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Patna, India
Joined June 2018
पान में इस्तेमाल होने वाली सुपारी(Areca catechu) के बारे में तो आप सभी जानते होंगे , लेकिन क्या आपने कभी इसके पेड़ को देखा है? सुपारी का पेड़ भी नारियल के पेड़ जैसा दिखता है, इसके फल का इस्तेमाल पान में किया जाता है और साथ ही इसको कई रीति-रिवाजों में भी उपयोगी है। प्रकृति की ऐसी ही अनोखी वनस्पतियों के बारे में जानें और इसके संरक्षण में अपना योगदान दें। @mla_hayaghat @moefcc #Supari #ArecaCatechu #PlantKnowledge #AmazingPlants #Biodiversity #GreenBihar
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बिहार के प्राकृतिक वैभव का अनुभव करने के लिए तैयार हो जाइए! वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ हो चुका है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), बिहार, श्री अरविंदर सिंह ने जंगल सफारी का उद्घाटन कर सैलानियों के पहले जत्थे को रवाना किया। इस पर्यटन सत्र में जंगल सफारी के रोमांच के साथ वन्यजीवों और समृद्ध जैव विविधता को करीब से जानने का अवसर आपका इंतजार कर रहा है। तो आइए, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की सैर करें और प्रकृति के अनमोल संसार को करीब से महसूस करें! @mla_hayaghat @moefcc #ValmikiTigerReserve #ecotourism #WildlifeConservation #bihartourism
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भारतीय रसोई में तेजपत्ते (Cinnamomum tamala) का इस्तेमाल खाने में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए तो किया ही जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल केवल रसोई तक सीमित नहीं है। पारंपरिक चिकित्सा में भी इसका खास महत्व है। पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और सूजन कम करने में भी तेजपत्ते को लाभकारी माना जाता है। आइए, इस उपयोगी वनस्पति की खूबियों के बारे में जानें और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। @mla_hayaghat @moefcc #TejPatta #medicinalplant #healthyliving #herbalplants #GreenBihar
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हाथियों की दुनिया को करीब से जानिए! हाथियों का आहार क्या है? उनका व्यवहार कैसा होता है। इन सभी सवालों के जवाब जानिए वन्यप्राणी विशेषज्ञ अभिषेक से। इस वीडियो में हाथियों के जीवन, उनकी आदतों और विशेषताओं से जुड़ी रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारियाँ दी गई हैं। @mla_hayaghat @moefcc #Elephants #Elephantfacts #Asianelephant #WildlifeConservation #Wildlifeeducation
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ, जंगल सफारी के लिए रवाना हुआ सैलानियों का पहला जत्था वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ 17.10.2026 (शनिवार) को किया गया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) श्री अरविंदर सिंह ने फीता काटकर जंगल सफारी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सैलानियों के पहले जत्थे को जंगल सफारी के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर श्री अरविंदर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और अधिकाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से इस दिशा में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में राजगीर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रमुखता से किया गया है। इसके साथ ही राज्य के अन्य संभावित पर्यटन स्थलों पर भी इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले यहां प्रतिवर्ष लगभग ढाई से तीन लाख पर्यटक आते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब छह लाख तक पहुंच गई है। विभाग का प्रयास है कि बेहतर सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए वीटीआर में पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का लगातार विकास किया जा रहा है। यहां इको-कॉटेज और कन्वेंशन सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। कन्वेंशन सेंटर में उच्चस्तरीय आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यटकों के ठहरने की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर रिसॉर्ट विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। जंगल सफारी को अधिक सुविधाजनक और यादगार बनाने के लिए नई गाड़ियों की व्यवस्था की गई है। साथ ही, पर्यटकों को जंगल, वन्यजीवों और जैव विविधता के बारे में विस्तृत जानकारी देने के उद्देश्य से गाइडों की नियुक्ति भी की गई है। इससे पर्यटक जंगल और वन्यजीवों को करीब से समझ सकेंगे तथा संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे। श्री सिंह ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए हेली-टूरिज्म के तहत हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की गई है। इन पहलों का उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बिहार को इको-टूरिज्म के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। पर्यटन सत्र के शुभारंभ के अवसर पर वन संरक्षक-सह-क्षेत्र निदेशक श्री गौरव ओझा, डीएफओ-सह-उप निदेशक, प्रमंडल-2 श्री विकास अहलावत, डीएफओ-सह-उप निदेशक, प्रमंडल-1 श्री शिखर प्रधान सहित सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र पदाधिकारी एवं विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। @mla_hayaghat @moefcc
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अशोक – प्राकृतिक सुंदरता और भारतीय परंपरा की पहचान अपने नारंगी-लाल फूल और लंबे, चमकदार पत्तों से पहचाना जाने वाला अशोक (Saraca asoca) का वृक्ष प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति में भी विशेष स्थान रखता है। इसकी छाल आयुर्वेद में भी उपयोगी मानी गई है। सुंदर फूल और घने पत्तों के कारण इसे मंदिरों और उद्यानों के आसपास सजावटी वृक्ष के रूप में भी लगाया जाता है। @mla_hayaghat @moefcc #Ashoka #Saracaasoca #Medicinalplant #Healthyliving #GreenBihar
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कैमूर की पहाड़ियों के बीच स्थित माँ मुंडेश्वरी मंदिर आस्था, श्रद्धा और प्राचीन विरासत का अद्भुत प्रतीक है। प्रकृति की सुंदर वादियों से घिरा यह पावन धाम भक्तों के मन में भक्ति और विश्वास का भाव जगाता है। इस नवरात्र, माँ मुंडेश्वरी के पावन धाम पधारें और आस्था की इस अनूठी विरासत से जुड़ें। @mla_hayaghat @moefcc #maamundeshwari #navratri #kaimurbihar #Shaktipeeth #biharexplore #IncredibleBihar
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, नए पर्यटन सत्र 2026-27 के लिए पर्यटकों के स्वागत को तैयार है। 17 अक्टूबर से जंगल सफारी के रोमांच के साथ गिद्ध संरक्षण केंद्र की सैर का भी आनंद लें और वन्यजीवों एवं प्रकृति की अनमोल विरासत को करीब से जानें। आइए, वाल्मीकि के प्राकृतिक वैभव का अनुभव करें और प्रकृति संरक्षण के संकल्प के साथ इस अद्भुत यात्रा का हिस्सा बनें। @mla_hayaghat @moefcc #ValmikiTigerReserve #vultureconservation #ecotourism #WildlifeConservation #bihartourism
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भारतीय सॉफ्टशेल कछुआ (Nilssonia gangetica), जिसे गंगेटिक सॉफ्टशेल कछुए के नाम से भी जाना जाता है, गंगा, यमुना और अन्य बड़ी नदियों में पाया जाता है। इसका चपटा, अंडाकार और चमड़े जैसा मुलायम ऊपरी कवच इसे अन्य कछुओं से अलग पहचान देता है। इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसके प्राकृतिक आवासों की रक्षा और नदियों को स्वच्छ बनाए रखना, इस प्रजाति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। @mla_hayaghat @moefcc #SoftshellTurtle #Turtlefacts #SaveWildlife #WildlifeConservation #Biodiversity
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क्या रेड सैंड बोआ सचमुच दो मुँहा साँप होता है? इस ग्राफिक्स के माध्यम से जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक तथ्य! अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक तथ्यों पर विश्वास करें। साँप दिखाई देने पर उसे छूने या पकड़ने का प्रयास न करें। सुरक्षित रेस्क्यू के लिए वन विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-345-7252 पर संपर्क करें। @mla_hayaghat @moefcc #Redsandboa #snakeawareness #snakefacts #mythvsfacts #wildlifeconservation
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ऊंचे पहाड़, मनोरम जलप्रपात, हरे-भरे जंगल, ऐतिहासिक किले और आस्था के पावन धाम… रोहतास की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत हर पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करती है। तुतला भवानी जलप्रपात से कशिश जलप्रपात तक, रोहतासगढ़ किले से गुप्ताधाम तक, यहां का हर स्थल अपने भीतर एक अनूठी कहानी समेटे हुए है। बिहार में इको-टूरिज्म की बढ़ती संभावनाओं के साथ रोहतास न केवल पर्यटन को नई पहचान दे रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित कर रहा है। आइए, प्रकृति के करीब आएं और रोहतास की खूबसूरती को करीब से जानें! @mla_hayaghat @moefcc #tutlabhawani #rohtasbihar #bihartourism #BiharExplorer #IncredibleBihar
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नीलकंठ (Coracias benghalensis) अपने खूबसूरत रंग और आकर्षक रूप के लिए जाना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति में भी इस पक्षी का विशेष महत्व है। आइए, इस अनमोल पक्षी और उसके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए मिलकर प्रयास करें। @mla_hayaghat @moefcc #Neelkanth #Coraciasbenghalensis #Birds #Birdsconservation #BirdFacts
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सुरैला चौर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा प्रारूप अधिसूचना प्रकाशित बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा सिवान जिले के पचरुखी अंचल में स्थित सुरैला चौर की प्रारूप अधिसूचना प्रकाशित की गई है। यह पहल क्षेत्र की समृद्ध जैव-विविधता, प्रवासी पक्षियों के आवास और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। करीब 144 एकड़ में फैला सुरैला चौर सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर स्थित है। यहाँ दर्ज पक्षियों की विविध प्रजातियाँ और समृद्ध जलीय पारिस्थितिकी इसे संरक्षण एवं इको-पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं। @mla_hayaghat @moefcc
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क्या आपने कभी पेड़ों के बीच तेजी से उड़ते शिकरा (Accipiter badius) को देखा है? इसकी फुर्तीली उड़ान और शिकार करने का अनोखा अंदाज़ इसे एक कुशल शिकारी बनाता है। पेड़ों की शाखाओं के बीच छिपकर शिकार पर नज़र रखना और सही मौका मिलते ही झपट्टा मारना इसकी खासियत है। प्रकृति का हर जीव अपने आप में खास है। इनकी विविधता को बनाए रखने के लिए इनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण आवश्यक है। @mla_hayaghat @moefcc #Shikra #accipiterbadius #wildlife #WildlifeFacts #wildlifeconservation
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ऊपर दिए गए विकल्पों में से बताएं कि ओजोन परत हमें किससे बचाती है? अपना सही जवाब कमेंट में लिखकर बताएं। @mla_hayaghat @moefcc #OzoneLayer #EnvironmentQuiz #OzoneDay #SaveOzone #Environment
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चौरासन शिव मंदिर, बिहार के रोहतास जिले में स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है, जिसे रोहितेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को 84 सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं, जो उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है। अगर आप भी इस मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और इसकी स्थापत्य संरचना को करीब से जानना चाहते हैं, तो जब भी रोहतास आएं, रोहितेश्वर महादेव के दर्शन करना न भूलें। @mla_hayaghat @moefcc #chaurasantemple #rohtas #bihartourism #ExploreBihar #IncredibleBihar
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चंपा का वृक्ष अपने सुंदर और सुगंधित फूलों के लिए जाना जाता है। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला यह वृक्ष बिहार के चंपारण जिले के नाम की उत्पत्ति से भी जुड़ा है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में चंपा के वृक्षों की अधिकता के कारण ही इसका नाम चंपारण पड़ा। अपनी सुंदरता और सुगंध के साथ-साथ यह वृक्ष पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। @mla_hayaghat @moefcc #Champa #Medicinalplants #Healthyliving #GreenBihar
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गुलाबी-लाल चेहरे और हल्की मुड़ी हुई पूँछ वाला रीसस मकाक अपनी अनुकूलन क्षमता के लिए जाना जाता है। वनों से लेकर गाँवों, शहरों और मंदिर परिसरों तक, यह विभिन्न प्रकार के वातावरण में आसानी से रह सकता है। समूह में रहने वाला यह बंदर फल, बीज, पत्तियाँ, अनाज और छोटे कीड़े-मकोड़ों को अपने आहार में शामिल करता है। वन्यजीवों को जानें, उनके व्यवहार को समझें और उनके प्रति संवेदनशील बनें। @mla_hayaghat @moefcc #rhesusmacaque #WildlifeConservation #wildlifeawareness #SaveWildlife #biodiversity
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घने काले बाल, लंबी थूथन और मजबूत पंजे… स्लॉथ भालू की ये विशेषताएँ इसे वन्यजीवों की दुनिया में खास बनाती हैं। मुख्य रूप से दीमक, चींटियों, फलों और शहद पर निर्भर रहने वाला स्लॉथ भालू वन पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, इसके सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। आइए, इस विश्व स्लॉथ बेयर दिवस पर इनके संरक्षण और सुरक्षित सह-अस्तित्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लें। @mla_hayaghat @moefcc #worldslothbearday #SlothBear #SaveWildlife #Wildlifefacts #Wildlifeconservation #Biodiversity
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बॉटल ब्रश अपने लाल, ब्रश जैसे खूबसूरत फूलों से सड़कों और पार्कों की रौनक बढ़ाने वाला एक आकर्षक पेड़ है। यह पेड़ बाग-बगीचों और आसपास के वातावरण को और भी जीवंत और ताजगी भरा बना देता है। बिहार में हरियाली बढ़ाने की दिशा में ऐसे सजावटी पौधों का रोपण एक सराहनीय पहल है। आइए, मिलकर हरित और सुंदर बिहार के निर्माण में अपना योगदान दें। @mla_hayaghat @moefcc #BottleBrush #callistemonviminalis #SaveEnvironment #treeplantation #GreenBihar
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