195 मछली प्रजातियाँ… और ये सिर्फ एक नदी की कहानी है!
कृष्णा नदी तंत्र में 195 fish species की पहचान की गई है, जिनमें से 187 को validly occurring माना गया है।
Indian carp से लेकर catfish तक—कृष्णा की जल-जैव विविधता अपने भीतर एक पूरी दुनिया समेटे हुए है।
और यही हमें याद दिलाता है कि नदी सिर्फ बहता हुआ पानी नहीं है।
उसके पानी में मौजूद हर जीव भी उसके स्वास्थ्य और प्राकृतिक संतुलन की कहानी कहता है।
कृष्णा की इस अनदेखी जलीय दुनिया को जानिए।
कृष्णा को जानें। उसका महत्व समझें। उसका भविष्य बचाएँ।
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दिनांक 17 अक्टूबर 2026 को श्री जैगम अली खान, संयुक्त सचिव, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (NRCD), जल शक्ति मंत्रालय एवं सदस्य (वित्त), केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) ने बरेली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 8वीं पीएसी परिसर में पीआईबी पैकेज-VI के अंतर्गत स्थापित पीजोमीटर एवं वास्तविक समय भूजल निगरानी व टेलीमेट्री प्रणाली का निरीक्षण किया तथा प्रभाग-16, बरेली के कार्यों की समीक्षा की।
बरेली छावनी परिषद में उन्होंने नकटिया नदी पुनर्जीवन कार्यों के तहत भूजल पुनर्भरण हेतु बनाई गई खाइयों का अवलोकन किया और नदी तट पर पौधारोपण में भाग लिया।
ये प्रयास भूजल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और पर्यावरणीय संतुलन को बढ़ावा देते हुए जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
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नदी के किनारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी भी चलती है और विकास भी… तो दोनों के बीच संतुलन कैसे बने?
मछली पकड़ने, नावों के आवागमन और पशुओं की चराई से लेकर बस्तियों, पानी के इस्तेमाल और विकास की गतिविधियों तक—नर्मदा से लोगों की अनेक ज़रूरतें जुड़ी हैं।
एक अध्ययन में नर्मदा के आसपास मानवीय गतिविधियों और दबावों के 18 प्रकार दर्ज किए गए। इनमें से 11 नदी-खंड ऐसे थे, जहाँ 10 से अधिक प्रकार के दबाव एक साथ मौजूद थे।
यह जानकारी किसी एक गतिविधि को दोष देने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर योजना बनाने और सही जगह पर सही कदम उठाने के लिए महत्वपूर्ण है। ताकि लोगों की ज़रूरतें पूरी हों, विकास आगे बढ़े और नर्मदा का प्राकृतिक जीवन भी सुरक्षित रहे।
आपके विचार में नर्मदा के साथ विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के लिए सबसे ज़रूरी कदम क्या है? कमेंट में बताइए।
नर्मदा को जानें। उसका महत्व समझें। उसका भविष्य बचाएँ।
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सुबह खेतों की सिंचाई से लेकर घरों तक पानी पहुँचने तक… नर्मदा कितने काम आती है?
किसानों के लिए सिंचाई, मछुआरों के लिए आजीविका और आसपास के शहरों व गाँवों के लिए पानी—नर्मदा अनेक लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी है।
इसका पानी फसलों को सहारा देता है, मछली पकड़ने से जुड़े समुदायों की आजीविका में योगदान करता है और घरों की पानी की ज़रूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सोचिए, आपके दिन का कौन-सा काम पानी के बिना अधूरा रह जाएगा? 💧
इस पोस्ट को साझा करें और नर्मदा के महत्व को दूसरों तक पहुँचाएँ।
नर्मदा को जानें। उसका महत्व समझें। उसका भविष्य बचाएँ।
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Review of National River Conservation Plan
On 16 October 2026, Hon’ble Union Minister of Jal Shakti Shri @CRPaatil reviewed the implementation of the National River Conservation Plan (NRCP).
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Sludge Digestion: Waste से Resource Recovery तक!
Used Water के treatment के दौरान निकलने वाले sludge में मौजूद organic matter को biological process के ज़रिए break down किया जा सकता है। Anaerobic Digestion में microorganisms oxygen के बिना organic matter को विघटित करते हैं, जिससे sludge stabilise होता है और biogas भी generate हो सकती है।
यह प्रक्रिया sludge के बेहतर प्रबंधन और energy recovery की संभावनाओं को बढ़ाती है।
सही Sludge Management, स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम।
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राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (National River Conservation Directorate – NRCD) के कार्यों एवं विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा।
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एक नदी की परिक्रमा… और उससे जुड़ी सदियों पुरानी आस्था।
नर्मदा परिक्रमा ऐसी परंपरा है, जिसमें श्रद्धालु नदी के मार्ग के साथ लंबी यात्रा करते हैं। अमरकंटक से ओंकारेश्वर और आगे गुजरात तक, नर्मदा के तट पर बसे मंदिर और तीर्थस्थल इस विरासत को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं।
ओंकारेश्वर का नर्मदा तट आदि शंकराचार्य और उनके गुरु गोविंद भगवत्पाद से जुड़ी आध्यात्मिक स्मृति भी सँजोए हुए है।
क्या आपने कभी नर्मदा परिक्रमा के बारे में सुना है? इस परंपरा से जुड़ी जानकारी अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें। 🌊
नर्मदा को जानें। उसका महत्व समझें। उसका भविष्य बचाएँ।
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नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए सहयोग की नई पहल!
राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (NRCD), जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिवर अफेयर्स (IIRA), SAIARD रिसर्च ग्रुप के बीच 15 अक्टूबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौता ज्ञापन पर श्री राजेश चौधरी, निदेशक, NRCD और डॉ. बिस्वजीत रॉय चौधरी, अध्यक्ष, IIRA ने हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और विशेषज्ञता के माध्यम से नदी संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा नदियों के सतत प्रबंधन के प्रयासों को और मजबूत करना है।
इस सहयोग के तहत GIS आधारित नदी मानचित्रण, स्मार्ट नदी प्रबंधन प्रणाली, छोटी नदियों के पुनर्जीवन, ज्ञान एवं क्षमता निर्माण और जन-जागरूकता जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह साझेदारी नदियों से जुड़े बेहतर निर्णयों, प्रभावी कार्ययोजनाओं और विभिन्न हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से भारत की नदी संरक्षण संबंधी पहलों को नई दिशा देने में सहायक होगी।
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ऊदबिलाव से पैंगोलिन तक… मिलिए नर्मदा के वन्यजीव पड़ोसियों से!
क्या आप जानते हैं कि नर्मदा के आसपास ऊदबिलाव और भारतीय पैंगोलिन जैसे स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं?
नर्मदा के पारिस्थितिक अध्ययन में 8 स्तनधारी प्रजातियों का उल्लेख किया गया है। इनमें स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव (Smooth-coated Otter) शामिल है, जो नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को समझने में महत्वपूर्ण संकेतक है।
वहीं, भारतीय पैंगोलिन (Indian Pangolin) एक संकटग्रस्त वन्यजीव है, जिसके संरक्षण पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है।
इन दोनों में से किस जीव के बारे में आप पहले से जानते थे—ऊदबिलाव या पैंगोलिन? हमें कमेंट में बताइए!
नर्मदा को जानें। उसका महत्व समझें। उसका भविष्य बचाएँ।
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क्या आपने कभी सोचा है कि नदी और उसके किनारे के बीच कितनी जिंदगी छिपी होती है?
नर्मदा के अध्ययन में 12 सरीसृप और 4 उभयचर प्रजातियाँ दर्ज की गईं। इनमें कछुए, मगरमच्छ और Bengal Monitor जैसे जीव भी शामिल हैं।
इनके लिए सिर्फ पानी जरूरी नहीं—प्राकृतिक किनारे, उथले पानी, नम जगहें और सुरक्षित habitats भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए अगली बार नदी का किनारा देखें, तो उसे सिर्फ रेत या मिट्टी न समझें। हो सकता है, वह किसी पूरी दुनिया का घर हो।
नर्मदा को जानें। उसका महत्व समझें। उसका भविष्य बचाएँ।
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TB Awareness & Community Engagement
Engaging communities, spreading awareness and addressing misconceptions are essential to the fight against TB.
Through JOSH Teams, young volunteers are encouraging open conversations, early diagnosis and timely treatment, strengthening collective efforts towards a TB-Mukt Bharat.
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स्वच्छता ही सेवा 2026 | नदियों की स्वच्छता के लिए जनभागीदारी की मुहिम।
17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक सेंटर फॉर महानदी रिवर बेसिन मैनेजमेंट स्टडीज़ (cMahanadi), NIT रायपुर ने महानदी रिवर बेसिन के लिए कंडीशन असेसमेंट एंड मैनेजमेंट प्लान (CAMP) के अंतर्गत, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (NRCD), जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान आयोजित किया।
थीम: स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत
16 दिनों में आयोजित 12 गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रोजेक्ट स्टाफ़ और स्थानीय समुदाय ने स्वच्छता एवं नदी संरक्षण के लिए एकजुट होकर भागीदारी की।
📅 23 सितंबर: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के साथ वॉकथॉन
📅 27 सितंबर: देशभक्ति एवं स्वच्छता पर आधारित संगीतमय प्रस्तुतियाँ | कबाड़ से जुगाड़ 2026
📅 28 सितंबर: स्वच्छता थ्रू आवर लेंस | स्वच्छता एवं जल संचय संवाद
📅 30 सितंबर: निबंध लेखन प्रतियोगिता | राजिम में स्वच्छता अभियान
📅 1 अक्टूबर: NIT रायपुर सहित सार्वजनिक स्थलों पर श्रमदान
📅 2 अक्टूबर: महादेव घाट पर सफ़ाई अभियान एवं बाढ़ के बाद स्थिति का आकलन | वृक्षारोपण | स्वच्छता शपथ | स्वच्छता ज्ञान यात्रा
हर गतिविधि का संदेश एक ही था—स्वच्छ नदियों की शुरुआत जनभागीदारी से होती है।
इस अभियान को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का हार्दिक आभार। हमारे प्रयासों को स्थान देने के लिए #DainikBhaskar, #TheHitavada और #TheArangPost का धन्यवाद। #ChhattisgarhVishesh में संबंधित प्रेस रिलीज़ प्रकाशित करने के लिए भी आभार।
आइए, जनभागीदारी से अपनी नदियों को स्वच्छ और जीवंत बनाएँ!
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स्वच्छता का संकल्प केवल हमारे आसपास की सफाई तक सीमित नहीं है, उसका सीधा संबंध नागरिकों के स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और परिवार की आर्थिक सुरक्षा से भी है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत और हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने के प्रयासों ने जनजीवन में व्यापक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों के जोखिम को कम करने, अनावश्यक उपचार और दवाइयों पर होने वाले खर्च को घटाने तथा परिवारों को अधिक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
जब स्वच्छता के साथ स्वच्छ जल भी सुनिश्चित होता है, तब उसका प्रभाव केवल एक योजना या परियोजना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्वास्थ्य, सम्मान, बचत और बेहतर जीवन के रूप में पूरे परिवार और समाज तक पहुंचता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि नदी का बहता पानी POWER की कहानी भी लिख सकता है?
Godavari सिर्फ पानी की धारा नहीं, बल्कि hydroelectric energy की कहानी का भी अहम हिस्सा है। इसके basin में 15 hydroelectric projects हैं, जिनकी कुल installed capacity करीब 2,555 MW है।
इनमें Upper Indravati Hydroelectric Project की क्षमता 600 MW है। वहीं, Machkund और Pench जैसे interstate projects इस energy story को अलग-अलग राज्यों से जोड़ते हैं।
पानी से POWER तक — Godavari की एक और अनोखी कहानी!
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खेतों की हरियाली से मछुआरों की आजीविका तक — Godavari लाखों ज़िंदगियों से जुड़ी है।
Godavari basin का करीब 59.5% क्षेत्र फसल उगाने के लिए इस्तेमाल होता है। यहाँ 108.41 लाख hectares cultivable land और 29.46 लाख hectares irrigated land दर्ज है।
लेकिन नदी से जुड़ी आजीविका सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। Fishing और aquaculture भी कई समुदायों के जीवन का अहम हिस्सा हैं। Kottipalli जैसी जगहों पर लोगों की रोज़ी-रोटी मछली पकड़ने और aquaculture से जुड़ी है।
यही है Godavari की एक और कहानी — पानी, खेती और आजीविका का गहरा रिश्ता।
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Sludge Treatment की शुरुआत कहाँ से होती है?
Sludge में पानी की मात्रा बहुत अधिक हो सकती है। इसलिए इसके treatment के शुरुआती steps में से एक है Thickening।
इस प्रक्रिया में sludge से कुछ पानी अलग करके उसमें solids की concentration बढ़ाई जाती है। इससे sludge का volume कम होता है और आगे के treatment के लिए उसे manage करना आसान हो जाता है।
लेकिन Thickening के बाद sludge के साथ क्या होता है?
जानिए अगले पोस्ट में, SEWAGE SE SOLUTION TAK के साथ!
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खेतों की हरियाली से मछुआरों की रोज़ी-रोटी तक — Godavari का पानी लाखों ज़िंदगियों से जुड़ी कहानी का हिस्सा है।
Godavari basin में करीब 59.5% क्षेत्र में फसलें उगाई जाती हैं, जबकि खेती के लिए उपलब्ध और सिंचित भूमि का विस्तार भी काफी बड़ा है।
यहाँ नदी से जुड़ी आजीविका सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। Fishing और aquaculture भी कई समुदायों के जीवन का अहम हिस्सा हैं।
Kottipalli जैसी जगहों पर मछली पकड़ना और aquaculture स्थानीय आजीविका से सीधे जुड़े हैं।
यही दिखाता है कि Godavari सिर्फ खेतों को पानी देने वाली नदी नहीं — यह खेती, रोज़गार और लोगों की ज़िंदगी से जुड़ी एक अहम कड़ी भी है।
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A postal network is built around more than letters and parcels; it is built around the people and possibilities it connects.
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This World Post Day, we celebrate a network that continues to evolve with India while remaining connected to the people it serves.
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