“एक वर दे दे राधे गोविंद राधे।
भूलूँ न भूलूँ नहीं तौही पल आये।” 1151
भावार्थ – हे श्री राधे! मैं तुमसे केवल एक ही वर की आशा करता हूँ, वह यही कि आधे क्षण को भी मैं तुम्हारा स्मरण करना न भूलूँ।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“तुझते विमुख होके गोविंद राधे।
अति दुःख पाया हरि अब तो क्षमा दे ॥”
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
राधा गोविन्द गीत
“एक वर माँगें तो सीं गोविंद राधे ।
तव सुख सुखी रहूँ ऐसी बना दे |” 1341
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
राधा गोविंद गीत
“तृण ते अधिक तृण सम गोविंद राधे।
तरु से भी अधिक सहनशील बना दे।”
भावार्थ – हे गोविंद! आप मुझे तृण से भी अधिक विनम्र एवं वृक्ष से भी अधिक सहनशील बना दीजिये।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
गले ना लगाया छोड़ो गोविंद राधे ।
आके सामने तेरा पिता हूँ बता दे ॥ f ॥ 281 ॥
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
राधा गोविंद गीत
"जीवन एक बुलबुले के समान अस्थायी है जो एक क्षण पानी में प्रकट होता है और अगले क्षण ख़तम हो जाता है। प्रह्लाद ने अपने मित्रों से कहा, "भगवान् को जानने के लिए बड़े होने की प्रतीक्षा न करो। मृत्यु कभी भी आ सकती है। पता नहीं कब मानव देह छिन जाये"
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“यह माया शक्ति इतनी बलवती है कि शक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा के बिना नहीं जा सकती। और यह कृपा भी केवल शरणागत जीव पर ही होती है। यह संपूर्ण गीता का सारभूत ज्ञान है।”
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“एक वर माँगूँ तौ सौँ गोविंद राधे।
तव सुख सुखी रहूँ ऐसी बना दे।” 134
हे राधे गोविंद! मैं आपसे एक वर माँगता हूँ कि मैं सदैव आपके सुख में ही सुखी रहूँ, मुझे ऐसा बना दीजिये।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“परदोष देखूँ नहीं गोविंद राधे।
परनिन्दा करूँ नहीं ऐसा बना दे।” 1155
भावार्थ – हे गोविंद! आप मुझे ऐसा बना दें कि मैं कभी परदोष न देखूँ और न परनिन्दा ही करूँ।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“रसना की भक्ति ते ना बने कछु कामा ।
शून्य का करोड़ गुना शून्य आवे नामा ॥ 6 ॥”
श्यामा श्याम गीत - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“हरि तो निरन्तर गोविंद राधे |
तव उर संकल्प देखें बता दे || 4570 ||
भगवान प्रतिक्षण तुम्हारे हृदय के प्रत्येक संकल्प को देख रहे हैँ |”
राधा गोविंद गीत - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
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“तुझते विमुख होके गोविंद राधे।
अति दुःख पाया हरि अब तो क्षमा दे ॥”
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
राधा गोविन्द गीत
“एक वर माँगूँ तौ सौँ गोविंद राधे।
तव सुख सुखी रहूँ ऐसी बना दे।” 134
हे राधे गोविंद! मैं आपसे एक वर माँगता हूँ कि मैं सदैव आपके सुख में ही सुखी रहूँ, मुझे ऐसा बना दीजिये।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“यह माया शक्ति इतनी बलवती है कि शक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा के बिना नहीं जा सकती। और यह कृपा भी केवल शरणागत जीव पर ही होती है। यह संपूर्ण गीता का सारभूत ज्ञान है।”
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“प्राकृत बुद्धि ते तो गोविंद राधे ।
राधे आत्मा का ज्ञान ही असम्भव बता दे |” 1600
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत
“सारा विश्व दान करो गोविंद राधे।
तो भी गुरु ऋण ते ना उऋण करा दे।” 2030
यदि कोई व्यक्ति गुरु को सम्पूर्ण विश्व का दान भी कर दे तो भी वो गुरु के ऋण से उऋण नहीं हो सकता।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“सारा विश्व दान करो गोविंद राधे।
तो भी गुरु ऋण ते ना उऋण करा दे।” 2030
यदि कोई व्यक्ति गुरु को सम्पूर्ण विश्व का दान भी कर दे तो भी वो गुरु के ऋण से उऋण नहीं हो सकता।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“एक वर दे दे राधे गोविंद राधे।
भूलूँ न भूलूँ नहीं तौही पल आये।” 1151
भावार्थ – हे श्री राधे! मैं तुमसे केवल एक ही वर की आशा करता हूँ, वह यही कि आधे क्षण को भी मैं तुम्हारा स्मरण करना न भूलूँ।
राधा गोविंद गीत | जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
“एक वर माँगें तो सीं गोविंद राधे ।
तव सुख सुखी रहूँ ऐसी बना दे |” 1341
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
राधा गोविंद गीत
