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भूले तो नहीं हैं.. दुर्गा शक्ति नागपाल को..??
“ज्यादा पुरानी नही सन् 2013 की बात है”
जिहादी “आजम खान” के नेतृत्व में अखिलेश यादव की सरकार ने पूरे उत्तर प्रदेश को शर्मसार कर दिया था।
दुर्गा शक्ति नागपाल (IAS) ने गौतमबुद्ध नगर जिले में उस समय के समाजवादी खनन माफियाओं के खिलाफ अभियान छेड़ने की गलती कर बैठीं।
मैंने जब से होश संभाला है तब से देख रहा हूँ कि दशहरे के मेलों से लेकर दीवाली तक बालकों में कृत्रिम अनुकृतियों के लिए जबरदस्त क्रेज रहता है।
असली अस्त्रों की जब कृत्रिम प्रतिकृति तैयार की जाती है तो वह खिलौना बन जाती है।
मेलों से हमारे लिए हमारे पिता नकली बंदूकें, नकली धनुष-बाण, नकली गदा, नकली तलवारें तक खरीदते रहे हैं।
हम बच्चे थे लेकिन इतनी समझ अवश्य विकसित थी कि यह सब महज खेलने के लिए है, ये असली नहीं हैं।
दीवाली के अगले दिन हम दीये बीनकर इकठ्ठे कर लेते थे। पिताजी उन दीयों से हमारे लिए तराजू बनाते थे। कुम्हार के यहाँ से दीयों के साथ नकली जतोला ( चक्की) आता था।
उसमे हम धूल डालकर पीसते थे, आनंद उठाते थे।
समय के साथ तकनीक विकसित हुई और जिनके पास ठीक-ठाक पैसा है, वे अपने बच्चों के लिए बीस से पचास हजार तकर की बैटरी से चलने वाली नकली बाईक, कार वगैरह खरीदते हैं, वीडियो गेम खरीदते हैं।
ये लक्जरी पांच से दस साल के बच्चों को मिलती है। कम उम्र के बाद भी वे जानते हैं कि ये सब नकली है।
इन बच्चों के पिता की भी आयु इस समय औसतन तीस साल के आस-पास ही होती है।
लेकिन दुर्भाग्य से इस देश में छप्पन साल का लॉलीपॉप चूसता एक बच्चा भी मौजूद है। 😂😂
वह भी कृत्रिम खिलौनों के इस दौर में मचल उठा और अपनी मम्मी से नकली पार्लियामेंट, नकली सांसद की मांग करने लगा।
उसे पी एम - पी एम खेलना था।
माँ का इकलौता बेटा। भले राजपाट छिन गया लेकिन राजसी कीड़ा अभी भी स्थान विशेष में मौजूद है। वह कीड़ा जब काटता है तो याद आता है कि मेरे बाप- दादे तो नवाब थे, सो मुझे भी नवाब साहब कहा जाय।
सो उसकी माँ के चाटुकारों ने उसके लिए नकली दरबार लगाया। बच्चा खेला और खूब खेला। अपने कीड़े को शांत करने के लिए उसने किसी को फांसी की सजा सुनाई तो किसी को उम्रकैद की।
उधर एक छोटा सा गरीब देश है पापुआ न्यू गिनी....
वहाँ के लोग आंदोलन कर रहे हैं कि अब समय आ गया है कि हमारे देश का नाम बदल दिया जाय, क्योंकि हम नहीं चाहते कि हमारे देश का नाम लेते ही किसी चूतिये मंदबुद्धि की याद आ जाए।
-साभार 🙏
ब्रह्ममुहूर्त में अगर “आंखें खुल गई हो” तो
सबसे पहले “श्री रामलला” के श्री चरणों में प्रणाम करके दिन की मंगलमय शुरुआत करें।
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनहर, दशरथ नंदन श्री रामलला सरकार के दिव्य अलौकिक दर्शन..
नमामि रघुवरं रामं, राजेन्द्रं सत्यव्रतम्॥
जय जय श्री राम 🚩🚩
अमेरिकी सेना सामूहिक कब्रों की ड्रिल कर रही है और ये बहुत चिंताजनक है, क्योंकि इससे पहले ये ड्रिल कोरिया युद्ध के समय हुई थी....
तब अमेरिका के 35 हजार सैनिक मरे थे
और उसने कोरिया और चीन के मिलाकर साढ़े छः लाख लोग मारे थे। मरे हुओ की संख्या बता रहा हूँ प्रभावितो की आप अपने हिसाब से जोड़ लो।
आप सबने भी ये अनुमान सालो पहले लगा लिया होगा कि अमेरिका कभी ना कभी ईरान पर आक्रमण करेगा।
2026 मे उसने किया भी, हमने खामनई के वध पर हर्ष भी व्यक्त किया, लेकिन अब जो अमेरिका कर रहा है ये थोड़ा धक धक करने वाली स्थिति है।
भारत मे हम अग्निदाह करते है लेकिन ईसाईयों मे दफन करने की परंपरा है। बात साफ है कि अमेरिका के कई सैनिक वीरगति प्राप्त करने वाले है, इराक युद्ध मे अमेरिका के 4500 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे।
इराक मे सुन्नी मुसलमानो की हुकूमत रही थी और शिया बहुसंख्यक थे। शियाओं ने अतीत मे प्रयास भी किये थे। अमेरिका ने मूल सत्ता शियाओं को दे दी। अब इससे वर्षो का संतुलन बिगड़ गया और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकवादी संगठन खडे हो गए।
अमेरिका की सेना इराक मे उतरी तो इराकी सेना भाग गयी और अपने हथियार छोड़ गयी।
शियाओं के हाथ मे सत्ता देख ज़ब सुन्नियों को कट्टरता चढ़ी तो ये ही हथियार प्रयोग हुए, इराकी सेना के कई अधिकारी आतंकवाद के चंगुल मे फस गए।
ज्ञातव्य हो कि इस्लामिक स्टेट को खत्म करने मे 5-7 साल लग गए थे, अब भी ये कभी कभी एक्टिवेट हो जाता है।
ईरान तो फिर इराक से बड़ा है, जाहिर है अमेरिकी सेना ईरान मे उतरेगी तो ईरानी सेना को भी भागना ही पड़ेगा क्योंकि ड्रोन तो जमीन पर अप्रासंगिक हो जाएंगे।
यदि अमेरिका सच मे सतही युद्ध शुरू करता है तो ये तय मानिये कि सऊदी अरब की और बेंड बजेगी साथ ही ईरान भी इराक की तरह खबरों के बाहर हो जायेगा और अमेरिकी ईरान मे वर्षो का गृहयुद्ध छोड़ कर जायेंगे।
इसके अलावा मानवीय अपराध भी है, अमेरिकी सेना ने अबु गरीब जेल मे क्या किया था वो आप इंटरनेट पर पढ़ लीजिये, 14 साल की अबीर क़ासिम हमजा के साथ क्या किया था वो देख लीजिए।
हालांकि इस्लामिक आतंकवाद भी कोई कम नहीं है,
बल्कि आगे ही है....
मुसलमानो के लिए मानवीय सहायता अब बेमानी लगने लगी है खासकर ज़ब हम इस्लामिक स्टेट का कहर कैमरो पर देख चुके है।
लेकिन ईरान मे जो होगा वो इराक से भयावह होगा, ज़ब इराक मे एक बारात अमेरिका ने उड़ा दी थी तो जॉर्ज बुश मे इतनी नैतिकता तो थी कि कैमरे पर दुख जताया, अब तो डोनाल्ड ट्रम्प है ये सीधा बोल देंगे कि मुझे डीजे पसंद नहीं आया तो मैंने उड़ा दी।
G-20 के सम्मेलन के लिए मोदीजी को अमेरिका जाना चाहिए और शांति का पक्ष एक बार फिर रखना चाहिए।
हालांकि अब पहले वाली दोस्ती रही नहीं, होती भी तो ट्रम्प पहले वाले हो या अब वाले अपनी मर्जी चलाकर मानते है।
जो भी हो मगर अब ये सही नहीं हो रहा है,
महंगाई और कमर तोड़ने वाली है।
इस समय मे हमारी जीत बस इसमें है कि ये समय हम झेल जाए, अर्थव्यवस्था तेज बढ़े या धीमे मगर यदि गरीबी हम इसी तरह नियंत्रित रख सके तो समझिए हमने तो युद्ध जीत लिया।
चांद जगा था और इसरो वाले भी...
और कितनी खूबसूरत सुबह दिखाया है इसरो ने इस नाविक नेविगेशन सिस्टम की लांचिग की तस्वीर से...
जब जब हम सब चैन की नींद सो रहे थे, तब इसरो इधर लगातार हो रही कुछ अवरोधो को परे हटा कर वापस इतिहास लिख रहा था...
ISRO के वैज्ञानिकों ने श्रीहरिकोटा से GSLV F18 रॉकेट के जरिए Navic S03 नेविगेशन सैटेलाइट को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है..
हमारा ये इंडीजीनस एटॉमिक क्लॉक और जीपीएस सिस्टम देश की सीमाओं से 1500 किमी तक अचूक नजर रख पाएगी..
हमारे वैज्ञानिकों की इस चौबीसों घंटे की तपस्या रंग लाई है तो अब इस साल की धनतेरस दिवाली देश के लिए खूब संपन्नता और समृद्धि भी लाएगी..
Mr. Mishra retweeted
योगी सरकार ने दीपावली पर कुम्हारों के लिए खजाने खोल दिए! 🪔
मिट्टी की खुशबू में हमारी परंपरा है, कारीगरों के हाथों में आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत।
यूपी खादी बोर्ड के CEO आदरणीय श्री @ShishirGoUP जी का संदेश साफ है, माटीकला को सिर्फ विरासत मत रखो, इसे रोजगार, उद्यम और स्वावलंबन का सशक्त माध्यम बनाओ।
माटीकला महोत्सव इसी सोच को आगे बढ़ा रहा है।
इस दीपावली स्वदेशी अपनाओ, अपने कारीगरों के हाथ मजबूत करो।
#Diwali #आत्मनिर्भरभारत #up #दीपावली
योगी सरकार ने दीपावली पर कुम्हारों के लिए खजाने खोल दिए! 🪔
मिट्टी की खुशबू में हमारी परंपरा है, कारीगरों के हाथों में आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत।
यूपी खादी बोर्ड के CEO आदरणीय श्री @ShishirGoUP जी का संदेश साफ है, माटीकला को सिर्फ विरासत मत रखो, इसे रोजगार, उद्यम और स्वावलंबन का सशक्त माध्यम बनाओ।
माटीकला महोत्सव इसी सोच को आगे बढ़ा रहा है।
इस दीपावली स्वदेशी अपनाओ, अपने कारीगरों के हाथ मजबूत करो।
#Diwali #आत्मनिर्भरभारत #up #दीपावली
Mr. Mishra retweeted
योगी सरकार ने दीपावली के शुभ अवसर पर कुम्हारों के लिए खजाने खोल दिया।🪔
मिट्टी की खुशबू में हमारी परंपरा है और कारीगरों के हुनर में आत्मनिर्भर भारत की ताकत।
यूपी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री शिशिर सिंह जी का संदेश स्पष्ट है।
माटीकला को केवल विरासत तक सीमित न रखें, बल्कि इसे रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक स्वावलंबन का सशक्त माध्यम बनाएं।
माटीकला महोत्सव इसी सोच को आगे बढ़ाने की पहल है। आइए, स्वदेशी उत्पादों को अपनाएं, स्थानीय हुनर को सम्मान दें और अपने कारीगरों के हाथों को नई मजबूती प्रदान करें।
ब्रह्ममुहूर्त में अगर “आंखें खुल गई हो” तो
सबसे पहले “श्री रामलला” के श्री चरणों में प्रणाम करके दिन की मंगलमय शुरुआत करें।
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनहर, दशरथ नंदन श्री रामलला सरकार के दिव्य अलौकिक दर्शन..
नमामि रघुवरं रामं, राजेन्द्रं सत्यव्रतम्॥
जय श्री राम 🚩
अमेरिका में सट्टा लगा था कि वो प्रधानमंत्री बन कर वापस आएंगा या नही, सट्टा वालों की कंपनी के सारे पैसे हैक हो गए...
राम लीला मैदान पर एक लाख की भीड़ आने वाली थी कि वो कैसे नही जाएगा, उसका बाप भी जाएगा..
रामलीला मैदान पानी में डुब गया...
बनारस में किसी ने उसकी की तस्वीर और नींबू बगैरा से तंत्र करने की कोशिश की, एक राजनैतिक दल की काफिले की सारी गाड़ियां एक दूसरे से भीड़ गई...
अब नान बायोलॉजिक वाली प्रिस्ट कींग वाली थ्योरी का प्रेटिकल में सबूत भगवान दे रहे,
अब करे तो क्या करें,
कहें तो क्या कहें...
मैं सोच रहा था कि काक्रोचों और तमाम विरोधियों के नकाब उतरने के बाद लोगों के मन से UGC का मुद्दा डाइलूट हुआ है...
लेकिन मैं आंशिक रूप से ही सही था..!!
MLC चुनावों के उत्तर प्रदेश और बिहार के परिणामों ने भाजपा को सोचने को विवश तो किया ही होगा, भले न कोई प्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करे।
चार लोग आकर सफाई दे सकते हैं कि UGC कुछ नहीं है लेकिन परिणाम झूठ नहीं बोल सकते। सच को स्वीकार करना समस्या के निराकरण का पहला कदम होता है।
इन चुनावों में अपेक्षाकृत अधिक प्रबुद्ध मतदाता होते हैं। आम धारणा रही है कि भाजपा प्रबुद्धों की पहली पसंद होती है। प्रबुद्ध मतदाता ही UGC को लेकर अधिक उद्वेलित भी हैं।
तो यह मानिये कि जो परिणाम आये हैं भाजपा की पेशानी पर सबसे अधिक बल डालने वाले हैं।
भाजपा की विशेषता रही है कि वह हार की समीक्षा करती है और अपना परिमार्जन भी करती है लेकिन इस बीच यदि कोई विरोधी उम्मीदवार प्रधानमंत्री के क्षेत्र से लगातार दो बार चुनाव जीत जाता है और पहले की तुलना में अपने जीत के अंतर में पाँच गुना की वृद्धि कर लेता है तो यह असाधारण बात है।
उधर गोरखपुर में भाजपा की सौ-दो वोटों से जीत, निर्दलीय उम्मीदवार यादव का दूसरा स्थान और सपा से लड़े संजयन त्रिपाठी को तीसरे स्थान पर रहने के बाद भी काफी वोट मिलना भी कुछ संकेत दे रहा है।
इससे जो मुझे समझ में आया है उसके हिसाब से सपा समर्थित लोग किसी भी आयातित सवर्ण उमीदवार के बजाय जाति के आधार पर किसी यादव या पिछड़े को ही वोट करेंगे।
दूसरा तथ्य यह है कि एक से अधिक सवर्ण उमीदवार होने के बाद सवर्णों का वोट निश्चित रूप से बंटेगा और कम से कम UGC से रुष्ट लोग तो अवश्य दूसरे को वोट देंगे।
कुल मिलाजुलाकर यूपी में योगी जी की लोकप्रियता के अलावा दूसरा फैक्टर भाजपा के पक्ष में काम नहीं कर सकता।
वैसे भी अखिलेश यादव ने चुनाव दर चुनाव बेहतर प्रदर्शन ही किया है। विपक्ष के नेताओं में वही एकमात्र नेता हैं जिनका वोटबैंक इंटैक्ट है और कम से कम बेवकूफ़ी भरी बातें भी नहीं करते।
हालांकि सब कुछ के बाद भी योगी के ही रिपीट होने की आशा है लेकिन रास्ता सुगम नहीं दिख रहा।
-साभार 🙏
मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस में एक शब्द इस्तेमाल किया.. “कामरेड”
बहुतों को इसका मतलब नहीं पता। थोड़ा इतिहास जान लो।
1885 का रूस, साम्राज्य था, सम्राट अलेक्जेंडर की सत्ता। यूरोप में कार्ल मार्क्स की थ्योरी चल रही थी, राजा हटाओ, दौलत बांटो।
एक तरह का भीड़तंत्र....
सम्राट अलेक्जेंडर की हत्या का प्रयास हुआ, आदमी पकड़ा गया, फांसी। उसका भाई था व्लादिमीर लेनिन। यहीं से बागी बना, कुछ सालों बाद स्विट्जरलैंड भाग गया।
लेनिन वहीं से अखबार लिखता था....
रूस के मजदूरों-किसानों को “कामरेड” कहकर क्रांति के लिए उकसाता था।
1894 में सम्राट की मौत हुई। बेटा निकोलस सम्राट बना। राज्याभिषेक पर ही भगदड़ मची, कई मरे। अर्थव्यवस्था नाजुक थी, आबादी ज्यादा।
किसानों-मजदूरों की हालत खराब। लेनिन के लेख पढ़े जाने लगे, हड़तालें बढ़ीं। निकोलस ने जापान से बेकार युद्ध लड़ा और हार गया।
1905 में मजदूरों-किसानों ने महल घुसने की कोशिश की, कई मारे गए। 1917 में दोबारा कोशिश हुई तो राजा गिर गया। विश्व युद्ध, गरीबी, जनता का रोष...
कम्युनिस्टों को जमीन मिल गई।
फरवरी 1917 में राजा हटा, लेनिन लौटा। अस्थायी सरकार बनी, अलेक्जेंडर केरेन्स्की मुखिया।
लेकिन लेनिन बोला - प्रचार और नैरेटिव मेरा है तो सत्ता किसी और को क्यों? अक्टूबर में संदेश दिया: “कामरेड्स, सत्ता उखाड़ फेंको।”
अक्टूबर क्रांति हुई.....
लेनिन ने सेंट पीटर्सबर्ग कब्जा किया। फिर असली चेहरा दिखाया। जेलों के अपराधियों को साथ लिया, गैंग्स को अपनाया और कहा - “कामरेड्स, ये है।”
राजा के परिवार को साइबेरिया लाया गया। लेनिन के आदेश पर “कामरेड्स” ने बेरहमी से मार डाला... 10 साल का बच्चा गोलियों से मारा गया। चार बेटियों को बंदूक के बट से घोंप-घोंपकर मारा गया।
लेनिन बोला: अब रूस में कोई राजा नहीं होगा, हम सब राज करेंगे… और चूंकि मैं नेता हूं, इसलिए अब तुम्हारा भाई राज करेगा।
विरोध हुआ....
फिर शुरू हुआ “रेड टेरर”
विरोधियों को चुन-चुनकर मारा गया। 1918-22 तक लगभग 6 लाख लोग मारे गए। मारने वाले थे - “कामरेड्स”
रूस जला। फिर ये क्रांति यूरोप, मेसेडोनिया, रोमानिया, चीन, कोरिया पहुंची...
अब मल्लिकार्जुन खड़गे कह रहे हैं - “कामरेड्स, दिल्ली आओ।”
आप समझ गए होंगे ये क्या चाहते हैं। आपकी किस्मत अच्छी है। वहां लेनिन था, यहां गधेड़ा है। लेनिन ने पहले प्रचार फैलाया फिर क्रूरता दिखाई। कांग्रेस ने क्रूरता पहले ही दिखा दी, प्रचार में असफल रही।
सोचिए,
राहुल गांधी की जगह कोई भेड़िया टाइप इंसान होता तो कांग्रेस का नेतृत्व कितना भयावह होता। अमित शाह को इन्हें जेल में डालना चाहिए? नहीं...
ये सिर्फ नियत के बुरे हैं, आता-जाता कुछ नहीं। समस्या तब होगी जब नियत से बुरा इंसान सूझबूझ के साथ आए।
इसलिए राहुल, तुम संघर्ष करो।
हम मोदी जी के साथ हैं....
भारत में किसानों का संगठन भारतीय किसान संघ है, मजदूरों का भारतीय मजदूर संघ, छात्रों का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद। इन सबका राजनीतिक चेहरा भारतीय जनता पार्टी है।
कामरेड्स अगर दिल्ली की सड़कों पर आए तो या जेल जाएंगे या सीधे यमलोक...
भारत रूस नहीं है... भारत भारत है...
क्या आप समझ गए खड़गे का “कामरेड” का मतलब?
😂😂
समाजवादी छम्मक छैंया ठुमका महोत्सव फिर से शुरू होंगे
MLC चुनाव के बाद अब मन को तसल्ली हो गई कि 2027 में सैफई का समाजवादी छम्मक छैंया ठुमका महोत्सव हो कर रहेगा,
यूपी में समाजवाद को आने से कोई रोक नहीं पाएगा
🤪🤣🙏
ब्रह्ममुहूर्त में अगर “आंखें खुल गई हो” तो
सबसे पहले “श्री रामलला” के श्री चरणों में प्रणाम करके दिन की मंगलमय शुरुआत करें।
सबके पालनहर, दशरथ नंदन श्री रामलला सरकार के दिव्य अलौकिक दर्शन..
राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने॥
जय श्री राम 🚩
इजराइल का चुनाव :
तीन खेमे, 120 सीटें, और बहुमत किसी के पास नहीं!
आजकल इजराइल चुनाव की चर्चा खूब हो रही है, जिसकी धमक अमेरिका तक पहुंच रही है। जानिए, वहां असल में चल क्या रहा है।
इजराइल की राजनीति में तीन फ्रंट सबसे अहम हैं:
1. बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन: 54 सीटें
इस खेमे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर यह गठबंधन 54 सीटों पर है। इसे मोटे तौर पर मजबूत राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी खेमा मानिए।
2. विपक्षी गठबंधन: 48 सीटें
गादी आइज़ेनकोट की याशार पार्टी को 21, नफ़्ताली बेनेट की टुगेदर पार्टी को 12, डेमोक्रेट्स को 8 और एविग्डोर लिबरमैन की इजराइल बेतेनु को 7 सीटें मिली हैं। कुल 48 सीटें...
ये दक्षिणपंथी + लिबरल मिक्स हैं, इजराइल राष्ट्रवाद और लोकतंत्र दोनों चाहिए इन्हें..
3. अरब नेतृत्व वाले दल: 18 सीटें
जॉइंट लिस्ट को 11 और राम (यूनाइटेड अरब लिस्ट) को 7 सीटें। कुल 18 सीटें...
ये सरकार बनाने में किंगमेकर बन सकते हैं।
120 सदस्यीय संसद में सरकार के लिए 61 सीटें चाहिए... जो किसी के पास नहीं हैं। यानी गठबंधन बनाना पड़ेगा।
लेकिन पेंच यहीं फंसा है।
पहला फ्रंट (नेतन्याहू वाला) अरब पार्टियों से हरगिज समर्थन नहीं लेना चाहता, क्योंकि उन्होंने चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा था। दूसरा फ्रंट भी अरब समर्थन से दूरी बनाए रखना चाहता है। नतीजा? फिर से चुनाव की संभावना बन रही है!
अब सवाल: पहले फ्रंट के इतने मजबूत प्रदर्शन के बाद भी ये हाल क्यों?
दो मुख्य कारण:
● इजराइल की आबादी का लगभग 20% अरब मूल का है। इस बार उन्होंने एकजुट होकर वोट किया, इसलिए इतनी सीटें मिलीं।
● सत्ताधारी फ्रंट पर दूसरे फ्रंट ने वोट चोरी जैसे आरोप लगाए। साथ ही, सत्ताधारी खेमे के कुछ कट्टर नेताओं पर गाजा के मामले में “नरम” होने का भी आरोप लगाया गया।
अरब पार्टियां मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाना चाहती हैं, लेकिन वे चाहती हैं कि विपक्षी दूसरा फ्रंट अपना कट्टरपन छोड़कर नरम बने... थोड़ा “मुलायम” और समाजवादी अंदाज अपनाए।
कुल मिलाकर हालत ये है… और काफी दिलचस्प है!
आपको क्या लगता है..?
इजराइल में फिर से चुनाव होंगे, या कोई अप्रत्याशित गठबंधन बन जाएगा?
वोट चोरी कुछ नहीं, बस दिमागी कीड़ा है...
जिसके काटे का इलाज लुकमान हकीम के पास भी नहीं!
अब कोई शक नहीं रहा....
कांग्रेस अगर राहुल गांधी के पदचिह्नों पर चली, तो खत्म हो जाएगी। इस परिवार को किसी से व्यक्तिगत खुंदक है, जिसे निकालने के लिए राहुल-प्रियंका गिरावट की सारी हदें पार कर चुके हैं।
काम का समय आता है तो ये या तो विदेश भाग जाते हैं, या आंदोलन करते हैं, या कुत्ते-बिल्लियों के साथ खेलते हैं, या बहन के साथ शिमला चले जाते हैं।
वफादारी दिखाते-दिखाते खड़गे, जयराम, वेणुगोपाल और पवन खेड़ा जैसे लोग कांग्रेस के बचे-खुचे वोट भी साफ कर देते हैं।
नतीजा सामने है....
चार राज्यों में विधान परिषद के चुनाव हुए, बैलेट पेपर से हुए, फिर भी कांग्रेस का अता-पता नहीं। तभी तो नितिन नबीन साफ कह रहे हैं कि कांग्रेस समाप्त हो जाएगी।
राहुल गांधी को सबक सीखने चाहिए...
अखिलेश यादव से....
सपा ने 11 में से 5 विधान परिषद सीटें जीतकर तगड़ा प्रदर्शन किया है। खास बात, वाराणसी और लखनऊ की सीटें छीनकर बीजेपी के गढ़ में सेंध लगा दी। ये खतरे का साफ संकेत है।
याद कीजिए 2024 को, जब सपा ने 36 लोकसभा सीटें जीत ली थीं और मोदी सरकार बैसाखियों पर आ गई थी?
लेकिन राहुल गांधी इतने घोर अभिमानी हैं कि कभी सबक नहीं सीखते।
हमारा दावा है कि ये इस पराजय को भुलाकर 1 नवंबर की रैली में जुट जाएंगे। उन्हें गम नहीं कि यूपी में अखिलेश ने एक भी सीट पर उनका प्रत्याशी नहीं उतारा। पहले भी यूपी विधान परिषद और विधानसभा में उनका एक भी विधायक नहीं।
इतनी बुरी हालत में पड़ी कांग्रेस विधानसभा में 200 सीटें मांग रही है। अब कांग्रेस की सूपड़ा साफ पराजय के बाद अगर अखिलेश 25-30 सीटें भी छोड़ दें, तो गनीमत होगी।
राहुल ने अपने लगातार “सद्कर्मों” से पार्टी का भट्टा बैठा दिया है।
हम कभी नहीं मान सकते कि राहुल गांधी के दबाव से ज्ञानेश कुमार का कुछ बिगड़ने वाला है। राहुल कोहराम मचाएंगे, उनके साथ मच्छर-मक्खी सब चिपके रहेंगे।
कल काकरोच पार्टी ने भी बिना बुलाए कांग्रेस के मंच पर आने की घोषणा कर दी। ये मक्कार करें भी क्या, अपने दम पर तो जिंदा नहीं रह सकते।
शायद राहुल उन्हें बुलाकर मंच साझा न भी करें।
लगता है नेहा बोरा को जरूर बुलाएंगे।
तो चलिए दोस्तों, इतने नाटक देखे हैं तो 1 नवंबर का ये तमाशा भी देख ही लेते हैं।
क्या राहुल अब भी सबक नहीं सीखेंगे?
ब्रह्ममुहूर्त में अगर “आंखें खुल गई हो” तो
सबसे पहले “श्री रामलला” के श्री चरणों में प्रणाम करके दिन की मंगलमय शुरुआत करें।
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनहर, दशरथ नंदन श्री रामलला सरकार के दिव्य अलौकिक दर्शन..
भवभयहरणं भक्तजनप्रियं, श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥
जय श्री राम 🚩
28 विधान परिषद सीटों पर वोटिंग हुई,
कांग्रेस के खाते मे शून्य आयी।
विधान परिषद कोई बहुत बड़े चुनाव भी नहीं है लेकिन नेहरू और इंदिरा की पार्टी एक सीट ना जीत सके तो महत्व फिर बढ़ जाता है।
यदि कोई कहे कि फ़लाने या ढिकाने चुनाव मे परीक्षा होंगी तो ये गलत है, परीक्षा चुनावों मे नहीं होती।
जनता दल ने 1998 का चुनाव लड़ा था और 6 सीटें जीती थी, क्या आज किसी को इस तथ्य से कोई मतलब है?
जबकि इसी जनता दल का नेता देश का प्रधानमंत्री बन गया था। कांग्रेस भविष्य मे सीटें जीतेगी हो सकता है एक दो राज्यों मे कही सरकारे भी बना ले।
लेकिन यदि कोई कहे कि कांग्रेस केंद्र की सत्ता मे दोबारा लौटेगी तो या तो उसने नशा किया हुआ है या फिर वो नींद मे बड़बड़ा रहा है। ये कुछ वैसा ही है कि सोवियत संघ वापस बनेगा।
बीजेपी को लम्बे समय तक अभी शासन करना है, इतिहास के साम्राज्यों को नजर मे रखते हुए जो भविष्य मैं देख पा रहा हूँ वो ये है कि अभी बीजेपी 30-40 साल शासन करेगी।
हो सकता है एक दो साल के लिए बीच मे बाहर हो जाए मगर स्थायी रूप से नहीं होंगी।
देश विकसित भी बनेगा और वर्तमान समस्याओ का निवारण हो जायेगा, इसके बाद एक नई विचारधारा जन्म लेगी जो बहुत ज्यादा कट्टर होंगी।
शायद वो लोग युद्ध की भी बात करें, वो विचारधारा एक पार्टी को जन्म देगी और फिर वह पार्टी बीजेपी से लड़ेगी।
हम एक राजनीतिक परिवर्तन के साक्षी बन रहे है।
लेकिन अपील है कि वो गलतियां ना करें जो कांग्रेस ने की थी, कांग्रेस अब कभी नहीं लौटेगी ये परम सत्य है। लेकिन इस सत्य को सिर्फ स्वीकार कीजिये, जीने की भूल मत करना।
हर चुनाव ऐसे लड़ो जैसे खुद बीजेपी आपके टक्कर मे हो लेकिन आत्मविश्वास और जोश ऐसा रखो जैसे कांग्रेस से लड़ रहे हो।
शायद आगामी पोस्ट्स मे भी मैं कांग्रेस को पंच मारता रहु मगर अब इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि कांग्रेस दोबारा नहीं लौटेगी।
कांग्रेस समर्थको से भी अपील है, अब मत पचो, 100-200 रूपये भाड़े मे किसी क्षेत्रीय पार्टी का झंडा उठा लो या फिर ठेला धका कर पैसा कमा लो।
कांग्रेस का अब कोई भविष्य नहीं है,
इसका आधिकारिक अंत हो चुका है, ये बस बीजेपी की बैंक गारंटी भर है।
एम एल सी चुनावों में भाजपा की बम्पर जीत की खुशी में कांग्रेस एक नवंबर को दिल्ली में महारैली करने जा रही है। 😂
आप सब से निवेदन है कि भारी संख्या में पहुँचकर हमारे नेता और स्टार प्रचारक आदरणीय राहुल गाँधी की हौसला आफजाई करें।
अपना खाना और पानी की बोतल घर से खुद लेकर आयें। अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें और रैली में अपने चप्पल-जूते अपनी-अपनी तशरीफ के नीचे रखें।
😉
काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) के समुद्री तटों के नजदीक चक्रवाती तूफान अर्नब का भीषण कहर!
145 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चल रही है...
जा कर्म जले कर ले रैली.. 😂😂
इनमें से एक भी शर्त की अवहेलना की तो पुलिस लाठी में पेट्रोलियम जेली लगा के पेली। 🫡😉
बड़ी खबर : दिल्ली के रामलीला मैदान में, कांग्रेस की रैली को हरी झंडी, जा। जरर। न झुझ लेकिन 14 सख्त शर्तों के साथ!
दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस और INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली के लिए कानून-व्यवस्था के तहत अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) बरकरार रखा है।
पुलिस ने सुरक्षा, शांति और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए 14 कड़े नियम तय किए हैं। शर्तों का उल्लंघन होने पर अनुमति तत्काल रद्द की जा सकती है।
रैली का समय: सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक। समय सीमा किसी भी हाल में नहीं बढ़ाई जाएगी और शाम 5 बजे के बाद मैदान खाली करना अनिवार्य होगा।
प्रमुख शर्तें और दिशानिर्देश:
-सुरक्षा व निगरानी: पूरे मैदान, मंच और प्रवेश-निकास द्वारों पर HD CCTV कैमरे, रिकॉर्डिंग बैकअप और कम से कम 5 स्क्रीन वाला कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा।
- नो मार्च / जुलूस: रैली सिर्फ रामलीला मैदान तक सीमित रहेगी; वहां से किसी अन्य दिशा में मार्च या जुलूस निकालने की मनाही होगी।
- भाषणों पर सख्त नजर: जाति, धर्म या रंग को लेकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले भाषणों पर पूर्ण प्रतिबंध। भड़काऊ बयानबाजी की स्थिति में तुरंत PA सिस्टम बंद कर वक्ता को मंच से हटाना होगा।
- रात में रुकने पर रोक: रैली से पहले या बाद में किसी भी कार्यकर्ता को मैदान में रात बिताने की इजाजत नहीं होगी।
- बुनियादी सुविधाएं: पीने के पानी के टैंकर, पर्याप्त शौचालय (महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था) और पहचान योग्य ड्रेस/बैज में वॉलंटियर्स की तैनाती जरूरी होगी।
- डेटा शेयरिंग: आमंत्रित अतिथियों, स्वयंसेवकों की सूची, मिनट-दर-मिनट कार्यक्रम और रैली में आने वाले वाहनों (बसों आदि) के पंजीकरण नंबर पुलिस को पहले सौंपने होंगे।
- पार्किंग नियम: सभी वाहनों को ट्रैफिक पुलिस द्वारा तय स्थानों पर ही पार्क करना अनिवार्य होगा।
दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि NOC रद्द नहीं की गई है, बल्कि सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह अनुमति दी गई है।


















