कूनो के चीते की गोली मारकर हत्या, शरीर से निकलीं बंदूक की 5 गोलियां
मध्य प्रदेश के श्योपुर में घायल मिले 19 महीने के नर चीते KNG22 की इलाज के दौरान मौत हो गई. सर्जरी में शरीर से बंदूक की पांच गोलियां निकाली गईं. घटना की जांच के लिए STF गठित की गई है.
पूरी ख़बर- intdy.in/12ueta
#KunoCheetah #CheetahDeath #MadhyaPradesh #WildlifeCrime #ATCard #AajTakSocial | @ReporterRavish
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What a beautiful video.
A mother and calf fell into a water tank. Both were rescued but during rescue the calf got separated from mother. Kurseong division staff brilliantly tracked the mother. It took 7 hours but they reunited them.
Reaction of mother in last !! Gods work.
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अंग्रेजों के शासनकाल में सबसे ज्यादा,
फाँसी ब्राह्मणों को दी गई।
और सबसे ज्यादा गोलियों से उन्हें भूना गया।
क्योंकि अंग्रेज ब्राह्मणों से बहुत डरते थे।
~सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता, अश्विनी उपाध्याय जी
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UGC नियमों के विरोध में भाषण देते समय रूमित सिंह ठाकुर अचानक बेहोश होकर मंचपर गिर पड़े।
रूमित सिंह ठाकुर पिछले 15 दिनों से महिपाल सिंह मकराना जी के साथ लगातार पदयात्रा कर रहे है।
हम माता करणी और भगवान महादेव से उनके शीघ्र स्वस्थ होने एवं उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करते है। 🙏🏻
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For how long will this bullying continue? The state turns hapless in front of mobs!
This is how we will turn our INDIA into a super power by driving out professors & making the director of INDIA’S most prestigious institutions beg, only because they did their job!
धन्यवाद @BJP4India और धन्यवाद @narendramodi जी! आपने अपनी कृपादृष्टि से IIT जैसे संस्थान के डायरेक्टर की हैसियत एक तथाकथित दलित चिंतक के समक्ष यह बना दी कि वह हाथ जोड़े, ऐसे गुंडों की धमकी सुन रहा है।
संभवतः, मोदी जी चाहते हैं कि सब पत्राचार से ही पढ़ें, ताकि न IIT आना पड़े, न भेदभाव हो। मेरा सुझाव ले लो मोदी जी, 23 में से 6 IIT को दलित-पीड़ित विशेष बना दीजिए। एक्सक्लूसिव। केवल एक ही जाति-जनजाति समूह के लोग वहाँ पढ़-पढ़ा सकें। उसका नाम भी आप चाहे तो नमो-IT कर सकते हैं।
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This helpless man folding his hands is IIT Bombay director.
Forget becoming a developed nation; we will be worse than Somalia in a few decades. Just wait & watch!
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माननीय प्रधानमंत्री जी,
फर्जी केस और तारीख पर तारीख के कारण प्रतिवर्ष 02 लाख अकाल मौत होती है।
झूठी शिकायत, झूठी FIR, झूठी जांच, झूठी गवाही और झूठा हलफनामा को गंभीर अपराध घोषित करने तथा 10 वर्ष की सजा और 10 लाख जुर्माना के लिए कानून कब बनेगा?
@narendramodi @AmitShah
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🔥𝐍𝐎 𝐑𝐄𝐒𝐄𝐑𝐕𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 𝐈𝐍 𝐓𝐇𝐄 𝐏𝐑𝐈𝐕𝐀𝐓𝐄 𝐒𝐄𝐂𝐓𝐎𝐑 🔥
🔥𝐍𝐎 𝐒𝐂-𝐒𝐓 𝐀𝐂𝐓 𝐅𝐈𝐑 𝐖𝐈𝐓𝐇𝐎𝐔𝐓 𝐀 𝐌𝐀𝐍𝐃𝐀𝐓𝐎𝐑𝐘 𝐏𝐑𝐄𝐋𝐈𝐌𝐈𝐍𝐀𝐑𝐘 𝐈𝐍𝐐𝐔𝐈𝐑𝐘!🔥
You voted, and Team Bharat will deliver!
We are taking our 𝗦𝗘𝗖𝗢𝗡𝗗 𝗪𝗔𝗩𝗘 of citizen protests straight onto the streets!
You gave us the mandate, and we will be your voice.
We step onto the ground with 𝟯 𝗡𝗢𝗡-𝗡𝗘𝗚𝗢𝗧𝗜𝗔𝗕𝗟𝗘 𝗗𝗘𝗠𝗔𝗡𝗗𝗦:
👉 𝗣𝗿𝗲𝗹𝗶𝗺𝗶𝗻𝗮𝗿𝘆 𝗶𝗻𝗾𝘂𝗶𝗿𝘆 before any FIR is registered under the SC/ST Act
👉 𝗡𝗢 𝗿𝗲𝘀𝗲𝗿𝘃𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 in the private sector
👉 𝗝𝘂𝘀𝘁𝗶𝗰𝗲, 𝗿𝗲𝗶𝗻𝘀𝘁𝗮𝘁𝗲𝗺𝗲𝗻𝘁, & 𝗰𝗼𝗺𝗽𝗲𝗻𝘀𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 for IIT Bombay Prof. Suryanarayana Doolla!
Jail, lockup, detention, or batons: nothing will deter us from fighting for what is right.
Date and location will be announced shortly.
Media friends an official Press Note will be sent.
We know you are with us!!
𝗧𝗲𝗮𝗺 𝗕𝗵𝗮𝗿𝗮𝘁 | 𝗝𝗮𝗶 𝗛𝗶𝗻𝗱, 𝗝𝗮𝗶 𝗕𝗵𝗮𝗿𝗮𝘁! 🇮🇳
#TeamBharat #CitizenPower #MeritFirst #JusticeForProfDoolla #FairLaw
@OGTeamBharat
@Nidhzee @FactswithDinesh @Shankyram2 @nachiket1982 @AbhinayWithYou @neha_laldas
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See how government Officials are asking the caste of a Brahmin family and threatening them with the SC ST Act
This video is from Bahraich, UP.
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देवा द्विवेदी की मां की चित्कार कौन सुनेगा?
IIT बॉम्बे का बच्चा, देश का बच्चा था लेकिन देवा मात्र ब्राह्मण परिवार का ही बच्चा है.
देवा के जाने का किसी को दुख नहीं है. SC-ST act ने एक और जान ले ली
आप मृतक की मां को सुनिए
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IIT बॉम्बे के छात्र की जान जातिवाद की वजह से नहीं गयी,
लेकिन देवा द्विवेदी की गई है!!
22 साल के देवा द्विवेदी ने SC/ST एक्ट लगाए जाने और उससे हुए मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली!
तो अब देवा को न्याय कौन देगा?
SC/ST एक्ट हटाओ या अब सवर्ण atrocity एक्ट भी दो!
बहुत हुआ!
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A Brahmin boy, Deva Dwivedi, died by suicide in fear of the SC-ST Act.
He was 22 yr old.
Just 22.
#StopSCSTActMisuse
No placards. No media outrage. No Vivek Srivasta-like creatures crying and howling through the night for justice for this 20 to 22-year-old Hindu youth.
A 22-year-old Brahmin youth, Deva Dwivedi, died by suicide in fear of the SC-ST Act.
A fight between two families took place in July in Pateria village, Manikpur, Chitrakoot.
An SC-ST Act case was filed against Deva in July 2026.
Deva Dwivedi was under severe mental pressure because of this fear.
But he won't give them TRP.
Neither will his death matter to vote-bank-hungry demons.
This is what happens when outrage is selective, justice is selective, and even death is filtered through political usefulness.
#SCSTActMisuse
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This is the CCTV footage of the two sisters, aged 12 and 8, seen around 2 pm on 18 September in Janghai market that falls under Sarai Mamrej police station area of Prayagraj
No trace of them after this
Agencies are on it. Really hope they are rescued soon
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निधि पांडेय और अनन्या पांडे ये 2 मासूम बच्चियाँ 10 दिन से लापता हैं, अभी तक उनका कोई सूराख नहीं लगा है। कृपया इन्हें ढूँढने में मदद करें।
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दरवाजे की चौखट पर बैठी मां की आंखें हर आने-जाने वाले रास्ते को निहार रही हैं। भाई की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे और घर के बाहर जुटी भीड़ भी बस एक खबर का इंतजार कर रही है—कि कहीं से कोई सूचना आए और परिवार को उनकी बेटियों के सकुशल होने की खबर मिल जाए।
प्रयागराज के जंघई क्षेत्र की पतवा ग्राम सभा से दो नाबालिग बच्चियां पिछले 10 दिनों से लापता हैं। परिजनों के मुताबिक, 13 वर्षीय निधि पांडे और 9 वर्षीय अनन्य पांडे स्कूल गई थीं, लेकिन इसके बाद दोनों घर वापस नहीं लौटीं।
दस दिन बीत जाने के बावजूद बच्चियों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। परिवार लगातार उनकी तलाश में जुटा हुआ है। बच्चियों के सुरक्षित होने को लेकर परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
परिजनों की ओर से आशंका जताई जा रही है कि दोनों बच्चियों को किसी ने या बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया हो। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बच्चियों के साथ किसी तरह की अनहोनी न हो, इसे लेकर परिवार बेहद चिंतित है। वहीं, समाज के कुछ लोगों ने भी बच्चियों की तलाश तेज कराने और मामले में प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन पर लगातार कार्रवाई का दबाव बनाने की बात कही है।
परिवार की एक ही गुहार है—
निधि और अनन्य जहां भी हों, सुरक्षित हों और जल्द से जल्द अपने घर वापस लौटें।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये दोनों बच्चियां कहां हैं?
क्या उन्हें जल्द सुरक्षित बरामद किया जा सकेगा?
परिवार और ग्रामीणों की निगाहें अब पुलिस की कार्रवाई और किसी संभावित सुराग पर टिकी हैं।
@prayagraj_pol @igrangealld @DCPGNagarPRJ @ADGZonPrayagraj @CMOfficeUP
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Hello All,
A fake narrative has been pushed in media for decades that SC/ST students face maximum dropouts/suicides in educational institutions.
This is not the truth!
Data shows that maximum dropouts & suicides are happening in GC students.
This is the data presented by govt in parliament (2019-2023)👇
Total Dropouts: 33,979
GC: 16,777 (49.37%)
OBC: 8,602 (25.32%)
SC: 4,823 (14.19%)
ST: 3,777 (11.12%)
Total Suicides: 75
GC: 39 (52.00%)
OBC: 25 (33.33%)
SC: 10 (13.33%)
ST: 1 (1.33%)
Request everyone to spread this data, across all SM platforms, as much as possible.
And never believe any media report, politician or activists blindly.
In case you see someone making such claims, always ask for data to back their claims.
Never believe without proof.
Gaureesh Vats Shukla retweeted
SC/ST एक्ट के दुरुपयोग के खिलाफ
27 सितंबर को GC/OBC की संयुक्त बैठक, जरूर जुड़ें!
Retweet to oppose the misuse!
Gaureesh Vats Shukla retweeted
बता दें कि IIT बॉम्बे में फरवरी में नमन अग्रवाल और जुलाई में रोहिल सांगवान नाम के 2 छात्रों ने भी आत्महत्या की थी!
लेकिन इन दोनों बच्चों की मौत पर कोई हंगामा नहीं हुआ, किसी आयोग ने जांच नहीं की!
क्योंकि दोनों बच्चे सामान्य वर्ग से थे!
इसलिए आज NCGC (सवर्ण आयोग) की ज़रूरत है!
ताकि सामान्य वर्ग के बच्चों की मौत की जांच भी हो, और उनके मौत की खबरें नेता और मीडिया दबाकर अपनी राजनीति ना चमकाएं!
Gaureesh Vats Shukla retweeted
पहली बात, OBC के साथ जातिवाद नहीं होता!
उनको आरक्षण पिछड़ेपन की वजह से मिलता है!
ST को भी आरक्षण उनके geographical isolation की वजह से मिलता है, जातिवाद की वजह से नहीं!
तीसरी बात, SC/ST एक्ट सबसे ज़्यादा OBC पर लगते हैं (बिहार/UP में यादवों पर ज़्यादा).
चौथी बात, UGC 2012 नियम पहले से ही हैं, नए नियम क्यों? UGC 2023 नियमों में भी शिकायत सिर्फ SC/ST/OBC कर सकते हैं, ऐसा क्यों?
सबसे अहम बात- किसके साथ कौन सा उत्पीड़न हो रहा है, और कौन कर रहा है, इसका डेटा किधर है? क्योंकि डेटा तो ये दिखाता है कि सामान्य वर्ग के बच्चों को सबसे ज़्यादा प्रोटेक्शन की ज़रूरत है!
तो डेटा लेकर आइए, औऱ बताइये की कौन किसका उत्पीड़न करता है और फिर नियम कानून बनाइये!
बड़े बड़े भाषण देकर, और लोगों को शब्दों में उलझाकर सिर्फ राजनीति मत चमकाईये🙏
#UGC_Rollback
प्रिय मित्रो,
यूजीसी नियमों में बदलाव के कारण उपजे विवाद के समाधान पर मैने पूर्णतः निष्पक्ष भाव से अपने विचार प्रकट किए हैं। आपसे अनुरोध है कि आप गहराई से मेरे प्रत्येक वाक्य और शब्द को पढ़ें और सामाजिक एकता को सर्वोपरि रख कर अपने विचार प्रकट कर शेयर करें
"यूजीसी के नए इक्विटी नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों में जो असंतोष और आशंका पैदा हुई है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
साथ ही, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों को भेदभाव और उत्पीड़न से सुरक्षा देना भी उतना ही आवश्यक है।"
मेरे विचार से समाधान नियम को पूरी तरह समाप्त करने में नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, निष्पक्ष और सर्वसमावेशी बनाने में है।
जाति के आधार पर किसी भी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए—चाहे वह सामान्य वर्ग का हो या आरक्षित वर्ग का। प्रत्येक विद्यार्थी को शिकायत करने, निष्पक्ष जांच कराने और अपील करने का समान अधिकार मिलना चाहिए।
साथ ही संविधान द्वारा SC, ST, OBC तथा अन्य वंचित वर्गों को दिए गए विशेष संरक्षण और सकारात्मक उपाय पूरी तरह सुरक्षित रहने चाहिए। सामाजिक न्याय और समान अवसर एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
शिकायत मात्र को दोष का प्रमाण न माना जाए। स्वतंत्र और निष्पक्ष समिति दोनों पक्षों को सुनकर प्रमाण के आधार पर निर्णय करे। जानबूझकर की गई झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायत के लिए भी उचित व्यवस्था हो, लेकिन ऐसी व्यवस्था वास्तविक पीड़ित को शिकायत करने से डराने वाली नहीं होनी चाहिए।
मेरी दृष्टि में संशोधित नियम का मूल संदेश बहुत स्पष्ट होना चाहिए—
“भेदभाव किसी के साथ नहीं; संरक्षण सभी को; और संविधान द्वारा वंचित वर्गों को मिले विशेष अधिकार पूरी तरह सुरक्षित।”
यदि UGC इसी भावना के साथ नियमों को पुनः तैयार करता है और केंद्र, राज्य, विश्वविद्यालयों, शिक्षकों तथा सभी सामाजिक वर्गों से व्यापक परामर्श करता है, तो वर्तमान विवाद को टकराव के बजाय सामाजिक सहमति में बदला जा सकता है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,
शिक्षा राजनीति का विषय नहीं, राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। इसलिए ऐसा नियम चाहिए जो किसी वर्ग की जीत या हार न बने, बल्कि विश्वविद्यालयों को ऐसा स्थान बनाए जहाँ जाति से ऊपर विद्यार्थी की प्रतिभा, गरिमा और समान अवसर की भावना सर्वोपरि हो।
#UGC #UGCAct
शिक्षा मंत्री श्री @JoshiPralhad @PralhadJoshiOfc
























