विश्व के प्रथम शिक्षक श्रीकृष्ण की अनन्य उपासक, धार्मिक आडंबरों और पाखंडों की गांधीवादी एवं अम्बेडकर वादी तरीक़ों से निर्मम हत्यारी ।

Joined January 2024
✍️समाज के दो चेहरों को देखना है तो कुमार विश्वास में देखिए और ख़ुद पर हंसिये ✍️अनैतिकताओं से बनी तुलसी तेरे आंगन की जिसकी छांव में कुमार विश्वास नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं। ✍️कुमार विश्वास लोगों को जीवन के दो बेहतरीन नियम सिखा रहे हैं जो भोग में भी हैं और मठ में भी। ✍️कुमार विश्वास देखें तो एक योगी पुरूष हैं क्योंकि वो कर्मों की व्याख्या उसके फल को चखकर लोगों को बता रहे हैं। ✍️पता नहीं क्यों अब लगता है कि वो अगर इस व्यक्तित्व के साथ भी राजनीति में पिछड़े हैं तो इसका एक बड़ा कारण उनके मित्र का उनसे भी बड़ा कर्म-साधक और फल पिपासु होना है। ✍️अनेकों अनेक नौजवानों की मेहनत के निचोड़ को निष्फल करने के बाद बने खाद्य से फलित उनके आंगन की तुलसी कुमार विश्वास की कथाओं के अर्थ का सशरीर प्रमाण है। ✍️उसको तुलसी को निहारिये और अपने सपनों को बलिवेदी पर चढ़ते देख ज़ोर से गाइये ……….. ——————-कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है ।😂😂😂 @DrKumarVishwas @Rajendra4BJP @BJP4Rajasthan @INCRajasthan @GovindDotasra @DrKirodilalBJP @VasundharaBJP @OfficeofGSD @8PMnoCM @8pm6cm @ajitanjum @ravishndtv @AnilYadavmedia1 @SupriyaShrinate @AamAadmiParty @Ramraajya @Khalbaali @Satveer___ @DrAshokJat @Dr_MonikaSingh_ @Saroj302 @AditiRajasthan @HansrajMeena @MukeshYadavIN @manphoolsaran7 @IPS_Prahlad
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हनुमान बेनिवाल जी की यह बात बताओ सब जगह फिट बैठ रही है।
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मीणावाटी / डोटासरा / मोरिया !!!!
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📍भरतपुर ! विश्वेन्द्र सिंह ने कांग्रेस डीग जिला अध्यक्ष को लेकर जो कुछ कहा था वह सच होता प्रतीत हो रहा है। बहुत चौंकाने वाली कार्यप्रणाली ग्राउन्ड पर नजर आ रही है। कम से कम किसी मोथे के लिए तो ऐसे नेता को नहीं ही खोना चाहिए कांग्रेस को क्योंकि उनकी नाराज़गी जिला अध्यक्ष और उनकी गैंग को लेकर बतायी जा रही है जिसका निशाना उन्होंने बराबर के लीडर को टारगेट कर बात पहुंचाने के लिए किया था। @INCRajasthan @INCIndia @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @ashokgehlot51 @SachinPilot
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कोई तो छूट रहा है !! कोन जगह भरेगा ?
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प्रिय @priyankagandhi @SupriyaShrinate @LambaAlka , यह अपराध तो अक्षम्य ही होना चाहिए क्योंकि राजस्थान का प्रतिनिधित्व करती @Ritubarala जैसी आवाजों को यह संदेश तो कम से कम जाना ही कि कांग्रेस के अग्रिम संगठन महिला कार्यकर्ताओं को केवल जगह नहीं उनके सम्मान और गरिमा के प्रति भी कृत संकल्पित हैं। अगर रितु का कोई अपराध था भी तो यह सीधी कार्यवाही दिवस तो था नहीं जो दिल्ली पुलिस की यह नालायक कांस्टेबल न्यायपालिका के कार्य का अतिक्रमण करने उतर गयी। डिटेंशन में एक लड़की के साथ थर्ड डिग्री का लाइव प्रसारण है जहां अन्य पुलिसकर्मी घेरा बनाकर इस अपराधिक प्रवृति की वर्दी धारी गुंडी को उकसा रहे हैं। रितु बराला को लेकर अगर डिटेंशन से इतर भी कोई पुलिसिया कार्यवाही की जरूरत थी तो वह कोर्ट के आदेशों के बाद बनती थी यह फैसले ऑन दा स्पॉट कल्चर किस के इशारे पर तय हुआ इसकी तह तो सुनिश्चित होनी ही चाहिए। राजस्थान से दिल्ली में जाने वाली यह लडकी आपके अग्रिम संगठन की कल ताकत बन खडी थी जबकि अधिकांश अधेड़ चाहे मुकेश भाकर रामनिवास गावडिया या फिर मनीष यादव कहीं नजर नहीं आये जो इन संगठनों के निचोड़ का फल खा रहे हैं कम से कम ऐसी लड़की के साथ संगठन और पार्टी कदम मिलाती प्रतीत हो ताकि लडकियों को इन संगठनों के प्रति विश्वास और प्रगाढ़ हो। रितु बराला जैसी लड़कियां सामान्य परिवार से आने वाले वो चेहरे हैं जो अगर संवारे नहीं जायें तो उनके दरकने की गुंजाइश कहीं अधिक होती है क्योंकि ये संघर्षों की तपिश से श्रृंगार करते हैं इन्हें वो ग्लैमर वाला कैमरा बहुत कम नसीब होता है जो जोशलिन जैसे चेहरों को बिना संघर्ष प्राप्त है। इसलिए यहां कार्यवाही इस उद्दण्डता और धृष्टता को तो छूनी ही चाहिए जो इस गंवार औरत ने वर्दी की आड़ में की है। @INCIndia @INCRajasthan @RahulGandhi @nsui @Rajasthan_PYC @GovindDotasra @TikaRamJullyINC
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📍 !!! भरतपुर !!! (ब्रज का रक्तांचल) (By default cm home town) श्री कृष्ण की क्रीड़ाओं का धार्मिक समावेश समेटे भरतपुर की ओर उत्तर प्रदेश से चलने वाली बाहुबली और अपराधिक गर्माहट वाली हवाओं का असर भी बराबर अन्य किसी प्रदेश से अधिक रहा है। यहां का कल्चरल समावेश उत्तर प्रदेश से निकटता अधिक महसूस करता है जिसका कारण ऐतिहासिक घटनाओं में जाने पर अबाध धार्मिक संत संन्यासियों से लेकर कृष्ण की लीलाओं को समेटे स्थल रहे हैं वहीं सामरिक दृष्टि से यह जाट महाराजा सूरजमल की शौरगाधाओं के क्षेत्र को भी उत्तर प्रदेश तक ले जाता है। आधुनिक राजस्थान के विलय के समय भी धौलपुर भरतपुर ने इन सब विशेषताओं का हवाला दे राजस्थान के प्रति उदासीनता दिखाई थी। खैर ! यह सब हो जाने के बाद जब इस प्रदेश के पिछडेपन और अपराधिकरण के कारणों की खोज में यह मालूम पड़ता है कि यहां के लोगों पर राजसी प्रभाव किसी अन्य क्षेत्र की तुलना में अधिक देखा गया साथ ही साथ यहां की राजनीति को उसी के प्रभाव में उन्होंने इकतरफा हांका। स्थानीय लोग राजनीतिक अस्थिरता से लेकर यहां के नेताओं की लोकतांत्रिक उदासीनता को इस सब के मूल कारण मानते हैं जो अपराधियों से हमेशा भाईचारावाद का सम्बन्ध निभाती रही है। कल पूर्व विधायक अतर सिंह भडाना की हत्या जो भरतपुर की बयाना सीट से BJP के विधायक रहे हैं से थोडे पीछे जाकर देखें आपको भाजपा नेता कृपाल जघीना के रक्त की बूंदे सडक पर गैंगवार की निशानी के तौर पर मिलेंगी एवं उसके बदले की भावना से पुलिस की मौजूदगी का आमोली टोलकांड जिसमें दिनदहाड़े फिल्मी स्टाइल में रोडवेज बस को छलनी कर कुलदीप जघीना हत्याकांड अंजाम दिया जिसके मूल में संरक्षणवाद की हवा चली लेकिन यहीं कहीं रह गयी एक डॉक्टर के खून को इत्मिनान से दिनदहाडे बीच बजार फैलाया गया लेकिन यहां का समाज और नेता कभी नहीं उबले क्योंकि यह उनके रोजमर्रा के घटित घटनाक्रमों में स्थान पा चुके हैं। यह मौत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं उनके शाला सखा गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह छोड़ गयी है। भरतपुर-डीग के अनेक स्थानों जिसमें कामां तहसील प्रमुख रूप से नाम आता है जहाँ अवैध खनन बड़े पैमाने पर हो रहा है जिसके वीडियो और ख़बरें अनेक बार प्रकाशित हुए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सब कुछ चुनिंदा राजनेताओं के घर भरने और उनके अपराधीकरण की प्रवृति के तहत संचालित हो रहा है। पूर्वी सीमा से सटे इस भूभाग पर उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर कल्चर की आभा लम्बे समय से बनी हुई है यहाँ के छुटभैये नेताओं से लेकर बड़े नेताओं का रंगदारी इतिहास देखने को मिलता है जो उत्तर प्रदेश के की याद दिलाता है। इसलिए माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जवाहर सिंह बेढम अभी चुनावों में व्यस्त हैं किसे डराना है किसका पर्चा खिंचाना है , साथ दे रहे हैं पूर्व कांग्रेसी विश्वेन्द्र सिंह इसलिए जनता जान माल की चिंता खुद करे और मादकता का वह खुमार उतार फेंके भजनलाल भरतपुर से कोई सरोकार रखते हैं। मोदी शाह और आप खुद अपनी योग्यता से परिचित हैं…… जिद क्यों ? नहीं सम्भल रहा भजनलाल शर्मा जी आप से प्रदेश हित में मैडम को कमान दीजिए 🙏🏻🙏🏻 @BhajanlalBjp @VasundharaBJP @INCRajasthan @BJP4Rajasthan
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प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में आरएसएस के नजदीकी माने जाने वाले, पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया के करीबी तथा बयाना के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता श्री अंतर सिंह भड़ाना जी की निर्मम हत्या राजस्थान में जंगलराज होने का प्रमाण है | स्थानीय लोगों के अनुसार, राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के कथित उकसावे के बाद पूर्व विधायक के साथ गंभीर मारपीट हुई, जिसमें उनकी जान चली गई। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मामला है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना सरकार की जिम्मेदारी है। इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब विवाद की जानकारी पुलिस को पहले से थी और भरतपुर के पुलिस अधीक्षक ने भी मीडिया के समक्ष इसकी जानकारी होने की बात कही, तो समय रहते विवाद का समाधान क्यों नहीं करवाया गया ? यदि पुलिस ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई की होती, तो शायद अंतर सिंह भड़ाना जी आज हमारे बीच होते। यह खुफिया तंत्र की विफलता के साथ-साथ पुलिस - प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। राजस्थान में कानून व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। सत्ता की नाकामी के चलते अफसरशाही हावी है और आमजन में असुरक्षा का माहौल है। हाल ही में जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के एक पुलिस थाने में कथित तौर पर सत्ता की कमान संभालने वाले RSS के एक जिला प्रचारक के कपड़े उतरवाकर पुलिसकर्मियों द्वारा उसे पेशाब पिलाने व बेरहमी से मारपीट किए जाने का मामला भी सामने आया। ये घटनाएं प्रदेश की पुलिस व्यवस्था और शासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। मैं देश के गृह मंत्री श्री @AmitShah का ध्यान राजस्थान में उनके ही दल के एक नेता एवं पूर्व विधायक की निर्मम हत्या से जुड़े इस गंभीर प्रकरण की ओर आकर्षित करते हुए यह बताना चाहता हूँ कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में आपके साथ जिन भाजपा नेताओं के फोन टेप किए जाने के आरोपों से जुड़े जिन पुलिस अधिकारियों पर सवाल उठे थे, उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल जी शर्मा की सरकार ने फिर से महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर रखा है | मेरी मांग है कि अनुभवहीन भरतपुर रेंज आईजी एवं भरतपुर जिला पुलिस अधीक्षक को तत्काल पद से हटाया जाए, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म को पद से हटाकर उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए,चूंकि स्थानीय लोगों द्वारा हत्या के आरोपियों और गृह राज्य मंत्री के बीच करीबी संबंध होने के संदर्भ में किए जा रहे दावों की भी स्वतंत्र रूप से जांच आवश्यक है इसलिए पुरे मामले की जांच सीबीआई को दी जाये | दिवंगत पूर्व विधायक श्री अंतर सिंह भड़ाना जी मेरे भी अच्छे मित्र थे। उनके असामयिक निधन से मुझे व्यक्तिगत रूप से गहरा दु:ख पहुंचा है। मैं उन्हें पुनः श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। @PMOIndia @BhajanlalBjp @RajCMO @PoliceRajasthan
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!!!!!भरतपुर में तो सब सहेगा राजस्थान!!!!! (ब्रज की गलियों का रंक्तांचल) प्रिय राजेन्द्र @Rajendra4BJP , आपके स्वास्थ्य लाभ की कामना में बड़ी ज़िम्मेदारी से यह पूछना चाहती हूँ और कब तक सहेगा राजस्थान ? आपसे पूछने का कारण इस लिए बनता है क्योंकि यह सब टर्मोलॉजी आपकी गढ़ी हुई है जिसकी आँच पर आपने वोटों की फ़सल पर पकाई है। मुख्यमंत्री से यह सवाल नहीं पूछे जाने का कारण आप जानते हैं क्योंकि वे इस सब की समझ रखने वाले कभी नहीं समझे गये हैं यही कारण है कि बचाव पक्ष में आज भी आप जैसे हारे हुए प्रत्याशी को ही उतारा जाता है। अगर आप अपने साथी पूर्व विधायक की मौत पर भी चरणवंदना एवं निपटाओ कल्चर के साक्षी बने रहना चाहते हैं बिना प्रश्न के अयोग्य नेतृत्व पर तो आप जैसे लोगों को सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेकर आम जन पर उपकार करना चाहिए। राजेन्द्र जी कोई तो जिम्मेदार होगा ही कोई और नहीं तो आप खुद ही जिम्मेदारी ले लीजिए आपको कोई इस्तीफा वगैरह भी नहीं देना होगा क्योंकि अघोषित दखलंदाजी तो सरकार में आप भी कर ही रहे हैं ना जब हर झूट और अकर्मण्यता पर माइक थामे ऊल जुलूल दलीलें भजनलाल शर्मा के लिए देते हैं। महाशय आपकी हार में मजबूत होते लोकतंत्र का भान करें और आपकी जनता को गुमराह करने वाली दलीलों को याद कर पर्चीलाल से इतना तो पूछ ही सकते हैं ——- “तू यार कहा करेगो भाई तौपे जब भरतपुर नाएं समर रो” @INCRajasthan @BJP4Rajasthan
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सत्ता की मलाई !!!
राजस्थान मे विपक्ष के हालात!
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पुलिसिया मानसिकता का नंगा नाच !! जब नेहा बोरा को आसानी से जब डिटेन किया जा सकता था तब यह मानसिकता दिखाती है पुलिस किस तरह की मानसिकता लेकर इस आंदोलन को कुचलने निकली है।
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Listen carefully, A very deep psychological fact and study report about police behaviour, narrated by a unknown girl. @neha_aisa @LambaAlka @SupriyaShrinate @NayakRagini
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“आग को पानी का डर “!! शेक्सपीयर के नोबेल “मैकबैथ” पर बनी मूवी “मक़बूल” में नसीरुद्दीन शाह जब यह बोलते हैं की —“आग को पानी का डर बना रहना चाहिए” यह राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस के उस शक्ति संतुलन में अब दृष्टिगोचर होने लगा है जो धीरे धीरे चतुष्कोणीय रूप लेता जा रहा है। लंबे समय से एकध्रुवीय चली आ रही है राजस्थान कांग्रेस की सियासत को द्विध्रुवीय संतुलन से पाटने की कोशिश सचिन पायलट ने पहली बार की थी लेकिन वे आलाकमान के धैर्य से ही संतुलन नहीं बिठा पाए और अमित शाहमयी राजनीति के वशीभूत बने बनाये शक्ति के संतुलन को खो बैठे और मानेसर जाकर फिर से राजस्थान कांग्रेस में गहलोत काल की वैलिडिटि का रिचार्ज करा आये। उसी शक्ति संतुलन में दोबारा से आग को पानी का डर दिखाने की जुर्रत कर रहे हैं PCC चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और दबे कदमों से शिकार करना चाहते हैं टीकाराम जूली। जहां तक राजस्थान के ध्रुवीय संतुलन की बात है तो वह चुनाव आते आते स्पष्ट तौर पर चतुष्कोणीय दिखेगा जहां चारों अजगर की तरह अधिक से अधिक मैन पॉवर निगलने की क्षमता में पेट का आकार बढा रहे हैं। जी हाँ सही अनुमान लगा रहे हैं पहले से मौजूद दो प्रतिद्वन्द्वी भले ही एक दूसरे के प्रति सहज हो गये हों और सचिन पायलेट ने गहलोत युग को स्वीकार कर लिया हो लेकिन दो नये प्रतिद्वन्द्वी गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली उस प्रतियोगिता को रोचक खेल के नियमों का पालन करते हुए बनाना चाहते हैं। जहां टीकाराम दलित चेहरे के तौर पर अपने क्षेत्र में अति सक्रियता और प्रदेश व्यापी दौरों के साथ-२सदन से अपनी दावेदारी की धुंआ NCR पट्टी से जोड रहे हैं वहीं वर्तमान PCC चीफ अपने तेज तर्रार तेवर और संगठनात्मक कौशल के बलबूते कांग्रेस को बीजेपी पर एज दे रहे हैं। राहुल गांधी के बाद अगर RSS और उसकी विचारधारा पर वैचारिक तौर पर कोई अति आक्रमकता से हमला करता हुआ प्रतीत होता है तो वह उत्तर भारत में नेतृत्व से नये डी के शिवकुमार के तौर उभर रहे शेखावाटी प्रदेश से आने वाले वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा हैं जो कांग्रेस का गढ़ भी माना जाता है। शक्ति के संतुलन को बड़ी धीमी आँच पर अगर किसी ने पकाया भी है तो वो ख़ुद कांग्रेस आलाकमान है जो दो बार अनुशासनहीनता के चलते ख़ुद के ही घर में मानेसर घटना और अशोक गहलोत की बगावत झेल चुका है। कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी के मस्तिष्क में यहीं से “आग को पानी का डर” उत्पन्न करने का फ़ॉर्मूला जन्म लिया जिसमें उन्होंने सचिन पायलट और अशोक गहलोत की बार्गेनिंग पावर को दो और प्रतिद्वंदियों के बीच बाँट दिया जो सही मायनों में अनुशासन बनाए रखने के लिए शक्ति का संतुलन कहा जा सकता है। @INCRajasthan @INCRajasthan @RahulGandhi @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @ashokgehlot51 @SachinPilot @SumitBhagasara
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राक्षसों का सनातनी तांडव !!🚩🚩
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अनशन इवेंट !! नरेश मीणा को अव्वल तो अब युवा भी नहीं कहा जाना चाहिए वे उम्र की अधेड़ता वाले चौड़े सिड्डे पर जा बैठे हैं भले ही राजनीति उन्हें यह मानने की इजाजत नहीं देती हो। खैर उम्र तो आनी जानी हैं, सडकें ही असल कहानी हैं !!!!!! सडकों पर नरेश मीणा हर बार यह सोच के उतरते हैं अबकी बार शायद भगत सिंह दिखे लेकिन वो भूल जाते हैं कि भगत के परिणाम व्यवस्था परिवर्तन को लेकर थे ये रोज हेर फेर कर अनशन का गिलास बिना तपस्या थामने वाले नहीं। नरेश को अब विशुद्ध राजनेता की तरह पेश आना चाहिए यह घडी-२ क्रान्तिकारी वाला चोला उतार फेंकना चाहिए। क्रान्तियों के कुछ तय मानक होते हैं जो नरेश ने भी पढ़े होंगे मैं यह उम्मीद करती हूँ। उनकी आचार संहिता का पालन करना नरेश मीणा उम्र के इस पड़ाव में भी नहीं सीख पाये हैं। किसी भी संगठन और क्रान्ति के मूल में होता है अनुशासन और सदस्यों के प्रति सम्मान जो उनके व्यक्तित्व का चिरंतर विकार है। उग्र से उग्र क्रान्तिकारी ने भी साथियों के प्रति आदर भाव को अपनाया है और किसी भी रोष का प्रकटीकरण केवल व्यवस्था के खिलाफ उतारा है ठीक इसके विपरीत नरेश अपने रोष की आहूति में हमेशा खुद के साथ चलते भोले और निश्छल साथियों को जलाते हैं भोले इसलिए की सब पता होकर भी चले आते हैं वही लात थप्पड खाने। नरेश मीणा केवल अपने मार्ग को यह कहकर ठेलना चाहते हों कि वे उग्र हैं गुस्सा है तो यह कतई जस्टिफाई नहीं करता कि जनता उनकी उस उद्दण्डता से नजरें फेर ले जो खुली सडकों पर किसी को मारने और गालियां देने पर प्रकट होती रहती है। नरेश के स्वाभावगत दिशा हीनता के चलते ना केवल वे आलोचना के पात्र बनते हैं बल्कि वे हर आंदोलन को जिस स्ट्राईक रेट से संचालित करते हैं उसकी परिणिति डेथ ओवर तक मटियायामेट में ही होती है। @NareshMeena__
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Come on colonel Rajyavardhardhar ! Come on ! You can do it , at least shoot these bastard. Come on you can do it as a retired army official at least. Is it proud moment mister rajyawarddhan ? @Ra_THORe @pcc @withabhinsui
प्रिय राज्यवर्धन राठौर, एक खिलाडी के तौर पर आपकी उपलब्धियां मुझे और तमाम भारतवंशियों जिनमें राहुल गांधी भी हैं वो खुशी देती हैं और गर्व करने का अनुभव कराती हैं लेकिन आपने जिन मुद्दों का जिक्र किया है वो एक राष्ट्र भक्त होने के नाते एक प्रोपेगेंडा के तौर पर किया गया एक छलावा नहीं तो क्या है ? १ एयर स्ट्राइक कब तब बेचते रहोगे जब पुलवामा का जवाब हर राष्ट्रभक्त के ज़हन में हो ! २ कौनसी वैक्सीन जिसपर ब्रिटेन के तमाम स्टडी और Result यह बता रहे हैं कि ह्रदयघात का एक कारण हो सकता है और देश ने शादियों के नाच को मातम बनते अनेक विडियों में देखा जिन मौत की कोई वजह आज तक बतानी जरूरी नहीं समझी गयी। ३ २१ वीं सदी के लोग आप जैसों की वजह से भारत की गौरवशाली परम्परा का मखौल उडाते हैं जब लाशें गंगा में तैरी और कोई दाड़ी बढाकर रैली कर रहा था जिस रोग के मूल में ही सोश्यल डिस्टेंसिंग था वह गौरव गान तुम्हें मुबारक ! ४ तुम्हारी पार्टी से ज्यादा राहुल गांधी के सिंटिंग सांसद और विधायकों के वो क्षण और मेडल हैं जिन्होंने भारत का राष्ट्र गान अनेक पोडियम पर बजवाया वो कांग्रेस और राहुल गांधी की खिलाडियों के प्रति सोच और सम्मान का प्रतीक है। ५ एक महिला पदकवीर जिसको बेटी बोल कर आया एक कायर उसकी व्यथा सुनने की हिम्मत जंतर मंतर जाकर नहीं जुटा सका क्या किसी महिला को उस पर गर्व करना चाहिए ? ५ हर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भारत अमेरिकी ज़लालत सहने को मजबूर है क्यों तब भी भारतवासियों को तुम्हारे झूठे एजेंडे पर विश्वगुरु होने का गुमान करना चाहिए ? ६ घर नारों से नहीं उस मेहनत की कमाई से चलता है जिसे मध्यम वर्ग आपके कमज़ोर विश्व गुरु की विदेश नीतियों के चलते ख़ुद की गाडियों का कबाड होते देख रहा है और गन्ने के जूस से सस्ता होने वाले तेल को महँगा ख़रीद रहा है। ७ आप जैसे चाटुकार नेताओं ने देश प्रेम से अधिक व्यक्ति पूजा के बलबूते इस देश की अर्थव्यवस्था संवैधानिक संस्थाओं और समाज को एक ऐसे व्यक्ति के हाथों जोड़ तोड़ करने के लिए खुला लाइसेंस दे दिया है जो कभी भी झोला उठाकर भागने के लिए रेडी टू मूव है। ८ रही बात न्यायपालिका की तो राहुल गांधी ने जो संदेह जताया था उसका एक उदाहरण तो अभी अपने ही प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के जज ने राजस्थान हाईकोर्ट के साहब पर ही टिप्पणी से ही नाप लेते। Come on, राज्यवर्धन Come on, you can do it अगर अतीत की गलतियों को सुधार नहीं सकते तो उनकी गौरवान्वित मादकता जैसा भ्रम पालना भी देशद्रोह है। इस तरह की नौटंकियों से देश चलाया जा रहा है और उम्मीद देश की जनता से तुम्हारे झूठे गर्व पर चिल्लाने की करते हो। @Ra_THORe @madanrrathore @BJP4Rajasthan @INCRajasthan @Rajasthan_PYC @withabhinsui
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प्रिय राज्यवर्धन राठौर, एक खिलाडी के तौर पर आपकी उपलब्धियां मुझे और तमाम भारतवंशियों जिनमें राहुल गांधी भी हैं वो खुशी देती हैं और गर्व करने का अनुभव कराती हैं लेकिन आपने जिन मुद्दों का जिक्र किया है वो एक राष्ट्र भक्त होने के नाते एक प्रोपेगेंडा के तौर पर किया गया एक छलावा नहीं तो क्या है ? १ एयर स्ट्राइक कब तब बेचते रहोगे जब पुलवामा का जवाब हर राष्ट्रभक्त के ज़हन में हो ! २ कौनसी वैक्सीन जिसपर ब्रिटेन के तमाम स्टडी और Result यह बता रहे हैं कि ह्रदयघात का एक कारण हो सकता है और देश ने शादियों के नाच को मातम बनते अनेक विडियों में देखा जिन मौत की कोई वजह आज तक बतानी जरूरी नहीं समझी गयी। ३ २१ वीं सदी के लोग आप जैसों की वजह से भारत की गौरवशाली परम्परा का मखौल उडाते हैं जब लाशें गंगा में तैरी और कोई दाड़ी बढाकर रैली कर रहा था जिस रोग के मूल में ही सोश्यल डिस्टेंसिंग था वह गौरव गान तुम्हें मुबारक ! ४ तुम्हारी पार्टी से ज्यादा राहुल गांधी के सिंटिंग सांसद और विधायकों के वो क्षण और मेडल हैं जिन्होंने भारत का राष्ट्र गान अनेक पोडियम पर बजवाया वो कांग्रेस और राहुल गांधी की खिलाडियों के प्रति सोच और सम्मान का प्रतीक है। ५ एक महिला पदकवीर जिसको बेटी बोल कर आया एक कायर उसकी व्यथा सुनने की हिम्मत जंतर मंतर जाकर नहीं जुटा सका क्या किसी महिला को उस पर गर्व करना चाहिए ? ५ हर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भारत अमेरिकी ज़लालत सहने को मजबूर है क्यों तब भी भारतवासियों को तुम्हारे झूठे एजेंडे पर विश्वगुरु होने का गुमान करना चाहिए ? ६ घर नारों से नहीं उस मेहनत की कमाई से चलता है जिसे मध्यम वर्ग आपके कमज़ोर विश्व गुरु की विदेश नीतियों के चलते ख़ुद की गाडियों का कबाड होते देख रहा है और गन्ने के जूस से सस्ता होने वाले तेल को महँगा ख़रीद रहा है। ७ आप जैसे चाटुकार नेताओं ने देश प्रेम से अधिक व्यक्ति पूजा के बलबूते इस देश की अर्थव्यवस्था संवैधानिक संस्थाओं और समाज को एक ऐसे व्यक्ति के हाथों जोड़ तोड़ करने के लिए खुला लाइसेंस दे दिया है जो कभी भी झोला उठाकर भागने के लिए रेडी टू मूव है। ८ रही बात न्यायपालिका की तो राहुल गांधी ने जो संदेह जताया था उसका एक उदाहरण तो अभी अपने ही प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के जज ने राजस्थान हाईकोर्ट के साहब पर ही टिप्पणी से ही नाप लेते। Come on, राज्यवर्धन Come on, you can do it अगर अतीत की गलतियों को सुधार नहीं सकते तो उनकी गौरवान्वित मादकता जैसा भ्रम पालना भी देशद्रोह है। इस तरह की नौटंकियों से देश चलाया जा रहा है और उम्मीद देश की जनता से तुम्हारे झूठे गर्व पर चिल्लाने की करते हो। @Ra_THORe @madanrrathore @BJP4Rajasthan @INCRajasthan @Rajasthan_PYC @withabhinsui
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सुमित भगासरा ! (छात्र राजनीति का जेन्टलमैन चेहरा) सम्पन्न परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुमित भगासरा राजस्थान राजनीति में छात्र इकाई से पदार्पण करने वाला जेन्टलमेंट पक्ष के कुछ विरले चेहरों मे से हैं। सुमित भगासरा छात्र राजनीति के उस दौर के प्रोडक्ट हैं जब छात्रसंघ चुनाव बहाली का बेहद आक्रामक उत्सव मनाया जा रहा था और स्टूडेंट पोलिटिक्स हॉस्टलरों से वोट अधिकार का वैलिडेसन मांग रही थी। सुमित इस सब के बीच पल रहे एक सामान्य छात्र जो बिना हॉस्टल के प्रविलेज लिए अपनी धीमी और सभ्य आवाज में दावेदारी जता रहा स्टूडेंट पॉलिटिक्स का वह चेहरा था जो सच में वह किरदार था जिसकी कल्पना इन चुनावों के मूल में की गई थी लेकिन यही तो खूबसूरती है भारतीय लोकतंत्र की अगर आप मानक प्रक्रिया का हिस्सा हैं तो काहे की लोकप्रियता और काहे के नेता। सुमित हाइली एजुकेटेड राउंड टेबल टाक पालिटिक्स को डेपिक्ट करती नेक्सट जेन की कल्पना में संजोये मुद्दों को समय पूर्व लठ्ठों के बीच बेच रहे थे यही कारण था कि मुकेश भाकर और मनीष यादव की दुकानों के ग्राहक उनमें आकर्षण नहीं खोज पाते थे। वे कालखंड के उस दौर में समय के चक्र को तेजी से नापने के नापाक इरादे उस दौर के हिसाब से लिये थे जो आज के दौर की तस्दीक है और आज उसे बेहतर समझा पाते। इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि आज के दौर की किसी भी संभ्रांत सभा और टेबल पर अगर निमंत्रण पत्र छपते हैं तो सुमित भगासरा का नाम मुकेश भाकर और मनीष यादव से पहले उस सभा को संबोधित करने के लिए लिखा जाएगा। सुमित उस दौर की समझ और मांग से थोडे आगे निकल गये थे जहां मैं खुद आज लिखते हुए यह कहने से कोई संकोच नहीं कर पा रहीं हूँ कि उन्हें वोट तो मैं खुद नहीं कर पायी थी क्योंकि मैं भी वहीं कहीं तो पल बढ रही थी हवा मुझतक भी वही बही आ रही थी जो वातावरण संदूषण का कार्बन मय घेरा विश्वविद्यालय की अन्य बिल्डिंग्स को घेर रहा था। @SumitBhagasara @INCRajasthan
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साईमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपत राय जब आंदोलन कर रहे थे तो अंग्रेजों ने लाठीचार्ज किया जिसके चलते अंत में वे शहीद भी हुए !! उस लाठीचार्ज की तुलना अभिषेक चौधरी राहुल गांधी के मार्च से कर रहे हैं जो मोदी सरकार की वोट चोरी के खिलाफ है जिसके आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लग रहे हैं। @withabhinsui
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विश्वेन्द्र सिंह ! (राजसी मानसिकता को ठेलते लोकतांत्रिक प्रत्याशी) विश्वेन्द्र सिंह का किसी भी पार्टी में होना केवल उन्हें मजबूत करता है ना कि किसी पार्टी या संगठन को, उनके तुनकमिजाजी के कारनामे नये नहीं हैं—- यह साल था 2018 कांग्रेस के तत्कालीन pcc चीफ सचिन पायलेट राहुल गांधी की रैली का वैन्यू रखते हैं करौली जो पहले भरतपुर होने वाला था लेकिन विश्वेन्द्र सिंह की इन्हीं तुनकमिजाजी को वे अपने कार्यकाल में कई बार झेल चुके थे और हर बार मिन्नत करने से बचना चाहते थे इसलिए वैन्यू का स्थान उन्होंने गुर्जर-मीणा बाहुल्य इलाके में रखना उचित समझा ताकि किसी भी तरीके की निर्भरता इनपर ना रहे। करौली में रैली सचिन पायलेट और रमेश मीणा जो सचिन पायलेट खेमे के माने जाते थे के चलते सफल रही लेकिन वहां भी विश्वेन्द्र सिंह मंच से वही ठट्टे करते नजर आये और बिन मांगी नसीहत जो नसीहत कम खुले मंच पर अनुशासनहीनता अधिक थी कर आये “ कांग्रेस चुनाव जीत जाती है विधायक दल की बैठक चल रही होती है जिसमें एक लाईन का प्रस्ताव पारित कराने आब्जर्वर आते हैं कि मुख्यमंत्री का फैसला आलाकमान करेगा लेकिन विश्वेन्द्र सिंह विधायक दल की मीटिंग से उठकर होटल में जा बैठते हैं और आलाकमान के रिजोल्यूसन का विरोध करते हुए बोलतै हैं जब फैसला आलाकमान को ही करना था तो हमें क्यों बुलाया यहाँ ? उसके बाद वे मानेसर कांड के प्रमुख किरदारों में रहे जो कि कांग्रेस आलाकमान को नीचा दिखाने और कांग्रेस सरकार बीजेपी की गोद में बैठ गिराने का ही एक षडयंत्र था। विश्वेन्द्र सिंह की राजनीति में अनुशासन का अभाव और पार्टी लाइन की अवहेलना मूल में रहा है जो हालिया उनके pcc चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ दिये बयानों से भी प्रमाणित होता है। राजनीति की जो शैली विश्वेन्द्र सिंह की है वह हर पार्टी को उनके प्रति शंकित रखती है जो पार्टी अनुशासन से हमेशा अलग रुख लिए रहती है। वह पार्टी संगठन को केवल अपनी चुनावी अर्दली टीम के तौर पर ही स्वीकार कर सकते हैं ना कि कार्यकताओं के सम्मान और जुडाव तक। @INCRajasthan @Chiranjeev_INC @Sukhjinder_INC @GovindDotasra
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PCC का शक्ति का डिसेंट्रालाइजेशन फॉर्मूला गोविंद सब के हैं !!!!! गोविंद सिंह डोटासरा के हस्ताक्षर मरू प्रदेश की रेत से हाडौती के पठारों को छूकर पूर्वांचल पर समय से पूर्व दस्तक देने लगे हैं किसी भी दल को अपने क्षेत्रीय इकाई प्रमुख से परिणामों में तब्दील होते इसी नेतृत्व की उम्मीद होती है। भाजपा अपने संगठन की वजह और तौर तरीकों से जानी जाती है लेकिन जिस तरह डोटासरा ने राजनितिक आक्रमकता से प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नेतृत्व किया है वह राजस्थान में कम से कम इस मामले पर कांग्रेस को एज देता है। हाल तक प्रदेश कांग्रेस शक्ति के सेंट्रलाइज दौर से गुजरती रही है जिसमें पूर्व के नेतृत्वकर्ताओं ने अशोक गहलोत के रहमो कर्म पर संगठन पर शासन किया जिसमें अप-टू-बॉटम का दृष्टिकोण ही प्रबल रहा।।। इस पद्धति में एक परिवर्तन सचिन पायलेट दौर में आया जब सरकार यानी गहलोत के रहमोकरम वाला कॉलम उन्होंने खाली रखना शुरू किया लेकिन शक्ति अभी भी कार्यकताओं की अरदली से उपजित अध्यक्षीय बनी रही और कार्यकर्ता केवल शोषित बने रहे।।।।। फिर दौर आया कार्यकर्ता से नेतृत्वकर्ता बने गोविंद सिंह डोटासरा का जिसमें शक्ति के संकुचन को नेतृत्व का आधार मानने से इनकार किया और उसे स्थायनीय स्तर की पहचान दी जो अक्सर बीजेपी संघ या फिर कॉमरेडों की ताकत माना जाता रहा है। कांग्रेस का हर अंचल अब नियुक्तियों से लेकर आदेशों तक में शक्ति के विकेन्द्रीकरण को महसूस करने लगा जिसने स्थानीय कार्यकताओं को वह विश्वास दिलाया की संगठन में उनकी भागीदारी है और यही उनकी पहचान है। जिले से लेकर ब्लॉक तक नेता से लेकर अध्यक्ष तक जो संवाद कडी का एक तंत्र गोविंद सिंह के नेतृत्व में खडा हुआ है वह कारण है कि कांग्रेस के आने की दस्तक समय पूर्व राजस्थान में देने लगी है। आलोचनाओं से परे कोई नहीं है गोविंद सिंह भी शुरुआती दिनों में अशोक गहलोत की छांव में पले बडे वहां कांग्रेस संगठन निष्क्रय ही नजर आया लेकिन जब से उन्होंने उस आदेशात्मक प्रणाली को त्याग संगठन सृजन किया है वहीं से उनके प्रति पुराने मठाधीशों की असहजता जोर पकड़ने लगी क्योंकि अब कार्यकताओं के दौरे संगठन के मार्फत दिल्ली तक आंदोलनों या रूटीन नियुक्तियों की रिकमेंन्डेसन का हिस्सा बन रहे थे जिसने जी हूजूरी प्रणाली पर गहरी चोट की।।।।।।। @INCIndia @INCRajasthan @Chiranjeev_INC @SupriyaShrinate @SumitBhagasara @Rutvik_Makwana_
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