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Let's meet on 08:30pm today (12/10/2026)
#EducationAndDrmocracy
#JohnDewey
#BabaSabhab
#MahatmaPhule
#EducateAgitateOrganise
#विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी, नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया, वित्त बिना शूद्र गए, इतने अनर्थ, एक अविद्या ने किए।"
#सिर्फ_सत्ता_बदलने_से_सामाजिक_परिवर्तन_नहीं_आता
जो लोग आज से पाँच, दस या पंद्रह साल पहले भी सत्ता परिवर्तन या सत्ता के विरुद्ध विद्रोह की बातें कर रहे थे, वही आज भी वैसा ही कर रहे हैं।
ये सिर्फ टिप्पणी नहीं, सोच का आईना है जनाब। जब ऐसे मामले इनके सामने न्याय के लिए आए होंगे, तब SC/ST के प्रति इनका न्याय-बोध और नजरिया कैसा रहा होगा, यह सोचने वाली बात है। कुंठा इतनी गहरी है कि अब तर्क और तथ्य की जगह झूठी व भ्रामक बातें तक परोसी जा रही हैं।
#CasteDiscrimination
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“अम्बेडकर बीसवीं सदी के महानतम विधिक और राजनीतिक विचारकों में से एक थे,अम्बेडकर ने जॉन डीवे के कार्यों को आधार बनाते हुए बौद्ध प्रज्ञावाद (Buddhist Pragmatism) का एक विशिष्ट रूप विकसित किया।"
— मार्था सी. नुसबाम, शिकागो विश्वविद्यालय
#बौद्ध_प्रज्ञावाद_वास्तव_में_है_क्या_?
सार्वजनिक कार्यों में काम करने वाले लोगों का वर्गीकरण किया जाय तो ऐसा दिखाई देगा कि कुछ लोग “नाम के वास्ते” तो कुछ लोग “काम के वास्ते” सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करते हैं। किन्तु उनमें नाम के वास्ते ही काम करने वालों की संख्या अधिक होती है।
#Jay_Bhim_Jay_Bharat
“जब मैं अमेरिका और यूरोप से पढ़ाई पूरी करके लौटा, तो मुझे डिस्ट्रिक्ट जज का पद ऑफर किया गया। तीन साल में हाईकोर्ट में पदोन्नति का वादा भी था। मैंने वह ऑफर ठुकरा दिया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि सरकारी नौकरी के आकर्षक बंधन मुझे अपने लोगों की सेवा करने से रोकें।”-1951,डॉ.बाबासाहेब
“हमारे समाज की सर्वांगीण उन्नति के लिए मैं पूरी शक्ति और प्रामाणिकता से प्रयास करूँगा। इसी कार्य के लिए मैंने इतना अभ्यास किया है। मैं अपनी प्राप्त ज्ञान-शक्ति का उपयोग केवल अपने परिवार या जाति के लिए नहीं करूँगा। मैं इसका उपयोग संपूर्ण अछूत समाज के आंदोलन के लिए करने वाला हूँ।"
क्या देश के किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को *स्कूल ठीक करो अभियान* से आपत्ति हो सकती है? स्कूलों और शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाला कोई भी अभियान स्वागत योग्य है। देश के हर जिम्मेदार नागरिक को इसमें भागीदारी करनी चाहिए।
क्या देश के किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को "स्कूल ठीक करो अभियान" से आपत्ति हो सकती है? स्कूलों और शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाला कोई भी अभियान स्वागत योग्य है। देश के हर जिम्मेदार नागरिक को इसमें भागीदारी करनी चाहिए।
@abhijeet_dipke
शक्ति दास निम(Shakti Das Nim) retweeted
When the Government wanted to grant more licenses for liquor-shops in Pune Municipality, Mahatma Jyotiba Phule wrote a letter to Plunket, President of Pune municipality’s acting committee highlighting ill effects of consumption of alcohol on the people and society.
He condemned this move, as he believed that addiction to liquor would ruin many poor families.
"शराब का शौक नागरिकों के नैतिक आचरण के लिए हानि पहुंचाने वाला है। इतना ही नहीं, उनके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत खतरनाक है , यह मेरा कहना शायद सभी लोगों को अस्वीकार नहीं होगा। शराबखाने जब से शहर की बस्तियों में शुरू किये गए, तब से दारूबाजों की संख्या इस हद तक बढ़ गयी है कि उससे कई परिवारों का पूरी तरह से विनाश हुआ है और इस गंदे आचरण की अब शहर को आदत सी हो गयी है।"
क्रांतिज्योति महात्मा ज्योतिबा फुले जी
#NashaMuktBharat #NashaMukti #QuitAlcohol #NoDrugs
शक्ति दास निम(Shakti Das Nim) retweeted
आरक्षण हटाने कि बात करने वाले इन 11 प्रश्नों पर दुम दबा कर भाग खड़े होते है।
1. यदि जाति समाप्त हो गई है तो अधिकांश विवाह आज भी जाति के भीतर क्यों होते हैं?
2. यदि आरक्षण से पहले व्यवस्था मेरिट-आधारित थी, तो संस्थानों में सभी जातियों का समान प्रतिनिधित्व क्यों नहीं था?
3. “अनारक्षित” सीट को किसी विशेष जाति की निजी सीट(EWS) किस कानून ने बनाया?
4. सरकारी स्कूल, निजी कोचिंग और पारिवारिक संसाधनों का अंतर मेरिट में क्यों नहीं गिना जाता?
5. राजनीतिक आरक्षण की दस वर्ष की अवधि को शिक्षा और नौकरी के आरक्षण पर क्यों चिपकाया जाता है?
6. EWS मिलने के बाद भी जाति-आधारित आरक्षण हटाने की मांग क्यों?
7. भारत में कुल जॉब के 97 % से भी ज़्यादा जगहों पर आरक्षण नहीं फिर भी ये क्षेत्र ग्लोबली भारत का स्थान टॉप कराते क्यो नहीं दिखते है? ग्लोबल स्तर पर भारत नीचे टॉप दिखता है मैक्सिमम स्थानों में।
8. आरक्षित अभ्यर्थी के अंक पूछे जाते हैं, लेकिन सिफारिश, मैनेजमेंट कोटा, निजी कॉलेज डोनेशन और पारिवारिक नेटवर्क को मेरिट क्यों कहा जाता है?
9. गुणवत्ता गिरने का आरोप लगाने वाले जातिवार कार्य-प्रदर्शन का प्रमाण क्यों प्रस्तुत नहीं करते?
10. प्रतिनिधित्व की मांग को जातिवाद कहने वाले सत्ता-संस्थानों में पुराने जातिगत वर्चस्व को क्या नाम देंगे?
और फाइनली
11. जब इतना ही दर्द है SC/ST/OBC के प्रतिनिधित्व से तो जाति जनगणना क्यो नहीं करवा लेते ताकि पता तो चले किस किस जाति के पास कितना संशाधन है और कौन किसका हक मार के खा रहा है?
शक्ति दास निम(Shakti Das Nim) retweeted
-40 नंबर पर मेडिकल में एडमिशन हुआ एक्सपोज़्ड। SC/ST/ओबीसी ने नहीं जनरल लड़के ने लिया था सबसे कम मार्क्स पर एडमिशन।
लड़के ने पूरी पोल सबूतों के साथ खोल दी। Must Watch
शक्ति दास निम(Shakti Das Nim) retweeted
Right now Abhijeet Dipke is the most popular person in India, equal to Narendra Modi. In just 2–3 months, there will be Lok Sabha elections for the Bashirhat seat in West Bengal and two other seats in Assam. He should immediately contest from Bashirhat on the CJP ticket. All other opposition parties should support him.
नेहा, आपका जज़्बा और बिना किसी क्रेडिट की सस्ती होड़ के लगातार काम करते रहना काबिल ए तारीफ़ है। मैं आशा करता हूं, कि आप केवल विरोधक नही , बल्कि अच्छे नीति निर्माता बने।
जय भीम ! जय भारत !
शक्ति दास निम(Shakti Das Nim) retweeted
दलितों को अब CJP/Student Protest को छोड़ देना चाहिए। यदि इस आंदोलन से कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियाँ मजबूत होती हैं, तो सत्ता में आने के बाद वे दलितों को फिर उसी लंबे संघर्ष में धकेल सकती हैं, जैसा अतीत में हुआ है, और इसकी कीमत दो-तीन पीढ़ियों को चुकानी पड़ सकती है।
बीजेपी का कमजोर होना अच्छी बात है, लेकिन कांग्रेस जैसी पार्टियों का मजबूत होना दलितों के लिए उतना ही खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा, सरकार कभी भी आंदोलन के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर सकती है। ऐसे में विरोध प्रदर्शन कर रहे दलित युवाओं को लंबी कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है और उनका भविष्य वर्षों तक प्रभावित हो सकता है।
जिस आंदोलन से दलितों को कोई ठोस लाभ मिलने की संभावना नहीं है, उसमें फँसकर अपनी ऊर्जा, समय और भविष्य को दाँव पर लगाना समझदारी नहीं है।















