@ChandrantM

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New Delhi India
Joined November 2012
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ये लोग (विपक्ष) जब हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में चुनाव जीतते हैं, तब इन्हें चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की याद नहीं आती। लेकिन जब बिहार में हार का सामना करना पड़ता है या पश्चिम बंगाल में चुनाव हारते हैं, तो अपनी हार की खीझ चुनाव आयोग पर निकालने लगते हैं। जब जनता इन्हें सबक सिखाती है, तो उससे सीखने के बजाय ये आरोप-प्रत्यारोप और घड़ियाली आंसू बहाने लगते हैं। एक कहावत है- चोर मचाए शोर… जिन्होंने कभी बूथ लूटने का काम किया, जिन्होंने बंदूक की नोक पर लोकतंत्र को कुचलने का काम किया, वे आज फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि ये फिर से उसी जंगलराज के दौर में लौटना चाहते हैं, जिसमें बूथ लूटने जैसी घटनाएं लोकतंत्र को शर्मसार करती थीं। मैं बिहार की जनता को हृदय से धन्यवाद देता हूं कि आपने हमेशा हमें अपना आशीर्वाद दिया। - श्री @NitinNabin
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लोकतंत्र की आड़ में वर्दी पर हमला, CJP की भद्दी राजनीति का सच! महिला पुलिस अधिकारी को थप्पड़ मारना लोकतांत्रिक विरोध नहीं, कानून और वर्दी का अपमान है। विरोध का अधिकार है, हिंसा और अराजकता का नहीं! भारत की जनता वर्दी पर ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं करेगी।
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अमेरिका की प्लानिंग है रूस और वेनेजुएला से क्रूड लेकर जामनगर में प्रोसेस करके उसे यूरोप और दुनिया के बाजारों में बेचा जाए अमेरिका में डीजल की खपत बड़ी मात्रा में होती है और रूस और वेनेजुएला के क्रूड से डीजल भारी मात्रा में निकलता है इसके अलावा अमेरिका की प्लानिंग है कि मुकेश अंबानी अमेरिका के टेक्सास में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी लगा रहे है अभी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी जामनगर की है और फिर उस रिफाइनरी के द्वारा वेनेजुएला और गुयाना का क्रूड प्रोसेस होकर पूरी दुनिया में बेचा जाए और इसी सिलसिले में अमेरिका के विदेश मंत्री पहले मुंबई में मुकेश अंबानी के घर जाएंगे और उसके बाद जामनगर का दौरा करेंगे मतलब अब उलटी गंगा है एक जमाने में भारत के प्रधानमंत्री विदेश के उद्योगपतियों के आगे नतमस्तक होते थे और आज अमेरिका भारत के उद्योगपतियों के आगे मस्तक होता है और अमेरिका ने अपने इसी प्लानिंग के तहत गल्फ देशों को आपस में लाडवा कर उनके लौरे लगा दिए उनको बर्बाद कर दिया सब एक दूसरे के दुश्मन बन गए हैं सब एक दूसरे को मार कर खत्म कर रहे हैं सब एक दूसरे के तेल फैसिलिटी तेल के कुएं और रिफाइनरी को जला रहे हैं और अमेरिका मौज ले रहा है मतलब आने वाले समय में तेल के मामले में अमेरिका राजा होगा और इसमें भारत पर कोई प्रभाव इसलिए नहीं पड़ेगा क्योंकि जब नरेंद्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस वक्त ही उन्होंने हार्ड क्रूड सॉफ्ट क्रूड यानी सभी तरह के क्रूड को रिफाइन करने के लिए रिफाइनरी लगने की गुजरात में मंजूरी दी थी और आज जामनगर में एक ही रोड पर तीन बड़ी रिफाइनरी है जो दुनिया के हर तरह के क्रूड को प्रोसेस कर सकती हैं एक और रोचक जानकारी आपको बता रहा हूं जिस वक्त भारत रूस से बड़ी मात्रा में सत्ता क्रूड ले रहा था तब पाकिस्तान में भी हंगामा हुआ कि हम क्यों नहीं ले रहे उस वक्त इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे इमरान खान ने रूस से तीन बड़े-बड़े जहाज में क्रूड मंगवाया क्रूड कराची पहुंचा उसके बाद जब क्रूड के सैंपल को रिफाइनरी में डाला गया तब पता चला कि यह क्रूड तो पाकिस्तान में प्रोसेस ही नहीं सकता उसके बाद इमरान खान ने रूस से रिक्वेस्ट किया कि भैया यह क्रूड आप वापस ले लो रूस ने बोला हमारी एक रिफाइनरी जामनगर में है वहां भिजवा दो और वहां भिजवाने तक का भाड़ा भी तुम दो तब हम वापस लेंगे मजबूरी में पाकिस्तान को वह दो जहाज क्रूड जामनगर नायरा में भेजना पड़ा और वह क्रूड नायरा एनर्जी को भाड़ा भी नहीं देना पड़ा था
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रूसी तेल-गैस खरीदने पर भारत समेत 5 देशों पर कोई टैरिफ नहीं', ट्रंप का बड़ा ऐलान हाहाहा..... ये बहुत बढ़िया था गुरु. डेढ़ साल खूब Tariff का गाना गाया... भारत पर जम कर Tariff लादा.... भारत ने कोई जवाब नहीं दिया. विपक्ष ने खूब हल्ला गुल्ला किया.... Surrender नरेन्दर के नारे लगे.... Meme की बाढ़ आई. फिर भारत ने काम से जवाब दिया...... Export Divert किया.... अमेरिका को जाने वाला सामान यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, middle east जाने लगा..... ढेरों देशों के साथ FTA किये....EU के साथ दुनिया की सबसे बड़ी डील की. जहाँ विपक्ष कह रहा था कि लाखों नौकरियां ख़त्म होंगी.... उद्योग बंद होंगे.... यहाँ कोई नुकसान नहीं हुआ. उधर अमेरिका में वहां के सुप्रीम कोर्ट ने इस Tariff को रद्दी की टोकरी में डाला. ट्रम्प सरकार ने भारत पर tariff लगाने के लिए बकायदा कानून ही बना दिया. और कमाल की बात है.. इस कानून बनाने के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका एक डील करता है रूस के साथ.... डीजल खरीदने की. मतलब.... जिसके कारण यह सब सियापा किया ट्रम्प ने.... उसी की गोद में जा कर बैठ गए. और आज ट्रम्प ने भारत समेत 5 देशों के लिए कहा है.. कि उन पर कोई रोक नहीं है... रूस से तेल लेने पर 🤣 चिचा... ओ सुनहरी जुल्फों वाले चिचा. भारत पर रोक थी भी नहीं... तुम्हारे ये Restriction और Tariff की बत्ती बना कर वहीं डाल दी है भारत ने..... जहाँ पहले भारत 1 मिलियन बैरल per day के हिसाब से रूसी तेल लेता था...... तुम्हारे Tariff और Restriction की नौटंकी के बाद आज 2-2.5 मिलियन बेरेल per day के हिसाब से ले रहा है....... और उसी तेल को Refine करके यूरोप और अब अमेरिका को भी बेच रहा है. बाकि surrender surrender का विधवा विलाप करने वालों... देख लो असली surrender 😂😂
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देश में लोगो के बीच फेल होने के बाद ईको सिस्टम का अगला प्लान विदेशों में भारत को बदनाम करना है। अब तक हम पाकिस्तान के ख़िलाफ़ विदेशों में प्रदर्शन करते थे कि उसकी आतंकी सच्चाई दुनिया के सामने आए। लेकिन ये देशद्रोही अब अपने ही देश ख़िलाफ़ विदेशियों के बीच इमेज ख़राब करने का पूरा प्लान बना चुके है। अगले कुछ दिनों में आप ये सब होता देखोगे।
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Cockroaches का असली एजेंडा बेनकाब: Chaos, Anarchy और Regime Change! 🪳 वोटर रोल्स, EVM और छात्रों की आड़ में सिर्फ देश के Institutions को destabilize करने की साजिश! SIR से electoral rolls साफ हो रहे हैं, 2.37 करोड़ नए युवा वोटर जुड़ चुके हैं, तो इनके झूठ की दुकान पर ताला लगना तय है। Democracy नहीं, तुम्हारा एजेंडा खतरे में है! Facts का सामना करो, वरना जनता तुम्हारे पूरे खेल को ध्वस्त कर देगी!
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“खुद कबूल कर लिया: मकसद ‘Regime Change’ है!” आम आदमी पार्टी के संजय सिंह के इस बयान ने पूरे खेल को बेनक़ाब कर दिया है और एजेंडा सामने आ रहा है! युवाओं सावधान! इन नेताओं के राजनीतिक मंसूबों का मोहरा मत बनिए!
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Protest में अपने आपको ‘स्वतंत्र पत्रकार’ कहने वाले Content Creators/YouTubers उर्फ़ रीलबाज़ पैसा लेकर किसी भी पार्टी के लिए वीडियो बनाने के लिए तैयार हैं। सबसे बड़ा Under Cover Investigation जो आपकी आँखें खोल देगा। पत्रकार या रीलबाज़ ?
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I hear you, young beautiful patriots! I see your videos all across the airwaves and social media! Chant it loud and proud INDIA, MODI! It is time for a new voice in India - born, raised, educated on the soil of India - to RISE UP, organize, and peacefully protest the disruptive spirit of the Cockroach Party. There should always be a counter movement to uphold democracy and freedom. You, young patriots are this movement! And the movement has started!!!! Use your voice and peacefully protest for your country and your leader! Post your videos! Show the world the youth of India stand with Prime Minister Modi! Use the hashtag #RISEUP! Rise up, young patriots! #RISEUP! Stand with PM @narendramodi! Defend democracy! Defend freedom! #Modi #inspiration
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Patience is not just a virtue, it’s never-ending hard work. @LtGovDelhi #DPUpdates
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“𝐑𝐞𝐠𝐢𝐦𝐞 𝐂𝐡𝐚𝐧𝐠𝐞,” 𝐭𝐡𝐞𝐲 𝐬𝐚𝐲. Their mask is off. The sinister agenda is now out in the open. Unable to win the trust of 140 crore Indians during elections, the INDI Alliance and its radical cabal are openly challenging the very foundations of the Indian Republic. Their own words expose their intent. Rahul Gandhi brazenly declares, “Our fight is against the Indian State itself.” Not against a political party. Not against a government policy. But against the Indian State itself and its constitutional machinery. Prashant Bhushan openly calls for “regime change” and has spoken of revolution involving bloodshed, guns and the Army. This is not the language of democratic dissent or a peaceful transfer of power through elections. It raises a fundamental question: when they speak of regime change, are they talking about defeating a government at the ballot box or bringing the State to its knees through street violence? Then comes Neha Bora, glorifying foreign turmoil with the slogan, “Lal Salaam to Bangladesh for showing the way.” This is an open romanticisation of the upheaval, violence and mob lynchings associated with Bangladesh’s political crisis, while holding up events beyond the constitutional process as a model to follow. 𝐓𝐡𝐞 𝐩𝐚𝐭𝐭𝐞𝐫𝐧 𝐢𝐬 𝐮𝐧𝐦𝐢𝐬𝐭𝐚𝐤𝐚𝐛𝐥𝐞: 𝐜𝐡𝐚𝐥𝐥𝐞𝐧𝐠𝐞 𝐭𝐡𝐞 𝐒𝐭𝐚𝐭𝐞, 𝐩𝐫𝐨𝐯𝐨𝐤𝐞 𝐜𝐨𝐧𝐟𝐫𝐨𝐧𝐭𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐰𝐢𝐭𝐡 𝐥𝐚𝐰 𝐞𝐧𝐟𝐨𝐫𝐜𝐞𝐦𝐞𝐧𝐭, 𝐚𝐧𝐝 𝐭𝐡𝐞𝐧 𝐜𝐫𝐲 “𝐨𝐩𝐩𝐫𝐞𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧” 𝐰𝐡𝐞𝐧 𝐭𝐡𝐞 𝐩𝐨𝐥𝐢𝐜𝐞 𝐩𝐞𝐫𝐟𝐨𝐫𝐦 𝐭𝐡𝐞𝐢𝐫 𝐜𝐨𝐧𝐬𝐭𝐢𝐭𝐮𝐭𝐢𝐨𝐧𝐚𝐥 𝐝𝐮𝐭𝐲 𝐭𝐨 𝐦𝐚𝐢𝐧𝐭𝐚𝐢𝐧 𝐥𝐚𝐰 𝐚𝐧𝐝 𝐨𝐫𝐝𝐞𝐫. 𝐅𝐫𝐨𝐦 𝐬𝐭𝐫𝐞𝐞𝐭 𝐯𝐞𝐭𝐨𝐞𝐬 𝐭𝐨 𝐫𝐡𝐞𝐭𝐨𝐫𝐢𝐜 𝐚𝐛𝐨𝐮𝐭 𝐛𝐥𝐨𝐨𝐝𝐬𝐡𝐞𝐝, 𝐭𝐡𝐢𝐬 𝐩𝐨𝐥𝐢𝐭𝐢𝐜𝐬 𝐫𝐢𝐬𝐤𝐬 𝐩𝐮𝐬𝐡𝐢𝐧𝐠 𝐚 𝐫𝐢𝐬𝐢𝐧𝐠, 𝐜𝐨𝐧𝐟𝐢𝐝𝐞𝐧𝐭 𝐁𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭 𝐭𝐨𝐰𝐚𝐫𝐝𝐬 𝐢𝐧𝐬𝐭𝐚𝐛𝐢𝐥𝐢𝐭𝐲 𝐚𝐧𝐝 𝐜𝐡𝐚𝐨𝐬. But India is not Bangladesh. It is not Nepal. India is a strong, resilient Republic, anchored in its Constitution, democratic institutions and the will of its people. And beyond law enforcement stands the greatest safeguard of all: crores of law-abiding Indians who will not allow the sanctity of our Republic, our Tricolour or our sovereignty to be undermined. No political ambition is greater than the nation. No street mobilisation can substitute for the people’s mandate. And no call for upheaval can override the Constitution. Every attempt to undermine democratic institutions must be confronted through the rule of law, constitutional safeguards and the unwavering resolve of the Indian people. 𝐋𝐨𝐧𝐠 𝐋𝐢𝐯𝐞 𝐭𝐡𝐞 𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚𝐧 𝐑𝐞𝐩𝐮𝐛𝐥𝐢𝐜. 🇮🇳 Jai Hind!
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CJP की क्रेडिबिलिटी खत्म होने के बड़े कारण:- - चुनाव आयोग जैसे विशुद्ध राजनीतिक मुद्दे पर राजनीतिक दलों की तरह कूदना - AAP से नजदीकी का सार्वजनिक होना - MP, असम, राजस्थान, दिल्ली पर बोलना लेकिन पंजाब का किसी PR कंपनी की तरह PR करना - आसमान भर का एटीट्यूड, घमंड और बेहद निचले स्तर की भाषा रखना - प्रकाश राज के जैसी विचारधारा के लोगों के साथ और कई विदेशी ताकतों से अच्छे संबंध का सार्वजनिक होना - आज CJP पूरे देश में AAP की B पार्टी से अधिक कुछ नहीं। ये तथ्य सार्वजनिक हो चुका है अब।
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पता नहीं ये किस्मत है या रणनीति- लेकिन CJP जैसे एक खतरनाक प्लान को जिस प्रकार सरकार ने तीन महीने के अंदर जनता के सामने ध्वस्त कर डाला है ये अभूतपूर्व है। दो development बेहद महत्वपूर्ण हुए है- - सरकार ने NEET के समय आलोचना के बावजूद बेहद संयम दिखाकर काम किया और देश में ये मेसेज नहीं जाने दिया की वो यूथ या छात्रो के ख़िलाफ़ किसी भी रूप में है। - CJP का एकदम से उभार भारत देश के लिए बेहद ख़तरनाक घटना थी उससे भी बड़ा खतरा ये था कि अगर ये छात्रो के चोले में रहकर ही काम करते रहते, यहाँ तक की “स्कूल ठीक करो” प्रोग्राम भी इनका आज के “वोट चोरी” के मुक़ाबले अधिक इफेक्टिव साबित होता। लेकिन ये संयम नहीं रख पाये और अपनी फंडिंग के KRA पूरा करने के लिए खुलकर Regime Change का हिस्सा बन गए, उसमे भी बांग्लादेश से सीख लेने के बयान ने तो देश को इनके पूरा ही ख़िलाफ़ कर दिया है। अब मीडिया-जनता और सोशल मीडिया पर CJP सिर्फ़ विषैले वामपंथी है, जिसे सरकार जब जैसे चाहे कुचल सकती है। महादेव के आशीर्वाद से देश एक बार फिर बहुत बड़ी साज़िश से बाहर आ रहा है।
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दिल्ली में लगातार धरने की शक्ल में चले उपद्रव ने भाजपा के उन कोर वोटरों को फिर से एकजुट कर दिया है, जो किन्हीं कारणों से बिदके हुए थे। बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल की तरह भारत में रिजीम चेंज की बात सुनकर ही देश में एक बड़ा वर्ग हिल जाता है। यह वर्ग वोट से ही सरकार बनाना-बिगाड़ना स्वीकार करता है, फ़साद से नहीं। देश की चिंता सबसे ज्यादा इसी वर्ग को सताती है। पहले हर चुनाव में भाजपा को दलित-ओबीसी सँभालने की चिंता ज़्यादा होती थी। यूजीसी आदि कारणों से 12 साल में पहली बार कोर वोटर सोशल मीडिया पर मुखर हो रहा था। यूपी में सबसे ज्यादा असर था। भाजपा के नेताओं को जमीन पर यह बात परेशान कर रही थी। परसेप्शन बिगड़ रहा था। लेकिन, सीजेपी और राहुल गांधी ने सब दुरुस्त कर दिया।
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कल दिल्ली में जम के बारिश हुई, दिल्ली के लोग कह रहे हैं की बड़ी सड़कों पर जल भराव नहीं दिखाई दिया । कांग्रेस, आप पार्टी ने जलभराव का एक झूठा वीडियो भी नहीं डाला । ये है दिल्ली में भाजपा सरकार की उपलब्धि । 💪
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ये regime change की साजिशें अब नहीं चलेंगी! 🚨 पहले शिक्षा सुधार और वोट चोरी का ढोंग, और अब सीधे 'Regime Change' की बात? यह साफ तौर पर देशविरोधी एजेंडा है, जिसका मकसद भारत की विकास यात्रा को रोकना है। लेकिन भारत की जागरूक जनता, खासकर युवा, अब सब समझ चुके हैं। देश के विकास की गति अब और तेज होगी, और ऐसे अराजक तत्वों को जनता मुंहतोड़ जवाब देकर बाहर का रास्ता दिखाएगी।
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प्रशांत भूषण ने आंदोलन की पोल कैसे खोली? वकील प्रशांत भूषण नेहा बोरा से भी दो कदम आगे निकल गए. उन्होंने कल खुलकर कहा कि इस आंदोलन का मकसद भारत में सत्ता परिवर्तन करना है, इसके लिए जो करना पड़ेगा वो करेंगे. प्रशांत भूषण नेहा बोरा और CJP नेता अभिजीत दिपके के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे. प्रशांत भूषण ने तो सारे प्रोटेस्ट की पोल खोल दी. जो लोग ‘वोट चोरी’ के नाम पर सड़कों पर उतरे थे, उनकी असलियत बता दी. बिल्ली थैले से बाहर आ गई. प्रशांत भूषण ने बता दिया कि साज़िश सरकार बदलने की है, बिना चुनाव के सत्ता परिवर्तन करने की है. क्या राहुल गांधी इस इरादे का समर्थन करेंगे ? दो दिन पहले वह प्रशांत भूषण के साथ खड़े थे. क्या भारत का लोकतंत्र अब दंगा कराने वालों के हवाले कर दिया जाएगा ? ये सवाल कांग्रेस से बार-बार पूछा जाएगा.
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राजस्थान में निकाय चुनावों के बाद CM भजनलाल शर्मा देश की राजनीति में सर्वाधिक चर्चित हुए आंदोलन पर आंदोलन के बावजूद आंदलोनकारियों की नाराजगी दूर कर ऐसा प्रदर्शन करना….. आज तक के मंच पर भी वही सवाल उठा।
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It’s done bro, everything is exposed !! Afterall, it was all about ‘Regime Change’.. आखिर मन में छुपी बात होठों पर आ ही गई! सारा खेल सत्ता की कुर्सी पाने का है.. फिर उसके लिए विद्यार्थियों, किसानों को उकसाना ही क्यों ना पडे, जाति और भाषा के नाम पर द्वेष फैलाना पडे, या देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रतिमा मलीन करनी पडे। आंदोलन की आड में अराजकता फैलाना ही 'इनका' उद्देश है। #Maharashtra
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राहुल गांधी और केजरीवाल ने हिंदुओं के त्योहारों पर क्या हाल बना दिया है। जो दिल्ली का दिल इन दिनों गुलज़ार रहा करता था।आज इन लोगों ने दिल्ली को बंधक बना लिया है। हिंदुओं से इतनी नफ़रत क्यो है।
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