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मुल्ला जी की बात से मैं पूरी तरह सहमत हूँ
मोदी को तानाशाही बिल्कुल भी नहीं आती…
क्योकि अगर मोदी ने तानाशाही की होती तो अब तक सारे वामपंथी देश द्रोही जेल में होते।
तानाशाही सीखनी है तो सपा कांग्रेस से सीखनी चाहिए कैसे होती है तानाशाही…!
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नरेंद्र- देवेंद्र के जोड़ी की तत्परता देखिए
टाइगर श्रॉफ पर पित्तल चलवाने वाले तीनो आरोपी
को 24 घंटे के अंदर राजस्थान से पकड़ लिया है
वरना हमने कांग्रेस की सरकार में भोपाल गैस कांड और बोफोर्स घोटाले के आरोपियों को देश से भगाते हुए देखा था
सैल्यूट है राजस्थान-मुंबई पुलिस को
FCRA से जुटाए धन से देश के लिए गद्दारी करने वालों से सावधान रहना है।
कासगंज का चंदन गुप्ता हत्याकांड देश विरोधी विदेशी धन पर पलने वाले NGO और वकीलों पर गहरा सवालिया निशान खड़ा करता है।
चंदन गुप्ता हत्याकांड के दोषियों को सजा देते समय न्यायाधीश विवेकानंद शरण जी ने कुछ गंभीर प्रश्न उठाए थे।
उन्होंने कम से कम 10 एनजीओ के नाम बताए जो चंदन गुप्ता के हत्यारे को बचाने के लिए ना केवल मौलिक समर्थन दे रहे थे बल्कि लाखों रुपए खर्च करके देश के बड़े-बड़े वकीलों को कासगंज जैसी छोटी जगह पर खड़ा कर दिए थे।
चंदन गुप्ता की हत्या कोई मामूली हत्या नहीं थी। वह 26 जनवरी का दिन था वह तिरंगा लहराते हुए शहर में पदयात्रा कर रहा था। वह हत्या भारत की आजादी की हत्या थी।
वही देशद्रोही NGOs इस समय भारत में तख्ता पलट के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
करोड़ों करोड़ों रुपए खर्च करके देश में अराजकता का माहौल पैदा कर रहे हैं।
अब समय आ गया है की एफसीआरए कानून को ही रद्द कर दिया जाए।
भारत को गरीबों की मदद करने के लिए किसी विदेशी धन की जरूरत नहीं है।
भारत को अपने शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक करने के लिए किसी विदेशी फंड की जरूरत नहीं है।
न्यायाधीश विवेकानंद शरण जी ने सरकार को जो सुझाव भेजे थे उस पर पूरी तरह अमल करने का समय आ गया है।
विदेशी NGOs को लात मार कर देश से बाहर किया जाए।
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जमशेदपुर में गरबा की एक गर्वित हिंदू महिला आयोजिका ने एक मुस्लिम महिला को आयोजन से भगा दिया और उसकी पास की राशि लौटा दी।
गरबा हिंदू परंपरा है। हमारे त्योहार, हमारे नियम।
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ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
नाथ संप्रदाय की प्राचीन परंपरा के अनुरूप आज @GorakhnathMndr में विधि-विधान से महानिशा पूजन, हवन एवं आरती की।
आदिशक्ति माँ भगवती की कृपा से समाज में धर्मनिष्ठा, सद्भाव और सेवा के भाव सुदृढ़ हों। सभी के जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि का संचार हो और राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना निरंतर जागृत रहे, यही प्रार्थना है।
जय जगदम्बे!
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शॉकिंग!
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अहमर अफ़ाक पर आरोप है कि उसने हिंदू लड़कियों को करियर खत्म करने की धमकी देकर नमाज़ पढ़ने, कन्वर्जन करने और 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लगाने के लिए मजबूर किया।
– हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने मामला सामने आने पर आरोपियों पर एक्शन लेने और तुरंत गिरफ्तारी की मांग की।
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कॉकरोचों के उपद्रव से परेशान हो कर अब सदर बाजार और कनॉट प्लेस की व्यापारी यूनियन के अध्यक्ष जनता से भावनात्मक अपील करने को मजबूर हो गए हैं |
व्यापारियों का कहना है कि आगे आगे दिवाली और भैया दूज का त्यौहार है जिसका हम सालों से इंतजार करते हैं - लेकिन पिछले एक महीना से हम दुकानों का किराया भी नहीं कमा पाए हैं |
अभी स्थिति यह है कियाबलरी समाज मीडिया के सामने आ कर निवेदन कर रहा है | अगर निवेदन स्वीकार नहीं हुआ तो आम जनता इन कॉकरोचों को सड़क पर कुकुरमुत्ता बना दे तो बड़ी बात नहीं |
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बाहर माइक पर 'क्रांति' का दहाड़ मारने वाले सूरमाओं का 'इंक़लाब',
तिहाड़ की ठंडी हवा लगते ही 24 घंटे वाले CCTV की लाइव स्ट्रीमिंग में सिमट गया है!
सड़क पर छाती कूटकर व्यवस्था गिराने चले इन 'स्वघोषित चे ग्वेराओं' की पूरी हेकड़ी सलाखों के पीछे पहुंचते ही हवा हो चुकी है।
तिहाड़ जेल से आ रही ताज़ा खबरें तो किसी कॉमेडी-ड्रामा की पटकथा जैसी लग रही हैं:
सौरव दास और आशुतोष रांका को आम बैरक का 'कष्ट' नहीं दिया गया; सीधे सुपर-स्पेशल हाई-सिक्योरिटी सेल में 'शाही' नज़रबंदी मिली है।
बैरक में 24 घंटे चालू CCTV सिर्फ फुटेज नहीं ले रहा, बल्कि इनके चेहरे की उड़ी हुई हवाइयों की लाइव मॉनिटरिंग कर रहा है। प्रशासन को बाकायदा पहरा बिठाना पड़ा है कि कहीं अपनी ही क्रांति के सदमे और बदहवासी में ये कोई 'आत्मघाती कदम' न उठा लें!
पहरा इतना सख्त है कि परिंदा तो दूर, जेल का कोई दूसरा कैदी भी इनके आस-पास न फटक सके,
सड़कों पर खड़े होकर देश के संस्थानों को ललकारना, कैमरे के सामने छाती तानना और भड़काऊ नारों से टीआरपी बटोरना बहुत आसान होता है जनाब...
लेकिन जब कानून की असली धाराएं चलती हैं और सामने जेल की बेरहम दीवारें होती हैं, तो सारे 'इंक़लाबी ड्रामे' एक झटके में हवा हो जाते हैं।
जो कल तक पूरे तंत्र को डराने का दावा कर रहे थे, आज अपनी ही परछाईं देखकर सहम रहे हैं।
👇 सड़क पर दहाड़ने वाले इन 'कागज़ी शेरों' के इस बदले हुए रंग-ढंग पर आपका क्या ख्याल है? क्या ऐसे 'पार्ट-टाइम क्रांतिकारियों' का इलाज यही होना चाहिए?
अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर दें!
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फरवरी 2007 में पाकिस्तान का विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कुरैशी भारत आया था।
दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में उसने भारत के सभी चैनलों को इंटरव्यू दिया।
उसका इंटरव्यू राजदीप सरदेसाई रजत शर्मा करण थापर बरखा दत्त शेखर गुप्ता सब ने लिया। कोई परेशानी नहीं.. बहुत फ्रेंडली सवाल पूछे गए.. गंगा जमुनी तहजीब के बारे में पूछे गए पाकिस्तान की जनता के शौक के बारे में पूछे गए लाहौर के गोल चक्कर में बिकने वाले मटन चिकन के बारे में सवाल पूछे गए
फिर नंबर आया अर्नब गोस्वामी का जो उस वक्त टाइम्स नाउ में थे
अरनव गोस्वामी ने आई एस आई द्वारा दिए गए सवालों की लिस्ट या फ्रेम के बजाय पाकिस्तान के विदेश मंत्री से एक पत्रकार की हैसियत से सवाल पूछना शुरू किया
अरनव गोस्वामी का पहला ही सवाल था कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में भारत ने जो सबूत पाकिस्तान को दिया है उस पर आप ने क्या कार्रवाई किया ?
पाकिस्तान का विदेश मंत्री जवाब देने में अटक गया फिर और गोस्वामी ने जब कड़वे सवाल पूछने शुरू किये तुरंत ही आईएसआई के अधिकारी आए और अरनव गोस्वामी के साथ तू तू मैं मैं करने लगे और इंटरव्यू बंद करने को कहने लगे
पाकिस्तान का विदेश मंत्री चुपचाप बैठा देख रहा था
सवाल यह है क्या किसी देश का विदेश मंत्री किसी को इंटरव्यू दे और सेना के अधिकारी उसका इंटरव्यू रुकवा सकते हैं ?
दूसरी बात है की अर्नब गोस्वामी के पहले जिन पत्रकारों ने इंटरव्यू लिया उन्होंने उस वक्त मना क्यों नही कर दिया कि हम पत्रकार हैं हमारा धर्म है अपने अनुसार सवाल पूछना ना कि दिए गए फ्रेम के अनुसार सवाल पूछना
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संसद के दरवाजे पर निहत्थे साधु-संतों पर गोलियाँ चलवाकर उनके खून से सड़क लाल करने का काला इतिहास है कांग्रेस का!
सत्ता की यह क्रूरता न तो कभी इतिहास से मिट सकती है और न ही कभी छुपाई जा सकती है।
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फ़्रांस के राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम सम्बोधन 🚨
पूरे फ्रांस मे हो रहे दंगे, जलाये जा रहे फ़्रांस के
शहर, फ्रांसीसी पुलिस को बेरहमी से घेर कर मार
रहे इस्लामिक दंगाई...
राष्ट्रपति मैक्रोन बोले.. ट्रम्प करा रहा दंगा🔥
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हम भारत से ट्रेड डील करना चाहते है इसलिए उसके रूस से तेल ख़रीदने पर टैरिफ़ नहीं लगा सकते - US विदेश मंत्री
झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए।
पिछले दो साल में ट्रम्प काल में मोदी सरकार ने जो संयम, रेजिस्टेंस और डिप्लोमेसी दिखायी है उसके उदाहरण text बुक में भी नहीं है।
दुनिया की उथल पुथल के बीच शानदार विदेश नीति 👏👏
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🔥 इतिहास के पन्ने पलटिए
सवालों की कड़ियाँ जोड़िए
कहीं संयोग हैं, कहीं गंभीर आरोप!
लेकिन सच क्या है? जवाब तो देना पड़ेगा! 🇮🇳
📌 1991: राजीव गांधी की हत्या के बाद लोकसभा चुनाव स्थगित हुए। कांग्रेस को सहानुभूति का लाभ मिलने की चर्चा हुई और पी. वी. नरसिंह राव के नेतृत्व में सरकार बनी।
📌 राजीव गांधी फाउंडेशन: सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले इस संस्थान की गतिविधियों और विदेशी संस्थाओं से कथित संबंधों को लेकर समय-समय पर सवाल उठे। सवाल उठाना गलत नहीं, लेकिन जवाब तथ्यों के साथ मिलना चाहिए।
📌 कंधार कांड, 1999: IC-814 के अपहरण के बाद तीन आतंकवादियों की रिहाई हुई। उनमें मसूद अजहर भी था, जिसने बाद में जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। आज भी यह घटना भारत की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद से निपटने की चुनौतियों की याद दिलाती है।
📌 संसद पर हमला, 2001: देश के लोकतंत्र के मंदिर पर आतंकवादी हमला हुआ। ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर तथ्य की गंभीरता से पड़ताल होनी चाहिए।
📌 UPA सरकार और POTA: आतंकवाद विरोधी कानून को समाप्त करने के फैसले पर बहस हुई। सवाल यह है कि उस समय सरकार की सुरक्षा नीति कितनी प्रभावी थी और उसके पक्ष-विपक्ष में क्या तर्क थे?
📌 विदेशी फंडिंग और NGO: यदि किसी संगठन को विदेशी धन मिलता है, तो उसके स्रोत, खर्च और गतिविधियों की पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। देश की एकता और अखंडता से जुड़े मामलों में किसी को भी सवालों से ऊपर नहीं होना चाहिए।
📌 आज की राजनीति: जब अलगाववाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर विवाद उठते हैं, तो सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। लेकिन किसी व्यक्ति या संगठन पर गंभीर आरोप लगाने के लिए प्रमाण भी उतने ही जरूरी हैं।
🔥 और अब ज़रा व्यंग्य समझिए!
आम आदमी अपने बैंक खाते में आए छोटे-से लेन-देन का हिसाब देने में परेशान हो जाता है, लेकिन राजनीति की दुनिया में बड़े-बड़े आरोप वर्षों तक बहस का विषय बने रहते हैं!
जनता पूछती है—फंडिंग कहाँ से आई? किस उद्देश्य से आई? किस काम में खर्च हुई? और यदि कोई गड़बड़ी नहीं है, तो पारदर्शी जवाब देने में परेशानी कैसी?
लोकतंत्र कोई निजी कंपनी नहीं, देश की जनता की अमानत है! यहाँ सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, NGO हो या राजनीतिक संगठन—सवाल सब से पूछे जाने चाहिए और जवाब तथ्यों के साथ मिलने चाहिए।
याद रखिए, हर संयोग साजिश नहीं होता और हर आरोप सच नहीं होता। लेकिन गंभीर सवालों को केवल राजनीतिक विरोध कहकर खारिज कर देना भी जवाबदेही नहीं है।
🇮🇳 न अंधसमर्थन, न अंधविरोध—सच सामने आए, प्रमाण सामने आएँ और देशहित सर्वोपरि रहे!
इस पोस्ट को साझा कीजिए, ताकि राजनीतिक बहस अफवाहों पर नहीं, तथ्यों और जवाबदेही पर हो।
जय हिंद! भारत माता की जय! 🚩
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*कैसे संस्कारी मां बाप है*
*जो अपनी जवान बेटियों को*
*प्रोटेस्ट में भेज देते है*
*तिलचट्टीयो को भी मज़ा आ रहा है*
*अरे मुर्ख हरामी हिंदुओं*
*तेरी लड़कियों के साथ खिलवाड़ हो रहा है*
*क्या तुम्हारी लड़कियां कभी घर बसा बनायेंगी*
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काट दिए गए मक्का की मस्जिद में इश्क करने वाले मियाँ-बीवी के सिर,
शीरी अख्तर और नजमुल दोनों थी थे इस्लामी मुल्क बांग्लादेश के निवासी,
ताबूतों में भर के दोनों लाशें भेज दी गईं उनके वतन को दफन के लिए.
सऊदी शासन में मिली सजा के खिलाफ नहीं बोल पाए मोहब्बत के ठेकेदार, महिला और मानवाधिकार आयोग,
#Saudi #Bangladesh
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जब कोई पूछे कि 1200 साल के दमन के बावजूद सरना सनातन धर्म कैसे बच गया,
तो उसे ये तस्वीर दिखा देना ! !!!!!!
गरीब रहे मगर लालच या दबाब अपना धर्म नहीं छोड़ा 🙏🙏
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फ्रांस विरोध प्रदर्शन ने अमित शाह को सही साबित कर दिया।
ध्रुव राठी का लंदन में पाकिस्तानियों के साथ विरोध प्रदर्शन ने ज्ञानेश कुमार को सही साबित कर दिया।
यूक्रेन में स्टारलिंक विवाद ने नरेंद्र मोदी को सही साबित कर दिया।
ये लोग दस कदम आगे सोच रहे थे। उन पर मेरा भरोसा और मजबूत हो रहा है। 🗿🫡























