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उत्तर प्रदेश पुलिस इस मामले को आत्महत्या का मामला बताकर दबा चुकी है। जबकि दलित लड़के ने मरते वक्त बयान दिया था कि उसे और उसकी प्रेमिका को पेट्रोल छिड़ककर जलाया गया था। साफ़ है लोकल पुलिस पैसे लेकर हत्यारों को बचा रही है।
@Uppolice @firozabadpolice
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भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद तमाम संघर्षों के बाद फाइनली केतन लाल की माँ से मिले। बारहवीं में पढ़ने वाले दलित लड़के केतन की अपर कास्ट लड़की से संबंध रखने के कारण हत्या कर दी गई थी। जगह- टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड
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Dalit minor boy Ketan Lal was killed for loving an upper-caste girl in Uttrakhand.
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अखिलेश यादव वचन दे रहे हैं👇
पंडित जी की हर बात मानेंगे।
वो कहेंगे बाल कटाना है तो कटाएंगे, कहेंगे बढ़ाना है तो बढ़ाएंगे।
कहेंगे घर से निकलना है तो निकलेंगे, नहीं निकलना तो नहीं निकलेंगे।
वो कहेंगे शूद्र हो शासक मत बनो तब क्या करेंगे?
ये नहीं बता रहे हैं।
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OBC Kranti must talk more about land reforms and intermediate caste violence against Dalits across India. No OBC politics proved to be quite transformative for Dalits, best example is SP. I'm sure this guy has zero knowledge of Azad's political trajectory, therefore his focus is on Rolls Royce, not Azad's political movement. Savarna gaze!
Azad was with farmers agitation, despite the Dalit critique of intermediate caste feudalism among farmers. You are simply a casteist (which you might not be realising yourself) because you couldn't give a Dalit leader enough credit to what he has done for more than a decade, rather reduced everything to a Rolls Royce which you are probably envious of!
OBC's must focus on casteism within their own community and among their own leaders before lecturing Dalits.
अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी ने बनाई और CM बन गए.
सुपरस्टार ने विजय ने TVK बनाई और CM बनने जा रहे हैं.
राजनीति में नेताओं को इतनी जल्दी सफलता नही मिलती. ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है.
चंद्रशेखर आजाद ने 2017 में आजाद समाज पार्टी की स्थापना की थी. अभी तक वो अकेले सफल हैं, लेकिन उनकी पार्टी को सफलता नही मिली है.
उनके व्यक्तित्व में जबरदस्त मास अपील है. लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या है वो अभी भी केवल अपनी जाति के वोट बैंक को साधने में लगे हैं.
जब पिछले साल वे अमेरिका में जातिसूचक नेमप्लेट वाली रोल्स रॉयस में बैठे थे तब मैंने उनकी जमकर आलोचना की. कुछ जातिवादी अनाड़ी लोगों ने आलोचना को नेगेटिव रूप में लिया. जबकि यह नुमाइश उन्हें केवल एक जाति के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट कर रही थी.
जब तक सभी जातियों को गोलबंद कर जोड़ा नही जाएगा, जब तक सत्ता पक्ष के खिलाफ मुखर होकर आंदोलन खड़ा किया जाएगा,
आज़ाद समाज पार्टी हो या बहुजन समाज पार्टी हो, सफलता नही मिलेगी. 24 घंटे Caste पॉलिटिक्स भी नही करनी चाहिए. याद रखिए OBC SC वर्ग की सभी जातियां एक जैसा नही सोचती हैं.
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भाई @MukeshMohannn को सिर्फ़ इसलिए FIR और इंटरस्टेट जाकर थाने के चक्कर लगवाए जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने कारवाँ मैगज़ीन को क्वोट करके एक इंस्टा रील बनाई थी। आर्टिकल क्वोट करने पर FIR हो रही हैं। मंत्री @nitin_gadkari जी ऐसा करके आप अपयश ही कमा रहे हैं। अरबों का कारोबार है एक इंडिविजुअल जर्नलिस्ट को परेशान करके आप जनहित नहीं कर रहे। आपको लड़ाई लड़नी है कारवाँ मैगज़ीन से लड़िए। अपनी ताक़त एक सामान्य इन्फ़्लुएंसर पर क्यों दिखा रहे हैं?
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कुछ दिन पहले @thecaravanindia ने नितिन गडकरी पर एक रिपोर्ट छापी। रिपोर्ट नितिन गडकरी और बीफ के कारोबार से संबंधित थी।
इस रिपोर्ट के आधार पर मैंने एक वीडियो किया। उस वीडियो के लिए मुझे 50Cr की मानहानि का नोटिस दिया गया और मुझपर नागपुर में एक FIR करवाई गई है।
दो दिन हो गए नागपुर में थाने के चक्कर काट रहा हूँ। एक फ़ोन जफ़्त कर लिया गया है दूसरा फ़ोन जिससे मैं वीडियो शूट करता उसे लाकर सबमिट करवाना है।
So where is freedom of speech?
It’s resting in the peace.
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दोस्तों, मुझे पूरा यकीन है कि इस मुश्किल घड़ी में आप हमारे साथ हैं। आप सबसे एक अपील कर रहा हूँ। इस वीडियो को देखें और शेयर करें।
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मेरे परिवार के लिए ये मुश्किल घड़ी है।
जय भीम साथियों, मेरी जीवनसाथी अज़रा इस समय गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। उन्हें दो तरह के रेयर एब्डॉमिनल ट्यूमर हैं और मेदांता अस्पताल (गुरुग्राम) में उनका इलाज चल रहा है।
नवंबर 2022 में इन्हीं ट्यूमर की सर्जरी कराई गई थी लेकिन दुर्भाग्य से ये ट्यूमर फिर लौट आए हैं। इस बार मामला क्रिटिकल है और अज़रा को मल्टीपल सर्जरी और कीमोथेरेपी वग़ैरह से गुज़रना होगा।
हेल्थ इंश्योरेंस और पर्सनल सेविंग्स ख़त्म होने के बाद हमें आपकी मदद की ज़रूरत है। हमें कुल 30 लाख रुपये की ज़रूरत है इसलिए हम आपसे अपील कर रहे हैं।
मैं आपसे गुज़ारिश करता हूँ कि अगर आप हमारी मदद कर सकें तो प्लीज़ करें। अकाउंट की जानकारी नीचे दी जा रही है।
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आप पोस्टर में दिए गए QR कोड को स्कैन करके भी हमारी मदद कर सकते हैं।
अगर आप मदद नहीं कर सकते तो प्लीज़ इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। मुझे उम्मीद है कि इस मुश्किल वक़्त में आप हमारा साथ देंगे।
आपका
सुमित चौहान
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हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं।
जन्मदिन मुबारक चंद्र..🥳❤
खूब जियो, खूब आगे बढ़ो।
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“एक मामूली लड़का… जिसने गाँव की धूल-भरी गलियों से उठकर सिर्फ़ दस सालों में उत्तर भारत के दलित गाँवों में अपना जड़ फैला दिया।"
तुम उससे सहमत हो सकते हो, असहमत हो सकते हो, लेकिन उसे पूरी तरह ख़ारिज करने की हिम्मत किसी में नहीं।”
प्रिय चंद्रशेखर, @BhimArmyChief
तुम्हारे बारे में सोचता हूँ तो हमेशा वही तस्वीर आँखों में उतर आती है, धूल-भरे किसी छोटे कस्बे की गलियों से उठकर, भीड़ में अकेले खड़े एक नौजवान की। न जेब में दौलत थी, न कंधे पर किसी बड़े नेता का हाथ, लेकिन आँखों में आग थी, और होठों पर अंबेडकर के सपनों का नाम।
तुम्हें चाहो तो आलोचना के तराजू पर तौल लो, चाहो तो अफवाहों की चादर ओढ़ाकर बदनाम कर दो, लेकिन सच यही है कि तुम इस देश की दलित-बहुजन राजनीति में नई हवा की तरह आए। और यह हवा सिर्फ चुनावी नारों तक नहीं रुकी, यह हवा गाँव-गाँव के बच्चों तक पहुँची, जिन्होंने पहली बार सुना कि “भीम आर्मी नाम का भी संगठन है।”
चंद्रशेखर, तुम पर बहुत उंगलियाँ उठीं, कभी राजनीति के नाम पर, कभी प्रेम के नाम पर, कभी तुम्हारे व्यक्तित्व पर। लेकिन क्या एक इंसान सिर्फ़ इन उंगलियों से तय हो सकता है? प्रेम की गलियों में वफ़ा और बेवफ़ाई दोनों होती हैं, और राजनीति के मैदान में जीत और हार दोनों। पर तुम्हारी सबसे बड़ी जीत यही है कि तुमने लाख ठोकरों के बाद भी रास्ता छोड़ा नहीं।
तुम्हारी कहानी मुझे वैसी लगती है जैसे कोई छोटा बीज, जिसे लोग पत्थरों के बीच फेंक दें, और सब कहें, “इससे कुछ नहीं उगेगा।” लेकिन वही बीज चट्टानों को चीरकर बाहर आता है, और एक दिन पेड़ बनकर छाँव देता है। तुम वही बीज हो चंद्रशेखर, जिसने दस बरस में नगीना से लेकर उत्तर भारत के दलित गाँवों तक अपनी जड़ें फैला दीं।
हाँ, तुमसे असहमति हो सकती है, तुम्हारे फ़ैसलों पर सवाल उठ सकते हैं, पर तुम्हें पूरी तरह नकारना असंभव है। क्योंकि जिस लड़के ने खुद अपने दम पर संगठन खड़ा किया, जेलें देखीं, गालियाँ सही, और फिर भी संसद तक पहुँच गया, वह लड़का किसी के लिए सिर्फ़ ‘नेता’ नहीं, बल्कि संघर्ष की जीती-जागती किताब है।
मेरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में तुम्हारा सफ़र और कठिन होगा, पर तुम्हारी रगों में जो विद्रोह बह रहा था, वह तुम्हें गिरने नहीं देगा। याद रखना, तुम्हारा नाम सिर्फ़ एक इंसान का नाम नहीं, बल्कि उन तमाम आँखों की उम्मीद है जो सदियों से समानता और न्याय के सपने देख रही हैं।
चंद्रशेखर, यह ख़त तुम्हें याद दिलाने के लिए है कि चाहे कितनी भी आँधियाँ आएं, तुम्हें रुकना नहीं है। तुम्हें वही रहना है, जो दलित-बहुजन बच्चों को पहली बार पढ़ाई की ताक़त दिखाए, जो गाँव की औरतों को पहली बार हिम्मत दे, और जो संसद में खड़े होकर यह कहे कि “हम यहाँ मेहमान नहीं, इस देश के बराबरी के वारिस हैं।”
तुम्हारा आलोचक बनना आसान है, पर तुम्हारा साथी बनकर चलना मुश्किल। फिर भी, मैं तुम्हें सलाम करता हूँ, क्योंकि तुमने हमें यह सिखाया कि साधारण लड़के भी असाधारण इतिहास रच सकते हैं।
फ़िर कहता हूं तुमसे हज़ार शिकायतें है, असहमति है। नेता के तौर बहुत ज़्यादा परिपक्वता की जरूरत है, लेकिन फिर भी कोई तुम्हें नकार नहीं सकता।
ख़त लिखने वाला लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
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मैं प्रेमचंद को दुश्मन नहीं मानता हूँ, दुश्मन मैं उन लोगों को मानता हूँ जो प्रेमचंद को दलित साहित्य के सामने दीवार की तरह खड़ा करते हैं। आप दलित साहित्य को पढ़े बिना प्रेमचंद का विश्लेषण मत कीजिए।
- साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि
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महान साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि जी से सुनिए उन्हीं की लिखी रचना "ठाकुर का कुआँ"।
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"आप हिंदी की किसी श्रेष्ठ रचना को उठाकर देखिए.वहाँ देखिए की लेखक की सोच क्या रही है ? हमारे आलोचक यहीं गलती कर जाते हैं की उस सोच के ऊपर ध्यान न देकर उसकी भाषा, उसकी कलात्मकता, उसका चमत्कार, उसका ये, उसका वो, उसका नाम रटते रहते हैं।"
~ ओमप्रकाश वाल्मीकि @KotwalMeena
@bhanwarmegh
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12 वी सदी में भारत में जब तुर्क घुसे तब चारों ओर लाशे बिछ गई थी। भारतीय राजाओ ने संघर्ष किया लेकिन असफल रहे कारण वो हजारों सालों से चली आ रही सभ्यता शालीनता का पालन करते और दुश्मन से भी युद्ध नियमों में यही पालन की उम्मीद किए बैठे थे ।
जबकि दूसरी तरफ़ थे ख़ूँख़ार दरिंदे, हवस के प्यासे, साम्राज्यवाद के दीवाने, और तो और भारत से कुछ चुनमंगे ग़द्दार उनके साथ जो मिल गए थे, जिन्हें हर हालत में युद्ध जीतना था भाड़ में जाय सभ्यता शालीनता ।
नतीजा तुर्क जीतते गए भारत ग़ुलाम होते गया । कुछ
भारतीय राजा तुर्क सत्ता समपर्ण कर तन मन धन लुटाकर लगकर जान बचाए और वफादार बन गए वही धर्म के ठेकेदार दरबार में जी हुजूरी चाटुकारिता कर वर्ण व्यवस्था में उच्च होने का नाटक सुरु कर दिए। फिर तुगलक से लेकर लोधी फिर मुगल आते गए ।
ईश्वर पर अल्लाह की फतह प्रचारित होने लगा।
फिर अंग्रेज आए अब अल्लाह पर जिसस का फतह हो गया ।
एकबार फिर समय बदला
अबकी बार यहोवा सबपर भारी पड़ा ।
आज ईरान इजराइल युद्ध में, इजराइल ने वही नीति आजमाई जो कभी अल्लाह प्रेमी लगाते थे ।
आज अल्लाह वाले रो रहे कभी भारत भी ऐसा ही रोया था । चारों तरफ़ बुद्ध की मूर्तिया तोड़ दी गई थी, महाविहार संघाराम जलाए गए थे, विश्वविद्यालय मिलीभगत कर नष्ट कर दिए गए थे ।
वाल्मीकि रामायण सहित तमाम ब्राह्मण ग्रंथों में बुद्ध का नाम लेना अपराध घोषित कर दिया गया। नतीजा भारतीय बुद्ध को भूलते गए लेकिन जमीन से निकले सबूत चीख चीख कर याद दिला रहा ये बुद्ध की धरती है थी और रहेगी ।
तुर्को के कर्मों की सजा आज उनके वंशजों को भुगतनी पड़ रही है ।
ब्राह्मण ग्रंथों में भारतीयो और बुद्ध को विलेन दिखाने वालो को सजा कब तक मिलेगी? इंतज़ार रहेगा ।
तब तक ईरान इजराइल युद्ध की कड़ी निंदा कर काम चलाए।
#IranUnderAttack
#IranIsraelConflict
#Israel
#Iran
#IsraelIranConflict
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भारत और पाकिस्तान में जब भी तनाव की स्थिति आती है तब कितने मुस्लिम देश खुलकर या अप्रत्यक्ष रूप से भारत का साथ देते है ?
जवाब है नील बट्टे सन्नाटा ।
कितने ईसाई देश साथ देते है ?
जवाब है मुस्किल से कुछ उसमे भी शक्तिशाली देश अमेरिका साथ नहीं देता।
तो फिर कौन भारत के साथ खुलकर खड़ा होता है
जवाब है : इजराइल
लेकिन हम भारतीय इजराईल का कभी खुलकर सपोर्ट नहीं करते क्योकि हमे बुद्ध चाहिए युद्ध नहीं कुछ लोग को गांधी चाहिए इसलिए भी सपोर्ट नहीं कर सकते और फिर अरबी देशों से व्यापारिक संबंध बिगड़ने का डर?
एक मिनट रुके ये हाथी के दाँत दिखाने वाला डायलॉग है असल बात मैं बताता हूँ ।
दरअसल हमने भारत के अंदर एक पाकिस्तान जितनी मुस्लिम आबादी खड़ी कर ली है और वो वोट से कई सरकार बना और गिरा सकते है । ऐसे में क्या पक्ष क्या विपक्ष और क्या उनके कार्यकर्ता बोले ?
खैर भविष्य में 100 साल बाद उनके बच्चे पैदा करने की रफ़्तार को देखते हुए साफ़ है वो ख़ुद सरकार बनाने में सक्षम हो जाएँगे तब सबकी जबान हलक से बाहर न निकल पायेगी की किसका सपोर्ट करना है पक्ष भी उनकी भाषा बोलेगा और विपक्ष भी और वो डिसाइड करेंगे की किसको सपोर्ट करना है।
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ये संसार सोए हुए लोगों की भीड़ है और सोए हुए लोग कभी भी जागे हुए आदमी को बर्दास्त नहीं करते हैं।
- राष्ट्रपिता ज्योतिबा फूले #JyotibaPhule
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भारत में राष्ट्रीयता की भावना का विकास तब तक नहीं होगा, जब तक खान-पान और वैवाहिक संबंधों पर जातीय बंधन बने रहेंगे।
- राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले #JyotibaPhule
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यदि तुम परिवर्तन की राह पर चलते हो तो, तुम्हारे विरोध की शुरुआत सबसे पहले तुम्हारे घर-परिवार से ही होगी।
– राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले #jyotibaphule
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माननीय @AmitShah जी बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के नाम से हमारी सात पीढ़ियो के जीवन की दशा और दिशा बदली है,बाबा साहब ने संविधान के माध्यम से इस देश के करोड़ो लोगो के जीवन में एक नयी रोशनी जगायी जिसका परिणाम है की आज किसान मजदूर और गांव ढाणी से निकलकर लोग देश में विधायिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका का हिस्सा है।
बाबा साहब ने इस देश के लिए जो किया वो सात जन्मो तक क्या सात करोड़ जन्मो तक कोई और नहीं कर सकता।
राज्यसभा में बाबा साहब के प्रति दिया गया आपका यह बयान कुंठित मानसिकता का परिचायक है और आपके इस वक्तव्य की हम कड़े शब्दों में निंदा करते है।
#जय_भीम
#जय_संविधान

















