं समर्पण के साथ विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपना योगदान दे सकें।
संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से आग्रह किया कि वह संवाद, सहयोग एवं विश्वास का वातावरण स्थापित करते हुए सभी लंबित मामलों का न्यायोचित समाधान करे, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े और प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल में जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, श्री चंद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी,के एस रावत, आर सी पाल सम्मिलित थे।
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ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद मनमाने ढंग से हटाए गए लगभग 25,000 संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए - संघर्ष समिति : 2017 के निर्धारित मानकों के अनुरूप संविदा कर्मियों की संख्या बहाल करने की मांग:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा बिना कारण संविदा कर्मियों को सेवा से न हटाए जाने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान निजीकरण की तैयारी और कथित "मैनपावर रेशनलाइजेशन" के नाम पर हटाए गए लगभग 25,000 संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 36 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 20 संविदा कर्मियों की व्यवस्था निर्धारित की गई थी। इसी मानक के आधार पर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था वर्षों तक सुचारु रूप से संचालित होती रही।
संघर्ष समिति ने बताया कि अक्टूबर 2024 से इन निर्धारित मानकों के विपरीत बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाने का अभियान शुरू किया गया। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 में पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया की घोषणा की गई थी। संघर्ष समिति का आरोप है कि उसी के बाद निजीकरण की तैयारी के तहत संविदा कर्मियों की संख्या में कटौती प्रारंभ कर दी गई।
संघर्ष समिति ने बताया कि नए टेंडरों में निर्धारित मानकों को दरकिनार करते हुए शहरी क्षेत्रों में 36 संविदा कर्मियों के स्थान पर मात्र 18.5 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मियों के स्थान पर केवल 12.5 कर्मियों की व्यवस्था का प्रावधान किया जा रहा है। राजधानी लखनऊ सहित जिन स्थानों पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग किया गया है वह शहरी क्षेत्र में संविदा कर्मियों की संख्या घटकर 7.5 कर दी गई है।इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में अनुभवी संविदा कर्मियों, जिनमें अनेक ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जो 20-25 वर्षों से विद्युत व्यवस्था के संचालन एवं रखरखाव में योगदान दे रहे थे, को सेवा से बाहर कर दिया गया है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि संविदा कर्मियों को 55 वर्ष की आयु में अनिवार्य रूप से हटाने का निर्णय भी पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है। अनेक ऐसे संविदा कर्मी, जिन्होंने बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के दौरान दुर्घटनाओं में अपने हाथ-पैर तक गंवा दिए, उन्हें भी सेवा से बाहर कर दिया गया। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि जब निगमों के शीर्ष अधिकारियों और प्रबंध निदेशकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, तब संविदा कर्मियों को 55 वर्ष की आयु में हटाने का औचित्य क्या है?
संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान विद्युत आपूर्ति में बाधाओं और फॉल्ट की घटनाओं में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि समस्या यह है कि फॉल्टों को तत्काल ठीक करने वाले अनुभवी संविदा कर्मियों की संख्या लगातार घटा दी गई है। परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की परेशानी झेलनी पड़ रही है और विद्युत कर्मचारियों पर भी कार्यभार असहनीय रूप से बढ़ गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब स्वयं ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिना कारण किसी भी कर्मी को सेवा से न हटाया जाए, तब 2017 के निर्धारित मानकों के विपरीत किए गए टेंडरों की समीक्षा कर सभी हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही उपकेंद्रों एवं विद्युत वितरण व्यवस्था में आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाया जाना चाहिए।
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माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि बिजली कर्मियों पर हमला करने वाले हमलावरों पर रासुका के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
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भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के कार्य में लगे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों में हमलावरों पर रासुका के तहत कठोर कार्रवाई की मांग: फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव इंजीनियर जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए अभियंता एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारी दिन-रात धरातल पर कार्य कर रहे हैं। फील्ड पर विभागीय कार्य करने के दौरान अराजक तत्वों द्वारा ड्यूटी कर रहे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की टीम पर गाली गलौज, मारपीट एवं जानलेवा हमले किये जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में बिजली कर्मी गंभीर रुप से घायल हो रहे हैं, इन मारपीट की घटनाओं से पूरे प्रदेश के कर्मचारियों एवं अभियंताओं में भय व्याप्त हो गया है।
दिनांक 27 मई 2026 को लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र में रेड टीम पर ड्यूटी के दौरान हमलावरों द्वारा घेरकर बेलचा से जानलेवा हमला किया गया तथा हमलावरों द्वारा बिजली कर्मियों को कुत्तों से भी कटवाया गया। इसी तरह दिनांक 26 मई 2026 को राजधानी लखनऊ के मध्य क्षेत्र में चैपटिया विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत पीक आवर्स में बिजली चोरी रोको अभियान के अंतर्गत गई रेड टीम पर बिजली चोरी में संलिप्त व्यक्तियों द्वारा इकट्ठा होकर टीम पर हमला किया। जिसमें एक संविदा कर्मी को गंभीर चोटें आईं।
इसी प्रकार 27 मई 2026 को जनपद शामली के केराना में विभागीय टीम को बंधक बनाकर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कर्मियों को गर्दन एवं सीने में गंभीर चोटें आई हैं।
इस प्रकार की मारपीट की घटनाएं प्रदेश के लगभग सभी जनपदों में घटित हो रही हैं लेकिन ऊर्जा प्रबंधन की ओर से फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की सुरक्षा के संबंध में कोई भी ठोस कार्य नहीं किया जा रहा है। और तो और घटना के बाद संबंधित थाने में एफआईआर लिखाने के लिए भी सभी बिजली कर्मियों को एकजूट होना पड़ता है, तब जाकर एफआईआर लिखी जाती है। एफआईआर लिखने के उपरांत हमलावरों की गिरफ्तारी तक नहीं हो रही है। जिससे हमलावरों के हौसलें बुलंद एवं बिजली कर्मियों में भय का माहौल व्याप्त है।
इस तरह की सभी घटनाओं पर त्वरित रोक लगाने हेतु संघ के महासचिव ने पावर कॉरपोरेशन शीर्ष प्रबंधन को पत्र लिख कर मांग की है कि
1. फील्ड में कार्य कर रहे अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इस हेतु शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन स्तर से समस्त जिला प्रशासन को तत्काल पत्र के माध्यम से कॉर्पोरेशन व शासन स्तर से निर्देश जारी किया जाए।
2. बिजली कर्मियों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2018 से शासन स्तर पर लंबित पावर सेक्टर इम्प्लाइज प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कराया जाए।
3. दुर्भाग्यवश यदि किसी भी अभियंता या उनके अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटना घटित होती है तो तत्काल संबंधित डिस्काॅम के प्रबंध निदेशक, संबंधित कमिश्नर/जिलाधिकारी/पुलिस अधीक्षक से वार्ता कर रासुका जैसी गंभीर धाराओं में हमलावरों की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराई जाए।
4. पाॅवर कार्पोरेशन स्तर पर प्रदेश भर में हो रही सभी मारपीट की घटनाओं को संकलित कर उन पर कृत कार्यवाही की समीक्षा की जाए।
5. शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन स्तर पर वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से की जाने वाली सभी समीक्षा बैठकों में मारपीट की घटनाओं को एजेंडे पर सम्मिलित करते हुए अग्रिम कार्यवाही की जाए।
संघ ने माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath से मांग की है कि अभियंताओं एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों को रोकने के लिए शासन स्तर पर प्रभावी कार्यवाही करायी जाये, जिससे बिजली कर्मी बिना किसी भय के प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहें।
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