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ऐकाउंडेट कम डाटा एंट्री ऑप्रेटर पंचायत सहायक पंचायत सहायक (DEO)....

हाथरस उत्तर प्रदेश... भारत
Joined January 2022
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माननीय @yadavakhilesh जी, उत्तर प्रदेश के 57,000 पंचायत सहायकों की आवाज़ को समाजवादी पार्टी के आगामी चुनावी घोषणापत्र में स्थान दीजिए। ग्राम सचिवालय के संचालन और ग्रामीण प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले UPkePanchayatSahayak अब अनिश्चित अनुबंध व्यवस्था से मुक्ति और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं। हमारी दो प्रमुख मांगें हैं: 1️⃣ नियमितीकरण एवं पृथक राज्य सेवा संवर्ग: अनुबंध व्यवस्था समाप्त कर पंचायत सहायकों के लिए पृथक राज्य सेवा संवर्ग का गठन किया जाए। वर्तमान में कार्यरत पंचायत सहायकों का नियमानुसार समायोजन करते हुए पदनाम “सहायक सचिव” निर्धारित किया जाए। 2️⃣ सेवा नियमावली एवं भर्ती में वरीयता: स्पष्ट सेवा नियमावली लागू कर वेतनमान, पदोन्नति, स्थानांतरण, अवकाश एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए। आगामी पंचायत सचिव एवं ग्राम पंचायत अधिकारी भर्तियों में नियमानुसार आयु सीमा में छूट एवं अनुभव के आधार पर वरीयता दी जाए। यह किसी विशेष कृपा की मांग नहीं, बल्कि वर्षों से कार्यरत पंचायत सहायकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा और भविष्य की स्पष्ट नीति की मांग है। कृपया इन दोनों मांगों को समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र में शामिल कर 57,000 पंचायत सहायकों को न्याय और सम्मान देने का संकल्प लें। @dimpleyadav @samajwadiparty @mediacellsp @SP_Prahari @ManojSinghKAKA @MPDharmendraYdv #ManifestoForPanchayatSahayak
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जब उत्तर प्रदेश सरकार अकुशल, अर्द्धकुशल एवं कुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित कर सकती है, तो ग्राम पंचायतों में नियमित रूप से विभागीय कार्यों का निर्वहन करने वाले पंचायत सहायकों को कम-से-कम निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के बराबर मानदेय क्यों नहीं दिया जा सकता ?
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माननीय अखिलेश यादव जी, गाँव की सरकार चलाने में हमारी जिम्मेदारी, लेकिन हमारे अपने भविष्य की कोई गारंटी नहीं! उत्तर प्रदेश के लगभग 58 हजार, गाँव के टॉपर पंचायत सहायक पिछले पाँच वर्षों से अल्प मानदेय पर ग्रामीण सचिवालय, सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन कार्यों एवं विभिन्न सर्वेक्षणों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। महँगाई के इस दौर में मात्र 200–300 रुपये प्रतिदिन के बराबर मानदेय पर परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन है। जब घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही चुनौती बन जाए, तो सम्मानजनक जीवन की उम्मीद कैसे करें? जब काम सरकारी, जिम्मेदारी सरकारी और जवाबदेही सरकारी है, तो सेवा में स्थायित्व और सम्मान क्यों नहीं? आपसे अनुरोध है कि पंचायत सहायकों के स्थायीकरण एवं नियमितीकरण की मांग को अपने चुनावी घोषणा-पत्र में प्रमुखता से शामिल करें। हमें सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, सम्मानजनक भविष्य और नियमितीकरण भी चाहिए! @yadavakhilesh @samajwadiparty
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माननीय विपक्षी नेताओं से आग्रह है कि उत्तर प्रदेश के 57,000 पंचायत सहायकों की आवाज़ सदन में उठाएँ। ▪️ स्थाईकरण ▪️ न्यूनतम ₹18,000 मानदेय ▪️ DBT से समयबद्ध भुगतान ▪️ सेवा नियमावली एवं सेवा सुरक्षा पंचायत सहायकों को आश्वासन नहीं, अधिकार चाहिए! ✊ #RegularizePanchayatSahayak
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PanchayatSahayak का भविष्य सुरक्षित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, संविदा व्यवस्था से आगे बढ़कर स्थायी नौकरी का रास्ता खोलें। #Regularize_UPPanchayatSahayak @myogiadityanath @oprajbhar
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मंत्री ओम प्रकाश राजभर जी की उदासीनता के कारण Panchayatsahayak सड़कों पर उतरने को विवश हैं। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, इस स्थिति को बिगड़ने से बचाएं। #Regularize_UPPanchayatSahayak @myogiadityanath @oprajbhar
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PanchayatSahayak केवल मानदेय पाने वाला कर्मी नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत के कार्यों में योगदान देने वाला शिक्षित युवा है। उसके स्वाभिमान का सम्मान करते हुए नियमितीकरण और सम्मानजनक वेतनमान सुनिश्चित किया जाए। @oprajbhar @myogiadityanath @RahulGandhi #Regularize_UPPanchayatSahayak
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Replying to @oprajbhar
@oprajbhar हल्के में न लीजियेगा..!
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#पंचायत_सहायक_नियमित_करो @myogiadityanath 1. पंचायत सहायकों का अनुबंध प्रणाली खत्म करते हुए नियमित सेवा संवर्ग बनाकर राज्यकर्मी घोषित किया जाए 2. राज्य संवर्ग बनने तक अंतरिम राहत हेतु न्यूनतम 18000 मानदेय डीबीटी माध्यम से दिया जाए। निम्न मांगो पर सरकार अगर निर्णय नहीं लेती है तो पंचायत सहायक लोकतांत्रिक तरीके से हर कदम उठाने का काम करेंगे। स्वयं और स्वयं के परिवार का वोट बहिष्कार समस्त 57000 पंचायत सहायक 2027 में करने का प्रण लेंगे। @oprajbhar @BJP4UP @ChiefSecyUP @AwasthiAwanishK @Manojkmr_singh @yadavakhilesh @Manoj_Yadav_ @INCUttarPradesh @BhimArmyChief @Mayawati @mppchaudhary
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उत्तर प्रदेश में संविदा पर तैनात पंचायत सहायकों का राज्य संवर्ग बनाया जाए एवं समायोजित किया जाए। अंतरिम राहत हेतु न्यूनतम 18000 मानदेय DBT माध्यम से दिया जाए। सेवा नियमावली बनाकर समस्त संवर्ग लाभ लागू किए जाए। उपर्युक्त मांगो पर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए। अन्यथा की दृष्टि में पंचायत सहायक दिवाली से पूर्व पुनः शांति पूर्ण आंदोलन हेतु मजबूर होंगे। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी @uppanchayatiraj शासन प्रशासन की होगी @myogiadityanath @uppanchayatiraj @oprajbhar
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शौचालय केयरटेकर और सचिवालय संभालने वाले PanchayatSahayak का वेतन एक समान (9000 रु) करने वाले अधिकारी को अर्थशास्त्र का नोबेल जरूर मिलना चाहिए! #सचिवालय_शौचालय_एक_समान @oprajbhar एक नोबेल आप भी डिजर्व करते हो
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माननीय मुख्यमंत्री जी, ग्राम सचिवालय को मजबूत बनाने की बात होती है। डिजिटल सेवाओं को गांव तक पहुंचाने की बात होती है। तो उस व्यवस्था को रोज संभालने वाले पंचायत सहायक के लिए ₹9,000 ही पर्याप्त क्यों? ₹18,000 न्यूनतम मानदेय, सीधे DBT भुगतान और सेवा सुरक्षा पर अब स्पष्ट निर्णय होना चाहिए। @myogiadityanath @oprajbhar #पंचायत_सहायक_संघर्ष #सचिवालय_शौचालय_एक_समान
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पचायत सहायकों के मानदेय में देरी न हो। सरकार डीबीटी पोर्टल अनिवार्य करे ताकि सीधे बैंक खाते में भुगतान हो सके।PanchayatSahayak #सचिवालय_शौचालय_एक_सामान @DirectorUPPR @ChiefSecyUP @uppanchayatiraj @oprajbhar @spsinghbaghelpr @UPGovt @myogiadityanath @myogioffice @InfoDeptUP
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#सचिवालय_शौचालय_एक_समान ग्राम सचिवालय मॉडल स्थायी है, तो उसके संचालन की महत्वपूर्ण कड़ी PanchayatSahayak संविदा पर क्यों?” क्या ग्राम सचिवालय कोई मौसमी योजना है? @myogiadityanath @AAPUttarPradesh @BJP4UP @mediacellsp @RajeevRai @pallavi_apnadal @BhimArmyChief @samajwadiparty
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टैलेंट की कद्र करना सीखो @myogiadityanath ! PanchayatSahayak को उसका हक मिलना ही चाहिए। #सचिवालय_शौचालय_एक_समान 😪
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Replying to @myogiadityanath
@myogiadityanath सरकारी आउटसोर्स व्यवस्था में पारिश्रमिक के अलग-अलग स्तर निर्धारित हैं। PanchayatSahayak के लिए ₹9,000 तय है। नीति-निर्माताओं से जानना जरूरी है कि दोनों व्यवस्थाओं में यह अंतर किस आधार पर तय हुआ। @InfoDeptUP @oprajbhar #सचिवालय_शौचालय_एक_समान
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#सचिवालय_शौचालय_एक_समान ? माननीय मुख्यमंत्री जी @myogiadityanath कभी-कभी अन्याय तब भी महसूस होता है, जब अलग योग्यता, अलग जिम्मेदारी और अलग प्रकृति के कार्यों का मूल्यांकन एक ही तराजू पर कर दिया जाए। "उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में सचिवों की कमी और ग्राम सचिवालयों के नियमित संचालन की आवश्यकता के बीच PanchayatSahayak की व्यवस्था सामने आई। उद्देश्य था कि गांव का सचिवालय केवल भवन बनकर न रह जाए, बल्कि वहां बैठने वाला कोई ऐसा व्यक्ति हो जो ग्रामीणों को पंचायत की डिजिटल और ऑनलाइन सेवाओं से जोड़ सके। 'पंचायत सहायक' इसी व्यवस्था की कड़ी बने। समय बीतता गया। काम और अनुभव बढ़ते गए, लेकिन पंचायत सहायक की सेवा-स्थिति अस्थायी संविदा व्यवस्था से आगे नहीं बढ़ी। पाँच वर्ष बाद भी उसके सामने स्थायी सेवा संवर्ग, स्पष्ट सेवा भविष्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप वेतनमान का प्रश्न खड़ा है। मानदेय ₹9,000 निर्धारित किया गया। इसी बीच एक ऐसी तुलना सामने आई, जिसने पंचायत सहायकों के भीतर एक गहरा सवाल पैदा किया। ग्राम सचिवालय संचालित करने वाले पंचायत सहायक के लिए ₹9,000 और सामुदायिक शौचालय की देखरेख करने वाले केयरटेकर के लिए भी ₹9,000 की राशि। पंचायत सहायक भी तो अपनी तरफ से ग्राम सचिवालय में जरूरते पूरी करता है उनको प्रताड़ित कर रखा जा रहा ?? यहीं से जन्म लेता है #सचिवालय_शौचालय_एक_समान इस नारे का अर्थ केयरटेकर के कार्य को छोटा बताना या उसके मानदेय का विरोध करना नहीं है। हर श्रम का अपना सम्मान है और प्रत्येक कर्मी को सम्मानजनक पारिश्रमिक मिलना चाहिए। लेकिन प्रश्न यह है कि यदि दो पदों की शैक्षिक योग्यता, चयन प्रक्रिया, कार्य की प्रकृति, तकनीकी दक्षता, उत्तरदायित्व और कार्यक्षेत्र अलग हैं, तो उनके मूल्यांकन का आधार क्या है? पंचायत सहायकों की पीड़ा इसी तुलना में छिपी है। वे यह नहीं पूछ रहे कि “केयरटेकर को ₹9,000 क्यों मिले?” “पंचायत सहायक की योग्यता, पाँच वर्षों के अनुभव और ग्राम सचिवालय की जिम्मेदारियों का स्वतंत्र मूल्यांकन क्यों नहीं हुआ?” यह अंतर बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि किसी दूसरे कर्मचारी का मानदेय कम कर देना न्याय नहीं हो सकता। न्याय तब होगा जब प्रत्येक पद को उसकी प्रकृति, योग्यता, उत्तरदायित्व और कार्यभार के आधार पर उचित स्थान मिले। आज पंचायत सहायकों के सामने इसलिए केवल ₹9,000 का आर्थिक प्रश्न नहीं है। उनके सामने अपने पद की पहचान और भविष्य का प्रश्न भी है। पाँच वर्ष की सेवा के बाद उनका सवाल है क्या PanchayatSahayak हमेशा एक अस्थायी व्यवस्था ही रहेगा, या उसके अनुभव और निरंतर आवश्यकता को देखते हुए सरकार उसके लिए राज्यकर्मी घोषित कर स्पष्ट सेवा नियम, सेवा संवर्ग और उचित वेतनमान की दिशा में भी विचार करेगी? यही #सचिवालय_शौचालय_एक_समान के पीछे का वास्तविक मुद्दा है। यह लड़ाई किसी दूसरे कर्मी से बराबरी तोड़ने की नहीं,बल्कि अपने काम का अलग और न्यायसंगत मूल्यांकन मांगने की है। और शायद किसी भी कर्मचारी के लिए सबसे बड़ी पीड़ा कम वेतन से पहले यह होती है कि उसके काम की प्रकृति, उसकी योग्यता और उसकी जिम्मेदारी को पहचान ही न मिले। @myogiadityanath @BJP4UP @mppchaudhary @mediacellsp @yadavakhilesh @uppanchayatiraj @INCUttarPradesh @RahulGandhi @BhimArmyChief @bspindia @mayawati @SanjayAzadSln @AnilYadavmedia1 @ranvijaylive @NaveenSirRWA
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पंचायत सहायकों को स्थाई करो PanchayatSahayak @myogiadityanath
गाँव का डेटा, पोर्टल का काम, योजनाओं का रिकॉर्ड और जनता की सहायता— जब इतनी जिम्मेदारियाँ Panchayat Sahayak के हिस्से हैं, तो ₹18,000 मानदेय की माँग अनुचित कैसे है? #PanchayatSahayak @oprajbhar #सचिवालय_शौचालय_एक_समान @BJP4UP @psu_knd @psunionup @PSCDEOWAUP @Surajyadav016
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@myogiadityanath जी PanchayatSahayak के पास काम की कमी नहीं, जिम्मेदारियों की कमी नहीं। है लेकिन कमी है तो बस उस सम्मानजनक तनख्वाह की, जिससे वह अपने घर को निश्चिंत होकर देख सके। @yadavakhilesh @oprajbhar @uppanchayatiraj #सचिवालय_शौचालय_एक_समान
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माननीय मुख्यमंत्री जी, @CMOfficeUP शौचालय और सचिवालय की तुलना किसी को छोटा दिखाने के लिए नहीं है। यह सवाल पूछने के लिए है—ग्राम सचिवालय चलाने वाले PanchayatSahayak की जिम्मेदारियों का उचित आर्थिक मूल्यांकन कब होगा? @myogiadityanath @oprajbhar @mediacellsp @BJP4UP @mppchaudhary #सचिवालय_शौचालय_एक_समान
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